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तफ़सीर An-Naml (27) — النمل

मक्की · 93 आयतें

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طسٓ ۚ تِلْكَ ءَايَـٰتُ ٱلْقُرْءَانِ وَكِتَابٍۢ مُّبِينٍ ﴿١﴾

(ता, सीन) सूरतुल-बक़रा की शुरुआत में इस प्रकार के अक्षरों के बारे में बात गुज़र चुकी है। आपपर उतरने वाली ये आयतें क़ु रआन तथा एक स्पष्ट और असंदिग्ध पुस्तक की आयतें हैं। जो कोई भी इस (पुस्तक) पर विचार करता है, वह जान लेता है कि यह अल्लाह की ओर से है। هدى وبشر للمؤمنين

هُدًۭى وَبُشْرَىٰ لِلْمُؤْمِنِينَ ﴿٢﴾

ये आयतें सत्य की ओर मार्गदर्शन करने वाली, उसकी ओर ले जाने वाली तथा अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान रखने वालों को ख़ुशख़बरी सुनाने वाली हैं।

ٱلَّذِينَ يُقِيمُونَ ٱلصَّلَوٰةَ وَيُؤْتُونَ ٱلزَّكَوٰةَ وَهُم بِٱلْـَٔاخِرَةِ هُمْ يُوقِنُونَ ﴿٣﴾

जो पूर्णतम तरीक़े से नमाज़ अदा करते हैं, अपने माल की ज़कात निकाल कर उसके हक़दारों को देते हैं, तथा वे आख़िरत के सवाब और सज़ा पर विश्वास रखते हैं।

إِنَّ ٱلَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِٱلْـَٔاخِرَةِ زَيَّنَّا لَهُمْ أَعْمَـٰلَهُمْ فَهُمْ يَعْمَهُونَ ﴿٤﴾

निःसंदेह जो काफ़िर आख़िरत तथा उसके सवाब और सज़ा पर ईमान नहीं रखते, हमने उनके बुरे कामों को उनके लिए सुंदर बना दिया है। चुनाँचे वे उन्हें करते रहते हैं। इसलिए वे भटकते फिर रहे हैं, उन्हें सत्य या मार्गदर्शन नहीं मिल रहा है।

أُو۟لَـٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ لَهُمْ سُوٓءُ ٱلْعَذَابِ وَهُمْ فِى ٱلْـَٔاخِرَةِ هُمُ ٱلْأَخْسَرُونَ ﴿٥﴾

उक्त विशेषताओं वाले ही वे लोग हैं, जिनके लिए इस दुनिया में क़त्ल एवं क़ैद की बुरी यातना है, तथा वे आख़िरत में सबसे ज़्यादा घाटा उठाने वाले होंगे। क्योंकि वे क़ियामत के दिन खुद को और अपने परिवार को, उन्हें हमेशा के लिए जहन्नम का वासी बनाकर, घाटे में डाल देंगे।

وَإِنَّكَ لَتُلَقَّى ٱلْقُرْءَانَ مِن لَّدُنْ حَكِيمٍ عَلِيمٍ ﴿٦﴾

और निःसंदेह (ऐ रसूल!) आप अपने ऊपर उतरने वाले इस क़ुरआन को एक ऐसी हस्ती की ओर से प्राप्त कर रहे हैं, जो अपनी रचना, प्रबंधन और विधान में पूर्ण हिकमत वाली है, सब कु छ जानने वाली है, उसके बंदों के हितों में से कोई भी वस्तु उससे छिपी नहीं है।

إِذْ قَالَ مُوسَىٰ لِأَهْلِهِۦٓ إِنِّىٓ ءَانَسْتُ نَارًۭا سَـَٔاتِيكُم مِّنْهَا بِخَبَرٍ أَوْ ءَاتِيكُم بِشِهَابٍۢ قَبَسٍۢ لَّعَلَّكُمْ تَصْطَلُونَ ﴿٧﴾

याद करो (ऐ रसूल!) जिस समय मूसा ने अपने घर वालों से कहा: निःसंदेह मैंने एक आग देखी है। मैं तुम्हारे पास उसे जलाने वाले से कोई ख़बर लाऊँ गा, जिससे हमें रास्ते का पता चलेगा, अथवा तुम्हारे पास उससे आग का कोई अंगारा लेकर आऊँ गा, ताकि तुम उसके द्वारा अपने आपको ठंड से गर्म कर सको।

فَلَمَّا جَآءَهَا نُودِىَ أَنۢ بُورِكَ مَن فِى ٱلنَّارِ وَمَنْ حَوْلَهَا وَسُبْحَـٰنَ ٱللَّهِ رَبِّ ٱلْعَـٰلَمِينَ ﴿٨﴾

जब वह उस आग के स्थान पर पहुँचे, जो उन्होंने देखी थी, तो अल्लाह ने उन्हें पुकारा: बरकत वाला है वह जो इस आग में है, तथा जो इसके आस-पास फ़रिश्ते हैं। तथा सारे संसारों का पालनहार पवित्र और पाक है उन विशेषताओं से जो उसके योग्य नहीं हैं, जिनसे पथभ्रष्ट लोग उसे विशेषित करते हैं। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

يَـٰمُوسَىٰٓ إِنَّهُۥٓ أَنَا ٱللَّهُ ٱلْعَزِيزُ ٱلْحَكِيمُ ﴿٩﴾

अल्लाह ने उनसे कहा: ऐ मूसा! निःसंदेह मैं ही अल्लाह हूँ। सब पर प्रभुत्वशाली हूँ, मुझे कोई पराजित नहीं कर सकता। अपनी रचना, नियति और विधान में पूर्ण हिकमत वाला हूँ। ن

وَأَلْقِ عَصَاكَ ۚ فَلَمَّا رَءَاهَا تَهْتَزُّ كَأَنَّهَا جَآنٌّۭ وَلَّىٰ مُدْبِرًۭا وَلَمْ يُعَقِّبْ ۚ يَـٰمُوسَىٰ لَا تَخَفْ إِنِّى لَا يَخَافُ لَدَىَّ ٱلْمُرْسَلُونَ ﴿١٠﴾

और अपनी लाठी डाल दो। मूसा ने आदेश का पालन किया, लेकिन जब उसे साँप की तरह हिलते और रेंगते हुए देखा, तो उससे पीठ फे रकर भागे और पीछे मुड़कर नहीं देखा। तो अल्लाह ने उनसे कहा: इससे भय न खाओ l क्योंकि मेरे पास रसूल साँप या किसी और से नहीं डरते।

إِلَّا مَن ظَلَمَ ثُمَّ بَدَّلَ حُسْنًۢا بَعْدَ سُوٓءٍۢ فَإِنِّى غَفُورٌۭ رَّحِيمٌۭ ﴿١١﴾

सिवाय उसके जिसने कोई पाप करके अपने ऊपर अत्याचार किया। फिर उसके बाद तौबा कर ली, तो निःसंदेह मैं उसे बहुत क्षमा करने वाला, उसपर बेहद दयालु हूँ।

وَأَدْخِلْ يَدَكَ فِى جَيْبِكَ تَخْرُجْ بَيْضَآءَ مِنْ غَيْرِ سُوٓءٍۢ ۖ فِى تِسْعِ ءَايَـٰتٍ إِلَىٰ فِرْعَوْنَ وَقَوْمِهِۦٓ ۚ إِنَّهُمْ كَانُوا۟ قَوْمًۭا فَـٰسِقِينَ ﴿١٢﴾

فسقين और अपना हाथ अपनी कमीज़ के गरीबान में डालो, उसमें डालने के बाद वह कोढ़ (बरस) के बिना बर्फ़ की तरह सफ़े द निकलेगा। यह उन नौ निशानियों में से एक है, जो आपकी सच्चाई की गवाही देती हैं। (ये नौ निशानियाँ: हाथ का चमकना, लाठी, अकाल, फलों की कमी, तूफान (बाढ़), टिड्डी, खटमल, मेंढक और खून हैं।) इन्हें फ़िरऔन तथा उसकी क़ौमके पास ले जाओ। वे अल्लाह का इनकार करने के कारण उसकी आज्ञाकारिता से निकलने वाले लोग हैं।

فَلَمَّا جَآءَتْهُمْ ءَايَـٰتُنَا مُبْصِرَةًۭ قَالُوا۟ هَـٰذَا سِحْرٌۭ مُّبِينٌۭ ﴿١٣﴾

फिर जब उनके पास हमारी ये निशानियाँ, जिनके साथ हमने मूसा का समर्थन किया था, स्पष्ट और साफ तौर पर आ गईं, तो उन्होंने कहा: ये निशानियाँ जिन्हें मूसा लेकर आया है, स्पष्ट जादू हैं। و

وَجَحَدُوا۟ بِهَا وَٱسْتَيْقَنَتْهَآ أَنفُسُهُمْ ظُلْمًۭا وَعُلُوًّۭا ۚ فَٱنظُرْ كَيْفَ كَانَ عَـٰقِبَةُ ٱلْمُفْسِدِينَ ﴿١٤﴾

उन्होंने इन स्पष्ट निशानियों का इनकार कर दिया और उन्हें मानने पर नहीं आए। हालाँकि उनके दिलों को इस बात का अच्छी तरह विश्वास था कि ये अल्लाह की ओर से हैं; ऐसा उन्होंने अत्याचार और सत्य से अहंकार के कारण किया। अतः (ऐ रसूल!) विचार करें कि अपने कु फ़्र और अवज्ञा के द्वारा घरती पर बिगाड़ पैदा करने वालों का परिणाम कै सा रहा! निश्चय हमने उन्हें नष्ट कर दिया और उन सबका विनाश कर दिया।

وَلَقَدْ ءَاتَيْنَا دَاوُۥدَ وَسُلَيْمَـٰنَ عِلْمًۭا ۖ وَقَالَا ٱلْحَمْدُ لِلَّهِ ٱلَّذِى فَضَّلَنَا عَلَىٰ كَثِيرٍۢ مِّنْ عِبَادِهِ ٱلْمُؤْمِنِينَ ﴿١٥﴾

निःसंदेह हमने दाऊद तथा उनके पुत्र सुलैमान को ज्ञान प्रदान किया। उसी में पक्षियों की बातों का ज्ञान भी शामिल है। दाऊद और सुलैमान ने प्रभुत्वशाली और महान अल्लाह का शुक्र अदा करते हुए कहा: हर प्रकार की प्रशंसा अल्लाह के लिए है, जिसने हमें ज्ञान और नुबुव्वत (पैग़ंबरी) से सम्मानित करके अपने बहुत-से ईमान वाले बंदों पर श्रेष्ठता प्रदान की। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

وَوَرِثَ سُلَيْمَـٰنُ دَاوُۥدَ ۖ وَقَالَ يَـٰٓأَيُّهَا ٱلنَّاسُ عُلِّمْنَا مَنطِقَ ٱلطَّيْرِ وَأُوتِينَا مِن كُلِّ شَىْءٍ ۖ إِنَّ هَـٰذَا لَهُوَ ٱلْفَضْلُ ٱلْمُبِينُ ﴿١٦﴾

और सुलैमान नुबुव्वत (पैग़ंबरी), ज्ञान तथा राजत्व में अपने पिता दाऊद के उत्तराधिकारी बने और खुद अपने तथा अपने पिता पर अल्लाह के अनुग्रह का वर्णन करते हुए कहा: ऐ लोगो! अल्लाह ने हमें पक्षियों की आवाज़ों को समझना सिखाया और हमें हर उस चीज़ में से प्रदान किया, जो उसने नबियों और बादशाहों को प्रदान किया। निःसंदेह यह जो अल्लाह ने हमें प्रदान किया, निश्चय यही स्पष्ट अनुकं पा है।

وَحُشِرَ لِسُلَيْمَـٰنَ جُنُودُهُۥ مِنَ ٱلْجِنِّ وَٱلْإِنسِ وَٱلطَّيْرِ فَهُمْ يُوزَعُونَ ﴿١٧﴾

और सुलैमान के लिए मनुष्यों, जिन्नों और पक्षियों में से उनके सैनिक इकट्ठे किए गए, फिर वे एक व्यवस्थित तरीके से चलाए जाते थे।

حَتَّىٰٓ إِذَآ أَتَوْا۟ عَلَىٰ وَادِ ٱلنَّمْلِ قَالَتْ نَمْلَةٌۭ يَـٰٓأَيُّهَا ٱلنَّمْلُ ٱدْخُلُوا۟ مَسَـٰكِنَكُمْ لَا يَحْطِمَنَّكُمْ سُلَيْمَـٰنُ وَجُنُودُهُۥ وَهُمْ لَا يَشْعُرُونَ ﴿١٨﴾

يشعرون वे चलाए जाते रहे यहाँ तक कि जब वे चींटियों की एक घाटी (शाम - लेवंत - में एक जगह) में पहुँचे, तो एक चींटी ने कहा: ऐ चींटियो! अपने घरों में प्रवेश कर जाओ। ताकि सुलैमान और उसके सैनिक तुम्हें नष्ट न कर दें, जबकि उन्हें तुम्हारे बारे में पता भी न हो। क्योंकि अगर वे तुम्हारे बारे में जानते, तो वे तुम्हें नहीं रौंदते।

فَتَبَسَّمَ ضَاحِكًۭا مِّن قَوْلِهَا وَقَالَ رَبِّ أَوْزِعْنِىٓ أَنْ أَشْكُرَ نِعْمَتَكَ ٱلَّتِىٓ أَنْعَمْتَ عَلَىَّ وَعَلَىٰ وَٰلِدَىَّ وَأَنْ أَعْمَلَ صَـٰلِحًۭا تَرْضَىٰهُ وَأَدْخِلْنِى بِرَحْمَتِكَ فِى عِبَادِكَ ٱلصَّـٰلِحِينَ ﴿١٩﴾

जब सुलैमान अलैहिस्सलामने चींटी की बात सुनी, तो उसकी इस बात से हँसते हुए मुसकु राए और अपने पवित्र रब से प्रार्थना करते हुए कहने लगे: ऐ मेरे पालनहार! मुझे सामर्थ्य प्रदान कर और मुझे अपनी उस ने'मत के लिए आभारी होने की प्रेरणा दे, जो तूने मुझे और मेरे माता-पिता को प्रदान की है। तथा मुझे सामर्थ्य दे कि मैं नेक कार्य करूँ , जिससे तू पसंद करे। और मुझे अपनी दया से अपने सदाचारी बंदों के समूह में शामिलकर ले।

وَتَفَقَّدَ ٱلطَّيْرَ فَقَالَ مَا لِىَ لَآ أَرَى ٱلْهُدْهُدَ أَمْ كَانَ مِنَ ٱلْغَآئِبِينَ ﴿٢٠﴾

और सुलैमान ने पक्षियों का निरीक्षण किया, पर हुदहुद को नहीं देखा। तो इसपर कहा: क्या बात है कि मैं हुदहुद को नहीं देख रहा हूँ? क्या किसी बाधा के कारण मैं उसे नहीं देख पा रहा हूँ अथवा वह अनुपस्थित है? لأعذبنه عذابا شديدا أو لأاذبحنه أو ليأتينى بسلطن مبين

لَأُعَذِّبَنَّهُۥ عَذَابًۭا شَدِيدًا أَوْ لَأَا۟ذْبَحَنَّهُۥٓ أَوْ لَيَأْتِيَنِّى بِسُلْطَـٰنٍۢ مُّبِينٍۢ ﴿٢١﴾

जब उनके लिए उसकी अनुपस्थिति स्पष्ट हो गई, तो उन्होंने कहा: मैं उसे अनुपस्थित रहने की कड़ी सज़ा दूँगा अथवा उसे ज़बह कर डालूँगा, या फिर वह मेरे पास एक स्पष्ट तर्क लेकर आए, जो उसके अनुपस्थित होने के कारण को बयान करे। فمكث غيربعيد فقال أحطت بما لم تحط به وجئتك من سبإبنبإ يقين

فَمَكَثَ غَيْرَ بَعِيدٍۢ فَقَالَ أَحَطتُ بِمَا لَمْ تُحِطْ بِهِۦ وَجِئْتُكَ مِن سَبَإٍۭ بِنَبَإٍۢ يَقِينٍ ﴿٢٢﴾

हुदहुद लंबे समय तक अनुपस्थित नही रहा, फिर जब वह आया, तो सुलैमान अलैहिस्सलाम से कहा: मैं ऐसी बात से अवगत हुआ हूँ जिससे आप अवगत नहीं हैं। तथा मैं "सबा" वालों के विषय में एक सच्ची ख़बर लेकर आया हूँ, जिसमें कोई संदेह नहीं।

إِنِّى وَجَدتُّ ٱمْرَأَةًۭ تَمْلِكُهُمْ وَأُوتِيَتْ مِن كُلِّ شَىْءٍۢ وَلَهَا عَرْشٌ عَظِيمٌۭ ﴿٢٣﴾

मैंने एक स्त्री को उनपर शासन करते पाया है और उस स्त्री को शक्ति एवं शासन के सारे साधन प्राप्त हैं और उसके पास एक बड़ा सिंहासन भी है, जिसपर बैठकर वह अपने लोगों के मामलों का प्रबंधन करती है। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

وَجَدتُّهَا وَقَوْمَهَا يَسْجُدُونَ لِلشَّمْسِ مِن دُونِ ٱللَّهِ وَزَيَّنَ لَهُمُ ٱلشَّيْطَـٰنُ أَعْمَـٰلَهُمْ فَصَدَّهُمْ عَنِ ٱلسَّبِيلِ فَهُمْ لَا يَهْتَدُونَ ﴿٢٤﴾

يهتدون मैंने उस स्त्री तथा उसकी जाति को पाया है कि वे पवित्र एवं सर्वशक्तिमान अल्लाह को छोड़कर सूरज को सजदा करते हैं। तथा शैतान ने उनके शिर्क एवं पाप के कार्यों को उनके लिए शोभनीय बना दिया है और उन्हें सत्य के मार्ग से हटा दिया है। अतः वे उसकी ओर मार्गदर्शन नहीं पाते।

أَلَّا يَسْجُدُوا۟ لِلَّهِ ٱلَّذِى يُخْرِجُ ٱلْخَبْءَ فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ وَيَعْلَمُ مَا تُخْفُونَ وَمَا تُعْلِنُونَ ﴿٢٥﴾

शैतान ने उनके शिर्क एवं पाप के कार्यों को उनके लिए सुंदर बना दिया है; ताकि वे अके ले अल्लाह को सजदा न करें, जो आकाश में छिपी वर्षा तथा धरती में छिपे पौधों को निकालता है, तथा वह उन कार्यों को जानता है, जो तुम छिपाते हो और जो तुम ज़ाहिर तरते हो। उनमें से कु छ भी उससे छिपा नहीं है।

ٱللَّهُ لَآ إِلَـٰهَ إِلَّا هُوَ رَبُّ ٱلْعَرْشِ ٱلْعَظِيمِ ۩ ﴿٢٦﴾

अल्लाह वह है जिसके अतिरिक्त कोई सत्य पूज्य नहीं, जो महान सिंहासन का रब है।

۞ قَالَ سَنَنظُرُ أَصَدَقْتَ أَمْ كُنتَ مِنَ ٱلْكَـٰذِبِينَ ﴿٢٧﴾

सुलैमान अलैहिस्सलामने हुदहुद से कहा: हमदेखेंगे कि तू अपने दावे में सच्चा है अथवा तू झूठों में से है?

ٱذْهَب بِّكِتَـٰبِى هَـٰذَا فَأَلْقِهْ إِلَيْهِمْ ثُمَّ تَوَلَّ عَنْهُمْ فَٱنظُرْ مَاذَا يَرْجِعُونَ ﴿٢٨﴾

सुलैमान अलैहिस्सलाम ने एक पत्र लिखा और उसे हुदहुद के हवाले करते हुए कहा: मेरा यह पात्र लेकर जाओ और इसे "सबा" वालों को पहुँचा देना और उनसे एक तरफ हटकर सुनते रहना कि वे इसके बारे में क्या जवाब देते हैं।

قَالَتْ يَـٰٓأَيُّهَا ٱلْمَلَؤُا۟ إِنِّىٓ أُلْقِىَ إِلَىَّ كِتَـٰبٌۭ كَرِيمٌ ﴿٢٩﴾

रानी ने पत्र प्राप्त किया और कहा: ऐ सरदारो! मेरी ओर एक बहुत प्रतिष्ठित पत्र फें का गया है।

إِنَّهُۥ مِن سُلَيْمَـٰنَ وَإِنَّهُۥ بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ ﴿٣٠﴾

सुलैमान की ओर से भेजे गए और "बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम" से प्रारंभ होने वाले इसपत्र का मज़मून यह है: أل اتعلوا على وأتونى مسلمين

أَلَّا تَعْلُوا۟ عَلَىَّ وَأْتُونِى مُسْلِمِينَ ﴿٣١﴾

यह कि तुम अभिमान न करो तथा अल्लाह को एकमात्र पूज्य मानने और उसके साथ शिर्क को परित्याग करने के मेरे आह्वान को स्वीकार करते हुए, आज्ञाकारी बनकर, मेरे पास आ जाओ। क्योंकि तुमने अल्लाह के साथ सूर्य की पूजा की है।

قَالَتْ يَـٰٓأَيُّهَا ٱلْمَلَؤُا۟ أَفْتُونِى فِىٓ أَمْرِى مَا كُنتُ قَاطِعَةً أَمْرًا حَتَّىٰ تَشْهَدُونِ ﴿٣٢﴾

रानी ने कहा: ऐ प्रमुखो एवं सज्जनो! मुझे मेरे मामले में सही हलबताओ। मैं किसी मामले का फ़ै सला करने वाली नहीं, यहाँ तक तुममेरे पास उपस्थित हो और उसके बारे में अपनी राय व्यक्त करो। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

قَالُوا۟ نَحْنُ أُو۟لُوا۟ قُوَّةٍۢ وَأُو۟لُوا۟ بَأْسٍۢ شَدِيدٍۢ وَٱلْأَمْرُ إِلَيْكِ فَٱنظُرِى مَاذَا تَأْمُرِينَ ﴿٣٣﴾

उसकी जाति के सरदारों ने उससे कहा: हम बड़ी ताकत के मालिक हैं तथा युद्ध में प्रबल शक्ति रखते हैं। और राय वही है जो आप देखती हैं। इसलिए देखें कि आप हमें क्या करने का आदेश देती हैं। क्योंकि हमउसे लागू करने में सक्षमहैं।

قَالَتْ إِنَّ ٱلْمُلُوكَ إِذَا دَخَلُوا۟ قَرْيَةً أَفْسَدُوهَا وَجَعَلُوٓا۟ أَعِزَّةَ أَهْلِهَآ أَذِلَّةًۭ ۖ وَكَذَٰلِكَ يَفْعَلُونَ ﴿٣٤﴾

रानी ने कहा: राजा जब किसी बस्ती में प्रवेश करते हैं, तो क़त्ल तथा लूट-पाट का बाज़ार गर्म करके उसे ख़राब कर देते हैं और उसके सरदारों और अशराफिया को अपमानित करते हैं, जबकि वे पहले उसमें प्रतिष्ठा और शक्ति वाले थे। तथा राजा हमेशा ऐसा ही करते हैं, जब वे किसी बस्ती को पराजित करते हैं; ताकि लोगों के दिलों में आतंक और दहशत पैदा कर सकें ।

وَإِنِّى مُرْسِلَةٌ إِلَيْهِم بِهَدِيَّةٍۢ فَنَاظِرَةٌۢ بِمَ يَرْجِعُ ٱلْمُرْسَلُونَ ﴿٣٥﴾

मैं यह पत्र भेजने वाले तथा उसके लोगों के पासएक उपहार भेजने वाली हूँ और देखती हूँ कि दूत इसउपहार को भेजने के बाद क्या उत्तर लाते हैं।

فَلَمَّا جَآءَ سُلَيْمَـٰنَ قَالَ أَتُمِدُّونَنِ بِمَالٍۢ فَمَآ ءَاتَىٰنِۦَ ٱللَّهُ خَيْرٌۭ مِّمَّآ ءَاتَىٰكُم بَلْ أَنتُم بِهَدِيَّتِكُمْ تَفْرَحُونَ ﴿٣٦﴾

जब रानी का दूत और उसके साथ उसके सहायक उपहार लेकर सुलैमान के पास आए, तो सुलैमान ने उनके उपहार भेजने को नकारते हुए कहा: क्या तुम धन से मेरी सहायता करते हो, ताकि मुझे अपनी ओर से फे र सको? (सुनो!) अल्लाह ने मुझे पैग़ंबरी, राजत्व तथा धन-दौलत के रूप में जो कु छ दिया है, वह उससे बेहतर है, जो उस ने तुम्हें दिया है। बल्कि, तुमही लोग इसप्रकार के सांसारिक उपहारों के दिए जाने पर खुश होते हो।

ٱرْجِعْ إِلَيْهِمْ فَلَنَأْتِيَنَّهُم بِجُنُودٍۢ لَّا قِبَلَ لَهُم بِهَا وَلَنُخْرِجَنَّهُم مِّنْهَآ أَذِلَّةًۭ وَهُمْ صَـٰغِرُونَ ﴿٣٧﴾

सुलैमान अलैहिस्सलाम ने रानी के दूत से कहा: तुम जो उपहार लेकर आए हो, उसे लेकर उनके पास वापस जाओ। यदि वे आज्ञाकारी बनकर मेरे पास नहीं आए, तो हम रानी तथा उसके लोगों पर ऐसी सेनाएँ लेकर आएँगे जिनका सामना करने की उनमें कोई शक्ति नहीं और हम अवश्य उन्हें 'सबा' से इस हाल में निकालेंगे कि वे वहाँ सम्मान पूर्ण रहने के बाद अपमानित और तिरस्कृ त होंगे।

قَالَ يَـٰٓأَيُّهَا ٱلْمَلَؤُا۟ أَيُّكُمْ يَأْتِينِى بِعَرْشِهَا قَبْلَ أَن يَأْتُونِى مُسْلِمِينَ ﴿٣٨﴾

सुलैमान अलैहिस्सलाम ने अपने राज्य के प्रमुख लोगों को संबोधित करते हुए कहा: ऐ प्रमुखो! तुममें से कौन रानी का सिंहासन मेरे पास लेकर आएगा, इससे पहले कि वे आज्ञाकारी होकर मेरे पास आएँ?

قَالَ عِفْرِيتٌۭ مِّنَ ٱلْجِنِّ أَنَا۠ ءَاتِيكَ بِهِۦ قَبْلَ أَن تَقُومَ مِن مَّقَامِكَ ۖ وَإِنِّى عَلَيْهِ لَقَوِىٌّ أَمِينٌۭ ﴿٣٩﴾

एक बलवान सरकश जिन्न ने कहा: इससे पहले कि आप अपनी इस जगह से उठें, मैं उसका सिंहासन आपके पास ले आऊँगा, और निःसंदेह मैं उसके उठाने की पूरी शक्ति रखता हूँ तथा उसमें जो कु छ है, उसके प्रति अमानतदार हूँ। इसलिए मैं उसमें कोई कमियागीरी नहीं करूँ गा।

قَالَ ٱلَّذِى عِندَهُۥ عِلْمٌۭ مِّنَ ٱلْكِتَـٰبِ أَنَا۠ ءَاتِيكَ بِهِۦ قَبْلَ أَن يَرْتَدَّ إِلَيْكَ طَرْفُكَ ۚ فَلَمَّا رَءَاهُ مُسْتَقِرًّا عِندَهُۥ قَالَ هَـٰذَا مِن فَضْلِ رَبِّى لِيَبْلُوَنِىٓ ءَأَشْكُرُ أَمْ أَكْفُرُ ۖ وَمَن شَكَرَ فَإِنَّمَا يَشْكُرُ لِنَفْسِهِۦ ۖ وَمَن كَفَرَ فَإِنَّ رَبِّى غَنِىٌّۭ كَرِيمٌۭ ﴿٤٠﴾

सुलैमान के पास उपस्थित एक सदाचारी ज्ञानी व्यक्ति, जिसके पास आसमानी किताबों का ज्ञान था, जिसमें अल्लाह का वह "इस्मे आज़म" (महान नाम) भी शामिल है, जिसकी विशेषता यह है कि यदि उसके द्वारा दुआ की जाए तो अल्लाह क़बूल करता है, ने कहा: मैं आपके पलक झपकाने से पहले ही उसका सिंहासन आपके पास ले आऊँ गा; इसतौर पर कि मैं अल्लाह से प्रार्थना करूँ गा और वह उसे यहाँ ले आएगाl अतः उसने प्रार्थना की और अल्लाह ने उसकी प्रार्थना स्वीकार कर ली। जब सुलैमान بلغ क़ुरआन · तफ़सीर ने उसके सिंहासन को अपने पास हाज़िर देखा, तो कहा: यह मेरे पालनहार की कृ पा से है; ताकि वह मेरी परीक्षा ले कि मैं उसकी नेमतों का शुक्र अदा करता हूँ या उनकी नाशुक्री करता हूँ? और जो अल्लाह का शुक्र अदा करता है, तो उसकी शुक्रगुज़ारी का लाभ उसी को मिलता है। क्योंकि अल्लाह बेनियाज़ है, बंदों की शुक्रगुज़ारी उसे नहीं बढ़ाती। तथा जिसने अल्लाह की नेमतों का इनकार किया और उनपर अल्लाह का शुक्र अदा नहीं किया, तो निश्चय मेरा पालनहार उसके शुक्र से बहुत बेनियाज़, बहुत उदार है। तथा यह उसकी उदारता है कि नेमतों की नाशुक्री करने वालों को भी प्रदान करता है।

قَالَ نَكِّرُوا۟ لَهَا عَرْشَهَا نَنظُرْ أَتَهْتَدِىٓ أَمْ تَكُونُ مِنَ ٱلَّذِينَ لَا يَهْتَدُونَ ﴿٤١﴾

सुलैमान अलैहिस्सलामने कहा: उसके लिए उसके राज-सिंहासन का रूप बदलदो। ताकि हमदेखें: क्या वह इस तथ्य को जान पाती है कि यह उसी का सिंहासन है, या कि वह उन लोगों में से हो जाती है जो अपनी वस्तुएँ भी नहीं पहचान पाते हैं?

فَلَمَّا جَآءَتْ قِيلَ أَهَـٰكَذَا عَرْشُكِ ۖ قَالَتْ كَأَنَّهُۥ هُوَ ۚ وَأُوتِينَا ٱلْعِلْمَ مِن قَبْلِهَا وَكُنَّا مُسْلِمِينَ ﴿٤٢﴾

जब सबा की रानी सुलैमान के पास आई, तो उसकी परीक्षा करने के लिए उससे कहा गया: क्या यह तेरे सिंहासन के समान है? उसने प्रश्न के अनुसार उत्तर दिया: मानो यह वही है। तो सुलैमान ने कहा: अल्लाह ने हमें इससे पहले ही ज्ञान दे रखा था कि वह इस तरह के कार्यों को अंजाम देने की पूरी शक्ति रखता है। तथा हम अल्लाह के आदेश के अधीन थे और उसके प्रति आज्ञाकारी थे।

وَصَدَّهَا مَا كَانَت تَّعْبُدُ مِن دُونِ ٱللَّهِ ۖ إِنَّهَا كَانَتْ مِن قَوْمٍۢ كَـٰفِرِينَ ﴿٤٣﴾

और उसे अल्लाह की तौहीद (एकेश्वरवाद) से उस चीज़ ने रोक रखा था जो वह अपनी जाति का अनुकरण करते हुए अल्लाह के अलावा पूजती थी। निःसंदेह वह उन लोगों में से थी जो अल्लाह का इनकार करने वाले थे। इसलिए वह (भी) उनके समान काफ़िर थी।

قِيلَ لَهَا ٱدْخُلِى ٱلصَّرْحَ ۖ فَلَمَّا رَأَتْهُ حَسِبَتْهُ لُجَّةًۭ وَكَشَفَتْ عَن سَاقَيْهَا ۚ قَالَ إِنَّهُۥ صَرْحٌۭ مُّمَرَّدٌۭ مِّن قَوَارِيرَ ۗ قَالَتْ رَبِّ إِنِّى ظَلَمْتُ نَفْسِى وَأَسْلَمْتُ مَعَ سُلَيْمَـٰنَ لِلَّهِ رَبِّ ٱلْعَـٰلَمِينَ ﴿٤٤﴾

उससे कहा गया कि महलमें प्रवेश कर जाओ, जो एक सतह के समान था। जब उसने महलको देखा, तो उसे कोई जलाशय समझ बैठी और उसमें उतरने के लिए अपनी दोनों पिंडलियाँ खोल दीं। सुलैमान अलैहिस्सलाम ने कहा: यह एक चिकना कांच का भवन है। फिर उसे इस्लाम की ओर आमंत्रित किया। और उसने उनके आमंत्रण को स्वीकार कर लिया, यह कहते हुए: ऐ मेरे पालनहार! मैंने तेरे साथ तेरे अलावा की पूजा करके अपने ऊपर अत्याचार किया है और (अब) मैं सुलैमान अलैहिस्सलाम के साथ सभी प्राणियों के पालनहार अल्लाह की आज्ञाकारिणी हो गई।

وَلَقَدْ أَرْسَلْنَآ إِلَىٰ ثَمُودَ أَخَاهُمْ صَـٰلِحًا أَنِ ٱعْبُدُوا۟ ٱللَّهَ فَإِذَا هُمْ فَرِيقَانِ يَخْتَصِمُونَ ﴿٤٥﴾

हमने समूद जाति की ओर उनके नसबी भाई सालेह अलैहिस्सलाम को भेजा कि तुम केवल एकमात्र अल्लाह की इबादत करो। परंतु उनके निमंत्रण के बाद वे दो समूह बन गए: एक ईमान लाने वाला समूह और दूसरा काफिर समूह, वे इसबात पर झगड़ने लगे कि उनमें से कौन सत्य पर है।

قَالَ يَـٰقَوْمِ لِمَ تَسْتَعْجِلُونَ بِٱلسَّيِّئَةِ قَبْلَ ٱلْحَسَنَةِ ۖ لَوْلَا تَسْتَغْفِرُونَ ٱللَّهَ لَعَلَّكُمْ تُرْحَمُونَ ﴿٤٦﴾

सालेह अलैहिस्सलामने उनसे कहा: तुमरहमत से पहले अज़ाब को क्यों जल्दी माँगते हो?तुमअपने पापों के लिए अल्लाह से क्षमा क्यों नहीं माँगते, इस आशा में कि वह तुमपर दया करे।

قَالُوا۟ ٱطَّيَّرْنَا بِكَ وَبِمَن مَّعَكَ ۚ قَالَ طَـٰٓئِرُكُمْ عِندَ ٱللَّهِ ۖ بَلْ أَنتُمْ قَوْمٌۭ تُفْتَنُونَ ﴿٤٧﴾

उनके समुदाय ने सत्य से हठधर्म दिखाते हुए उनसे कहा: हम तुमसे तथा तुम्हारे साथ जो मोमिन हैं उनसे अपशकुन लेते हैं। सालेह अलैहिस्सलाम ने उनसे कहा: तुम अपने ऊपर आने वाली कठिनाइयों के कारण पक्षियों को उड़ाकर जो अपशकुन लेते हो, अल्लाह के पास उसका ज्ञान है, उसमें से कुछ भी उससे छिपा नहीं है। बल्कि तुम्हें जो बड़ी मात्रा में भलाई प्रदान की जा रही है तथा तुम जो बुराइयों से ग्रस्त होते हो, उनके द्वारा तुम आज़माए जा रहे हो। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

وَكَانَ فِى ٱلْمَدِينَةِ تِسْعَةُ رَهْطٍۢ يُفْسِدُونَ فِى ٱلْأَرْضِ وَلَا يُصْلِحُونَ ﴿٤٨﴾

और "हिज्र" शहर में नौ आदमी थे, जो कु फ़्र और पापों के द्वारा धरती में बिगाड़ पैदा करते थे, तथा ईमान और अच्छे कर्मों के द्वारा उसमें सुधार नहीं करते थे।

قَالُوا۟ تَقَاسَمُوا۟ بِٱللَّهِ لَنُبَيِّتَنَّهُۥ وَأَهْلَهُۥ ثُمَّ لَنَقُولَنَّ لِوَلِيِّهِۦ مَا شَهِدْنَا مَهْلِكَ أَهْلِهِۦ وَإِنَّا لَصَـٰدِقُونَ ﴿٤٩﴾

उन्होंने एक-दूसरे से कहा: हममें से प्रत्येक व्यक्ति अल्लाह की क़सम खाए कि हम अवश्य ही रात में उसके घर पर हमला करेंगे, फिर हम अवश्य ही उसे और उसके परिवार को क़त्ल कर देंगे। फिर हम अवश्य ही उसके खून के उत्तराधिकारी से कह देंगे: हम सालेह और उसके परिवार की हत्या के समय उपस्थित नहीं थे और हमने जो कहा, उसमें हम बिलकु ल सच्चे हैं। ومكروامكرا ومكرنا مكرا وهم لا يشعرون

وَمَكَرُوا۟ مَكْرًۭا وَمَكَرْنَا مَكْرًۭا وَهُمْ لَا يَشْعُرُونَ ﴿٥٠﴾

और उन्होंने सालेह तथा उनके ईमान वाले अनुयायियों को नष्ट करने के लिए एक छिपी हुई साजिश रची, तथा हमने भी उनकी मदद करने, उन्हें उन लोगों की साज़िश से बचाने और उनकी जाति के काफ़िरों को नष्ट करने के लिए गुप्त उपाय किया, और वे इसके बारे में नहीं जानते थे।

فَٱنظُرْ كَيْفَ كَانَ عَـٰقِبَةُ مَكْرِهِمْ أَنَّا دَمَّرْنَـٰهُمْ وَقَوْمَهُمْ أَجْمَعِينَ ﴿٥١﴾

तो (ऐ रसूल!) आप ग़ौर कीजिए कि उनकी साज़िश और चाल का परिणाम कै सा रहा? हमने उन्हें अपनी ओर से यातना देकर सबको विनष्ट कर दिया।

فَتِلْكَ بُيُوتُهُمْ خَاوِيَةًۢ بِمَا ظَلَمُوٓا۟ ۗ إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَـَٔايَةًۭ لِّقَوْمٍۢ يَعْلَمُونَ ﴿٥٢﴾

तो ये उनके घर हैं जिनकी दीवारें उनकी छतों समेत गिर गई हैं और अपने निवासियों से खाली हैं, ऐसा उनके अत्याचार के कारण हुआ है। इन लोगों को उनके अत्याचार के कारण जो यातना पहुँची है, उसमें उन लोगों के लिए निश्चय एक सबक़ है जो ईमान रखते हैं, क्योंकि वही लोग हैं जो निशानियों से सबक़ हासिलकरते हैं।

وَأَنجَيْنَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَكَانُوا۟ يَتَّقُونَ ﴿٥٣﴾

और हमने सालेह अलैहिस्सलाम के समुदाय में से उन लोगों को बचा लिया, जो अल्लाह पर ईमान लाए तथा अल्लाह से उसकी आज्ञाओं का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर डरते थे।

وَلُوطًا إِذْ قَالَ لِقَوْمِهِۦٓ أَتَأْتُونَ ٱلْفَـٰحِشَةَ وَأَنتُمْ تُبْصِرُونَ ﴿٥٤﴾

और (ऐ रसूल!) लूत अलैहिस्सलाम को याद करें, जब उन्होंने अपनी जाति से, उन्हें फटकार लगाते तथा उनकी निंदा करते हुए कहा: क्या तुम अपने क्लबों में खुले तौर पर घिनौना काम - लिवात - करते हो, जबकि तुम एक-दूसरे को देखते हो?!

أَئِنَّكُمْ لَتَأْتُونَ ٱلرِّجَالَ شَهْوَةًۭ مِّن دُونِ ٱلنِّسَآءِ ۚ بَلْ أَنتُمْ قَوْمٌۭ تَجْهَلُونَ ﴿٥٥﴾

क्या वाक़ई तुम औरतों को छोड़कर कामवासना की पूर्ति के लिए मर्दों के पास जाते हो! तुम शुद्धता या संतान नहीं चाहते, केवल एक पशु वासना की पूर्ति चाहते हो। बल्कि, तुम ऐसे लोग हो जिन्हें अपने ऊपर अनिवार्य ईमान, पवित्रता और पापों से दूरी का भी ज्ञान नहीं है।

۞ فَمَا كَانَ جَوَابَ قَوْمِهِۦٓ إِلَّآ أَن قَالُوٓا۟ أَخْرِجُوٓا۟ ءَالَ لُوطٍۢ مِّن قَرْيَتِكُمْ ۖ إِنَّهُمْ أُنَاسٌۭ يَتَطَهَّرُونَ ﴿٥٦﴾

उनकी जाति के पास इसके सिवा कोई उत्तर नहीं था कि उन्होंने कहा: लूत के परिवार को अपनी बस्ती से निकाल दो। ये ऐसे लोग हैं जो गंदगी और अशुद्धता से बड़े पवित्र बनते हैं। उन्होंने यह बात लूत के परिवार का मज़ाक उड़ाते हुए कही थी, जो उनके द्वारा किए जाने वाले घिनौने कामों में हिस्सा नहीं लेते थे, बल्कि उन्हें करने पर उनकी निंदा करते थे। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

فَأَنجَيْنَـٰهُ وَأَهْلَهُۥٓ إِلَّا ٱمْرَأَتَهُۥ قَدَّرْنَـٰهَا مِنَ ٱلْغَـٰبِرِينَ ﴿٥٧﴾

अतः हमने उन्हें और उनके घर वालों को बचा लिया, के वल उनकी पत्नी को छोड़कर। हमने उसके बारे में यह फै सला कर दिया था कि वह यातना में बाक़ी रहने वालों में से होगी, ताकि वह हलाक होने वालों में से हो जाए।

وَأَمْطَرْنَا عَلَيْهِم مَّطَرًۭا ۖ فَسَآءَ مَطَرُ ٱلْمُنذَرِينَ ﴿٥٨﴾

हमने उनपर आसमान से पत्थर बरसाए, तो यह उन लोगों के लिए बहुत बुरी और विनाशकारी बारिश थी, जो यातना से डराए गए थे, परंतु वे नहीं माने।

قُلِ ٱلْحَمْدُ لِلَّهِ وَسَلَـٰمٌ عَلَىٰ عِبَادِهِ ٱلَّذِينَ ٱصْطَفَىٰٓ ۗ ءَآللَّهُ خَيْرٌ أَمَّا يُشْرِكُونَ ﴿٥٩﴾

(ऐ रसूल!) आप कह दें: सारी प्रशंसा अल्लाह के लिए है उसकी नेमतों पर, तथा उसकी ओर से नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लमके सहाबा के लिए उसकी उस यातना से सुरक्षा (हिफ़ाज़त) है, जिसके साथ लूत और सालेह (अलैहिमस्सलाम) की जाति के लोग दंडित किए गए। क्या सत्य पूज्य अल्लाह जिसके हाथ में हर चीज़ का राज्य है, बेहतर है अथवा बहुदेववादियों द्वारा पूजे जाने वाले देवता, जो किसी लाभ और हानि के मालिक नहीं हैं?!

أَمَّنْ خَلَقَ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضَ وَأَنزَلَ لَكُم مِّنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءًۭ فَأَنۢبَتْنَا بِهِۦ حَدَآئِقَ ذَاتَ بَهْجَةٍۢ مَّا كَانَ لَكُمْ أَن تُنۢبِتُوا۟ شَجَرَهَآ ۗ أَءِلَـٰهٌۭ مَّعَ ٱللَّهِ ۚ بَلْ هُمْ قَوْمٌۭ يَعْدِلُونَ ﴿٦٠﴾

अथवा वह (बेहतर) है, जिसने बिना किसी पूर्व नमूने के आकाशों एवं धरती को पैदा किया तथा उसने (ऐ लोगो!) तुम्हारे लिए आकाश से बारिश का पानी उतारा, फिर हमने उससे सुंदर और भव्य बगीचे उगाए। तुम्हारे लिए संभव नहीं था कि तुम उन बागों के पेड़ों को उगाते, क्योंकि तुम ऐसा करने में अक्षम थे। अतः अल्लाह ही है जिसने उन्हें उगाया। क्या किसी अन्य पूज्य ने अल्लाह के साथ यह सब काम किया है?! नहीं! बल्कि वे ऐसे लोग हैं जो सत्य से भटक जाते हैं, इसलिए अन्यायपूर्ण रूप से सृष्टिकर्ता को सृष्टि के बराबर कर देते हैं।

أَمَّن جَعَلَ ٱلْأَرْضَ قَرَارًۭا وَجَعَلَ خِلَـٰلَهَآ أَنْهَـٰرًۭا وَجَعَلَ لَهَا رَوَٰسِىَ وَجَعَلَ بَيْنَ ٱلْبَحْرَيْنِ حَاجِزًا ۗ أَءِلَـٰهٌۭ مَّعَ ٱللَّهِ ۚ بَلْ أَكْثَرُهُمْ لَا يَعْلَمُونَ ﴿٦١﴾

بل أكثرهم لا يعلمون अथवा वह (बेहतर) है, जिसने धरती को स्थिर बनाया, जो अपने ऊपर मौजूद चीज़ों के साथ हिलती-डुलती नहीं है, तथा उसके भीतर बहने वाली नदियों को बनाया और उसके लिए स्थिर पर्वत बनाए, तथा दो समुद्रों: खारे और मीठे के बीच एक विभाजक बनाया, जो खारे पानी को मीठे पानी के साथ मिलने से रोकता है ताकि उसका स्वाद ख़राब न हो और वह पीने के लिए उपयुक्त न रह जाए। क्या किसी (अन्य) पूज्य ने अल्लाह के साथ यह सारा कामकिया है?! कदापि नहीं, बल्कि उनके अधिकांश लोग (अल्लाह की महानता को) नहीं जानते। यदि वे जानते होते तो अल्लाह की किसी सृष्टि को कभी उसका साझी नहीं बनाते।

أَمَّن يُجِيبُ ٱلْمُضْطَرَّ إِذَا دَعَاهُ وَيَكْشِفُ ٱلسُّوٓءَ وَيَجْعَلُكُمْ خُلَفَآءَ ٱلْأَرْضِ ۗ أَءِلَـٰهٌۭ مَّعَ ٱللَّهِ ۚ قَلِيلًۭا مَّا تَذَكَّرُونَ ﴿٦٢﴾

अथवा वह (बेहतर) है कि जब कोई कष्ट में पड़ा हुआ व्याकु ल व्यक्ति उसे पुकारता है, तो उसकी पुकार सुनता है, तथा इनसान जब रोग और निर्धनता का शिकार होता है, तो उसे इनसे मुक्ति प्रदान करता है, और तुम्हें धरती में उत्तराधिकारी बनाता है, तुम पीढ़ी दर पीढ़ी एक-दूसरे के उत्तराधिकारी बनते हो। क्या कोई (अन्य) पूज्य है जो अल्लाह के साथ यह सारा काम करता है?! कदापि नहीं, तुम बहुत कम उपदेश और सीख ग्रहण करते हो।

أَمَّن يَهْدِيكُمْ فِى ظُلُمَـٰتِ ٱلْبَرِّ وَٱلْبَحْرِ وَمَن يُرْسِلُ ٱلرِّيَـٰحَ بُشْرًۢا بَيْنَ يَدَىْ رَحْمَتِهِۦٓ ۗ أَءِلَـٰهٌۭ مَّعَ ٱللَّهِ ۚ تَعَـٰلَى ٱللَّهُ عَمَّا يُشْرِكُونَ ﴿٦٣﴾

يشركون अथवा वह (बेहतर) है, जो थल एवं जल के अँधेरों में विभिन्न स्थलचिह्नों एवं नक्षत्रों द्वारा तुम्हें मार्गदर्शन प्रदान करता है। तथा जो हवाओं को उस वर्षा से पूर्व शुभ सूचना बनाकर भेजता है, जिसके द्वारा वह अपने बंदों पर दया करता है। क्या कोई (अन्य) पूज्य है, जो अल्लाह के साथ यह सारा काम करता है?! अल्लाह उनके उसकी सृष्टियों को उसका साझी बनाने से पाक है। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

أَمَّن يَبْدَؤُا۟ ٱلْخَلْقَ ثُمَّ يُعِيدُهُۥ وَمَن يَرْزُقُكُم مِّنَ ٱلسَّمَآءِ وَٱلْأَرْضِ ۗ أَءِلَـٰهٌۭ مَّعَ ٱللَّهِ ۚ قُلْ هَاتُوا۟ بُرْهَـٰنَكُمْ إِن كُنتُمْ صَـٰدِقِينَ ﴿٦٤﴾

صدقين अथवा वह (बेहतर) है, जो गर्भ के अंदर चरण दर चरण सृष्टि की शुरुआत करता है, फिर उसे मृत्यु देने के बाद पुनः जीवित करेगा। और जो तुम्हें आकाश से उसकी ओर से उतरने वाली वर्षा के द्वारा जीविका प्रदान करता है, तथा तुम्हें धरती से उसमें पौधे उगाकर जीविका देता है? क्या कोई (अन्य) पूज्य है, जो अल्लाह के साथ यह सब करता है?! (ऐ रसूल!) आप इन मुश्रिकों से कह दें: तुम जिस शिर्क पर क़ायम हो, उसपर अपने प्रमाण प्रस्तुत करो, यदि तुम अपने इस दावे में सच्चे हो कि तुम सत्य पर हो?

قُل لَّا يَعْلَمُ مَن فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ ٱلْغَيْبَ إِلَّا ٱللَّهُ ۚ وَمَا يَشْعُرُونَ أَيَّانَ يُبْعَثُونَ ﴿٦٥﴾

(ऐ रसूल!) आप कह दें कि आकाशों में मौजूद फ़रिश्ते और धरती में मौजूद इनसान ग़ैब (परोक्ष) को नहीं जानते। बल्कि एकमात्र अल्लाह ही उसे जानता है। तथा अल्लाह के सिवा आकाशों एवं धरती में मौजूद सभी प्राणी यह नहीं जानते कि वे बदले के लिए कब पुनः जीवित किए जाएँगे।

بَلِ ٱدَّٰرَكَ عِلْمُهُمْ فِى ٱلْـَٔاخِرَةِ ۚ بَلْ هُمْ فِى شَكٍّۢ مِّنْهَا ۖ بَلْ هُم مِّنْهَا عَمُونَ ﴿٦٦﴾

अथवा क्या निरंतर उन्हें आख़िरत के बारे में ज्ञान होता रहा, तो वे इसके बारे में निश्चित हैं? नहीं! बल्कि वे आख़िरत के बारे में संदेह और विस्मय के शिकार हैं। बल्कि, उनकी अंतर्दृष्टि उससे अंधी हो गई है।

وَقَالَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوٓا۟ أَءِذَا كُنَّا تُرَٰبًۭا وَءَابَآؤُنَآ أَئِنَّا لَمُخْرَجُونَ ﴿٦٧﴾

तथा काफ़िरों ने इनकार करते हुए कहा: क्या जब हम (और हमारे बाप-दादा) मर जाएँगे और मिट्टी बन जाएँगे, तो क्या यह संभव है कि हमें पुनः जीवित किया जाएगा?

لَقَدْ وُعِدْنَا هَـٰذَا نَحْنُ وَءَابَآؤُنَا مِن قَبْلُ إِنْ هَـٰذَآ إِلَّآ أَسَـٰطِيرُ ٱلْأَوَّلِينَ ﴿٦٨﴾

निश्चय हमसे वादा किया गया है और इससे पहले हमारे बाप-दादा पिता से भी वादा किया गया था कि हम सभी को पुनर्जीवित किया जाएगा, लेकिन हमने उस वादे की पूर्ति नहीं देखी। हम सब से किया गया यह वादा पहले लोगों की झूठी कथाएँ हैं, जो उन्होंने अपनी पुस्तकों में लिख रखी हैं।

قُلْ سِيرُوا۟ فِى ٱلْأَرْضِ فَٱنظُرُوا۟ كَيْفَ كَانَ عَـٰقِبَةُ ٱلْمُجْرِمِينَ ﴿٦٩﴾

(ऐ रसूल!) आप मरणोपरांत पुनः जीवित कर उठाए जाने का इनकार करने वालों से कह दें: धरती के किसी भी हिस्से में चलो-फिरो, फिर विचार करो कि पुनर्जीवन को झुठलाने वाले अपराधियों का परिणाम कै सा रहा? हमने इसका इनकार करने के कारण उन्हें नष्ट कर दिया। ولا تحزن عليهم ولا تكن فى ضيق مما يمكرون

وَلَا تَحْزَنْ عَلَيْهِمْ وَلَا تَكُن فِى ضَيْقٍۢ مِّمَّا يَمْكُرُونَ ﴿٧٠﴾

इन मुश्रिकों के आपके बुलावे से मुँह फे रने के कारण आप शोक न करें, और उनकी साज़िशों से आपका दिल तंग न हो। क्योंकि अल्लाह उनके विरुद्ध आपकी सहायता करेगा।

وَيَقُولُونَ مَتَىٰ هَـٰذَا ٱلْوَعْدُ إِن كُنتُمْ صَـٰدِقِينَ ﴿٧١﴾

आपके समुदाय के मरणोपरांत पुनः जीवित कर उठाए जाने का इनकार करने वाले काफ़िर कहते हैं: तुम और ईमान वाले जिस यातना का हमसे वादा करते हो, वह कब आएगी, यदि तुम उसमें सच्चे हो, जिसका तुम दावा करते हो? بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

قُلْ عَسَىٰٓ أَن يَكُونَ رَدِفَ لَكُم بَعْضُ ٱلَّذِى تَسْتَعْجِلُونَ ﴿٧٢﴾

(ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें: जिस यातना की तुम जल्दी मचा रहे हो, संभव है कि उसका कु छ हिस्सा तुम्हारे निकट आ गया हो।

وَإِنَّ رَبَّكَ لَذُو فَضْلٍ عَلَى ٱلنَّاسِ وَلَـٰكِنَّ أَكْثَرَهُمْ لَا يَشْكُرُونَ ﴿٧٣﴾

और निःसंदेह (ऐ रसूल!) आपका पालनहार लोगों पर अति दयावान है कि वह लोगों के कुफ़्र और पापों के बावजूद उन्हें यातना देने में जल्दी नहीं करता। लेकिन अधिकांश लोग अल्लाह की नेमतों का शुक्र अदा नहीं करते। وإن ربك ليعلمما تكن صدورهم وما يعلنون

وَإِنَّ رَبَّكَ لَيَعْلَمُ مَا تُكِنُّ صُدُورُهُمْ وَمَا يُعْلِنُونَ ﴿٧٤﴾

और निःसंदेह आपका पालनहार जानता है जो उसके बंदों के दिलछिपाए हुए हैं तथा वे जो कु छ प्रकट करते हैं, उनमें से कु छ भी उससे छिपा नहीं है, और वह उन्हें इसके लिए प्रतिफल देगा।

وَمَا مِنْ غَآئِبَةٍۢ فِى ٱلسَّمَآءِ وَٱلْأَرْضِ إِلَّا فِى كِتَـٰبٍۢ مُّبِينٍ ﴿٧٥﴾

जो भी वस्तु आकाश में लोगों से ओझलहै, या धरती में लोगों से ओझलहै, वह एक स्पष्ट किताब अर्थात् लौह़े-महफ़ू ज़ में लिखित रूप से मौजूद है।

إِنَّ هَـٰذَا ٱلْقُرْءَانَ يَقُصُّ عَلَىٰ بَنِىٓ إِسْرَٰٓءِيلَ أَكْثَرَ ٱلَّذِى هُمْ فِيهِ يَخْتَلِفُونَ ﴿٧٦﴾

मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर अवतरित होने वाला यह क़ु रआन बनी-इसराईल के सामने उन अधिकांश बातों का वर्णन करता है, जिनमें वे विभेद करते हैं तथा उनकी पथभ्रष्टता को उजागर करता है। وإنه لهدى ورحمة للمؤمنين

وَإِنَّهُۥ لَهُدًۭى وَرَحْمَةٌۭ لِّلْمُؤْمِنِينَ ﴿٧٧﴾

और निःसंदेह यह (क़ु रआन) उन मोमिनों के लिए मार्गदर्शन और दया है जो इसकी शिक्षाओं पर अमलकरने वाले हैं।

إِنَّ رَبَّكَ يَقْضِى بَيْنَهُم بِحُكْمِهِۦ ۚ وَهُوَ ٱلْعَزِيزُ ٱلْعَلِيمُ ﴿٧٨﴾

निश्चय (ऐ रसूल!) आपका रब क़ियामत के दिन लोगों के बीच अर्थात् उनके ईमान वालों और उनके काफ़िरों के बीच अपने न्याय से फ़ै सला करेगा। अतः वह मोमिन पर दया करेगा और काफ़िर को यातना देगा। तथा वही सब पर प्रभुत्वशाली है जो अपने दुश्मनों से बदला लेता है और उसे कोई पराजित नहीं कर सकता, वह सब कुछ जानने वाला है, उसपर सत्यनिष्ठ और असत्यता का पालन करने वाले गड्डमड्ड नहीं हो सकते।

فَتَوَكَّلْ عَلَى ٱللَّهِ ۖ إِنَّكَ عَلَى ٱلْحَقِّ ٱلْمُبِينِ ﴿٧٩﴾

अतः आप अल्लाह पर भरोसा करें, तथा अपने सभी मामलों में उसी पर निर्भर रहें। निःसंदेह आप स्पष्ट सत्य पर हैं।

إِنَّكَ لَا تُسْمِعُ ٱلْمَوْتَىٰ وَلَا تُسْمِعُ ٱلصُّمَّ ٱلدُّعَآءَ إِذَا وَلَّوْا۟ مُدْبِرِينَ ﴿٨٠﴾

(ऐ रसूल!) आप उन मरे हुए लोगों को नहीं सुना सकते, जिनके दिल अल्लाह के इनकार के कारण मर चुके हैं। तथा जिनके कानों को अल्लाह ने सत्य सुनने से बहरा कर दिया है, आप उन्हें (भी) वह बात नहीं सुना सकते, जिसकी ओर आप उन्हें बुला रहे हैं, जबकि वे आपसे मुँह फे रकर पलट जाएँ। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

وَمَآ أَنتَ بِهَـٰدِى ٱلْعُمْىِ عَن ضَلَـٰلَتِهِمْ ۖ إِن تُسْمِعُ إِلَّا مَن يُؤْمِنُ بِـَٔايَـٰتِنَا فَهُم مُّسْلِمُونَ ﴿٨١﴾

तथा आप उन्हें सत्य मार्ग नहीं दिखा सकते, जिनकी अंतर्दृष्टि सत्य से अंधी हो गई है। अतः आप उनके लिए शोक न करें और न अपने आप को थकाएँ। आप सत्य बात के वल उन्हीं को समझा सकते हैं, जो हमारी आयतों पर ईमान रखते हैं, सो वही अल्लाह के आदेशों का पालन करने वाले हैं।

۞ وَإِذَا وَقَعَ ٱلْقَوْلُ عَلَيْهِمْ أَخْرَجْنَا لَهُمْ دَآبَّةًۭ مِّنَ ٱلْأَرْضِ تُكَلِّمُهُمْ أَنَّ ٱلنَّاسَ كَانُوا۟ بِـَٔايَـٰتِنَا لَا يُوقِنُونَ ﴿٨٢﴾

जब उनके कु फ़्र एवं पापों पर अडिग रहने के कारण यातना उनपर साबित और आवश्यक हो जाएगी, तथा के वल बुरे लोग ही शेष रह जाएँगे, तो हम क़ियामत के निकट होने पर उनके लिए क़ियामत की बड़ी निशानियों में से एक निशानी निकालेंगे, और वह (निशानी) धरती का एक जानवर है, जो लोगों से इस तरह बात करेगा जो वे समझेंगे, कि लोग हमारे नबी पर उतरने वाली हमारी आयतों पर विश्वास नहीं करते थे। ويومنحشرمن كل أمة فوجا ممن يكذب بٔايتنا فهم يوزعون

وَيَوْمَ نَحْشُرُ مِن كُلِّ أُمَّةٍۢ فَوْجًۭا مِّمَّن يُكَذِّبُ بِـَٔايَـٰتِنَا فَهُمْ يُوزَعُونَ ﴿٨٣﴾

तथा (ऐ रसूल!) उस दिन को याद कीजिए, जब हम प्रत्येक समुदाय से उनके प्रमुखों का एक समूह इकट्ठा करेंगे, उन लोगों में से जो हमारी आयतों को झुठलाया करते थे। उनमें से प्रथम व्यक्ति से लेकर अंतिम तक को प्रस्तुत किया जाएगा, फिर वे हिसाब-किताब की ओर हाँककर ले जाए जाएँगे।

حَتَّىٰٓ إِذَا جَآءُو قَالَ أَكَذَّبْتُم بِـَٔايَـٰتِى وَلَمْ تُحِيطُوا۟ بِهَا عِلْمًا أَمَّاذَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ ﴿٨٤﴾

उनको हाँका जाता रहेगा, यहाँ तक कि जब वे अपने हिसाब-किताब के स्थान पर पहुँच जाएँगे, तो अल्लाह उनको फटकारते हुए कहेगा: क्या तुमने मेरी उन आयतों को झुठलाया था जो मेरे एकेश्वरवाद को दर्शाने वाली थीं और मेरी शरीयत को सम्मिलित थीं, जबकि तुम्हें उनके असत्य होने का पूर्ण ज्ञान नहीं था कि तुम्हारे लिए उनका झुठलाना उचित होता! या तुमने उनके साथ कौन-सा रवैया अपनाया था, पुष्टि करने का या झुठलाने का?!

وَوَقَعَ ٱلْقَوْلُ عَلَيْهِم بِمَا ظَلَمُوا۟ فَهُمْ لَا يَنطِقُونَ ﴿٨٥﴾

अल्लाह के इनकार तथा उसकी आयतों को झुठलाकर अत्याचार करने के कारण उनपर यातना आ पहुँचेगी। अतः वे अपने बचाव के संदर्भ में कोई बात नहीं कर सकें गे, क्योंकि वे ऐसा करने में असमर्थ और उनके तर्क अमान्य होंगे।

أَلَمْ يَرَوْا۟ أَنَّا جَعَلْنَا ٱلَّيْلَ لِيَسْكُنُوا۟ فِيهِ وَٱلنَّهَارَ مُبْصِرًا ۚ إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَـَٔايَـٰتٍۢ لِّقَوْمٍۢ يُؤْمِنُونَ ﴿٨٦﴾

क्या मरणोपरांत पुनः जीवित किए जाने को झुठलाने वाले ये लोग नहीं देखते कि हमने रात बनाई, ताकि वे उसमें सोकर आराम कर सकें , तथा दिन को प्रकाशमान बनाया, ताकि उसमें देख सकें और अपने कामों के लिए निकल सकें । इस बार-बार होने वाली मृत्यु और उसके बाद जी उठने में विश्वास रखने वाले लोगों के लिए स्पष्ट निशानियाँ हैं।

وَيَوْمَ يُنفَخُ فِى ٱلصُّورِ فَفَزِعَ مَن فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَمَن فِى ٱلْأَرْضِ إِلَّا مَن شَآءَ ٱللَّهُ ۚ وَكُلٌّ أَتَوْهُ دَٰخِرِينَ ﴿٨٧﴾

और (ऐ रसूल!) याद करें उस दिन को, जब सूर फूँकने के कार्य पर नियुक्त फ़रिश्ता नरसिंघा में द्वितीय बार फूँकेगा, तो आकाशों एवं धरती में मौजूद सारी चीज़ें घबरा जाएँगी, सिवाय उसके जिसे अल्लाह ने अपनी कृ पा से इस घबराहट से अलग कर दिया। उस दिन अल्लाह के सभी प्राणी उसके पास आज्ञाकारी एवं हीन होकर आएँगे।

وَتَرَى ٱلْجِبَالَ تَحْسَبُهَا جَامِدَةًۭ وَهِىَ تَمُرُّ مَرَّ ٱلسَّحَابِ ۚ صُنْعَ ٱللَّهِ ٱلَّذِىٓ أَتْقَنَ كُلَّ شَىْءٍ ۚ إِنَّهُۥ خَبِيرٌۢ بِمَا تَفْعَلُونَ ﴿٨٨﴾

उस दिन तुमपहाड़ों को देखकर सोचोगे कि वे स्थिर हैं, हिलनहीं रहे हैं, जबकि वास्तव में वे बादलों की तरह तेज गति से चलरहे होंगे। यह अल्लाह की कारीगरी है, अतः वही है जो उन्हें चला रहा है। निःसंदेह वह भली-भाँति जानता है जो कु छ तुम करते हो, तुम्हारे कार्यों में से कु छ भी उससे छिपा नहीं है, और वह शीघ्र ही तुम्हें उनका बदला देगा। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

مَن جَآءَ بِٱلْحَسَنَةِ فَلَهُۥ خَيْرٌۭ مِّنْهَا وَهُم مِّن فَزَعٍۢ يَوْمَئِذٍ ءَامِنُونَ ﴿٨٩﴾

जो कोई क़ियामत के दिन ईमान और नेक कामों के साथ आएगा, उसके लिए जन्नत होगी, और वे अल्लाह के उन्हें सुरक्षा प्रदान करने के कारण क़ियामत के दिन की घबराहट से सुरक्षित होंगे।

وَمَن جَآءَ بِٱلسَّيِّئَةِ فَكُبَّتْ وُجُوهُهُمْ فِى ٱلنَّارِ هَلْ تُجْزَوْنَ إِلَّا مَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ ﴿٩٠﴾

परंतु जो कुफ़्र और पाप के साथ आएगा, तो उनके लिए नरक है जिसमें उन्हें उनके चेहरों के बल डाला जाएगा, तथा उनसे उन्हें डाँटते और अपमानित करते हुए कहा जाएगा: क्या तुम्हें उसके सिवा किसी और चीज़ का बदला दिया जाएगा, जो तुम दुनिया में कु फ़्र और पाप किया करते थे?

إِنَّمَآ أُمِرْتُ أَنْ أَعْبُدَ رَبَّ هَـٰذِهِ ٱلْبَلْدَةِ ٱلَّذِى حَرَّمَهَا وَلَهُۥ كُلُّ شَىْءٍۢ ۖ وَأُمِرْتُ أَنْ أَكُونَ مِنَ ٱلْمُسْلِمِينَ ﴿٩١﴾

(ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें: मुझे तो के वल यही आदेश दिया गया है कि मैं मक्का (नगर) के पालनहार की उपासना करूँ , जिसने इसे प्रतिष्ठा एवं सम्मान प्रदान किया है। अतः इसमें रक्त नहीं बहाया जाएगा, इसमें किसी पर अत्याचार नहीं किया जाएगा, इसके शिकार को नहीं मारा जाएगा और यहाँ के पेड़ों को नहीं काटा जाएगा। वही पवित्र अल्लाह हर वस्तु का मालिक है। तथा मुझे आदेश दिया गया है कि मैं अल्लाह के आगे समर्पण करने वालों, उसके आज्ञाकारियों में से हो जाऊँ ।

وَأَنْ أَتْلُوَا۟ ٱلْقُرْءَانَ ۖ فَمَنِ ٱهْتَدَىٰ فَإِنَّمَا يَهْتَدِى لِنَفْسِهِۦ ۖ وَمَن ضَلَّ فَقُلْ إِنَّمَآ أَنَا۠ مِنَ ٱلْمُنذِرِينَ ﴿٩٢﴾

तथा मुझे आदेश दिया गया है कि मैं लोगों को क़ुरआन पढ़कर सुनाऊँ। फिर जो इससे मार्गदर्शन प्राप्त करे तथा इसमें जो कुछ है उसके अनुसार काम करे, तो उसके मार्गदर्शन प्राप्त करने का लाभ स्वंय उसी को होगा। परंतु जो उससे भटककर गुमराह हो जाए और उसका इनकार कर दे तथा उसमें जो कु छ है उसके अनुसार कार्य न करे, तो आप कह दें: मैं तो के वलचेतावनी देने वालों में से हूँ, मैं तुम्हें अल्लाह की यातना के बारे में चेतावनी देता हूँ, और तुम्हें सीधे रास्ते पर चलाना मेरे हाथ में नहीं है।

وَقُلِ ٱلْحَمْدُ لِلَّهِ سَيُرِيكُمْ ءَايَـٰتِهِۦ فَتَعْرِفُونَهَا ۚ وَمَا رَبُّكَ بِغَـٰفِلٍ عَمَّا تَعْمَلُونَ ﴿٩٣﴾

और (ऐ रसूल!) आप कह दें: अल्लाह की अनगिनत नेमतों के लिए हर प्रकार की प्रशंसा उसी के लिए है। शीघ्र ही अल्लाह तुम्हें स्वंय तुम्हारे अंदर, तथा आकाश एवं धरती और जीविका में अपनी निशानियाँ दिखाएगा। तो तुम उन्हें ऐसे पहचान लोगे कि वह तुम्हें सच्चाई को मानने के लिए मार्गदर्शन करेगा। तथा तुम्हारा पालनहार उससे बेख़बर नहीं है जो कु छ तुम करते हो, बल्कि वह उससे अवगत है। उससे कु छ भी छिपा नहीं है और शीघ्र ही वह तुम्हें उसका बदला देगा। स्रोत:अल-मुख़्तसर फ़ी तफ़सीरिल क़ु रआनिल करीम

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