قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ ٱلنَّاسِ ﴿١﴾
(ऐ रसूल) आप कह दें कि मैं लोगों के पानलहारी की पनाह लेता हूँ और उसकी शरण में आता हूँ।
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मक्की · 6 आयतें
قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ ٱلنَّاسِ ﴿١﴾
(ऐ रसूल) आप कह दें कि मैं लोगों के पानलहारी की पनाह लेता हूँ और उसकी शरण में आता हूँ।
مَلِكِ ٱلنَّاسِ ﴿٢﴾
वह लोगों का बादशाह है, वह उनके साथ जो चाहता है करता है। उसके सिवा उनका कोई बादशाह नहीं।
إِلَـٰهِ ٱلنَّاسِ ﴿٣﴾
वह उनका सच्चा पूज्य है। उसके सिवा उनका कोई सच्चा पूज्य नहीं।
مِن شَرِّ ٱلْوَسْوَاسِ ٱلْخَنَّاسِ ﴿٤﴾
शैतान की बुराई से, जो इनसान के अल्लाह के ज़िक्र से गाफ़िल होने पर, उसके दिल में वसवसा डालने लगता है, और जब वह अल्लाह का ज़िक्र करता है, तो उससे पीछे हट जाता है।
ٱلَّذِى يُوَسْوِسُ فِى صُدُورِ ٱلنَّاسِ ﴿٥﴾
जो लोगों के दिलों में अपना वसवसा डालता रहता है।
مِنَ ٱلْجِنَّةِ وَٱلنَّاسِ ﴿٦﴾
वह जिन्नों और इनसानों दोनों में से होता है। स्रोत:अल-मुख़्तसर फ़ी तफ़सीरिल क़ु रआनिल करीम
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