عَمَّ يَتَسَآءَلُونَ ﴿١﴾
ये मुश्रिक लोग, रसूलसल्लल्लाहु अलैहि व सल्लमके उनकी ओर भेजे जाने के बाद, किसचीज़ के बारे में एक-दूसरे से पूछ रहे हैं?!
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मक्की · 40 आयतें
عَمَّ يَتَسَآءَلُونَ ﴿١﴾
ये मुश्रिक लोग, रसूलसल्लल्लाहु अलैहि व सल्लमके उनकी ओर भेजे जाने के बाद, किसचीज़ के बारे में एक-दूसरे से पूछ रहे हैं?!
عَنِ ٱلنَّبَإِ ٱلْعَظِيمِ ﴿٢﴾
वे एक-दूसरे से बहुत बड़ी ख़बर के विषय में पूछ रहे हैं। और वह उनके रसूलपर अवतरित यह क़ु रआन है, जिसमें दोबारा उठाए जाने की सूचना है।
ٱلَّذِى هُمْ فِيهِ مُخْتَلِفُونَ ﴿٣﴾
यह क़ु रआन है, जिसका वर्णन करने में उनका मतभेद है कि वह जादू है, या कविता, या ज्योतिष या पहले लोगों की कहानियाँ। كلا سيعلمون
كَلَّا سَيَعْلَمُونَ ﴿٤﴾
मामला वैसा नहीं है, जैसा वे समझते हैं। क़ु रआन को झुठलाने वाले ये लोग शीघ्र ही अपने झुठलाने के बुरे परिणामको जान लेंगे। ثم كلا سيعلمون
ثُمَّ كَلَّا سَيَعْلَمُونَ ﴿٥﴾
फिर उनके लिए इसकी पुष्टि हो जाएगी।
أَلَمْ نَجْعَلِ ٱلْأَرْضَ مِهَـٰدًۭا ﴿٦﴾
क्या हमने धरती को उनके लिए सपाट नहीं बनाया, जो उनके उसपर बसने के लिए उपयुक्त है?!
وَٱلْجِبَالَ أَوْتَادًۭا ﴿٧﴾
और हमने पहाड़ों को धरती के ऊपर मेखों की तरह बनाया, जो उसे हिलने-डुलने से रोकते हैं। وخلقنكم أ زوجا
وَخَلَقْنَـٰكُمْ أَزْوَٰجًۭا ﴿٨﴾
और (ऐ लोगो) हमने तुम्हें नर और मादा के रूप में पैदा किया। وجعلنا نومكم سباتا
وَجَعَلْنَا نَوْمَكُمْ سُبَاتًۭا ﴿٩﴾
और हमने तुम्हारी नींद को गतिविधि से रुकने का कारण बनाया, ताकि तुम आराम कर सको।
وَجَعَلْنَا ٱلَّيْلَ لِبَاسًۭا ﴿١٠﴾
और हमने रात को अपने अंधेरे के साथ तुम्हारे लिए आवरण बनाया, जैसे तुमकपड़े से अपनी शर्मगाहों को छिपाते हो। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर
وَجَعَلْنَا ٱلنَّهَارَ مَعَاشًۭا ﴿١١﴾
और हमने दिन को कमाने और रोज़ी तलाश करने का समय बनाया। وبنينا فوقكم سبعا شدادا
وَبَنَيْنَا فَوْقَكُمْ سَبْعًۭا شِدَادًۭا ﴿١٢﴾
और हमने तुम्हारे ऊपर मज़बूत तथा सुदृढ़ रूप से निर्मित सात आकाश बनाए। وجعلنا سراجا وهاجا
وَجَعَلْنَا سِرَاجًۭا وَهَّاجًۭا ﴿١٣﴾
और हमने सूरज को तेज़ जलने वाला और रौशनी देने वाला दीप बनाया।
وَأَنزَلْنَا مِنَ ٱلْمُعْصِرَٰتِ مَآءًۭ ثَجَّاجًۭا ﴿١٤﴾
और हमने उन बादलों से, जो बरसने ही वाले थे, बहुत बरसने वाला पानीبउतारा। لنخرج به ح اونباتا
لِّنُخْرِجَ بِهِۦ حَبًّۭا وَنَبَاتًۭا ﴿١٥﴾
ताकि हम उसके द्वारा विभिन्न प्रकार के अन्न और नाना प्रकार की वनस्पतियाँ उगाएँ। وجنت ألفافا
وَجَنَّـٰتٍ أَلْفَافًا ﴿١٦﴾
और उसके द्वारा ऐसे बाग़ उगाएँ, जो अपने पेड़ों की शाखाओं के आपस में गुथे होने के कारण गुंजान और घने हैं।
إِنَّ يَوْمَ ٱلْفَصْلِ كَانَ مِيقَـٰتًۭا ﴿١٧﴾
निःसंदेह प्राणियों के बीच निर्णय के दिन का एक समय निर्धारित है, जो टल नहीं सकता।
يَوْمَ يُنفَخُ فِى ٱلصُّورِ فَتَأْتُونَ أَفْوَاجًۭا ﴿١٨﴾
जिस दिन फ़रिश्ता सूर में दूसरी बार फूँ क मारेगा, तो (ऐ लोगो) तुम गिरोह के गिरोह चले आओगे।
وَفُتِحَتِ ٱلسَّمَآءُ فَكَانَتْ أَبْوَٰبًۭا ﴿١٩﴾
और आकाश को खोल दिया जाएगा, तो उसमें खुले दरवाज़ों की तरह छेद और दरारें हो जाएँगी।
وَسُيِّرَتِ ٱلْجِبَالُ فَكَانَتْ سَرَابًا ﴿٢٠﴾
और पहाड़ों को चलाया जाएगा, यहाँ तक कि वे बिखरे हुए धूल में बदल जाएँगे और मरीचिका की तरह हो जाएँगे। إ ن جهن م كانت مرصادا
إِنَّ جَهَنَّمَ كَانَتْ مِرْصَادًۭا ﴿٢١﴾
निश्चय जहन्नम घात लगाकर प्रतीक्षा में है। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर للط غين مٔابا
لِّلطَّـٰغِينَ مَـَٔابًۭا ﴿٢٢﴾
ज़ालिमों के लिए लौटने की जगह है, जहाँ वे लौटकर जाएँगे।
لَّـٰبِثِينَ فِيهَآ أَحْقَابًۭا ﴿٢٣﴾
जिसमें वे अंतहीन युगों और कालों तक रहेंगे। لا يذوقون فيها بردا ولا شرابا
لَّا يَذُوقُونَ فِيهَا بَرْدًۭا وَلَا شَرَابًا ﴿٢٤﴾
वे उसमें न ठंडी हवा का स्वाद ले सकें गे, जो उनसे दोज़ख़ की गर्मी को शांत कर सके , और न ही वे उसमें कोई आनंददायक पेय चखेंगे। إلا حميما وغس اقا
إِلَّا حَمِيمًۭا وَغَسَّاقًۭا ﴿٢٥﴾
वे अत्यंत गर्म पानी और जहन्नमके लोगों से बहने वाले मवाद के अलावा कु छ भी नहीं चखेंगे।
جَزَآءًۭ وِفَاقًا ﴿٢٦﴾
यह उनके कु फ़्र एवं गुमराही के अनुरूप बदला है। إن هم كانوالا يرجون حسابا
إِنَّهُمْ كَانُوا۟ لَا يَرْجُونَ حِسَابًۭا ﴿٢٧﴾
निश्चय वे दुनिया में इस बात से नहीं डरते थे कि अल्लाह आख़िरत में उनका हिसाब लेगा। क्योंकि वे मरणोपरांत दोबारा जीवित होने में विश्वास नहीं करते थे। अगर वे दोबारा ज़िंदा होने का भय रखते, तो अल्लाह पर अवश्य ईमान लाते और अच्छे कार्य करते। وكذ بوا بٔايتنا كذابا
وَكَذَّبُوا۟ بِـَٔايَـٰتِنَا كِذَّابًۭا ﴿٢٨﴾
तथा उन्होंने हमारे रसूल पर उतरने वाली हमारी आयतों को बुरी तरह झुठलाया। وكل شىء أح ص ينهكتبا
وَكُلَّ شَىْءٍ أَحْصَيْنَـٰهُ كِتَـٰبًۭا ﴿٢٩﴾
और हमने उनके हर कार्य को संरक्षित कर लिया है और उसे गिन रखा है। और वह उनके कर्मपत्रों में लिखा हुआ है। فذوقوا فلن نزيدكم إلا عذابا
فَذُوقُوا۟ فَلَن نَّزِيدَكُمْ إِلَّا عَذَابًا ﴿٣٠﴾
अब (ऐ सरकशो) तुम इस स्थायी यातना का मज़ा चखो। हम तुम्हारे लिए यातना पर यातना ही बढ़ाते रहेंगे। إن للمتقين مفازا
إِنَّ لِلْمُتَّقِينَ مَفَازًا ﴿٣١﴾
निश्चय जो लोग अपने पालनहार से, उसके आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर, डरते हैं, उनके लिए कामयाबी का एक स्थान है, जिसमें वे अपनी मुराद प्राप्त कर लेंगे और वह जन्नत है। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर
حَدَآئِقَ وَأَعْنَـٰبًۭا ﴿٣٢﴾
बाग़ और अंगूर हैं। وكواعب أ ترابا
وَكَوَاعِبَ أَتْرَابًۭا ﴿٣٣﴾
और समान आयु वाली नवयुवतियाँ हैं। وكأ سا دهاقا
وَكَأْسًۭا دِهَاقًۭا ﴿٣٤﴾
और शराब से भरे हुए जाम हैं। لا يسمعون فيها لغوا ولا كذبا
لَّا يَسْمَعُونَ فِيهَا لَغْوًۭا وَلَا كِذَّٰبًۭا ﴿٣٥﴾
वे जन्नत में कोई निरर्थक बात नहीं सुनेंगे और न कोई झूठ सुनेंगे और न वे एक-दूसरे को झुठलाएँगे।
جَزَآءًۭ مِّن رَّبِّكَ عَطَآءً حِسَابًۭا ﴿٣٦﴾
यह सब अल्लाह ने उन्हें अपने उपकार एवं एहसान स्वरूप ऐसा प्रदान दिया है जो व्याप्त एवं पर्याप्त है।
رَّبِّ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا ٱلرَّحْمَـٰنِ ۖ لَا يَمْلِكُونَ مِنْهُ خِطَابًۭا ﴿٣٧﴾
जो आकाशों और धरती का पालनहार तथा उन दोनों के बीच की समस्त चीज़ों का पालनहार है, जो दुनिया तथा आख़िरत में अत्यंत दयावान् है। धरती या आकाश में मोजूद लोगों में से किसी को भी उससे पूछने का अधिकार नहीं होगा, सिवाय इसके कि वह उन्हेंف अनुमति प्रदान कर दे।
يَوْمَ يَقُومُ ٱلرُّوحُ وَٱلْمَلَـٰٓئِكَةُ صَفًّۭا ۖ لَّا يَتَكَلَّمُونَ إِلَّا مَنْ أَذِنَ لَهُ ٱلرَّحْمَـٰنُ وَقَالَ صَوَابًۭا ﴿٣٨﴾
जिस दिन जिबरील और फ़रिश्ते पंक्तिबद्ध खड़े होंगे, वे किसी की सिफ़ारिश के लिए ज़बान नहीं खोलेंगे, सिवाय उसके जिसके लिए अत्यंत दयावान् (अल्लाह) सिफ़ारिश करने की अनुमति प्रदान कर देगा, और वह ठीक बात कहेगा, जैसे तौह़ीद (एके श्वरवाद) का कलिमा।
ذَٰلِكَ ٱلْيَوْمُ ٱلْحَقُّ ۖ فَمَن شَآءَ ٱتَّخَذَ إِلَىٰ رَبِّهِۦ مَـَٔابًا ﴿٣٩﴾
यह (दिन) जिसका तुम्हारे सामने वर्णन हुआ, वह दिन है जिसके आने में कोई संदेह नहीं है। अतः जो उस दिन अल्लाह की यातना से बचना चाहता है, वह अपने पालनहार को प्रसन्न करने वाले कार्य करके उसके लिए रास्ता बना ले।
إِنَّآ أَنذَرْنَـٰكُمْ عَذَابًۭا قَرِيبًۭا يَوْمَ يَنظُرُ ٱلْمَرْءُ مَا قَدَّمَتْ يَدَاهُ وَيَقُولُ ٱلْكَافِرُ يَـٰلَيْتَنِى كُنتُ تُرَٰبًۢا ﴿٤٠﴾
हमने (ऐ लोगो) तुम्हें एक ऐसी यातना से सावधान कर दिया है, जो निकट ही घटित होने वाली है। जिस दिन मनुष्य इस दुनिया में अपने किए हुए काम को देख लेगा, और काफ़िर व्यक्ति यातना से मुक्ति की कामना करते हुए कहेगा: ऐ काश कि मैं जानवरों की तरह मिट्टी हो जाता! यह उस समय कहेगा, जब क़ियामत के दिन जानवरों से कहा जाएगा: तुम मिट्टी हो जाओ। स्रोत:अल-मुख़्तसर फ़ी तफ़सीरिल क़ु रआनिल करीम
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