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तफ़सीर Ash-Shu'araa (26) — الشعراء

मक्की · 227 आयतें

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طسٓمٓ ﴿١﴾

(ता, सीन, मीम) सूरतुल-बक़रा की शुरुआत में इस प्रकार के अक्षरों के बारे में बात गुज़र चुकी है।

تِلْكَ ءَايَـٰتُ ٱلْكِتَـٰبِ ٱلْمُبِينِ ﴿٢﴾

यह उस क़ु रआन की आयतें हैं, जो असत्य से सत्य को स्पष्ट करने वाला है। لعلك بخع نفسك ألا يكونوامؤمنين

لَعَلَّكَ بَـٰخِعٌۭ نَّفْسَكَ أَلَّا يَكُونُوا۟ مُؤْمِنِينَ ﴿٣﴾

शायद (ऐ रसूल!) आप उनकी हिदायत की तीव्र उत्सुकता के कारण, उनकी हिदायत की चिंता और ग़म में अपने आपको हलाक कर लेंगे।

إِن نَّشَأْ نُنَزِّلْ عَلَيْهِم مِّنَ ٱلسَّمَآءِ ءَايَةًۭ فَظَلَّتْ أَعْنَـٰقُهُمْ لَهَا خَـٰضِعِينَ ﴿٤﴾

यदि हम उनपर आकाश से कोई निशानी उतारना चाहें, तो उसे उनपर उतार दें, फिर उनकी गर्दनें उसके आगे झुकी रह जाएँ। किंतु हमने उनकी परीक्षा लेने के उद्देश्य से ऐसा नहीं चाहा कि: क्या वे ग़ैब (परोक्ष) पर ईमान लाते हैं?

وَمَا يَأْتِيهِم مِّن ذِكْرٍۢ مِّنَ ٱلرَّحْمَـٰنِ مُحْدَثٍ إِلَّا كَانُوا۟ عَنْهُ مُعْرِضِينَ ﴿٥﴾

जब भी इन मुश्रिकों के पास 'रहमान' की ओर से कोई नई नसीहत आती है, जो उसके एके श्वरवाद और उसके नबी की सच्चाई को इंगित करने वाले प्रमाणों पर आधारित होती है, तो वे उसे सुनने तथा उसे सच्चा मानने से मुँह फे र लेते हैं।

فَقَدْ كَذَّبُوا۟ فَسَيَأْتِيهِمْ أَنۢبَـٰٓؤُا۟ مَا كَانُوا۟ بِهِۦ يَسْتَهْزِءُونَ ﴿٦﴾

जो कु छ उनके रसूल उनके पास लाए थे, उन्होंने उसे झुठला दिया। इसलिए अब शीघ्र ही उनके पास उन समाचारों की पुष्टि आ जाएगी, जिनका वे मज़ाक़ उड़ाया करते थे तथा उनपर यातना उतरेगी।

أَوَلَمْ يَرَوْا۟ إِلَى ٱلْأَرْضِ كَمْ أَنۢبَتْنَا فِيهَا مِن كُلِّ زَوْجٍۢ كَرِيمٍ ﴿٧﴾

क्या ये मुश्रिक अभी भी अपने कु फ्रपर अड़े हुए हैं, इसलिए उन्होंने धरती की ओर नहीं देखा कि हमने उसमें कितने प्रकार के पौधे उगाए हैं, जो अच्छे दिखने वाले और बहुत-से फायदे वाले हैं?!

إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَـَٔايَةًۭ ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُم مُّؤْمِنِينَ ﴿٨﴾

निःसंदेह धरती पर विभिन्न प्रकार के पौधे उगाने में निश्चय इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि उन्हें उगाने वाला, मुर्दों को पुनः जीवित करने में सक्षम है। परंतु इसके बावजूद उनमें से अधिकतर लोग ईमान लाने वाले नहीं हैं।

وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ ٱلْعَزِيزُ ٱلرَّحِيمُ ﴿٩﴾

और ऐ रसूल! आपका पालनहार ही सब पर प्रभुत्वशाली है जिसे कोई परास्त नहीं कर सकता, अपने बंदों पर अत्यंत दयालु है। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

وَإِذْ نَادَىٰ رَبُّكَ مُوسَىٰٓ أَنِ ٱئْتِ ٱلْقَوْمَ ٱلظَّـٰلِمِينَ ﴿١٠﴾

और (ऐ रसूल!) उस समय को याद करें, जब आपके रब ने मूसा को आदेश देते हुए कहा कि वह उस अत्याचारी क़ौम के पास जाएँ, जिसने अल्लाह का इनकार किया है और मूसा (अलैहिस्सलाम) की क़ौम को ग़ुलाम बना रखा है।

قَوْمَ فِرْعَوْنَ ۚ أَلَا يَتَّقُونَ ﴿١١﴾

उस क़ौम से अभिप्राय फ़िरऔन की क़ौम है। वहाँ जाकर उन्हें नरमी के साथ अल्लाह से, उसके आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर, डरने का आदेश दें।

قَالَ رَبِّ إِنِّىٓ أَخَافُ أَن يُكَذِّبُونِ ﴿١٢﴾

मूसा अलैहिस्सलामने कहा: मुझे इसबात का डर है कि जो कु छ मैं उन्हें तेरे विषय में बताऊँ गा, वे मुझे झुठला देंगे। ويضيق صدرى ولا ينطلق لسانى فأرسل إلىهرون

وَيَضِيقُ صَدْرِى وَلَا يَنطَلِقُ لِسَانِى فَأَرْسِلْ إِلَىٰ هَـٰرُونَ ﴿١٣﴾

मेरा सीना इस भय से संकु चित हो रहा है कि कहीं वे मुझे झुठला न दें और मेरी ज़बान बोलने से रुक रही है। अतः जिबरील द्वारा मेरे भाई हारून के पास संदेश भेज कि वह मेरा सहायक बन जाए। ولهم على ذنب فأخاف أن يقتلون

وَلَهُمْ عَلَىَّ ذَنۢبٌۭ فَأَخَافُ أَن يَقْتُلُونِ ﴿١٤﴾

तथा मेरे एक क़िबती को मारने के कारण, उनका मेरे खिलाफ एक जुर्म का आरोप है। इसलिए मुझे डर है कि वे मुझे मार डालेंगे।

قَالَ كَلَّا ۖ فَٱذْهَبَا بِـَٔايَـٰتِنَآ ۖ إِنَّا مَعَكُم مُّسْتَمِعُونَ ﴿١٥﴾

अल्लाह ने मूसा अलैहिस्सलाम से कहा: हरगिज़ ऐसा नहीं होगा। वे कदापि तुम्हें क़त्ल नहीं कर सकते। अतः तुम अपने भाई हारून के साथ हमारी निशानियाँ लेकर जाओ, जो तुम दोनों की सत्यता की पुष्टि करने वाली हैं। क्योंकि हम अपनी सहायता एवं समर्थन के साथ तुम्हारे साथ हैं, तुम उनसे तथा वे तुमसे जो कु छ कहेंगे हम सब कु छ सुनने वाले हैं। हमसे कोई भी चीज़ छू ट नहीं सकती।

فَأْتِيَا فِرْعَوْنَ فَقُولَآ إِنَّا رَسُولُ رَبِّ ٱلْعَـٰلَمِينَ ﴿١٦﴾

अतः तुमदोनों फ़िरऔन के पासजाओ और उससे कहो: हमदोनों सारी सृष्टि के पालनहार की ओर से तेरे पाससंदेश लेकर आए हैं।

أَنْ أَرْسِلْ مَعَنَا بَنِىٓ إِسْرَٰٓءِيلَ ﴿١٧﴾

कि तू बनी-इसराईलको हमारे साथ भेज दे। قال ألم نربك فينا وليدا ولبثت فينا من عمركسنين

قَالَ أَلَمْ نُرَبِّكَ فِينَا وَلِيدًۭا وَلَبِثْتَ فِينَا مِنْ عُمُرِكَ سِنِينَ ﴿١٨﴾

फ़िरऔन ने मूसा अलैहिस्सलाम से कहा: क्या हमने तुझे बचपन में अपने यहाँ पाला नहीं था? और तूने हमारे बीच अपनी आयु के कई वर्ष गुज़ारे। फिर किस बात ने तुझे नुबुव्वत (पैग़ंबरी) का दावा करने के लिए प्रेरित किया? بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

وَفَعَلْتَ فَعْلَتَكَ ٱلَّتِى فَعَلْتَ وَأَنتَ مِنَ ٱلْكَـٰفِرِينَ ﴿١٩﴾

और तूने अपनी जाति के एक व्यक्ति के समर्थन में एक क़िबती को क़त्लकरके बहुत बड़ा अपराध किया है, तथा तू अपने ऊपर मेरे उपकारों को न मानने वालों में से है।

قَالَ فَعَلْتُهَآ إِذًۭا وَأَنَا۠ مِنَ ٱلضَّآلِّينَ ﴿٢٠﴾

मूसा अलैहिस्सलाम ने अपने कार्य को स्वीकारते हुए कहा: मैंने उस व्यक्ति को उस समय क़त्ल किया, जब मैं अज्ञानियों में से था और मेरे पास वह़्य नहीं आई थी।

فَفَرَرْتُ مِنكُمْ لَمَّا خِفْتُكُمْ فَوَهَبَ لِى رَبِّى حُكْمًۭا وَجَعَلَنِى مِنَ ٱلْمُرْسَلِينَ ﴿٢١﴾

फिर जब मुझे भय हुआ कि क़त्ल के अपराध में तुम मेरा वध कर दोगे, तो मैं मदयन गांव की ओर भाग गया। जहाँ मेरे पालनहार ने मुझे ज्ञान प्रदान किया और मुझे उन रसूलों में से बना दिया, जिन्हें वह लोगों के पासभेजता है।

وَتِلْكَ نِعْمَةٌۭ تَمُنُّهَا عَلَىَّ أَنْ عَبَّدتَّ بَنِىٓ إِسْرَٰٓءِيلَ ﴿٢٢﴾

तेरा बनी इसराईल को दास बनाने के साथ मुझे गुलाम बनाए बिना मेरा पालन-पोषण करना, एक ऐसा उपकार है जो तू मुझपर उचित रूप से जतला रहा है। लेकिन यह मुझे तुमको एक अल्लाह की ओर बुलाने से नहीं रोकता है।

قَالَ فِرْعَوْنُ وَمَا رَبُّ ٱلْعَـٰلَمِينَ ﴿٢٣﴾

फ़िरऔन ने मूसा अलैहिस्सलाम से कहा: सारे प्राणियों का रब क्या है, जिसका तूने रसूल होने का दावा किया है?!

قَالَ رَبُّ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَآ ۖ إِن كُنتُم مُّوقِنِينَ ﴿٢٤﴾

मूसा ने फ़िरऔन को उत्तर देते हुए कहा: सारे प्राणियों का रब वह है, जो आकाशों तथा धरती और उन दोनों के बीच मौजूद सारी चीज़ों का रब है। यदि तुमविश्वास रखने वाले हो कि वही उन सब का रब है, तो के वल उसी की इबादत करो। قال لمن حوله ألا تستمعون

قَالَ لِمَنْ حَوْلَهُۥٓ أَلَا تَسْتَمِعُونَ ﴿٢٥﴾

फ़िरऔन ने वहाँ उपस्थित अपनी क़ौम के प्रमुखों से कहा: क्या तुम मूसा का उत्तर और उसका झूठा दावा नहीं सुन रहे हो?!

قَالَ رَبُّكُمْ وَرَبُّ ءَابَآئِكُمُ ٱلْأَوَّلِينَ ﴿٢٦﴾

मूसा ने उनसे कहा: अल्लाह तुम्हारा तथा तुम्हारे पूर्व बाप-दादों का भी रब है।

قَالَ إِنَّ رَسُولَكُمُ ٱلَّذِىٓ أُرْسِلَ إِلَيْكُمْ لَمَجْنُونٌۭ ﴿٢٧﴾

फ़िरऔन ने कहा: यह व्यक्ति जो तुम्हारी ओर रसूल बनाकर भेजे जाने का दावा करता है, अवश्य पागल है। वह जवाब देना नहीं जानता और ऐसी बात कहता है जो समझ में नहीं आती। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

قَالَ رَبُّ ٱلْمَشْرِقِ وَٱلْمَغْرِبِ وَمَا بَيْنَهُمَآ ۖ إِن كُنتُمْ تَعْقِلُونَ ﴿٢٨﴾

मूसा ने कहा: जिस अल्लाह की ओर मैं तुम्हें बुला रहा हूँ, वह पूर्व और पश्चिम तथा उन दोनों के बीच मौजूद सारी चीज़ों का रब है, यदि तुम्हारे पास समझने के लिए बुद्धि है।

قَالَ لَئِنِ ٱتَّخَذْتَ إِلَـٰهًا غَيْرِى لَأَجْعَلَنَّكَ مِنَ ٱلْمَسْجُونِينَ ﴿٢٩﴾

फ़िरऔन ने मूसा अलैहिस्सलाम से, उनके साथ बहस करने में असमर्थ होने के बाद, कहा: यदि तूने मेरे अलावा किसी अन्य को पूज्य बनाया, तो मैं तुझे अवश्य ही बंदी बनाए हुए लोगों में शामिलकर दूँगा। قال أولو جئتك بشىء م بين

قَالَ أَوَلَوْ جِئْتُكَ بِشَىْءٍۢ مُّبِينٍۢ ﴿٣٠﴾

मूसा अलैहिस्सलाम ने फ़िरऔन से कहा: क्या यदि मैं तेरे पास ऐसी चीज़ ले आऊँ , जो मेरे अल्लाह की ओर सच्चे रसूल होने की पुष्टि करती हो, फिर भी तू मुझे बंदी बनाए हुए लोगों में शामिलकर देगा?

قَالَ فَأْتِ بِهِۦٓ إِن كُنتَ مِنَ ٱلصَّـٰدِقِينَ ﴿٣١﴾

उसने कहा: तो उसे ले आ जो तूने कहा है कि वह तेरी सच्चाई को दर्शाता है, यदि तू अपने दावे में सच्चा है। فألق عصاه فإذا هى ثعبان م بين

فَأَلْقَىٰ عَصَاهُ فَإِذَا هِىَ ثُعْبَانٌۭ مُّبِينٌۭ ﴿٣٢﴾

मूसा ने अपनी लाठी ज़मीन पर फें की, और वह अचानक एक स्पष्ट रूप से दिखाई देने वाले अजगर में बदलगई।

وَنَزَعَ يَدَهُۥ فَإِذَا هِىَ بَيْضَآءُ لِلنَّـٰظِرِينَ ﴿٣٣﴾

और उन्होंने अपना हाथ अपने गिरेबान में डाला, जबकि वह सफेद नहीं था, फिर उसे इस हालत में निकाला कि वह सफ़ेद और चमकदार था, पर बरस की सफ़ेदी की तरह नहीं, देखने वाले उसे ऐसा ही देख रहे थे। قال للملإ حوله إن هذا لسحرعليم

قَالَ لِلْمَلَإِ حَوْلَهُۥٓ إِنَّ هَـٰذَا لَسَـٰحِرٌ عَلِيمٌۭ ﴿٣٤﴾

फिरऔन ने अपने आस-पास उपस्थित सरदारों से कहा: निश्चय यह व्यक्ति तो एक कु शलजादूगर है। يريد أن يخرجكم من أرضكم بسحره فماذا تأمرون

يُرِيدُ أَن يُخْرِجَكُم مِّنْ أَرْضِكُم بِسِحْرِهِۦ فَمَاذَا تَأْمُرُونَ ﴿٣٥﴾

यह चाहता है कि अपने जादू से तुम्हें तुम्हारी भूमिसे निकालदे, तो तुम्हारी क्या राय है, इसके बारे में हमें क्या कार्रवाई करनी चाहिए कि?

قَالُوٓا۟ أَرْجِهْ وَأَخَاهُ وَٱبْعَثْ فِى ٱلْمَدَآئِنِ حَـٰشِرِينَ ﴿٣٦﴾

उनहोंने उससे कहा: इसे और इसके भाई के मामले को अभी टाले रखो और इन दोनों को दंड देने में जल्दी न करो, तथा मिस्र के नगरों में जादूगरों को इकट्ठा करने वालों को भेज दो। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर يأتوك بكل سحار عليم

يَأْتُوكَ بِكُلِّ سَحَّارٍ عَلِيمٍۢ ﴿٣٧﴾

कि वे तुम्हारे पास हर बड़ा जादूगर ले आएँ, जो जादू में प्रवीण और कु शल हो।

فَجُمِعَ ٱلسَّحَرَةُ لِمِيقَـٰتِ يَوْمٍۢ مَّعْلُومٍۢ ﴿٣٨﴾

तो फ़िरऔन ने अपने जादूगरों को मूसा से मुक़ाबले के लिए एक विशिष्ट स्थान और समय पर इकट्ठा किया। وقيل للناس هل أنتم م جتمعون

وَقِيلَ لِلنَّاسِ هَلْ أَنتُم مُّجْتَمِعُونَ ﴿٣٩﴾

तथा लोगों से कहा गया: क्या तुमयह देखने के लिए एकत्र होने वाले हो कि विजयी मूसा होते हैं या जादूगर?

لَعَلَّنَا نَتَّبِعُ ٱلسَّحَرَةَ إِن كَانُوا۟ هُمُ ٱلْغَـٰلِبِينَ ﴿٤٠﴾

इस आशा के साथ कि यदि जादूगर मूसा को पराजित कर देते हैं, तो हम उनके धर्म के अनुयायी बन जाएँगे।

فَلَمَّا جَآءَ ٱلسَّحَرَةُ قَالُوا۟ لِفِرْعَوْنَ أَئِنَّ لَنَا لَأَجْرًا إِن كُنَّا نَحْنُ ٱلْغَـٰلِبِينَ ﴿٤١﴾

जब जादूगर मूसा का मुक़ाबला करने के लिए फ़िरऔन के पास आए, तो उन्होंने उससे कहा: यदि हम मूसा पर विजय प्राप्त कर लेते हैं, तो क्या हमें कोई आर्थिक या नैतिक इनाम मिलेगा?

قَالَ نَعَمْ وَإِنَّكُمْ إِذًۭا لَّمِنَ ٱلْمُقَرَّبِينَ ﴿٤٢﴾

फ़िरऔन ने उनसे कहा: हाँ, तुम्हें बदला मिलेगा, तथा यदि तुम उसपर विजयी हो जाते हो, तो तुम उच्च पद प्राप्त कर मेरे क़रीबी लोगों में से हो जाओगे।

قَالَ لَهُم مُّوسَىٰٓ أَلْقُوا۟ مَآ أَنتُم مُّلْقُونَ ﴿٤٣﴾

मूसा ने अल्लाह की मदद से आश्वस्त और यह स्पष्ट करते हुए कि उनके पास जो कु छ है वह जादू नहीं है, कहा: तुम अपनी रस्सियाँ और लाठियाँ, जो फें कना चाहते हो, फें को।

فَأَلْقَوْا۟ حِبَالَهُمْ وَعِصِيَّهُمْ وَقَالُوا۟ بِعِزَّةِ فِرْعَوْنَ إِنَّا لَنَحْنُ ٱلْغَـٰلِبُونَ ﴿٤٤﴾

अतः उन्होंने अपनी रस्सियाँ और लाठियाँ फेंकीं और उन्हें फेंकते हुए कहा: फ़िरऔन के प्रभुत्व की सौगंध! निश्चय हम ही विजयी रहेंगे और मूसा को पराजित होना पड़ेगा। فألق موس عصاهفإذا هى تلقف ما يأفكون

فَأَلْقَىٰ مُوسَىٰ عَصَاهُ فَإِذَا هِىَ تَلْقَفُ مَا يَأْفِكُونَ ﴿٤٥﴾

फिर मूसा ने अपनी लाठी फें की और वह एक अजगर बन गई, जिसने अचानक उस जादू को निगलना शुरू कर दिया, जो वे लोगों पर छलावा कर रहे थे।

فَأُلْقِىَ ٱلسَّحَرَةُ سَـٰجِدِينَ ﴿٤٦﴾

जब जादूगरों ने देखा कि मूसा की लाठी उनके फें के हुए जादू को निगल रही है, तो वे सजदे में गिर गए। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

قَالُوٓا۟ ءَامَنَّا بِرَبِّ ٱلْعَـٰلَمِينَ ﴿٤٧﴾

वे बोलपड़े: हमसारे संसार के पालनहार पर ईमान ले आए। رب موس وهرون

رَبِّ مُوسَىٰ وَهَـٰرُونَ ﴿٤٨﴾

मूसा और हारून अलैहिमस्सलाम के रब पर।

قَالَ ءَامَنتُمْ لَهُۥ قَبْلَ أَنْ ءَاذَنَ لَكُمْ ۖ إِنَّهُۥ لَكَبِيرُكُمُ ٱلَّذِى عَلَّمَكُمُ ٱلسِّحْرَ فَلَسَوْفَ تَعْلَمُونَ ۚ لَأُقَطِّعَنَّ أَيْدِيَكُمْ وَأَرْجُلَكُم مِّنْ خِلَـٰفٍۢ وَلَأُصَلِّبَنَّكُمْ أَجْمَعِينَ ﴿٤٩﴾

وأ رجلكم من خلف ولأصلبنكم أ جمعين फ़िरऔन ने जादूगरों के ईमान को अस्वीकार करते हुए कहा: क्या तुममूसा पर ईमान ले आए, इससे पहले कि मैं तुम्हें ऐसा करने की अनुमति देता?निःसंदेह मूसा अवश्य तुम्हारा प्रमुख है, जिसने तुम्हें जादू सिखाया है, तथा तुम सब ने मिलकर मिस्र के वासियों को उनकी भूमि से निकालने की साज़िश रची है। अतः शीघ्र ही तुम जान लोगे कि मैं तुम्हें क्या दण्ड देता हूँ। मैं अवश्य ही हर एक का पैर और उसका हाथ विपरीत दिशा से काट दूँगा, यानी दाहिने पैर को बाएँ हाथ के साथ या उसके विपरीत बाएँ पैर को दाहिने हाथ के साथ। तथा तुम सभी को खजूर के तनों पर सूली पर चढ़ा दूँगा, तुममें से किसी को भी जीवित नहीं छोड़ूँगा।

قَالُوا۟ لَا ضَيْرَ ۖ إِنَّآ إِلَىٰ رَبِّنَا مُنقَلِبُونَ ﴿٥٠﴾

जादूगरों ने फ़िरऔन से कहा: इस संसार में हाथ-पैर काटने तथा सूली पर चढ़ाने की जो तू हमें धमकी दे रहा है, उसमें कोई नुक़सान नहीं। क्योंकि तेरी यातना बीत जाएगी और हम अपने रब ही की ओर पलटने वाले हैं, और वह हमें अपनी शाश्वत दया में प्रवेश करेगा।

إِنَّا نَطْمَعُ أَن يَغْفِرَ لَنَا رَبُّنَا خَطَـٰيَـٰنَآ أَن كُنَّآ أَوَّلَ ٱلْمُؤْمِنِينَ ﴿٥١﴾

हमआशा करते हैं कि अल्लाह हमारे उन पिछले पापों को मिटा देगा जो हमने किए थे क्योंकि हममूसा पर सबसे पहले ईमान लाने वाले और उनको सच्चा मानने वाले बने हैं।

۞ وَأَوْحَيْنَآ إِلَىٰ مُوسَىٰٓ أَنْ أَسْرِ بِعِبَادِىٓ إِنَّكُم مُّتَّبَعُونَ ﴿٥٢﴾

और हमने मूसा की ओर उन्हें यह आदेश देते हुए वह़्य की कि बनी इसराईल को लेकर रातों-रात निकल जाओ। क्योंकि फ़िरऔन अपने साथियों के साथ उन्हें वापस ले जाने के लिए पीछा करेगा।

فَأَرْسَلَ فِرْعَوْنُ فِى ٱلْمَدَآئِنِ حَـٰشِرِينَ ﴿٥٣﴾

जब फ़िरऔन को पता चला कि बनी इसराईल मिस्र से भाग निकले हैं, तो उसने अपने कुछ सिपाहियों को नगरों में सेना एकत्र करने के लिए भेज दिए, ताकि वे बनी इसराईल को वापस ला सकें ।

إِنَّ هَـٰٓؤُلَآءِ لَشِرْذِمَةٌۭ قَلِيلُونَ ﴿٥٤﴾

फ़िरऔन ने बनी इसराईलके महत्व को घटाने के लिए कहा: निःसंदेह ये लोग तो एक छोटा-सा समूह हैं।

وَإِنَّهُمْ لَنَا لَغَآئِظُونَ ﴿٥٥﴾

और ये ऐसा काम करने वाले हैं, जो हमें इनपर क्रोधित करता है। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर وإنا لجميع حذرون

وَإِنَّا لَجَمِيعٌ حَـٰذِرُونَ ﴿٥٦﴾

हमउनके लिए तैयार और सतर्क रहने वाले हैं। فأخرجنهم من جنت وعيون

فَأَخْرَجْنَـٰهُم مِّن جَنَّـٰتٍۢ وَعُيُونٍۢ ﴿٥٧﴾

इस प्रकार हमने फ़िरऔन तथा उसकी जाति को हरे-भरे बगीचों और जल से बहने वाले सोतों वाली मिस्र की भूमि से निकाल दिया। وكنوز ومقام كريم

وَكُنُوزٍۢ وَمَقَامٍۢ كَرِيمٍۢ ﴿٥٨﴾

तथा पैसे के खज़ानों और अच्छे आवासों वाली भूमिसे।

كَذَٰلِكَ وَأَوْرَثْنَـٰهَا بَنِىٓ إِسْرَٰٓءِيلَ ﴿٥٩﴾

जिस तरह हमने फ़िरऔन तथा उसकी जाति को इन नेमतों से बाहर निकाला, वैसे ही हमने उनके बाद इसी प्रकार की नेमतें बनी इसराईल को शाम के देश (लेवांत) में प्रदान कीं। فأتبعوهم م شرقين

فَأَتْبَعُوهُم مُّشْرِقِينَ ﴿٦٠﴾

सो फ़िरऔन और उसकी जाति के लोगों ने सूर्योदय के समय बनी इसराईल का पीछा किया।

فَلَمَّا تَرَٰٓءَا ٱلْجَمْعَانِ قَالَ أَصْحَـٰبُ مُوسَىٰٓ إِنَّا لَمُدْرَكُونَ ﴿٦١﴾

फिर जब फ़िरऔन और उसकी जाति के लोग मूसा और उनकी जाति के लोगों से मिले, इस प्रकार कि दोनों दल एक-दूसरे को देखने लगे, तो मूसा के साथियों ने कहा: निश्चय फ़िरऔन और उसकी जाति के लोग हमें पकड़ लेंगे, और हमारे पास उनसे निपटने की शक्ति नहीं है।

قَالَ كَلَّآ ۖ إِنَّ مَعِىَ رَبِّى سَيَهْدِينِ ﴿٦٢﴾

मूसा ने अपने साथियों से कहा: ऐसा कदापि नहीं होगा, जैसा तुम सोच रहे हो। क्योंकि मेरा रब समर्थन और मदद के साथ मेरे संग है। वह अवश्य मेरा मार्गदर्शन करेगा और मुझे मोक्ष के मार्ग पर ले जाएगा।

فَأَوْحَيْنَآ إِلَىٰ مُوسَىٰٓ أَنِ ٱضْرِب بِّعَصَاكَ ٱلْبَحْرَ ۖ فَٱنفَلَقَ فَكَانَ كُلُّ فِرْقٍۢ كَٱلطَّوْدِ ٱلْعَظِيمِ ﴿٦٣﴾

हमने यह आदेश देते हुए मूसा की ओर वह़्य की कि अपनी लाठी को सागर पर मारो। अतः उन्होंने उसपर मारा, जिससे सागर फट गया और बनी-इसराईल के गोत्रों की संख्या के बराबर बारह मार्ग बन गए। समुद्र से फटकर अलग हुआ हर टुकड़ा बड़े पहाड़ की तरह इतना बड़ा और दृढ़ था कि उसमें से कु छ भी पानी नहीं बह सकता था।

وَأَزْلَفْنَا ثَمَّ ٱلْـَٔاخَرِينَ ﴿٦٤﴾

फिर हम फ़िरऔन तथा उसकी जाति को निकट ले आए, यहाँ तक कि वे समुद्र में प्रवेश कर गए, यह सोचकर कि रास्ता चलने योग्य है। وأنجينا موس ومن معه أجمعين

وَأَنجَيْنَا مُوسَىٰ وَمَن مَّعَهُۥٓ أَجْمَعِينَ ﴿٦٥﴾

हमने मूसा तथा उनके साथ मौजूद बनी इसराईल को बचा लिया और उनमें से कोई भी नाश न हुआ। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

ثُمَّ أَغْرَقْنَا ٱلْـَٔاخَرِينَ ﴿٦٦﴾

फिर हमने फ़िरऔन तथा उसकी जाति को समुद्र में डुबाकर नाश कर दिया।

إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَـَٔايَةًۭ ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُم مُّؤْمِنِينَ ﴿٦٧﴾

मूसा के लिए समुद्र के फटने, उनके बच निकलने तथा फिरऔन और उसकी जाति के विनाश में, निश्चय मूसा अलैहिस्सलाम की सच्चाई को दर्शाने वाली एक बड़ी निशानी है। और फ़िरऔन के साथ मौजूद अकसर लोग ईमान लाने वाले नहीं थे।

وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ ٱلْعَزِيزُ ٱلرَّحِيمُ ﴿٦٨﴾

और निःसंदेह (ऐ रसूल!) आपका पालनहार ही वह प्रभुत्वशाली है, जो अपने दुश्मनों से बदला लेता है, तथा उनमें से तौबा करने वालों पर बहुत दयालु है।

وَٱتْلُ عَلَيْهِمْ نَبَأَ إِبْرَٰهِيمَ ﴿٦٩﴾

और (ऐ रसूल!) आप उन्हें इबराहीम की कहानी सुनाएँ। إذ قال لأبيه وقومه ما تعبدون

إِذْ قَالَ لِأَبِيهِ وَقَوْمِهِۦ مَا تَعْبُدُونَ ﴿٧٠﴾

जिस समय उन्होंने अपने पिता आज़र तथा अपनी जाति के लोगों से कहा: आप लोग अल्लाह के सिवा किसकी पूजा करते हैं? قالوانعبد أصناما فنظل لها عكفين

قَالُوا۟ نَعْبُدُ أَصْنَامًۭا فَنَظَلُّ لَهَا عَـٰكِفِينَ ﴿٧١﴾

तो उनकी जाति के लोगों ने उनसे कहा: हम मूर्तियों की पूजा करते हैं और उनकी पूजा पर अडिग रहते हैं। قال هل يسمعونكم إذ تدعون

قَالَ هَلْ يَسْمَعُونَكُمْ إِذْ تَدْعُونَ ﴿٧٢﴾

उनसे इबराहीम ने पूछा: क्या ये मूर्तियाँ तुम्हारी पुकार सुनती हैं, जब तुम उन्हें पुकारते हो? أو ينفعونكم أو يضرون

أَوْ يَنفَعُونَكُمْ أَوْ يَضُرُّونَ ﴿٧٣﴾

या वे तुम्हें लाभ पहुँचाती हैं, यदि तुम उनकी बात मानते हो, या वे तुम्हें हानि पहुँचाती हैं, यदि तुम उनकी अवज्ञा करते हो?

قَالُوا۟ بَلْ وَجَدْنَآ ءَابَآءَنَا كَذَٰلِكَ يَفْعَلُونَ ﴿٧٤﴾

उन्होंने उत्तर दिया: यदि हम इन मूर्तियों को पुकारते हैं, तो वे हमारी पुकार नहीं सुनतीं, और यदि हम उनकी आज्ञा मानते हैं, तो वे हमें लाभ नहीं पहुँचातीं, और यदि हम उनकी अवज्ञा करते हैं, तो वे हमें हानि नहीं पहुँचातीं। बल्कि, असल बात यह है कि हमने अपने बाप-दादा को ऐसा ही करते हुए पाया है, इसलिए हम उनका अनुकरण करते हैं। قال أفرءيتم ما كنتم تعبدون

قَالَ أَفَرَءَيْتُم مَّا كُنتُمْ تَعْبُدُونَ ﴿٧٥﴾

इबराहीम ने कहा: क्या तुमने उन मूर्तियों के विषय में ग़ौर किया और देखा, जिनकी तुम अल्लाह के सिवा पूजा करते हो? بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

أَنتُمْ وَءَابَآؤُكُمُ ٱلْأَقْدَمُونَ ﴿٧٦﴾

और जिनकी तुम्हारे पहले के बाप-दादा पूजा करते थे? و

فَإِنَّهُمْ عَدُوٌّۭ لِّىٓ إِلَّا رَبَّ ٱلْعَـٰلَمِينَ ﴿٧٧﴾

निःसंदेह! वे सब मेरे शत्रु हैं; क्योंकि वे झूठे हैं, सिवाय सभी प्राणियों के पालनहार अल्लाह के ।

ٱلَّذِى خَلَقَنِى فَهُوَ يَهْدِينِ ﴿٧٨﴾

जिसने मुझे पैदा किया, फिर वही दुनिया और आख़िरत की भलाई की ओर मेरा मार्गदर्शन करता है।

وَٱلَّذِى هُوَ يُطْعِمُنِى وَيَسْقِينِ ﴿٧٩﴾

और वही अके ला है जो जब मैं भूखा होता हूँ, तो मुझे खिलाता है और जब मैं प्यासा होता हूँ, तो मुझे पिलाता है। وإ ذا مرضت فهو يشفين

وَإِذَا مَرِضْتُ فَهُوَ يَشْفِينِ ﴿٨٠﴾

और जब मैं बीमार होता हूँ, तो वही अके ला मुझे बीमारी से अच्छा करता है, उसके सिवा कोई मुझे स्वास्थ्य देने वाला नहीं है।

وَٱلَّذِى يُمِيتُنِى ثُمَّ يُحْيِينِ ﴿٨١﴾

तथा के वल वही है, जो मुझे मृत्यु देगा जब मेरी जीवन-अवधि समाप्त होगी, फिर मेरे मरने के पश्चात मुझे जीवित करेगा।

وَٱلَّذِىٓ أَطْمَعُ أَن يَغْفِرَ لِى خَطِيٓـَٔتِى يَوْمَ ٱلدِّينِ ﴿٨٢﴾

तथा वही अके ला है जिससे मैं आशा रखता हूँ कि वह बदले के दिन मेरे लिए मेरे पापों को क्षमा कर देगा।

رَبِّ هَبْ لِى حُكْمًۭا وَأَلْحِقْنِى بِٱلصَّـٰلِحِينَ ﴿٨٣﴾

इबराहीम ने अपने रब से दुआ करते हुए कहा: ऐ मेरे रब! मुझे धर्म की समझ प्रदान कर तथा मुझे मुझसे पहले के सदाचारी नबियों से मिला दे, इस प्रकार कि मुझे उनके साथ जन्नत में प्रवेश प्रदान कर।

وَٱجْعَل لِّى لِسَانَ صِدْقٍۢ فِى ٱلْـَٔاخِرِينَ ﴿٨٤﴾

तथा मेरे बाद आने वाली नसलों के अंदर मेरी शुभ-चर्चा और अच्छी प्रशंसा जारी रख।

وَٱجْعَلْنِى مِن وَرَثَةِ جَنَّةِ ٱلنَّعِيمِ ﴿٨٥﴾

और मुझे उन लोगों में से बना दे, जो स्वर्ग के उन घरों के वारिसहोंगे जिनमें तेरे मोमिन बंदे आनंद लेंगे, तथा मुझे उनका निवासी बना दे। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

وَٱغْفِرْ لِأَبِىٓ إِنَّهُۥ كَانَ مِنَ ٱلضَّآلِّينَ ﴿٨٦﴾

तथा मेरे बाप को क्षमा कर दे, वह शिर्क के कारण सत्य मार्ग से भटके हुए लोगों में से था। इबराहीम अलैहिस्सलाम ने अपने बाप के लिए दुआ यह स्पष्ट होने से पहले की थी कि वह नरक के वासियों में से है। चुनाँचे जब उनके लिए यह स्पष्ट हो गया, तो उससे अलग होने का एलान कर दिया और (फिर) उसके लिए दुआ नहीं की। ولا تخزنى يوم يبعثون

وَلَا تُخْزِنِى يَوْمَ يُبْعَثُونَ ﴿٨٧﴾

और मुझे उस दिन यातना देकर रुसवा न करना, जिस दिन लोग हिसाब के लिए पुनः जीवित किए जाएँगे। يوملا ينفع مال ولا بنون

يَوْمَ لَا يَنفَعُ مَالٌۭ وَلَا بَنُونَ ﴿٨٨﴾

जिस दिन न माल काम आएगा, जिसे इनसान ने संसार में एकत्र किया होगा और न संतान जिनकी मदद वह दुनिया में लिया करता था।

إِلَّا مَنْ أَتَى ٱللَّهَ بِقَلْبٍۢ سَلِيمٍۢ ﴿٨٩﴾

सिवाय उस व्यक्ति के , जो अल्लाह के पास पाक-साफ़ दिल लेकर आया, जिसमें कोई शिर्क , कोई निफ़ाक़, कोई दिखावा तथा कोई अहंकार (दंभ) नहीं। तो ऐसा व्यक्ति अपने उसधन से लाभान्वित होगा, जिसे अल्लाह के मार्ग में खर्च किया, तथा अपनी उन बच्चों से भी जो उसके लिए दुआ करते हैं।

وَأُزْلِفَتِ ٱلْجَنَّةُ لِلْمُتَّقِينَ ﴿٩٠﴾

और जन्नत उन लोगों के निकट लाई जाएगी, जो अपने रब से डरने वाले हैं; उसकी आज्ञाओं का पालन करते हैं और उनके निषेधों से बचते हैं।

وَبُرِّزَتِ ٱلْجَحِيمُ لِلْغَاوِينَ ﴿٩١﴾

तथा सत्य-धर्म से भटके हुए पथभ्रष्ट लोगों के लिए 'मह़शर' (एकत्र होने का स्थान) में जहन्नमज़ाहिर कर दी जाएगी। وقيل لهم أين ما كنتمتعبدون

وَقِيلَ لَهُمْ أَيْنَ مَا كُنتُمْ تَعْبُدُونَ ﴿٩٢﴾

उन्हें डाँटते हुए कहा जाएगा: कहाँ हैं वे मूर्तियाँ जिन्हें तुमपूजते थे?

مِن دُونِ ٱللَّهِ هَلْ يَنصُرُونَكُمْ أَوْ يَنتَصِرُونَ ﴿٩٣﴾

जिनकी तुम अल्लाह को छोड़कर पूजा करते थे? क्या वे तुम्हें अल्लाह की यातना से बचाकर तुम्हारी सहायता करती हैं, अथवा स्वयं अपनी ही सहायता करती हैं?

فَكُبْكِبُوا۟ فِيهَا هُمْ وَٱلْغَاوُۥنَ ﴿٩٤﴾

अतः उन्हें एक-दूसरे के ऊपर नरक में फें क दिया जाएगा तथा उनको भी जिन्होंने उन्हें गुमराह किया था। وجنود إ بليس أجمعون

وَجُنُودُ إِبْلِيسَ أَجْمَعُونَ ﴿٩٥﴾

तथा शैतानों में से इबलीस के सभी सहयोगियों को, उनमें से किसी एक को भी छोड़ा नहीं जाएगा। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर قالوا وهم فيها يختصمون

قَالُوا۟ وَهُمْ فِيهَا يَخْتَصِمُونَ ﴿٩٦﴾

अल्लाह के अलावा दूसरों की पूजा करने वाले तथा उन्हें अल्लाह का साझी बनाने वाले मुश्रिक अपने उन पूज्यों से झगड़ते हुए कहेंगे, जिन्हें वे अल्लाह को छोड़ पूजते थे:

تَٱللَّهِ إِن كُنَّا لَفِى ضَلَـٰلٍۢ مُّبِينٍ ﴿٩٧﴾

अल्लाह की क़सम! निश्चय हम स्पष्ट रूप से सत्य से भटक गए थे।

إِذْ نُسَوِّيكُم بِرَبِّ ٱلْعَـٰلَمِينَ ﴿٩٨﴾

जब हम तुम्हें सारी सृष्टि के पालनहार के समान बनाते थे, चुनाँचे हम उसकी पूजा करने की तरह तुम्हारी पूजा करते थे।

وَمَآ أَضَلَّنَآ إِلَّا ٱلْمُجْرِمُونَ ﴿٩٩﴾

हमें सत्य के मार्ग से के वलउन अपराधियों ने भटकाया, जिन्होंने हमें अल्लाह के सिवा दूसरों की इबादत की ओर बुलाया। فما لنا من شفعين

فَمَا لَنَا مِن شَـٰفِعِينَ ﴿١٠٠﴾

अब न तो हमारे लिए कोई सिफ़ारिश करने वाले हैं, जो हमारे लिए अल्लाह के पाससिफ़ारिश कर सकें कि वह हमें अपनी यातना से बचा ले। ولا صديق حميم

وَلَا صَدِيقٍ حَمِيمٍۢ ﴿١٠١﴾

और न हमारा कोई सच्चा मित्र है, जो हमारा बचाव करे और हमारे लिए सिफ़ारिश करे।

فَلَوْ أَنَّ لَنَا كَرَّةًۭ فَنَكُونَ مِنَ ٱلْمُؤْمِنِينَ ﴿١٠٢﴾

काश हमें एक बार दुनिया के जीवन में लौटने का अवसर मिलजाता, तो हमअल्लाह पर ईमान रखने वालों में से हो जाते।

إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَـَٔايَةًۭ ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُم مُّؤْمِنِينَ ﴿١٠٣﴾

इबराहीम अलैहिस्सलाम की इस कहानी तथा झुठलाने वालों के अंजाम में सीख लेने वालों के लिए निश्चय सीख ग्रहण करने का महान अवसर है। और उनमें से अधिकांश लोग ईमान लाने वाले नहीं थे।

وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ ٱلْعَزِيزُ ٱلرَّحِيمُ ﴿١٠٤﴾

और निःसंदेह (ऐ रसूल!) आपका पालनहार ही वह प्रभुत्वशाली है, जो अपने दुश्मनों से बदला लेता है, तथा उनमें से तौबा करने वालों पर बहुत दयालु है।

كَذَّبَتْ قَوْمُ نُوحٍ ٱلْمُرْسَلِينَ ﴿١٠٥﴾

नूह के समुदाय ने (भी) रसूलों को झुठलाया, जब उन्होंने नूह अलैहिस्सलाम को झुठला दिया। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर إذ قال لهم أخوهم نوح ألا تتقون

إِذْ قَالَ لَهُمْ أَخُوهُمْ نُوحٌ أَلَا تَتَّقُونَ ﴿١٠٦﴾

जब उनके वंश के भाई नूह ने उनसे कहा: क्या तुमअल्लाह से डरते नहीं कि उसके भय के कारण उसके अलावा की उपासना छोड़ दो?! إنى لكم رسول أمين

إِنِّى لَكُمْ رَسُولٌ أَمِينٌۭ ﴿١٠٧﴾

निःसंदेह मैं तुम्हारा रसूल हूँ, अल्लाह ने मुझे तुम्हारी ओर भेजा है। (मैं) अमानतदार हूँ, अल्लाह ने मेरी ओर जो वह़्य की है, उसमें कोई कमी-बेशी नहीं करता।

فَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ وَأَطِيعُونِ ﴿١٠٨﴾

अतः तुम अल्लाह के आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर उससे डरो, तथा जिसका मैं तुम्हें आदेश देता हूँ और जिससे मैं तुम्हें मना करता हूँ, उसमें मेरा कहा मानो।

وَمَآ أَسْـَٔلُكُمْ عَلَيْهِ مِنْ أَجْرٍ ۖ إِنْ أَجْرِىَ إِلَّا عَلَىٰ رَبِّ ٱلْعَـٰلَمِينَ ﴿١٠٩﴾

और जो कु छ मैं अपने रब की ओर से तुम्हें संदेश पहुँचाता हूँ, मैं तुमसे उसका बदला नहीं माँगता। मेरा बदला तो के वल सारी सृष्टि के रब अल्लाह के ज़िम्मे है, किसी अन्य के नहीं।

فَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ وَأَطِيعُونِ ﴿١١٠﴾

अतः तुम अल्लाह के आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर उससे डरो, तथा जिसका मैं तुम्हें आदेश देता हूँ और जिससे मैं तुम्हें मना करता हूँ, उसमें मेरा कहा मानो।

۞ قَالُوٓا۟ أَنُؤْمِنُ لَكَ وَٱتَّبَعَكَ ٱلْأَرْذَلُونَ ﴿١١١﴾

उनकी जाति के लोगों ने उनसे कहा: ऐ नूह! क्या हम तुझपर ईमान ले आएँ तथा जो कुछ तू लेकर आया है उसका पालन करें और उसपर अमल करने लगें, जबकि स्थिति यह है कि तुम्हारे अनुयायी सबसे हीन एवं कमहैसियत लोग हैं। उनमें श्रेष्ठ जन और अशराफिया लोग नहीं पाए जाते?! قال وما علمى بما كانوايعملون

قَالَ وَمَا عِلْمِى بِمَا كَانُوا۟ يَعْمَلُونَ ﴿١١٢﴾

नूह अलैहिस्सलामने उनसे कहा: मुझे क्या पता कि ये ईमान वाले क्या कार्य करते रहे हैं?क्योंकि मैं उनका निरीक्षक नहीं हूँ कि उनके कामों की गिनती करूँ ।

إِنْ حِسَابُهُمْ إِلَّا عَلَىٰ رَبِّى ۖ لَوْ تَشْعُرُونَ ﴿١١٣﴾

उनका हिसाब तो अल्लाह ही के ज़िम्मे है, जो उनकी छिपी और खुली (सारी) बातोंं को जानता है, मेरे ज़िम्मे नहीं है। अगर तुम समझते, तो वह बात न कहते जो तुमने कही है।

وَمَآ أَنَا۠ بِطَارِدِ ٱلْمُؤْمِنِينَ ﴿١١٤﴾

और मैं तुम्हारी माँग को स्वीकार करते हुए ईमान वालों को अपनी सभा से निकालने वाला नहीं हूँ, ताकि तुम ईमान ले आओ। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर إ ن أناإ ل انذير م بين

إِنْ أَنَا۠ إِلَّا نَذِيرٌۭ مُّبِينٌۭ ﴿١١٥﴾

मैं तो के वलस्पष्ट रूप से डराने वाला हूँ। तुम्हें अल्लाह की यातना से सावधान करता हूँ।

قَالُوا۟ لَئِن لَّمْ تَنتَهِ يَـٰنُوحُ لَتَكُونَنَّ مِنَ ٱلْمَرْجُومِينَ ﴿١١٦﴾

उनके समुदाय के लोगों ने उनसे कहा: यदि तुम हमें जिस बात की ओर बुलाते हो उससे बाज़ नहीं आए, तो निश्चय तुम अपशब्द सहोगे और पथराव करके मार डाले जाओगे। قال رب إن قومى كذبون

قَالَ رَبِّ إِنَّ قَوْمِى كَذَّبُونِ ﴿١١٧﴾

नूह ने अपने पालनहार से दुआ करते हुए कहा: ऐ मेरे पालनहार! मेरे समुदाय के लोगों ने मुझे झुठला दिया और मैं तेरे पास से जो कु छ लाया हूँ उसके प्रति मुझपर विश्वास नहीं किया।

فَٱفْتَحْ بَيْنِى وَبَيْنَهُمْ فَتْحًۭا وَنَجِّنِى وَمَن مَّعِىَ مِنَ ٱلْمُؤْمِنِينَ ﴿١١٨﴾

अतः मेरे और उनके बीच ऐसा फ़ै सला कर दे, जो उन्हें उनके असत्य पर अड़े रहने के कारण विनष्ट कर दे, तथा मुझे और मेरे साथ जो ईमान वाले हैं, उन्हें उससे बचा ले जिसके द्वारा तू मेरे समुदाय के काफ़िरों को नष्ट करने वाला है।

فَأَنجَيْنَـٰهُ وَمَن مَّعَهُۥ فِى ٱلْفُلْكِ ٱلْمَشْحُونِ ﴿١١٩﴾

अतः हमने उनकी दुआ को स्वीकार कर लिया तथा उन्हें और उनके साथ, लोगों और जानवरों से भरी हुई नौका में सवार, ईमान वालों को बचा लिया।

ثُمَّ أَغْرَقْنَا بَعْدُ ٱلْبَاقِينَ ﴿١٢٠﴾

फिर हमने उनके बाद नूह़ के समुदाय के बाक़ी लोगों को डुबो दिया।

إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَـَٔايَةًۭ ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُم مُّؤْمِنِينَ ﴿١٢١﴾

उपर्युक्त नूह और उनके समुदाय की कहानी तथा नूह एवं उनके मोमिन साथियों के बच निकलने और उनके समुदाय के काफ़िरों के विनाश में निश्चय सीख ग्रहण करने वालों के लिए बड़ी सीख है। तथा उनमें से अधिकांश लोग ईमान लाने वाले नहीं थे।

وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ ٱلْعَزِيزُ ٱلرَّحِيمُ ﴿١٢٢﴾

और निःसंदेह (ऐ रसूल!) आपका पालनहार ही वह प्रभुत्वशाली है, जो अपने दुश्मनों से बदला लेता है, तथा उनमें से तौबा करने वालों पर बहुत दयालु है।

كَذَّبَتْ عَادٌ ٱلْمُرْسَلِينَ ﴿١٢٣﴾

आद जाति ने (भी) रसूलों को झुठलाया, जिस समय उन्होंने अपने रसूल हूद अलैहिस्सलाम को झुठला दिया। إذ قال لهم أخوهم هودألا تتقون

إِذْ قَالَ لَهُمْ أَخُوهُمْ هُودٌ أَلَا تَتَّقُونَ ﴿١٢٤﴾

(उस समय को) याद करो जब उनके वंश के भाई हूद ने उनसे कहा: क्या तुमअल्लाह से डरते नहीं कि उसके भय के कारण उसके अलावा की उपासना छोड़ दो?! بلغ क़ुरआन · तफ़सीर إنى لكم رسول أمين

إِنِّى لَكُمْ رَسُولٌ أَمِينٌۭ ﴿١٢٥﴾

निःसंदेह मैं तुम्हारा रसूल हूँ, अल्लाह ने मुझे तुम्हारी ओर भेजा है। (मैं) अमानतदार हूँ, जो कुछ अल्लाह ने मुझे पहुँचाने का आदेश दिया है, उसमें कोई कमी-बेशी नहीं करता।

فَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ وَأَطِيعُونِ ﴿١٢٦﴾

अतः तुम अल्लाह के आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर उससे डरो, तथा जिसका मैं तुम्हें आदेश देता हूँ और जिससे मैं तुम्हें मना करता हूँ, उसमें मेरा कहा मानो।

وَمَآ أَسْـَٔلُكُمْ عَلَيْهِ مِنْ أَجْرٍ ۖ إِنْ أَجْرِىَ إِلَّا عَلَىٰ رَبِّ ٱلْعَـٰلَمِينَ ﴿١٢٧﴾

और जो कु छ मैं अपने रब की ओर से तुम्हें संदेश पहुँचाता हूँ, मैं तुमसे उसका बदला नहीं माँगता। मेरा बदला तो के वल सारी सृष्टि के रब अल्लाह के ज़िम्मे है, किसी अन्य के नहीं। أتبنون بكل ريع ءاية تعبثون

أَتَبْنُونَ بِكُلِّ رِيعٍ ءَايَةًۭ تَعْبَثُونَ ﴿١٢٨﴾

क्या तुमप्रत्येक ऊँ चे स्थान पर व्यर्थ में स्मारक भवन का निर्माण करते हो, जबकि उसका इस दुनिया या आख़िरत में तुम्हें कोई फ़ायदा नहीं होता?! وتتخذون مصانع لعل كم تخلدون

وَتَتَّخِذُونَ مَصَانِعَ لَعَلَّكُمْ تَخْلُدُونَ ﴿١٢٩﴾

और तुम क़िले और महलें बनाते हो, मानो तुम इस दुनिया में हमेशा के लिए रहने वाले हो और यहाँ से तुम्हें जाना नहीं है। وإذا بطشتم بطشتمجبارين

وَإِذَا بَطَشْتُم بَطَشْتُمْ جَبَّارِينَ ﴿١٣٠﴾

और जब तुम क़त्ल करने अथवा मारने के लिए किसी पर हमला करते हो, तो निर्दय और बे-रहम होकर हमला करते हो।

فَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ وَأَطِيعُونِ ﴿١٣١﴾

अतः तुम अल्लाह के आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर उससे डरो, तथा जिसका मैं तुम्हें आदेश देता हूँ और जिससे मैं तुम्हें मना करता हूँ, उसमें मेरा कहा मानो।

وَٱتَّقُوا۟ ٱلَّذِىٓ أَمَدَّكُم بِمَا تَعْلَمُونَ ﴿١٣٢﴾

और तुमअल्लाह के प्रकोप से डरो, जिसने तुम्हें अपनी नेमतों में से वे चीज़ें प्रदान कीं, जिन्हें तुमजानते हो। أمد كم بأ نعم وبنين

أَمَدَّكُم بِأَنْعَـٰمٍۢ وَبَنِينَ ﴿١٣٣﴾

उसने तुम्हें मवेशी दिए, तथा तुम्हें बच्चे प्रदान किए। وجنت وعيون

وَجَنَّـٰتٍۢ وَعُيُونٍ ﴿١٣٤﴾

तथा उसने तुम्हें बाग़ और बहते जल स्रोत प्रदान किए। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

إِنِّىٓ أَخَافُ عَلَيْكُمْ عَذَابَ يَوْمٍ عَظِيمٍۢ ﴿١٣٥﴾

निश्चय मैं (ऐ मेरी जाति के लोगो!) तुमपर एक महान दिन की यातना से डरता हूँ, जो कि क़ियामत का दिन है।

قَالُوا۟ سَوَآءٌ عَلَيْنَآ أَوَعَظْتَ أَمْ لَمْ تَكُن مِّنَ ٱلْوَٰعِظِينَ ﴿١٣٦﴾

उनकी जाति के लोगों ने उनसे कहा: तुम्हारा हमें सदुपदेश देना और न देना दोनों बराबर है। क्योंकि हम तुमपर कदापि ईमान नहीं लाएँगे और जिसपर हम क़ायम हैं, उससे हरगिज़ पीछे नहीं हटेंगे।

إِنْ هَـٰذَآ إِلَّا خُلُقُ ٱلْأَوَّلِينَ ﴿١٣٧﴾

यह तो पहले ही लोगों का धर्म, उनके रीति-रिवाज और आचरण हैं। وما نحن بمعذبين

وَمَا نَحْنُ بِمُعَذَّبِينَ ﴿١٣٨﴾

और हम कदापि यातना दिए जाने वाले नहीं हैं।

فَكَذَّبُوهُ فَأَهْلَكْنَـٰهُمْ ۗ إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَـَٔايَةًۭ ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُم مُّؤْمِنِينَ ﴿١٣٩﴾

उन्होंने अपने नबी हूद अलैहिस्सलाम को झुठलाना जारी रखा, इसलिए हमने उनके झुठलाने के कारण उन्हें तेज़ आँधी से नष्ट कर दिया। इस विनाश में पाठ ग्रहण करने वालों के लिए निश्चय महान पाठ है। परंतु उनमें से अधिकांश लोग ईमान लाने वाले नहीं थे।

وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ ٱلْعَزِيزُ ٱلرَّحِيمُ ﴿١٤٠﴾

और निःसंदेह (ऐ रसूल!) आपका पालनहार ही वह प्रभुत्वशाली है, जो अपने दुश्मनों से बदला लेता है, तथा उनमें से तौबा करने वालों पर बहुत दयालु है।

كَذَّبَتْ ثَمُودُ ٱلْمُرْسَلِينَ ﴿١٤١﴾

समूद ने (भी) अपने नबी सालेह अलैहिस्सलाम को झुठलाकर समस्त रसूलों को झुठला दिया। إذ قال لهم أخوهم صلح ألا تتقون

إِذْ قَالَ لَهُمْ أَخُوهُمْ صَـٰلِحٌ أَلَا تَتَّقُونَ ﴿١٤٢﴾

जब उनके वंश के भाई सालेह ने उनसे कहा: क्या तुमअल्लाह से डरते नहीं कि उसके भय के कारण उसके अलावा की उपासना छोड़ दो?! إنى لكم رسول أمين

إِنِّى لَكُمْ رَسُولٌ أَمِينٌۭ ﴿١٤٣﴾

निःसंदेह मैं तुम्हारा रसूलहूँ, अल्लाह ने मुझे तुम्हारी ओर भेजा है। (मैं) अल्लाह का संदेश पहुँचाने के कार्य में अमानतदार हूँ, उसमें कोई कमी-बेशी नहीं करता।

فَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ وَأَطِيعُونِ ﴿١٤٤﴾

अतः तुम अल्लाह के आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर उससे डरो, तथा जो मैंने तुम्हें आदेश दिया है और जो तुम्हें करने से मना किया है, उसमें मेरा कहा मानो। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

وَمَآ أَسْـَٔلُكُمْ عَلَيْهِ مِنْ أَجْرٍ ۖ إِنْ أَجْرِىَ إِلَّا عَلَىٰ رَبِّ ٱلْعَـٰلَمِينَ ﴿١٤٥﴾

और जो कु छ मैं अपने रब की ओर से तुम्हें संदेश पहुँचाता हूँ, मैं तुमसे उसका बदला नहीं माँगता। मेरा बदला तो के वल सारी सृष्टि के रब अल्लाह के ज़िम्मे है, किसी अन्य के नहीं।

أَتُتْرَكُونَ فِى مَا هَـٰهُنَآ ءَامِنِينَ ﴿١٤٦﴾

क्या तुम यह इच्छा रखते हो कि यहाँ की सुख-सुविधाओं और नेमतों में निश्चिंत छोड़ दिए जाओगे, तुम डर से पीड़ित नहीं होगे?! فى جنت وعيون

فِى جَنَّـٰتٍۢ وَعُيُونٍۢ ﴿١٤٧﴾

बाग़ों तथा बहते जलस्राेतों में। وزروع ونخل طلعها هضيم

وَزُرُوعٍۢ وَنَخْلٍۢ طَلْعُهَا هَضِيمٌۭ ﴿١٤٨﴾

तथा खेतों और खजूर के बागों में, जिनके फल मुलायम और पके हुए हैं।

وَتَنْحِتُونَ مِنَ ٱلْجِبَالِ بُيُوتًۭا فَـٰرِهِينَ ﴿١٤٩﴾

और तुम पर्वतों को काटकर रहने के लिए घर बनाते हो और तुम उनको तराशने में कु शल हो।

فَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ وَأَطِيعُونِ ﴿١٥٠﴾

अतः तुम अल्लाह के आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर उससे डरो, तथा जो मैंने तुम्हें आदेश दिया है और जो तुम्हें करने से मना किया है, उसमें मेरा कहा मानो।

وَلَا تُطِيعُوٓا۟ أَمْرَ ٱلْمُسْرِفِينَ ﴿١٥١﴾

तथा उन लोगों के आदेश का पालन न करो, जो पाप करके अपने ऊपर अत्याचार करने वाले हैं।

ٱلَّذِينَ يُفْسِدُونَ فِى ٱلْأَرْضِ وَلَا يُصْلِحُونَ ﴿١٥٢﴾

जो पाप फै लाकर धरती में बिगाड़ पैदा करते हैं और अल्लाह का आज्ञापालन करके अपने आपको सुधारने का काम नहीं करते हैं।

قَالُوٓا۟ إِنَّمَآ أَنتَ مِنَ ٱلْمُسَحَّرِينَ ﴿١٥٣﴾

उसकी जाति के लोगों ने कहा: तू तो उन लोगों में से है, जिनपर बार-बार जादू किया गया है। यहाँ तक कि जादू उनके दिमाग पर हावी हो गया है और उसे निष्क्रिय कर दिया है।

مَآ أَنتَ إِلَّا بَشَرٌۭ مِّثْلُنَا فَأْتِ بِـَٔايَةٍ إِن كُنتَ مِنَ ٱلصَّـٰدِقِينَ ﴿١٥٤﴾

तू के वल हमारे ही जैसा एक मनुष्य है। इसलिए तुझे हमारे ऊपर कोई विशेषता हासिल नहीं है कि तू रसूल बन सके । अतः यदि तुम अपने रसूल होने के दावे में सच्चे हो, तो कोई ऐसी निशानी ले आओ, जो प्रमाणित करे कि तुम रसूल हो। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर قال هذه ناقةلها شرب ولكم شرب يوم معلوم

قَالَ هَـٰذِهِۦ نَاقَةٌۭ لَّهَا شِرْبٌۭ وَلَكُمْ شِرْبُ يَوْمٍۢ مَّعْلُومٍۢ ﴿١٥٥﴾

सालेह अलैहिस्सलाम ने (जिन्हें अल्लाह ने एक निशानी दी थी, जो एक ऊँ टनी थी जिसे अल्लाह ने चट्टान से निकाला था) उनसे कहा: यह ऊँ टनी है जिसे देखा और छु आ जा सकता है। इसके लिए पानी का एक हिस्सा है, और तुम्हारे लिए भी एक ज्ञात हिस्सा है। यह उस दिन पानी नहीं पिएगी, जिस दिन तुम्हारा हिस्सा है और जिस दिन उसका हिस्सा है, उस दिन तुम पानी नही पिओगे।

وَلَا تَمَسُّوهَا بِسُوٓءٍۢ فَيَأْخُذَكُمْ عَذَابُ يَوْمٍ عَظِيمٍۢ ﴿١٥٦﴾

तथा तुम इसे हानि पहुँचाने जैसे कि हत्या करने या मारने-पीटने की नीयत से हाथ न लगाना, अन्यथा इसके कारण तुम्हें अल्लाह की ओर से ऐसी यातना आ पकड़ेगी जो तुम्हें नष्ट कर देगी एक ऐसे दिन में, जो उसमें तुमपर उतरने वाली विपत्ति के कारण बहुत भयानक होगा। فعقروها فأصبحوا ندمين

فَعَقَرُوهَا فَأَصْبَحُوا۟ نَـٰدِمِينَ ﴿١٥٧﴾

सो वे उसकी हत्या करने पर सहमत हो गए और उनमें से सबसे अभागे व्यक्ति ने उसे मार डाला। फिर वे अपने किए पर पछताने लगे, जब उन्हें पता चला कि यातना अनिवार्य रूप से उनपर आने वाली है। लेकिन यातना देख लेने के समय पछताने से कोई लाभ नहीं होता।

فَأَخَذَهُمُ ٱلْعَذَابُ ۗ إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَـَٔايَةًۭ ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُم مُّؤْمِنِينَ ﴿١٥٨﴾

अंततः उन्हें उस यातना ने पकड़ लिया, जिसका उन्हें वादा किया गया था, जो भूकं प और तेज़ चीख थी। सालेह तथा उसकी जाति की इस कहानी में सीख ग्रहण करने वालों के लिए निश्चय बड़ी सीख है। तथा उनमें से अधिकतर ईमान लाने वाले नहीं थे।

وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ ٱلْعَزِيزُ ٱلرَّحِيمُ ﴿١٥٩﴾

और निःसंदेह (ऐ रसूल!) आपका पालनहार ही वह प्रभुत्वशाली है, जो अपने दुश्मनों से बदला लेता है, तथा उनमें से तौबा करने वालों पर बहुत दयालु है।

كَذَّبَتْ قَوْمُ لُوطٍ ٱلْمُرْسَلِينَ ﴿١٦٠﴾

लूत अलैहिस्सलाम की जाति ने (भी) अपने नबी लूत अलैहिस्सलाम को झुठलाकर समस्त रसूलों को झुठला दिया। إذ قال لهم أخوهم لوط ألا تتقون

إِذْ قَالَ لَهُمْ أَخُوهُمْ لُوطٌ أَلَا تَتَّقُونَ ﴿١٦١﴾

जब उनके वंश के भाई लूत ने उनसे कहा: क्या तुमअल्लाह से डरते नहीं कि उसके भय के कारण उसके साथ किसी को साझी ठहराना छोड़ दो?! إنى لكم رسول أمين

إِنِّى لَكُمْ رَسُولٌ أَمِينٌۭ ﴿١٦٢﴾

निःसंदेह मैं तुम्हारा रसूलहूँ, अल्लाह ने मुझे तुम्हारी ओर भेजा है। (मैं) अल्लाह का संदेश पहुँचाने के कार्य में अमानतदार हूँ, उसमें कोई कमी-बेशी नहीं करता।

فَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ وَأَطِيعُونِ ﴿١٦٣﴾

अतः तुम अल्लाह के आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर उससे डरो, तथा जिसका मैं तुम्हें आदेश देता हूँ और जिससे मैं तुम्हें मना करता हूँ, उसमें मेरा कहा मानो। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

وَمَآ أَسْـَٔلُكُمْ عَلَيْهِ مِنْ أَجْرٍ ۖ إِنْ أَجْرِىَ إِلَّا عَلَىٰ رَبِّ ٱلْعَـٰلَمِينَ ﴿١٦٤﴾

और जो कु छ मैं अपने रब की ओर से तुम्हें संदेश पहुँचाता हूँ, मैं तुमसे उसका बदला नहीं माँगता। मेरा बदला तो के वल सारी सृष्टि के रब अल्लाह के ज़िम्मे है, किसी अन्य के नहीं।

أَتَأْتُونَ ٱلذُّكْرَانَ مِنَ ٱلْعَـٰلَمِينَ ﴿١٦٥﴾

क्या तुमलोगों में से पुरुषों के साथ गुदा संभोग करते हाे?!

وَتَذَرُونَ مَا خَلَقَ لَكُمْ رَبُّكُم مِّنْ أَزْوَٰجِكُم ۚ بَلْ أَنتُمْ قَوْمٌ عَادُونَ ﴿١٦٦﴾

और तुमअपनी पत्नियों की अगली शर्मगाहों में संभोग करना छोड़ देते हो, जिन्हें अल्लाह ने इसलिए बनाया है ताकि तुमउनसे अपनी वासनाओं को पूरा करो?! बल्कि इस घृणित विकृ ति से तुमअल्लाह की सीमाओं का उल्लंघन करने वाले हो।

قَالُوا۟ لَئِن لَّمْ تَنتَهِ يَـٰلُوطُ لَتَكُونَنَّ مِنَ ٱلْمُخْرَجِينَ ﴿١٦٧﴾

उनकी जाति के लोगों ने उनसे कहा: ऐ लूत! यदि तुम हमें इस कार्य से मना करने और इसपर हमारी निंदा करने से बाज़ नहीं आए, तो तुम्हें तथा तुम्हारे संगियों को हमारे गाँव से निकाल दिया जाएगा।

قَالَ إِنِّى لِعَمَلِكُم مِّنَ ٱلْقَالِينَ ﴿١٦٨﴾

लूत अलैहिस्सलामने उनसे कहा: मैं तुम्हारे इसकार्य से जिसे तुमकरते हो, सख़्त नफ़रत और घृणा करने वालों में से हूँ। رب نجنى وأهلى مما يعملون

رَبِّ نَجِّنِى وَأَهْلِى مِمَّا يَعْمَلُونَ ﴿١٦٩﴾

उन्होंने अपने पालनहार से दुआ करते हुए कहा: ऐ मेरे पालनहार! तू मुझे और मेरे परिवार को उस यातना से बचा ले, जो इन लोगों पर इनके द्वारा किए जाने वाले घिनौने कार्य के कारण आने वाली है। فنج ينه وأهله أجمعين

فَنَجَّيْنَـٰهُ وَأَهْلَهُۥٓ أَجْمَعِينَ ﴿١٧٠﴾

तो हमने उनकी दुआ स्वीकार कर ली तथा उन्हें और उनके पूरे परिवार को बचा लिया।

إِلَّا عَجُوزًۭا فِى ٱلْغَـٰبِرِينَ ﴿١٧١﴾

उनकी पत्नी को छोड़कर। क्योंकि वह काफ़िर थी। अतः वह भी नष्ट होने वालों में से थी।

ثُمَّ دَمَّرْنَا ٱلْـَٔاخَرِينَ ﴿١٧٢﴾

फिर जब लूत और उनके परिवार ने (सदूम) गाँव छोड़ दिया, तो हमने उनके बाद उनके शेष रह जाने वाले लोगों को बुरी तरह से नष्ट कर दिया। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

وَأَمْطَرْنَا عَلَيْهِم مَّطَرًۭا ۖ فَسَآءَ مَطَرُ ٱلْمُنذَرِينَ ﴿١٧٣﴾

और हमने उनपर बारिश बरसाने की तरह आकाश से पत्थर बरसाए। तो उन लोगों की बारिश बहुत बुरी थी, जिन्हें लूत अलैहिस्सलाम डराते थे और उन्हें चेतावनी देते थे कि अगर वे अपने बुरे कामों में लगे रहे, तो उन्हें अल्लाह की सज़ा भुगतनी पड़ेगी।

إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَـَٔايَةًۭ ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُم مُّؤْمِنِينَ ﴿١٧٤﴾

कुकर्म के कारण लूत की जाति पर उतरने वाले उपर्युक्त अज़ाब में, सीख ग्रहण करने वालों के लिए निश्चय बड़ी सीख है। और उनमें से अधिकांश लोग ईमान लाने वाले नहीं थे।

وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ ٱلْعَزِيزُ ٱلرَّحِيمُ ﴿١٧٥﴾

और निःसंदेह (ऐ रसूल!) आपका पालनहार ही वह प्रभुत्वशाली है, जो अपने दुश्मनों से बदला लेता है, तथा उनमें से तौबा करने वालों पर बहुत दयालु है।

كَذَّبَ أَصْحَـٰبُ لْـَٔيْكَةِ ٱلْمُرْسَلِينَ ﴿١٧٦﴾

घने-पेड़ वाली बस्ती के लोगों ने रसूलों को झुठलाया, जब उन्होंने अपने रसूल शुऐब अलैहिस्सलाम को झुठला दिया। إذ قال لهم شعيب ألا تتقون

إِذْ قَالَ لَهُمْ شُعَيْبٌ أَلَا تَتَّقُونَ ﴿١٧٧﴾

जब उनके नबी शुऐब ने उनसे कहा: क्या तुम अल्लाह से डरते नहीं कि उसके भय से किसी को उसका साझी बनाना छोड़ दो?! إنى لكم رسول أمين

إِنِّى لَكُمْ رَسُولٌ أَمِينٌۭ ﴿١٧٨﴾

निःसंदेह मैं तुम्हारा रसूल हूँ, अल्लाह ने मुझे तुम्हारी ओर भेजा है। (मैं) अल्लाह का संदेश पहुँचाने के कार्य में अमानतदार हूँ। जो कु छ उसने मुझे पहुँचाने का आदेश दिया है, उसमें कोई कमी-बेशी नहीं करता।

فَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ وَأَطِيعُونِ ﴿١٧٩﴾

अतः तुम अल्लाह के आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर उससे डरो, तथा जो मैंने तुम्हें आदेश दिया है और जो तुम्हें करने से मना किया है, उसमें मेरा कहा मानो।

وَمَآ أَسْـَٔلُكُمْ عَلَيْهِ مِنْ أَجْرٍ ۖ إِنْ أَجْرِىَ إِلَّا عَلَىٰ رَبِّ ٱلْعَـٰلَمِينَ ﴿١٨٠﴾

और जो कु छ मैं अपने रब की ओर से तुम्हें संदेश पहुँचाता हूँ, मैं तुमसे उसका बदला नहीं माँगता। मेरा बदला तो के वल सारी सृष्टि के रब अल्लाह के ज़िम्मे है, किसी अन्य के नहीं।

۞ أَوْفُوا۟ ٱلْكَيْلَ وَلَا تَكُونُوا۟ مِنَ ٱلْمُخْسِرِينَ ﴿١٨١﴾

जब तुमलोगों से कु छ बेचो तो उन्हें पूरा-पूरा नाप कर दो तथा उन लोगों में से न हो जाओ, जो लोगों से कु छ बेचते हैं तो कमनाप कर देते हैं। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

وَزِنُوا۟ بِٱلْقِسْطَاسِ ٱلْمُسْتَقِيمِ ﴿١٨٢﴾

तथा जब तुम दूसरों को तौलकर दो तो सीधी तराज़ू से तौला करो।

وَلَا تَبْخَسُوا۟ ٱلنَّاسَ أَشْيَآءَهُمْ وَلَا تَعْثَوْا۟ فِى ٱلْأَرْضِ مُفْسِدِينَ ﴿١٨٣﴾

लोगों को उनके अधिकार कम न दो और पाप करके धरती में बिगाड़ न बढ़ाओ।

وَٱتَّقُوا۟ ٱلَّذِى خَلَقَكُمْ وَٱلْجِبِلَّةَ ٱلْأَوَّلِينَ ﴿١٨٤﴾

तथा उस अस्तित्व से भय खाते हुए तक़वा धारण करो, जिसने तुमको तथा पहले के समुदायों को पैदा किया है कि कहीं वह तुमपर अपनी यातना न भेज दे।

قَالُوٓا۟ إِنَّمَآ أَنتَ مِنَ ٱلْمُسَحَّرِينَ ﴿١٨٥﴾

शुऐब की जाति ने शुऐब अलैहिस्सलाम से कहा: तुम तो बस उन लोगों में से हो जिनपर बार-बार जादू किया गया है, यहाँ तक कि जादू तुम्हारे दिमाग पर हावी हो गया है तथा उसे गायब (निष्क्रिय) कर दिया है।

وَمَآ أَنتَ إِلَّا بَشَرٌۭ مِّثْلُنَا وَإِن نَّظُنُّكَ لَمِنَ ٱلْكَـٰذِبِينَ ﴿١٨٦﴾

तथा तू तो हमारे ही जैसा एक साधारण इनसान है। इसलिए तुझे हमपर कोइ श्रेष्ठता प्राप्त नहीं है। फिर तू रसूल कै से हो सकता है? और तू जो यह रसूल होने का दावा कर रहा है, इसमें हम तुझे झूठा समझते हैं।

فَأَسْقِطْ عَلَيْنَا كِسَفًۭا مِّنَ ٱلسَّمَآءِ إِن كُنتَ مِنَ ٱلصَّـٰدِقِينَ ﴿١٨٧﴾

यदि तू अपने दावे में सच्चा है, तो हमपर आसमान से कोई टुकड़ा गिरा दे।

قَالَ رَبِّىٓ أَعْلَمُ بِمَا تَعْمَلُونَ ﴿١٨٨﴾

शुऐब ने उनसे कहा: मेरा रब अधिक जानने वाला है, जो कु छ तुमशिर्क और पाप कर रहे हो, उससे तुम्हारे कर्मों में से कु छ भी छिपा नहीं है।

فَكَذَّبُوهُ فَأَخَذَهُمْ عَذَابُ يَوْمِ ٱلظُّلَّةِ ۚ إِنَّهُۥ كَانَ عَذَابَ يَوْمٍ عَظِيمٍ ﴿١٨٩﴾

चुनाँचे वे शुऐब अलैहिस्सलाम को झुठलाते रहे, तो उनपर एक बड़ी यातना आ पड़ी।एक भीषण गरमी वाले दिन के बाद, उनपर बादल छा गया, फिर उनपर आग बरसाकर उन्हें जला दिया। निश्चय उनके विनाश का दिन बड़े भय का दिन था।

إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَـَٔايَةًۭ ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُم مُّؤْمِنِينَ ﴿١٩٠﴾

निश्चय शुऐब अलैहिस्सलामकी जाति के उपर्युक्त विनाश में सीख ग्रहण करने वालों के लिए बड़ी सीख है। और उनमें से अधिकांश लोग ईमान वाले नहीं थे।

وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ ٱلْعَزِيزُ ٱلرَّحِيمُ ﴿١٩١﴾

और निःसंदेह (ऐ रसूल!) आपका पालनहार ही वह प्रभुत्वशाली है, जो अपने दुश्मनों से बदला लेता है, तथा उनमें से तौबा करने वालों पर बहुत दयालु है। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

وَإِنَّهُۥ لَتَنزِيلُ رَبِّ ٱلْعَـٰلَمِينَ ﴿١٩٢﴾

निःसंदेह मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लमपर उतरने वाला यह क़ु रआन सारी सृष्टि के पालनहार की ओर से उतारा गया है।

نَزَلَ بِهِ ٱلرُّوحُ ٱلْأَمِينُ ﴿١٩٣﴾

इसे लेकर जिबरील अमीन अलैहिस्सलाम उतरे हैं।

عَلَىٰ قَلْبِكَ لِتَكُونَ مِنَ ٱلْمُنذِرِينَ ﴿١٩٤﴾

वह इसे लेकर (ऐ रसूल!) आपके दिलपर उतरे हैं, ताकि आप उन रसूलों में से हो जाएँ, जो लोगों को चेतावनी देते हैं और उन्हें अल्लाह की यातना से डराते हैं। بلسان عربى م بين

بِلِسَانٍ عَرَبِىٍّۢ مُّبِينٍۢ ﴿١٩٥﴾

वह इसे शुद्ध एवं स्पष्ट अरबी भाषा में लेकर उतरे हैं।

وَإِنَّهُۥ لَفِى زُبُرِ ٱلْأَوَّلِينَ ﴿١٩٦﴾

और इस क़ु रआन का वर्णन पिछले लोगों की किताबों में भी आया है। चुनाँचे इसकी ख़ुशख़बरी पिछली आसमानी किताबों में भी दी गई है।

أَوَلَمْ يَكُن لَّهُمْ ءَايَةً أَن يَعْلَمَهُۥ عُلَمَـٰٓؤُا۟ بَنِىٓ إِسْرَٰٓءِيلَ ﴿١٩٧﴾

क्या आपको झुठलाने वाले इन लोगों के लिए यह तथ्य आपकी सच्चाई की निशानी नहीं है कि आपपर उतरने वाली किताब की सच्चाई को बनी इसराईल के विद्वान जैसे अब्दुल्लाह बिन सलाम(भी) जानते हैं?

وَلَوْ نَزَّلْنَـٰهُ عَلَىٰ بَعْضِ ٱلْأَعْجَمِينَ ﴿١٩٨﴾

और यदि हम यह क़ु रआन किसी अजमी (ग़ैर अरब) पर उतार देते, जो अरबी भाषा नहीं बोलता। فقرأه عليهم ما كانوابه مؤمنين

فَقَرَأَهُۥ عَلَيْهِم مَّا كَانُوا۟ بِهِۦ مُؤْمِنِينَ ﴿١٩٩﴾

फिर वह इसे उनके सामने पढ़ता, तो भी ये लोग उसपर ईमान लाने वाले न होते; क्योंकि वे कहते: हम इसे नहीं समझते हैं। इसलिए उन्हें अल्लाह का शुक्र अदा करना चाहिए की यह (क़ु रआन) उनकी भाषा (अरबी) में उतरा है।

كَذَٰلِكَ سَلَكْنَـٰهُ فِى قُلُوبِ ٱلْمُجْرِمِينَ ﴿٢٠٠﴾

इसी प्रकार हमने झुठलाने तथा इनकार की प्रवृति को अपराधियों के दिलों में डाल दिया है।

لَا يُؤْمِنُونَ بِهِۦ حَتَّىٰ يَرَوُا۟ ٱلْعَذَابَ ٱلْأَلِيمَ ﴿٢٠١﴾

वे अपने कु फ़्र से टस से मस नहीं होंगे और ईमान नहीं लाएँगे, यहाँ तक कि वे दर्दनाक यातना देख लें। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर فيأتيهم بغتة وهم لا يشعرون

فَيَأْتِيَهُم بَغْتَةًۭ وَهُمْ لَا يَشْعُرُونَ ﴿٢٠٢﴾

सो यह यातना उनपर अचानक आ पड़े, और वे इसके आने से वाक़िफ़ न हों यहाँ तक कि यह अचानक उन्हें धर ले। فيقولواهل نحن منظرون

فَيَقُولُوا۟ هَلْ نَحْنُ مُنظَرُونَ ﴿٢٠٣﴾

फिर वे, जब उनपर अचानक यातना आ जाए, अफ़सोस करते हुए कहें: क्या हममोहलत दिए जाने वाले हैं ताकि हमअल्लाह के समक्ष तौबा करें?! أ فبعذابنا يستعجلون

أَفَبِعَذَابِنَا يَسْتَعْجِلُونَ ﴿٢٠٤﴾

तो क्या ये काफिर लोग हमारी यातना के लिए जल्दी मचा रहे हैं, यह कहते हुए कि: हम तुझपर कदापि ईमान नहीं लाएँगे, जब तक तू अपने दावे के अनुसार हमपर आसमान का कोई टुकड़ा न गिरा दे। أفرءيت إن م تعنهم سنين

أَفَرَءَيْتَ إِن مَّتَّعْنَـٰهُمْ سِنِينَ ﴿٢٠٥﴾

तो (ऐ रसूल!) आप मुझे बताएँ कि यदि हम इन काफिरों को, जो उसपर ईमान लाने से मुँह फे रने वाले हैं जो आप लेकर आए हैं, एक लंबी अवधि के लिए नेमतों से लाभ उठाने का अवसर प्रदान कर दें।

ثُمَّ جَآءَهُم مَّا كَانُوا۟ يُوعَدُونَ ﴿٢٠٦﴾

फिर उस अवधि के बाद जिसमें उन्होंने उन नेमतों का लाभ उठाया, वह यातना आ जाए, जिसकी उन्हें धमकी दी जा रही थी।

مَآ أَغْنَىٰ عَنْهُم مَّا كَانُوا۟ يُمَتَّعُونَ ﴿٢٠٧﴾

तो इस दुनिया में उनके पास जो नेमतें थी, उनके क्या कामआएँगी?! क्योंकि वे सारी नेमतें समाप्त हो गईं और कु छ लाभ न दे सकीं।

وَمَآ أَهْلَكْنَا مِن قَرْيَةٍ إِلَّا لَهَا مُنذِرُونَ ﴿٢٠٨﴾

हमने (पिछले समुदायों में से) किसी भी समुदाय को विनष्ट नहीं किया, परंतु इसके बाद कि रसूलों को भेजकर और किताबें उतारकर उनके लिए बहाना का रास्ता बंद कर दिया। ذكر وما كنا ظلمين

ذِكْرَىٰ وَمَا كُنَّا ظَـٰلِمِينَ ﴿٢٠٩﴾

उन्हें नसीहत करने और याद दिलाने के लिए। तथा रसूलों को भेजकर और किताबें उतारकर उनके लिए बहाना का रास्ता बंद करने के बाद, हम उन्हें यातना देकर अन्याय नहीं कर रहे थे।

وَمَا تَنَزَّلَتْ بِهِ ٱلشَّيَـٰطِينُ ﴿٢١٠﴾

इस क़ु रआन को रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के दिल पर, शैतान लेकर नहीं उतरे। وما ينبغى لهم وما يستطيعون

وَمَا يَنۢبَغِى لَهُمْ وَمَا يَسْتَطِيعُونَ ﴿٢١١﴾

और इसे लेकर आपके दिल पर उतरना उनके योग्य नहीं है, और न वे ऐसा कर सकते हैं। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

إِنَّهُمْ عَنِ ٱلسَّمْعِ لَمَعْزُولُونَ ﴿٢١٢﴾

वे ऐसा नहीं कर सकते, क्योंकि वे आकाश में उसके स्थान से अलग कर दिए गए हैं, तो वे उसतक कै से पहुँच सकते हैं और उसे लेकर कै से उतर सकते हैं?!

فَلَا تَدْعُ مَعَ ٱللَّهِ إِلَـٰهًا ءَاخَرَ فَتَكُونَ مِنَ ٱلْمُعَذَّبِينَ ﴿٢١٣﴾

अतः आप अल्लाह के साथ किसी अन्य पूज्य की इबादत न करें जिसे आप उसके साथ साझी बना लें। नहीं तो उसके कारण, आप भी यातना दिए जाने वालों में से हो जाएँ गे।

وَأَنذِرْ عَشِيرَتَكَ ٱلْأَقْرَبِينَ ﴿٢١٤﴾

और (ऐ रसूल!) आप अपने समुदाय में से निकटतम फिर निकटतर लोगों को सावधान करें, ताकि अगर वे शिर्क पर क़ायम रहें तो अल्लाह की यातना से पीड़ित न हों।

وَٱخْفِضْ جَنَاحَكَ لِمَنِ ٱتَّبَعَكَ مِنَ ٱلْمُؤْمِنِينَ ﴿٢١٥﴾

तथा ईमान वालों में से जो आपका अनुसरण करें, उनपर दया एवं नरमी करते हुए उनके साथ विनम्रता का व्यवहार करें।

فَإِنْ عَصَوْكَ فَقُلْ إِنِّى بَرِىٓءٌۭ مِّمَّا تَعْمَلُونَ ﴿٢١٦﴾

फिर यदि वे आपकी अवज्ञा करें और उसको न मानें जो आपने उन्हें अल्लाह को एकमात्र पूज्य मानने और उसकी आज्ञा का पालन करने का आदेश दिया है, तो आप उनसे कह दें: तुमजो शिर्क और पाप करते हो, मैं उससे बिलकु लअलग-थलग हूँ।

وَتَوَكَّلْ عَلَى ٱلْعَزِيزِ ٱلرَّحِيمِ ﴿٢١٧﴾

तथा आप अपने सभी मामलों में उस प्रभुत्वशाली पर भरोसा करें, जो अपने दुश्मनों से बदला लेता है, तथा वह उनमें से तौबा करने वाले पर बहुत दया करने वाला है।

ٱلَّذِى يَرَىٰكَ حِينَ تَقُومُ ﴿٢١٨﴾

जो पवित्र अल्लाह आपको उस समय देखता है, जब आप नमाज़ के लिए खड़े होते हैं।

وَتَقَلُّبَكَ فِى ٱلسَّـٰجِدِينَ ﴿٢١٩﴾

तथा वह पवित्र अल्लाह नमाज़ियों में आपके एक हालसे दूसरे हालमें जाने को भी देखता है। उससे आपका तथा आपके सिवा अन्य लोगों का कोई कामछिपा नहीं है।

إِنَّهُۥ هُوَ ٱلسَّمِيعُ ٱلْعَلِيمُ ﴿٢٢٠﴾

आप अपनी नमाज़ में जो क़ु रआन और दुआएँ पढ़ते हैं, वह उसे सुनने वाला और आपकी नीयत को भली-भाँति जानने वाला है।

هَلْ أُنَبِّئُكُمْ عَلَىٰ مَن تَنَزَّلُ ٱلشَّيَـٰطِينُ ﴿٢٢١﴾

क्या मैं तुम्हें बताऊँ कि शैतान, जिनके बारे में तुम्हारा दावा है कि इसक़ु रआन को लेकर उतरे हैं, किसपर उतरते हैं? بلغ क़ुरआन · तफ़सीर تنزل عل كل أفاك أثيم

تَنَزَّلُ عَلَىٰ كُلِّ أَفَّاكٍ أَثِيمٍۢ ﴿٢٢٢﴾

शैतान हर झूठ बोलने वाले, बहुत पाप और अवज्ञा करने वाले काहिन पर उतरते हैं।

يُلْقُونَ ٱلسَّمْعَ وَأَكْثَرُهُمْ كَـٰذِبُونَ ﴿٢٢٣﴾

शैतान चोरी से फ़रिश्तों की बातें सुन लेते हैं, फिर अपने काहिन मित्रों तक उन्हें पहुँचा देते हैं। और अधिकांश काहिन झूठे होते हैं। यदि उनकी कोई एक बात सत्य होती है, तो उसके साथ सौ झूठ मिला देते हैं।

وَٱلشُّعَرَآءُ يَتَّبِعُهُمُ ٱلْغَاوُۥنَ ﴿٢٢٤﴾

और कवि लोग जिनके बारे में तुम्हारा दावा है कि मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम उन्हीं में से हैं, उनका अनुसरण तो केवल वे लोग करते हैं जो मार्गदर्शन और धार्मिकता के मार्ग से भटके हुए हैं, जो उनके कहे हुए काव्य का वर्णन करते हैं। ألم ترأن هم فى كل واد يهيمون

أَلَمْ تَرَ أَنَّهُمْ فِى كُلِّ وَادٍۢ يَهِيمُونَ ﴿٢٢٥﴾

और क्या (ऐ रसूल!) आपने नहीं देखा कि उनकी गुमराही की निशानियों में से एक यह है कि वे हर वादी में भटकते फिरते हैं। कभी प्रशंसा की वादी में सिर मारते हैं, तो कभी निंदा की वादी में, और कभी इन दोनों के अलावा किसी और वादी में। وأنهم يقولون ما لا يفعلون

وَأَنَّهُمْ يَقُولُونَ مَا لَا يَفْعَلُونَ ﴿٢٢٦﴾

और यह कि वे झूठ बोलते हैं। चुनाँचे वे कहते हैं: हमने यह किया है, जबकि उन्होंने उसे नहीं किया होता है।

إِلَّا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ وَذَكَرُوا۟ ٱللَّهَ كَثِيرًۭا وَٱنتَصَرُوا۟ مِنۢ بَعْدِ مَا ظُلِمُوا۟ ۗ وَسَيَعْلَمُ ٱلَّذِينَ ظَلَمُوٓا۟ أَىَّ مُنقَلَبٍۢ يَنقَلِبُونَ ﴿٢٢٧﴾

منقلب ينقلبون सिवाय उन कवियों के , जो ईमान लाए और नेक कर्म किए, और अल्लाह को बहुत याद किया, तथा अपने शत्रुओं से उनके अत्याचार से पीड़ित होने के बाद बदला लिया, जैसे हस्सान बिन साबित रज़ियल्लाहु अन्हु l और शीघ्र ही वे लोग जान लेंगे, जिन्होंने अल्लाह के साथ शिर्क करके तथा उसके बंदों पर ज़्यादती करके अत्याचार किया, कि वे लौटने की कौन-सी जगह लौटकर जाएँगे। वे एक विकट स्थिति और सटीक हिसाब-किताब की ओर पलटकर जाएँगे। स्रोत:अल-मुख़्तसर फ़ी तफ़सीरिल क़ु रआनिल करीम

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