وَٱلْفَجْرِ ﴿١﴾
अल्लाह पाक ने फ़ज्र (उषाकाल) की क़सम खाई है। وليال عشر
होम›तफ़सीर›Al-Fajr (89)
मक्की · 30 आयतें
وَٱلْفَجْرِ ﴿١﴾
अल्लाह पाक ने फ़ज्र (उषाकाल) की क़सम खाई है। وليال عشر
وَلَيَالٍ عَشْرٍۢ ﴿٢﴾
और ज़ुल-हिज्जा के महीने की प्रथम दस रातों की क़सम खाई है।
وَٱلشَّفْعِ وَٱلْوَتْرِ ﴿٣﴾
तथा सम (जोड़े वाली) और विषम (अके ली) चीज़ों की क़सम खाई है।
وَٱلَّيْلِ إِذَا يَسْرِ ﴿٤﴾
और रात की क़सम खाई है, जब वह आए, चले और प्रस्थान करे। इन क़समों का जवाब यह है कि: तुम अपने कर्मों का अवश्य बदला दिए जाओगे। هل فى ذلك قسم لذىحجر
هَلْ فِى ذَٰلِكَ قَسَمٌۭ لِّذِى حِجْرٍ ﴿٥﴾
क्या उपर्युक्त में ऐसी क़सम है, जो अक़्ल वाले व्यक्ति को आश्वस्त कर सकताी है?! ألم تركيف فعل ربك بعاد
أَلَمْ تَرَ كَيْفَ فَعَلَ رَبُّكَ بِعَادٍ ﴿٦﴾
क्या (ऐ रसूल) आपने नहीं देखा कि आपके रब ने हूद अलैहिस्सलाम की जाति 'आद' के साथ किस तरह किया, जब उन्होंने उसके रसूल को झुठलाया?!
إِرَمَ ذَاتِ ٱلْعِمَادِ ﴿٧﴾
यह 'आद' जाति का गोत्र है, जो अपने दादा 'इरम' की ओर मंसूब है, जिसके लोग बहुत लंबे होते थे।
ٱلَّتِى لَمْ يُخْلَقْ مِثْلُهَا فِى ٱلْبِلَـٰدِ ﴿٨﴾
वह ऐसी जाति थी कि जिसके समान अल्लाह ने दुनिया के देशों में किसी को पैदा नहीं किया।
وَثَمُودَ ٱلَّذِينَ جَابُوا۟ ٱلصَّخْرَ بِٱلْوَادِ ﴿٩﴾
क्या आपने नहीं देखा कि आपके रब ने सालेह अलैहिस्सलाम की जाति समूद के साथ कि तरह किया, जिन्होंने 'ह़िज्र' नामी स्थान पर पहाड़ों की चट्टानों को काटकर घर बनाए?!
وَفِرْعَوْنَ ذِى ٱلْأَوْتَادِ ﴿١٠﴾
क्या आपने नहीं देखा कि आपके रब ने फ़िरऔन के साथ किसतरह किया, जिसके पासलोगों को यातना देने के लिए मेंखें थीं? بلغ क़ुरआन · तफ़सीर
ٱلَّذِينَ طَغَوْا۟ فِى ٱلْبِلَـٰدِ ﴿١١﴾
ये सभी लोग अत्याचार और अन्याय में सीमा पार कर गए। हर एक ने अपने-अपने देश में सीमा पार किया।
فَأَكْثَرُوا۟ فِيهَا ٱلْفَسَادَ ﴿١٢﴾
उन्होंने उन नगरों में, कु फ़्र और पाप फै लाकर, बहुत अधिक बिगाड़ पैदा किया। فصب عليهم ربك سوط عذاب
فَصَبَّ عَلَيْهِمْ رَبُّكَ سَوْطَ عَذَابٍ ﴿١٣﴾
तो अल्लाह ने उन्हें गंभीर यातना चखाई और उन्हें धरती से उखाड़ फें का।
إِنَّ رَبَّكَ لَبِٱلْمِرْصَادِ ﴿١٤﴾
(ऐ रसूल) निश्चय आपका पालनहार लोगों के कर्मों को देख रहा है और उनका निरीक्षण कर रहा है, ताकि अच्छा कार्य करने वाले को जन्नत के साथ और बुरा कार्य करने वाले को जहन्नमके साथ पुरस्कृ त करे।
فَأَمَّا ٱلْإِنسَـٰنُ إِذَا مَا ٱبْتَلَىٰهُ رَبُّهُۥ فَأَكْرَمَهُۥ وَنَعَّمَهُۥ فَيَقُولُ رَبِّىٓ أَكْرَمَنِ ﴿١٥﴾
जहाँ तक इनसान का मामला है, तो उसका स्वभाव यह है कि यदि उसका पालनहार उसका परीक्षण करे और उसे सम्मानित करे, तथा उसे धन, संतान और प्रतिष्ठा प्रदान करे, तो वह सोचता है कि यह उसे अल्लाह के निकट सम्मान प्राप्त होने के कारण है। चुनाँचे वह कहता है: मेरे पालनहार ने मुझे सम्मानित किया, क्योंकि मैं उसके सम्मान के योग्य था।
وَأَمَّآ إِذَا مَا ٱبْتَلَىٰهُ فَقَدَرَ عَلَيْهِ رِزْقَهُۥ فَيَقُولُ رَبِّىٓ أَهَـٰنَنِ ﴿١٦﴾
लेकिन जब अल्लाह उसका परीक्षण करे और उसकी आजीविका उसके लिए तंग कर दे, तो वह सोचता है कि इसका कारण यह है कि उसके पालनहार के पास उसका कोई सम्मान नहीं है। चुनाँचे वह कहता है: मेरे पालनहार ने मुझे अपमानित किया।
كَلَّا ۖ بَل لَّا تُكْرِمُونَ ٱلْيَتِيمَ ﴿١٧﴾
हरगिज़ नहीं, यह मामला ऐसा नहीं है, जैसा कि इस व्यक्ति ने कल्पना की है कि नेमत बंदे से अल्लाह के खुश होने का प्रमाण है और सज़ा बंदे से अल्लाह के नाराज़ होने का प्रमाण है। बल्कि, वास्तविकता यह है कि अल्लाह ने तुम्हें जो जीविका प्रदान की है, तुमउससे अनाथ का सम्मान नहीं करते हो।
وَلَا تَحَـٰٓضُّونَ عَلَىٰ طَعَامِ ٱلْمِسْكِينِ ﴿١٨﴾
तथा तुमउसग़रीब को भोजन कराने के लिए एक-दूसरे से आग्रहم नहीं करते हो, जिसके पासखाने के लिए कु छ नहीं होता।
وَتَأْكُلُونَ ٱلتُّرَاثَ أَكْلًۭا لَّمًّۭا ﴿١٩﴾
और तुम कमज़ोरों; महिलाओं और अनाथों के हक़ों को, हलाल-हराम की परवाह किए बिना, बुरी तरह खा जाते हो। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर ب م
وَتُحِبُّونَ ٱلْمَالَ حُبًّۭا جَمًّۭا ﴿٢٠﴾
और तुमधन से बहुत प्यार करते हो। इसलिए उसे अल्लाहكके मार्गك में खर्च करने में कं जूसी करते हो।
كَلَّآ إِذَا دُكَّتِ ٱلْأَرْضُ دَكًّۭا دَكًّۭا ﴿٢١﴾
तुम्हें हरगिज़ ऐसा नहीं करना चाहिए, और उस समय को यादف रखो,فजब धरती ज़ोर-ज़ोर से हिला दी जाएगी।
وَجَآءَ رَبُّكَ وَٱلْمَلَكُ صَفًّۭا صَفًّۭا ﴿٢٢﴾
और (ऐ रसूल) आपका पालनहार बंदों के बीच निर्णय करने के लिए आएगा और फ़रिश्ते भी पंक्तिबद्ध होकर आ जाएँगे।
وَجِا۟ىٓءَ يَوْمَئِذٍۭ بِجَهَنَّمَ ۚ يَوْمَئِذٍۢ يَتَذَكَّرُ ٱلْإِنسَـٰنُ وَأَنَّىٰ لَهُ ٱلذِّكْرَىٰ ﴿٢٣﴾
उस दिन जहन्नम को इस तरह लाया जाएगा कि उसकी सत्तर हज़ार लगामें होंगी। हर लगाम के साथ सत्तर हज़ार फ़रिश्ते होंगे जो उसे खींच रहे होंगे। उस दिन इनसान याद करेगा कि उसने अल्लाह के पक्ष में क्या-क्या कोताही की है। लेकिन उस दिन याद करना उसे कहाँ से लाभ देगा; क्योंकि वह प्रतिदान दिवसहै, कार्य दिवस नहीं?! يقول يليتنى قدمت لحياتى
يَقُولُ يَـٰلَيْتَنِى قَدَّمْتُ لِحَيَاتِى ﴿٢٤﴾
वह बड़े अफ़सोसके साथ कहेगा: ऐ काश! मैंने अपने इसआख़िरत के जीवन के लिए नेक कार्य किए होते, जो वास्तविक जीवन है। فيومئذ لا يعذب عذابه أحد
فَيَوْمَئِذٍۢ لَّا يُعَذِّبُ عَذَابَهُۥٓ أَحَدٌۭ ﴿٢٥﴾
उस दिन अल्लाह की यातना की तरह कोई यातना नहीं देगा, क्योंकि अल्लाह की यातना अधिक गंभीर और स्थायी है। ولا يوثق وثاقه أحد
وَلَا يُوثِقُ وَثَاقَهُۥٓ أَحَدٌۭ ﴿٢٦﴾
और न उसके काफ़िरों को ज़ंजीरों में बाँधने की तरह कोई बाँधेगा।
يَـٰٓأَيَّتُهَا ٱلنَّفْسُ ٱلْمُطْمَئِنَّةُ ﴿٢٧﴾
जहाँ तक मोमिन की आत्मा की बात है, तो उसे मौत के समय और क़ियामत के दिन कहा जाएगा: ऐ ईमान और नेक कार्य से संतुष्ट आत्मा!
ٱرْجِعِىٓ إِلَىٰ رَبِّكِ رَاضِيَةًۭ مَّرْضِيَّةًۭ ﴿٢٨﴾
अपने पालनहार की ओर लौट चल, इस हाल में कि तू भरपूर बदला पाकर उससे संतुष्ट है, और अपने अच्छे कार्यों के कारण उसके निकट पसंदीदा (संतोषजनक) है।
فَٱدْخُلِى فِى عِبَـٰدِى ﴿٢٩﴾
अतः तू मेरे नेक बंदों में शामिलहो जा। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर
وَٱدْخُلِى جَنَّتِى ﴿٣٠﴾
और उनके साथ मेरी जन्नत में दाख़िल हो जा, जिसे मैंने उनके लिए तैयार कर रखी है। स्रोत:अल-मुख़्तसर फ़ी तफ़सीरिल क़ु रआनिल करीम
साथ पढ़ें · दोहराएँ · सुनाएँ · बिना पंजीकरण