وَٱلْمُرْسَلَـٰتِ عُرْفًۭا ﴿١﴾
अल्लाह ने घोड़े की अयाल की तरह लगातार चलने वाली हवाओं की क़सम खाई है।
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मक्की · 50 आयतें
وَٱلْمُرْسَلَـٰتِ عُرْفًۭا ﴿١﴾
अल्लाह ने घोड़े की अयाल की तरह लगातार चलने वाली हवाओं की क़सम खाई है।
فَٱلْعَـٰصِفَـٰتِ عَصْفًۭا ﴿٢﴾
तथा अल्लाह ने बहुत तेज़ चलने वाली हवाओं की क़सम खाई है।
وَٱلنَّـٰشِرَٰتِ نَشْرًۭا ﴿٣﴾
और अल्लाह ने उन हवाओं की क़सम खाई है, जो बादलों को फै लाती हैं।
فَٱلْفَـٰرِقَـٰتِ فَرْقًۭا ﴿٤﴾
और अल्लाह ने उन फ़रिश्तों की क़सम खाई है, जो सत्य और असत्य के बीच अंतर करने वाली चीज़ के साथ उतरते हैं।
فَٱلْمُلْقِيَـٰتِ ذِكْرًا ﴿٥﴾
और अल्लाह ने उन फ़रिश्तों की क़समखाई है, जो वह़्य (प्रकाशना) के साथ उतरते हैं। عذرا أو نذرا
عُذْرًا أَوْ نُذْرًا ﴿٦﴾
जो वह़्य (प्रकाशना) लेकर उतरते हैं, अल्लाह की ओर से लोगों के उज़्र (बहाने) को समाप्त करने के लिए और लोगों को अल्लाह की यातना से सावधान करने के लिए। إنما توعدون لوقع
إِنَّمَا تُوعَدُونَ لَوَٰقِعٌۭ ﴿٧﴾
निःसंदेह मरणोपरांत पुनः जीवित होकर उठने, हिसाब और प्रतिफल का जो तुमसे वादा किया जाता है, निश्चय वह अनिवार्य रूप से घटित होने वाला है।
فَإِذَا ٱلنُّجُومُ طُمِسَتْ ﴿٨﴾
जब तारों के प्रकाश को मिटा दिया जाएगा और उनकी रोशनी चली जाएगी।
وَإِذَا ٱلسَّمَآءُ فُرِجَتْ ﴿٩﴾
और जब आकाश को फाड़ (खोल) दिया जाएगा, ताकि उससे फ़रिश्ते उतर सकें ।
وَإِذَا ٱلْجِبَالُ نُسِفَتْ ﴿١٠﴾
और जब पहाड़ों को उनके स्थानों से उखाड़ दिया जाएगा और उन्हें चूर्ण-विचूर्ण कर दिया जाएगा यहाँ तक कि वे धूलबन जाएँगे। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर
وَإِذَا ٱلرُّسُلُ أُقِّتَتْ ﴿١١﴾
और जब रसूलों को एक निर्धारित समय पर एकत्र किया जाएगा। لأى يوم أجلت
لِأَىِّ يَوْمٍ أُجِّلَتْ ﴿١٢﴾
एक महान दिन के लिए वे अपने समुदायों पर गवाही देने के लिए विलंबित किए गए हैं।
لِيَوْمِ ٱلْفَصْلِ ﴿١٣﴾
बंदों के बीच निर्णय के दिन के लिए। उसदिन स्पष्ट हो जाएगा कि कौन सत्यवादी है और कौन असत्यवादी तथा कौन सौभाग्यशाली है और कौन दुर्भाग्यशाली।
وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا يَوْمُ ٱلْفَصْلِ ﴿١٤﴾
और (ऐ रसूल) आपको किस चीज़ ने अवगत कराया कि निर्णय का दिन क्या है?! ويل يومئذ للمكذبين
وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ ﴿١٥﴾
उस दिन झुठलाने वालों के लिए बड़ा विनाश, यातना और क्षति है, जो रसूलों के अल्लाह की ओर से लाए हुए संदेश को झुठलाते हैं।
أَلَمْ نُهْلِكِ ٱلْأَوَّلِينَ ﴿١٦﴾
क्या हमने पिछले समुदायों को विनष्ट नहीं किया, जब उन्होंने अल्लाह का इनकार किया और उसके रसूलों को झुठलाया?
ثُمَّ نُتْبِعُهُمُ ٱلْـَٔاخِرِينَ ﴿١٧﴾
फिर हम उनके पीछे बाद के झुठलाने वालों को लगा देंगे, चुनाँचे जिस तरह हमने उन्हें नष्ट किया था, उसी तरह इन्हें भी नष्ट कर देंगे।
كَذَٰلِكَ نَفْعَلُ بِٱلْمُجْرِمِينَ ﴿١٨﴾
उन समुदायों को विनष्ट करने की तरह, हममुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लमके लाए हुए संदेश को झुठलाने वाले अपराधियों को भी विनष्ट कर देंगे। ويل يومئذ للمكذبين
وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ ﴿١٩﴾
उस दिन, उन लोगों के लिए विनाश, यातना और क्षति है, जो अपराधियों के लिए अल्लाह की सज़ा की धमकी को झुठलाते हैं।
أَلَمْ نَخْلُقكُّم مِّن مَّآءٍۢ مَّهِينٍۢ ﴿٢٠﴾
क्या हमने तुम्हें (ऐ लोगो) थोड़े-से तुच्छ पानी अर्थात् वीर्य की बूँद से पैदा नहीं किया है?! فجعلنهفى قرار مكين
فَجَعَلْنَـٰهُ فِى قَرَارٍۢ مَّكِينٍ ﴿٢١﴾
फिर हमने उस तुच्छ पानी को एक संरक्षित स्थान पर रख दिया, जो कि महिला का गर्भाशय है। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर إلى قدر م علوم
إِلَىٰ قَدَرٍۢ مَّعْلُومٍۢ ﴿٢٢﴾
एक ज्ञात अवधि तक, जो गर्भावस्था की अवधि है।
فَقَدَرْنَا فَنِعْمَ ٱلْقَـٰدِرُونَ ﴿٢٣﴾
फिर हमने नवजात शिशु का विवरण, भाग्य और रंग-रूप आदि नियत किया। तो हम यह सब कै से अच्छे नियत करने वाले हैं। ويل يومئذ للمكذبين
وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ ﴿٢٤﴾
उस दिन, अल्लाह की शक्ति को नकारने वालों के लिए, बड़ा विनाश, यातना और क्षति है।
أَلَمْ نَجْعَلِ ٱلْأَرْضَ كِفَاتًا ﴿٢٥﴾
क्या हमने धरती को सभी लोगों को समेटने वाली नहीं बनाया?
أَحْيَآءًۭ وَأَمْوَٰتًۭا ﴿٢٦﴾
वह उनके जीवित लोगों को इसतरह समेटती है कि वे उसपर रहते-बसते और उसे आबाद करते हैं, और उनके मृतकों को इसतरह कि वे उसमें दफन किए जाते हैं।
وَجَعَلْنَا فِيهَا رَوَٰسِىَ شَـٰمِخَـٰتٍۢ وَأَسْقَيْنَـٰكُم مَّآءًۭ فُرَاتًۭا ﴿٢٧﴾
तथा हमने उसमें मज़बूत, ऊँचे पहाड़ बनाए, जो उसे हिलने-डुलने से बचाते हैं और हमने तुम्हें (ऐ लोगो) मीठा पानी पिलाया। तो जिसने इन सब को पैदा किया, वह तुम्हें मरने के बाद दोबारा जीवित कर उठाने में विवश नहीं है। ويل يومئذ للمكذبين
وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ ﴿٢٨﴾
उस दिन, अल्लाह की ओर से मिली हुई नेमतों को झुठलाने वालों के लिए, बड़ा विनाश, यातना और क्षति है।
ٱنطَلِقُوٓا۟ إِلَىٰ مَا كُنتُم بِهِۦ تُكَذِّبُونَ ﴿٢٩﴾
अपने रसूलों के लाए हुए संदेश को झुठलाने वालों से कहा जाएगा: (ऐ झुठलाने वालो!) उसयातना की ओर चलो, जिसे तुमझुठलाया करते थे।
ٱنطَلِقُوٓا۟ إِلَىٰ ظِلٍّۢ ذِى ثَلَـٰثِ شُعَبٍۢ ﴿٣٠﴾
जहन्नम की आग के धुएँ की छाया की ओर चलो, जो तीन शाखाओं वाली है।
لَّا ظَلِيلٍۢ وَلَا يُغْنِى مِنَ ٱللَّهَبِ ﴿٣١﴾
उसमें न छाया की ठंडक होगी और न वह तुमसे आग की लपट और उसकी गर्मी को रोक सके गी। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर
إِنَّهَا تَرْمِى بِشَرَرٍۢ كَٱلْقَصْرِ ﴿٣٢﴾
वह आग चिंगारियाँ फें के गी। हर चिंगारी भवन की तरह विशालहोगी। كأنه جملت صفر
كَأَنَّهُۥ جِمَـٰلَتٌۭ صُفْرٌۭ ﴿٣٣﴾
मानो वे चिंगारियाँ, जिन्हें वह आग फें के गी, अपने कालेपन और विशालता में काले ऊँ टों की तरह होंगी। ويل يومئذ للمكذبين
وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ ﴿٣٤﴾
उस दिन अल्लाह की यातना को झुठलाने वालोंं के लिए बड़ी तबाही, यातना और क्षति है। هذا يوملا ينطقون
هَـٰذَا يَوْمُ لَا يَنطِقُونَ ﴿٣٥﴾
यह ऐसा दिन है, जिसमें वे कु छ नहीं बोलेंगे। ولا يؤذن لهم فيعتذرون
وَلَا يُؤْذَنُ لَهُمْ فَيَعْتَذِرُونَ ﴿٣٦﴾
और उन्हें अपने पालनहार के सामने अपने कु फ़्र और पापों के लिए कोई उज़्र (कारण) पेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी कि वे उसके पासकोई उज़्र पेश करें। ويل يومئذ للمكذبين
وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ ﴿٣٧﴾
उस दिन, उन लोगों के लिए विनाश, यातना और क्षति है, जो इस दिन की खबरों को झुठलाने वाले हैं।
هَـٰذَا يَوْمُ ٱلْفَصْلِ ۖ جَمَعْنَـٰكُمْ وَٱلْأَوَّلِينَ ﴿٣٨﴾
यह प्राणियों के बीच निर्णय का दिन है। हमने तुम्हें और पिछले समुदायों को एक ही स्थान पर एकत्र कर दिया है। فإن كان لكم كيد فكيدون
فَإِن كَانَ لَكُمْ كَيْدٌۭ فَكِيدُونِ ﴿٣٩﴾
अगर तुम्हारे पास कोई चाल है, जिसे चलकर तुम अल्लाह की यातना से मुक्ति पा सकते हो, तो मेरे विरुद्ध चल लो। ويل يومئذ للمكذبين
وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ ﴿٤٠﴾
उस दिन, निर्णय के दिन को झुठलाने वालों के लिए विनाश, यातना और क्षति है।
إِنَّ ٱلْمُتَّقِينَ فِى ظِلَـٰلٍۢ وَعُيُونٍۢ ﴿٤١﴾
निश्चय वे लोग, जो अपने पालनहार से, उसके आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर, डरते हैं, जन्नत के हरे-भरे पेड़ों की छाँवों और मीठे पानी के बहते हुए स्रोतों में होंगे। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर وفوكه مما يشتهون
وَفَوَٰكِهَ مِمَّا يَشْتَهُونَ ﴿٤٢﴾
तथा ऐसे फलों में होंगे, जिन्हें वे खाना पसंद करेगे।
كُلُوا۟ وَٱشْرَبُوا۟ هَنِيٓـًٔۢا بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ ﴿٤٣﴾
और उनसे कहा जाएगा: अच्छी चीजें खाओ और ऐसा सुखद पेय पियो, जिसमें कोई अप्रिय तत्व नहीं है। यह उन अच्छे कर्मों का प्रतिफल है, जो तुम दुनिया में किया करते थे।
إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِى ٱلْمُحْسِنِينَ ﴿٤٤﴾
हमने जो बदला तुम्हें दिया है, इसी तरह बदला हम उन लोगों को देते हैं, जो अच्छे कार्य करने वाले हैं। ويل يومئذ للمكذبين
وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ ﴿٤٥﴾
उस दिन, उन लोगों के लिए विनाश, यातना और नुक़सान है, जो उस चीज़ को झुठलाने वाले हैं, जो अल्लाह ने डरने वालों (परहेज़गारो) के लिया तैयार किया है। كلوا وتمتعوا قليلا إنكم م جرمون
كُلُوا۟ وَتَمَتَّعُوا۟ قَلِيلًا إِنَّكُم مُّجْرِمُونَ ﴿٤٦﴾
झुठलाने वालों से कहा जाएगा: इस दुनिया में थोड़े समय के लिए खा लो और जीवन के सुखों का आनंद ले लो। निश्चय तुमअल्लाह के साथ कु फ़्र करने और उसके रसूलों को झुठलाने के कारण अपराधी हो। ويل يومئذ للمكذبين
وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ ﴿٤٧﴾
उस दिन, उन लोगों के लिए विनाश, यातना और क्षति है, जो क़ियामत के दिन अपने बदले का इनकार करने वाले हैं।
وَإِذَا قِيلَ لَهُمُ ٱرْكَعُوا۟ لَا يَرْكَعُونَ ﴿٤٨﴾
और जब इन झुठलाने वालों से कहा जाता है: अल्लाह के लिए नमाज़ पढ़ो, तो वे उसके लिए नमाज़ नहीं पढ़ते। ويل يومئذ للمكذبين
وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ ﴿٤٩﴾
उस दिन विनाश, यातना और क्षति है उन झुठलाने वालों के लिए, जो रसूलों के अल्लाह के पाससे लाए हुए संदेश को झुठलाते हैं। فبأى حديث بعده يؤمنون
فَبِأَىِّ حَدِيثٍۭ بَعْدَهُۥ يُؤْمِنُونَ ﴿٥٠﴾
यदि वे अपने पालनहार की ओर से अवतरित इस क़ु रआन पर ईमान नहीं लाते, तो फिर उसके अलावा वे कौन सी बात पर ईमान लाएँगे?! स्रोत:अल-मुख़्तसर फ़ी तफ़सीरिल क़ु रआनिल करीम
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