होमतफ़सीरAs-Saaffaat (37)

तफ़सीर As-Saaffaat (37) — الصافات

मक्की · 182 आयतें

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وَٱلصَّـٰٓفَّـٰتِ صَفًّۭا ﴿١﴾

मैं उन फ़रिश्तों की क़समखाता हूँ जो अपनी इबादत में एक दूसरे से मिलकर पंक्तिबद्ध खड़े होते हैं।

فَٱلزَّٰجِرَٰتِ زَجْرًۭا ﴿٢﴾

और मैं उन फ़रिश्तों की क़समखाता हूँ, जो बादलों को डाँटते हैं और उन्हें हाँक कर वहाँ ले जाते हैं, जहाँ अल्लाह उन्हें बरसाना चाहाता है।

فَٱلتَّـٰلِيَـٰتِ ذِكْرًا ﴿٣﴾

तथा मैं उन फ़रिश्तों की क़सम खाता हूँ, जो अल्लाह की वाणी की तिलावत करते हैं। إن إلهكم لوحد

إِنَّ إِلَـٰهَكُمْ لَوَٰحِدٌۭ ﴿٤﴾

निःसंदेह (ऐ लोगो!) तुम्हारा सत्य पूज्य निश्चय एक ही है, जिसका कोई साझी नहीं और वह अल्लाह है।

رَّبُّ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا وَرَبُّ ٱلْمَشَـٰرِقِ ﴿٥﴾

वह आकाशों का स्वामी, धरती का स्वामी और उन दोनों के बीच मौजूद सभी चीज़ों का स्वामी है, तथा सूर्य का स्वामी है उसके साल भर उदय होने और यास्त होने के स्थानों में।

إِنَّا زَيَّنَّا ٱلسَّمَآءَ ٱلدُّنْيَا بِزِينَةٍ ٱلْكَوَاكِبِ ﴿٦﴾

हमने पृथ्वी के निकटतमआकाश को एक सुंदर सजावट के साथ सुशोभित किया है, जो कि वे सितारे हैं जो देखने में चमचमाते रत्नों की तरह हैं। وحفظا من كل شيطن مارد

وَحِفْظًۭا مِّن كُلِّ شَيْطَـٰنٍۢ مَّارِدٍۢ ﴿٧﴾

तथा हमने निचले आकाश को अल्लाह की आज्ञाकारिता से निकल जाने वाले हर विद्रोही शैतान से सितारों के साथ सुरक्षित किया है। चुनाँचे उसे तारों के द्वारा मारा जाता है।

لَّا يَسَّمَّعُونَ إِلَى ٱلْمَلَإِ ٱلْأَعْلَىٰ وَيُقْذَفُونَ مِن كُلِّ جَانِبٍۢ ﴿٨﴾

ये शैतान आसमान में मौजूद फ़रिश्तों की बात नहीं सुन सकते, जब वे उस बारे में बात करते हैं जो उनका पालनहार अपने विधान या अपनी नियति से संबंधित उनकी ओर वह़्य करता है, और उन्हें हर तरफ़ से उल्काओं (आग के दहकते हुए अंगारों) के द्वारा मारा जाता है।

دُحُورًۭا ۖ وَلَهُمْ عَذَابٌۭ وَاصِبٌ ﴿٩﴾

उन्हें फ़रिश्तों की बात सुनने से भगाने और दूर रखने के लिए। तथा उनके लिए आखिरत में दर्दनाक स्थायी यातना है, जो कभी खत्म नहीं होगी। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

إِلَّا مَنْ خَطِفَ ٱلْخَطْفَةَ فَأَتْبَعَهُۥ شِهَابٌۭ ثَاقِبٌۭ ﴿١٠﴾

परंतु यह कि कोई शैतान अचानक किसी बात को उचक ले जाए। जो कि वह बात होती है, जिसके विषय में फ़रिश्ते आपस में बातचीत करते हैं और उनके बीच उसकी चर्चा होती है और उसकी जानकारी धरती के लोगों तक नहीं पहुँची होती है। तो ऐसी स्थिति में एक उज्ज्वल उल्का उसका पीछा करता है और उसे जला देता है। कभी तो वह शैतान उल्का के द्वारा जलाए जाने से पहले उस बात को अपने भाइयों तक पहुँचा देता है। फिर वह बात काहिनों तक पहुँच जाती है, जो उसमें सौ झूठ मिला देते हैं।

فَٱسْتَفْتِهِمْ أَهُمْ أَشَدُّ خَلْقًا أَم مَّنْ خَلَقْنَآ ۚ إِنَّا خَلَقْنَـٰهُم مِّن طِينٍۢ لَّازِبٍۭ ﴿١١﴾

अतः (ऐ मुहम्मद!) मरणोपरांत पुनः उठाए जाने का इनकार करने वाले इन काफ़िरों से पूछें कि क्या वे हमारी पैदा की हुई रचनाओं जैसे आकाशों, धरती और फ़रिश्तों आदि से भी अधिक कठिन रचना वाले, शक्तिशाली शरीर वाले और बड़े-बड़े अंगों वाले हैं? निःसंदेह हमने उन्हें चिपचिपी मिट्टी से पैदा किया है। तो फिर वे मरणोपरांत पुनर्जीवित किए जाने का इनकार कै से करते हैं, जबकि वे एक कमज़ोर चीज़ अर्थात् चिपकने वाली मिट्टी से पैदा किए गए हैं? بل عجبت ويسخرون

بَلْ عَجِبْتَ وَيَسْخَرُونَ ﴿١٢﴾

बल्कि (ऐ मुहम्मद!) आपको अल्लाह के सामर्थ्य और उसके अपनी रचना के मामलों का प्रबंधन करने पर आश्चर्य हो रहा है, तथा आपको मुश्रिकों के मरणोपरांत पुनर्जीवित किए जाने का इनकार करने पर आश्चर्य होता है, और इन मुश्रिकों का हाल यह है कि वे मरणोपरांत पुनर्जीवित किए जाने को झुठलाने की तीव्रता से, उसके बारे में आप जो कु छ कहते हैं, उसका मज़ाक उड़ाते हैं। وإذا ذكروالا يذكرون

وَإِذَا ذُكِّرُوا۟ لَا يَذْكُرُونَ ﴿١٣﴾

और जब इन बहुदेववादियों को कोई उपदेश दिया जाता है, तो वे अपने दिलों की कठोरता के कारण उससे उपदेश ग्रहण नहीं करते और उससे लाभ नहीं उठाते। وإ ذا رأوا ءاية يستسخرون

وَإِذَا رَأَوْا۟ ءَايَةًۭ يَسْتَسْخِرُونَ ﴿١٤﴾

और जब वे नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की कोई निशानी देखते हैं, जो आपके सच्चे होने को दर्शाती है, तो उसका खूब मज़ाक़ उड़ाते हैं और उस पर आश्चर्य प्रकट करते हैं।

وَقَالُوٓا۟ إِنْ هَـٰذَآ إِلَّا سِحْرٌۭ مُّبِينٌ ﴿١٥﴾

तथा वे कहते हैं: मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जो कु छ लेकर आए हैं, वह स्पष्ट जादू के अलावा कु छ नहीं है। أءذا متنا وكنا ترابا وعظما أءنا لمبعوثون

أَءِذَا مِتْنَا وَكُنَّا تُرَابًۭا وَعِظَـٰمًا أَءِنَّا لَمَبْعُوثُونَ ﴿١٦﴾

क्या जब हम मर गए और मिट्टी तथा सड़ी-गली हड्डियाँ हो गए, तो क्या उसके बाद भी हम पुनर्जीवित करके अवश्य उठाए जाएँगे?! इसकी संभावना तो नहीं है।

أَوَءَابَآؤُنَا ٱلْأَوَّلُونَ ﴿١٧﴾

और क्या हमारे पहले बाप-दादा भी दोबारा उठाए जाएँगे, जो हमसे पहले मर चुके हैं?! قل نعم وأنتمدخرون

قُلْ نَعَمْ وَأَنتُمْ دَٰخِرُونَ ﴿١٨﴾

(ऐ मुहम्मद!) आप उन्हें जवाब देते हुए कह दीजिए: हाँ, तुम मिट्टी और सड़ी-गली हड्डियाँ होने के बाद भी उठाए जाओगे और तुम्हारे पहले बाप-दादा भी उठाए जाएँगे। तुम सभी को इस हाल में उठाया जाएगा कि तुम तुच्छ और अपमानित होगे। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर فإنما هى زجرة وحدة فإذا هم ينظرون

فَإِنَّمَا هِىَ زَجْرَةٌۭ وَٰحِدَةٌۭ فَإِذَا هُمْ يَنظُرُونَ ﴿١٩﴾

वह तो मात्र सूर (नरसिंघा) में मारी जाने वाली एक फूँ क (दूसरी फूँ क) होगी, तो अचानक वे सभी लोग क़ियामत के दिन के भयावह दृृश्यों को देख रहे होंगे और इस बात की प्रतीक्षा कर रहे होंगे कि अल्लाह उनके साथ क्या करने वाला है।

وَقَالُوا۟ يَـٰوَيْلَنَا هَـٰذَا يَوْمُ ٱلدِّينِ ﴿٢٠﴾

तथा मरणोपरांत पुनर्जीवन को झुठलाने वाले अनेके श्वरवादी कहेंगे: हाय हमारा विनाश! यह तो बदले का दिन है, जिसमें अल्लाह अपने बंदों को उनके दुनिया के जीवन में किए हुए कार्यों का बदला देगा।

هَـٰذَا يَوْمُ ٱلْفَصْلِ ٱلَّذِى كُنتُم بِهِۦ تُكَذِّبُونَ ﴿٢١﴾

तो उनसे कहा जाएगा: यह बंदों के बीच निर्णय का वही दिन है, जिसका तुम दुनिया में इनकार किया करते थे और उसे झुठलाया करते थे।

۞ ٱحْشُرُوا۟ ٱلَّذِينَ ظَلَمُوا۟ وَأَزْوَٰجَهُمْ وَمَا كَانُوا۟ يَعْبُدُونَ ﴿٢٢﴾

مِن دُونِ ٱللَّهِ فَٱهْدُوهُمْ إِلَىٰ صِرَٰطِ ٱلْجَحِيمِ ﴿٢٣﴾

उस दिन फ़रिश्तों से कहा जाएगा: उन बहुदेववादियों को इकट्ठा करो, जो शिर्क के द्वारा अपने आप पर ज़ुल्म करने वाले हैं, उन्हें तथा उनके जैसे अन्य शिर्क करने वालों और झुठलाने में उनका साथ देने वालों को, तथा उन मूर्तियों को भी, जिनकी वे अल्लाह को छोड़कर पूजा किया करते थे। फिर उन्हें जहन्नम का रास्ता दिखा दो और उसकी ओर हाँककर ले जाओ। क्योंकि वही उनका ठिकाना है।

وَقِفُوهُمْ ۖ إِنَّهُم مَّسْـُٔولُونَ ﴿٢٤﴾

और उन्हें जहन्नममें दाखिलकरने से पहले हिसाब के लिए रोको। क्योंकि उनसे पूछताछ की जानी है। फिर उसके बाद उन्हें जहन्नमकी ओर हाँककर ले जाओ। ما لكم لا تناصرون

مَا لَكُمْ لَا تَنَاصَرُونَ ﴿٢٥﴾

उन्हें फटकारते हुए कहा जाएगा: तुम्हें क्या हो गया कि तुमएक-दूसरे की मदद नहीं करते, जिस तरह कि तुमदुनिया में एक-दूसरे की मदद किया करते थे और यह दावा करते थे कि तुम्हारी मूर्तियाँ तुम्हारी मदद करेंगी?!

بَلْ هُمُ ٱلْيَوْمَ مُسْتَسْلِمُونَ ﴿٢٦﴾

बल्कि, आज वे अल्लाह के आदेश के प्रति आज्ञाकारी और विनीत हैं। वे अपनी लाचारी और उपाय की कमी के कारण एक-दूसरे का समर्थन नहीं कर रहे हैं।

وَأَقْبَلَ بَعْضُهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍۢ يَتَسَآءَلُونَ ﴿٢٧﴾

और वे एक-दूसरे को संबोधित करके आपस में बुरा-भला कहेंगे और झगड़ा करेंगे, जबकि उस दिन एक-दूसरे को बुरा-भला कहने और आपस में झगड़ा करने से कु छ लाभ नहीं होगा। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

قَالُوٓا۟ إِنَّكُمْ كُنتُمْ تَأْتُونَنَا عَنِ ٱلْيَمِينِ ﴿٢٨﴾

उस दिन अनुयायी उन लोगों से जिनका वे अनुसरण किया करते थे, कहेंगे: (ऐ हमारे प्रमुखो!) तुम हमारे पास धर्म और सत्य का चोला पहनकर आते थे और हमारे लिए अल्लाह के साथ कु फ़्र एवं शिर्क और पाप करने को सुंदर बनाकर पेश करते थे और हमें उससत्य से घृणित कर देते थे, जो रसूलगण अल्लाह के पास से लाए थे। قالوا بل لم تكونوامؤمنين

قَالُوا۟ بَل لَّمْ تَكُونُوا۟ مُؤْمِنِينَ ﴿٢٩﴾

जिन लोगों का अनुसरण किया गया था, वे अनुसरण करने वालों से कहेंगे: मामला ऐसा नहीं है - जैसा तुमने दावा किया है - सच्चाई यह है कि तुम कु फ़्र पर थे, तुम ईमान लाने वाले नहीं थे। बल्कि, तुमइनकार करने वाले थे।

وَمَا كَانَ لَنَا عَلَيْكُم مِّن سُلْطَـٰنٍۭ ۖ بَلْ كُنتُمْ قَوْمًۭا طَـٰغِينَ ﴿٣٠﴾

ऐ अनुयायियो! हमारा तुम पर कोई ज़ोर नहीं चलता था कि हम तुम्हें कु फ़्र, शिर्क और गुनाह की राह में ज़बरदस्ती डाल देते। बल्कि तुम खुद ही कु फ़्र और गुमराही में सीमा पार करने वाले थे।

فَحَقَّ عَلَيْنَا قَوْلُ رَبِّنَآ ۖ إِنَّا لَذَآئِقُونَ ﴿٣١﴾

فَأَغْوَيْنَـٰكُمْ إِنَّا كُنَّا غَـٰوِينَ ﴿٣٢﴾

जहन्नम को तुझसे और उन तमाम लोगों से भर दूँगा, जो उनमें से तेरा अनुसरण करेंगे।'' [सूरत साद: 85] अतः हम - अनिवार्य रूप से - वह यातना चखनने वाले हैं, जिसका हमारे पालनहार ने वादा किया था। فأغوينكم إنا كنا غوين इसलिए हमने तुम्हें गुमराही और कु फ़्र की ओर बुलाया। क्योंकि हमख़ुद हिदायत की राह से भटके हुए थे।

فَإِنَّهُمْ يَوْمَئِذٍۢ فِى ٱلْعَذَابِ مُشْتَرِكُونَ ﴿٣٣﴾

क़ियामत के दिन अनुसरण करने वाले और जिनका वे अनुसरण करते थे, सब के सब यातना में सहभागी होंगे।

إِنَّا كَذَٰلِكَ نَفْعَلُ بِٱلْمُجْرِمِينَ ﴿٣٤﴾

वास्तव में, जैसा हमने इन लोगों के साथ किया है कि उन्हें यातना चखाई है, वैसे ही हमदूसरे अपराधियों के साथ भी करते हैं।

إِنَّهُمْ كَانُوٓا۟ إِذَا قِيلَ لَهُمْ لَآ إِلَـٰهَ إِلَّا ٱللَّهُ يَسْتَكْبِرُونَ ﴿٣٥﴾

इन मुश्रिकों से जब दुनिया में कहा जाता था कि अल्लाह के सिवा कोई पूज्य नहीं, ताकि उसकी अपेक्षाओं के अनुसार कार्य करें और उसके विपरीत चीज़ों को छोड़ दें, तो वे सत्य से अभिमान और घमंड करते हुए उसे क़बूलकरने और मानने से इनकार कर देते थे।

وَيَقُولُونَ أَئِنَّا لَتَارِكُوٓا۟ ءَالِهَتِنَا لِشَاعِرٍۢ مَّجْنُونٍۭ ﴿٣٦﴾

और वे अपने कु फ़्र के लिए तर्क देते हुए कहते थे: क्या हम अपने देवताओं की पूजा एक दीवाने कवि के कहने पर छोड़ दें?! ऐसा कहने से उनका तात्पर्य अल्लाह के रसूलसल्लल्लाहु अलैहि व सल्लमथे। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

بَلْ جَآءَ بِٱلْحَقِّ وَصَدَّقَ ٱلْمُرْسَلِينَ ﴿٣٧﴾

वास्तव में, उन्होंने बहुत बड़ा झूठा आरोप लगाया है। क्योंकि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम दीवाने या कवि नहीं थे। बल्कि आप वह क़ु रआन लेकर आए हैं, जो अल्लाह को एक मानने (एके श्वरवाद) और उसके रसूल का अनुसरण करने का आह्वान करता है। तथा रसूलगण अल्लाह के पास से जो तौहीद (एके श्वरवाद) और आख़िरत का प्रमाण लेकर आए थे, उसमें उनकी पुष्टि की है और किसी भी चीज़ में उनका विरोध नहीं किया है।

إِنَّكُمْ لَذَآئِقُوا۟ ٱلْعَذَابِ ٱلْأَلِيمِ ﴿٣٨﴾

(ऐ मुश्रिको!) तुमनिश्चय अपने कु फ़्र और रसूलों को झुठलाने के कारण क़ियामत के दिन दर्दनाक यातना चखने वाले हो। وما تجزون إلا ما كنتمتعملون

وَمَا تُجْزَوْنَ إِلَّا مَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ ﴿٣٩﴾

(ऐ मुश्रिको!) तुम्हें के वलउसी का बदला दिया जाएगा, जो तुमदुनिया में अल्लाह के साथ कु फ़्र और गुनाह के कार्य किया करते थे।

إِلَّا عِبَادَ ٱللَّهِ ٱلْمُخْلَصِينَ ﴿٤٠﴾

लेकिन अल्लाह के वे मोमिन बंदे, जिन्हें अल्लाह ने अपनी इबादत के लिए ख़ालिस (विशुद्ध) कर लिया है और उन्होंने खालिस अल्लाह की इबादत की है, वे इस यातना से छु टकारा पाने वाले हैं।

أُو۟لَـٰٓئِكَ لَهُمْ رِزْقٌۭ مَّعْلُومٌۭ ﴿٤١﴾

उन ख़ालिस (विशुद्ध) किए हुए बंदों के लिए अल्लाह की ओर से प्रदान की हुई रोज़ी है, जिसका पाकीज़ा, अच्छा और स्थायी होना सर्वज्ञात है।

فَوَٰكِهُ ۖ وَهُم مُّكْرَمُونَ ﴿٤٢﴾

वह जीविका विभिन्न प्रकार के फल हैं, जो उन सबसे अच्छी चीज़ों में से होंगे जो वे खाना चाहेंगे हैं और जिसकी वे इच्छा करेंगे। इससे बढ़कर, वे दर्जों की बुलंदी और अल्लाह के सम्मानित चेहरे को देखने की प्रतिष्ठा से सम्मानित किए गए होंगे।

فِى جَنَّـٰتِ ٱلنَّعِيمِ ﴿٤٣﴾

यह सब उन्हें स्थायी एवं निरंतर नेमत के बागों में प्राप्त होगा, जो न कभी बाधित होगी और न समाप्त होगी। عل سرر متقبلين

عَلَىٰ سُرُرٍۢ مُّتَقَـٰبِلِينَ ﴿٤٤﴾

वे तख़्तों पर आमने-सामने बैठे होंगे और एक-दूसरे को देख रहे होंगे। يطاف عليهم بكأس من معين

يُطَافُ عَلَيْهِم بِكَأْسٍۢ مِّن مَّعِينٍۭ ﴿٤٥﴾

उनपर ऐसी शराब के प्याले फिराए जाएँगे, जो बहते पानी की तरह साफ़ होगी।

بَيْضَآءَ لَذَّةٍۢ لِّلشَّـٰرِبِينَ ﴿٤٦﴾

उसका रंग सफ़े द होगा। जो उसे पिएगा, भरपूर आनंद उठाएगा। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर لا فيها غول ولا هم عنها ينزفون

لَا فِيهَا غَوْلٌۭ وَلَا هُمْ عَنْهَا يُنزَفُونَ ﴿٤٧﴾

वह दुनिया की शराब की तरह नहीं होगी। चुनाँचे उसमें ऐसा नशा नहीं होगा जो आदमी को मदहोश कर दे। तथा उसका सेवन करने वाले के सिर में दर्द नहीं होगा। बल्कि उसके पीने वाले का शरीर और उसकी बुद्धि सलामत रहेगी।

وَعِندَهُمْ قَـٰصِرَٰتُ ٱلطَّرْفِ عِينٌۭ ﴿٤٨﴾

और उनके पास जन्नत में पवित्र औरतें होंगी, जिनकी नज़रें उनके पतियों के सिवा किसी की ओर नहीं उठेंगी, तथा सुंदर आँखों वाली होंगी। كأن هن بيض مكنون

كَأَنَّهُنَّ بَيْضٌۭ مَّكْنُونٌۭ ﴿٤٩﴾

मानो वे पीलापन लिए हुए अपने रंगों की सफे दी में पक्षी का संरक्षित अंडा हों, जिसे हाथों ने न छु आ हो।

فَأَقْبَلَ بَعْضُهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍۢ يَتَسَآءَلُونَ ﴿٥٠﴾

फिर कु छ जन्नती दूसरे जन्नतियों से उनके अतीत और दुनिया में उनके साथ पेश आने वाले हालात के बारे में पूछेंगे।

قَالَ قَآئِلٌۭ مِّنْهُمْ إِنِّى كَانَ لِى قَرِينٌۭ ﴿٥١﴾

इन ईमान वालों में से एक कहने वाला कहेगा: दुनिया में मेरा एक साथी था, जो दोबारा जीवित होकर उठने का इनकार करता था।

يَقُولُ أَءِنَّكَ لَمِنَ ٱلْمُصَدِّقِينَ ﴿٥٢﴾

वह मुझसे इनकार करते हुए और व्यंग्यात्मक रूप से कहा करता था: क्या - ऐ मेरे दोस्त - तू भी उन लोगों में से है जो मृतकों के फिर से जीवित किए जाने में विश्वास करते हैं? أءذا متنا وكنا ترابا وعظما أءنا لمدينون

أَءِذَا مِتْنَا وَكُنَّا تُرَابًۭا وَعِظَـٰمًا أَءِنَّا لَمَدِينُونَ ﴿٥٣﴾

क्या जब हम मर गए और हम सड़ी-गली हड्डियाँ हो गए, तो क्या हम अवश्य दोबारा उठाए जाएँगे और हमें हमारे दुनिया में किए हुए कार्यों का बदला दिया जाएगा? قال هل أنتم مط لعون

قَالَ هَلْ أَنتُم مُّطَّلِعُونَ ﴿٥٤﴾

उसका ईमान वाला साथी अपने जन्नती दोस्तों से कहेगा: मेरे साथ झाँको, ताकि हम उस साथी का अंजाम देखें, जो मरने के बाद दोबारा उठाए जाने का इनकार किया करता था?

فَٱطَّلَعَ فَرَءَاهُ فِى سَوَآءِ ٱلْجَحِيمِ ﴿٥٥﴾

चुनाँचे वह झांककर देखेगा, तो अपने साथी को जहन्नम के बीचों-बीच देखेगा।

قَالَ تَٱللَّهِ إِن كِدتَّ لَتُرْدِينِ ﴿٥٦﴾

वह कहेगा: अल्लाह की क़सम! (ऐ साथी!) तू क़रीब था कि मुझे कु फ़्र और मरने के बाद दोबारा जीवित होकर उठने के इनकार की ओर बुलाकर मुझे जहन्नममें दाख़िल करके , नष्ट कर देता। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

وَلَوْلَا نِعْمَةُ رَبِّى لَكُنتُ مِنَ ٱلْمُحْضَرِينَ ﴿٥٧﴾

अगर अल्लाह ने ईमान के लिए मार्गदर्शन और उसका सामर्थ्य प्रदान करके मुझपर उपकार न किया होता, तो मैं भी तेरी तरह यातना में उपस्थित किए गए लोगों में शामिल होता। أفما نحن بميتين

أَفَمَا نَحْنُ بِمَيِّتِينَ ﴿٥٨﴾

तो हम (जन्नत वाले) कभी मरने वाले नहीं हैं।

إِلَّا مَوْتَتَنَا ٱلْأُولَىٰ وَمَا نَحْنُ بِمُعَذَّبِينَ ﴿٥٩﴾

दुनिया के जीवन में हमारी पहली मौत के अलावा। बल्कि हमजन्नत में हमेशा के लिए रहेंगे। तथा हमे काफ़िरों की तरह कोई यातना नहीं दी जाएगी।

إِنَّ هَـٰذَا لَهُوَ ٱلْفَوْزُ ٱلْعَظِيمُ ﴿٦٠﴾

यह बदला जो हमारे पालनहार ने हमें दिया है (अर्थात् जन्नत में प्रवेश करना, उसमें हमेशा के लिए रहना और नरक की आग से सुरक्षित रहना) बहुत बड़ी सफलता है, जिसके बराबर कोई सफलता नहीं हो सकती।

لِمِثْلِ هَـٰذَا فَلْيَعْمَلِ ٱلْعَـٰمِلُونَ ﴿٦١﴾

इसी जैसे बड़े बदले के लिए कार्य करने वालों को कार्य करना चाहिए। क्योंकि यही लाभदायक व्यापार है।

أَذَٰلِكَ خَيْرٌۭ نُّزُلًا أَمْ شَجَرَةُ ٱلزَّقُّومِ ﴿٦٢﴾

क्या यह उल्लेख की गई नेमत जिसे अल्लाह ने अपने उन बंदों के लिए तैयार कर रखी है, जिन्हें अपने आज्ञापालन के लिए विशिष्ट कर लिया है, अधिक अच्छी और बेहतर स्थिति एवं गरिमा वाली है, या क़ु रआन में शापित ज़क़्क़ू म (थोहड़) का पेड़, जो कि काफ़िरों का भोजन है, जो न मोटा करेगा और न भूख मिटाएगा। إنا جعلنها فتنة للظ لمين

إِنَّا جَعَلْنَـٰهَا فِتْنَةًۭ لِّلظَّـٰلِمِينَ ﴿٦٣﴾

हमने इस पेड़ को एक परीक्षा बनाया है, जिसके द्वारा उन लोगों को परीक्षा में डाला जाता है, जो कु फ़्र और गुनाहों के द्वारा अत्याचार करने वाले हैं। जैसा कि उन्होंने कहा: आग पेड़ों को खा जाती है; इसलिए यह संभव नहीं है कि आग में पेड़ उगे।

إِنَّهَا شَجَرَةٌۭ تَخْرُجُ فِىٓ أَصْلِ ٱلْجَحِيمِ ﴿٦٤﴾

थोहड़ का पेड़ गंदी जगह में उगने वाला पेड़ है। चुनाँचे वह जहन्नमके तलमें उगता है।

طَلْعُهَا كَأَنَّهُۥ رُءُوسُ ٱلشَّيَـٰطِينِ ﴿٦٥﴾

इसका जो फल निकलता है, वह देखने में बद्सूरत होता है, मानो वह शैतानों का सिर हो, और दृष्टि की कु रूपता अंतरमन की कु रूपता का प्रमाण है। और इसका अर्थ यह है कि इसके फलका स्वाद बहुत खराब है। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

فَإِنَّهُمْ لَـَٔاكِلُونَ مِنْهَا فَمَالِـُٔونَ مِنْهَا ٱلْبُطُونَ ﴿٦٦﴾

काफ़िर लोग निश्चय उसका कड़वा, बदसूरत फल खाएँगे और उससे अपने खाली पेट भरेंगे। ثم إن لهم عليها لشوبا من حميم

ثُمَّ إِنَّ لَهُمْ عَلَيْهَا لَشَوْبًۭا مِّنْ حَمِيمٍۢ ﴿٦٧﴾

फिर उन्हें उन फलों को खाने के बाद पीने के लिए जो चीज़ दी जाएगी, वह एक बदसूरत, गर्म मिश्रण होगा।

ثُمَّ إِنَّ مَرْجِعَهُمْ لَإِلَى ٱلْجَحِيمِ ﴿٦٨﴾

फिर उसके बाद उन्हें जहन्नम की यातना की ओर लौटाया जाएगा। चुनाँचे वे एक यातना से दूसरी यातना की ओर स्थानांतरित होते रहेंगे।

إِنَّهُمْ أَلْفَوْا۟ ءَابَآءَهُمْ ضَآلِّينَ ﴿٦٩﴾

इन काफ़िरों ने अपने बाप-दादा को हिदायत के रास्ते से भटका हुआ पाया, और उनकी देखा-देखी उन्हीं के रास्ते पर चलपड़े। उन्होंने प्रमाण से कोई सरोकार नहीं रखा।

فَهُمْ عَلَىٰٓ ءَاثَـٰرِهِمْ يُهْرَعُونَ ﴿٧٠﴾

तो वे गुमराही में अपने बाप-दादों के पदचिह्नों का अनुसरण करते हुए दौड़े चले जा रहे हैं।

وَلَقَدْ ضَلَّ قَبْلَهُمْ أَكْثَرُ ٱلْأَوَّلِينَ ﴿٧١﴾

निश्चय इनसे पहले भी अगले लोगों में से अधिकांश लोग गुमराह हुए हैं। सो (ऐ रसूल!) आपकी जाति के लोग गुमराह होने वाले पहले व्यक्ति नहीं हैं। ولقد أرسلنا فيهم منذرين

وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا فِيهِم مُّنذِرِينَ ﴿٧٢﴾

तथा हमने उन पहले समुदायों में भी रसूलभेजे, जो उन्हें अल्लाह की यातना से डराते थे, परंतु उन्होंने इनकार कर दिया।

فَٱنظُرْ كَيْفَ كَانَ عَـٰقِبَةُ ٱلْمُنذَرِينَ ﴿٧٣﴾

तो (ऐ रसूल!) देखो कि उन लोगों का अंत कै से हुआ, जिन्हें उनके रसूलों ने डराया, लेकिन उन्होंने उनकी बात नहीं मानी। निःसंदेह उनका अंजामहमेशा के लिए जहन्नममें प्रवेश करना था। यह सब उनके कु फ़्र करने और रसूलों को झुठलाने के कारण हुआ।

إِلَّا عِبَادَ ٱللَّهِ ٱلْمُخْلَصِينَ ﴿٧٤﴾

परंतु जिन्हें अल्लाह ने अपने ऊपर ईमान लाने के लिए चुन लिया है, तो वे उस यातना से मुक्ति पाने वाले हैं, जो उन झुठलाने वाले काफ़िरों का परिणामहुआ।

وَلَقَدْ نَادَىٰنَا نُوحٌۭ فَلَنِعْمَ ٱلْمُجِيبُونَ ﴿٧٥﴾

और हमारे नबी नूह अलैहिस्सलामने हमें पुकारा, जब उन्होंने अपनी झुठलाने वाली जाति के ख़िलाफ बद्दुआ की। तो निश्चय हमअच्छे दुआ स्वीकार करने वाले हैं। चुनाँचे हमने उनके विरुद्ध उनकी बद्दुआ को स्वीकार करने में जल्दी की। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

وَنَجَّيْنَـٰهُ وَأَهْلَهُۥ مِنَ ٱلْكَرْبِ ٱلْعَظِيمِ ﴿٧٦﴾

हमने उसे, उसके घर वालों और उसके साथ के ईमान वालों को उसकी जाति के कष्ट से तथा उस भयानक बाढ़ में डूबने से बचा लिया, जो उसकी जाति के काफ़िरो पर भेजा गई थी।

وَجَعَلْنَا ذُرِّيَّتَهُۥ هُمُ ٱلْبَاقِينَ ﴿٧٧﴾

और हमने के वल उनके घर वालों और उनके मोमिन अनुयायियों को बचाया। और उनके सिवा उनकी जाति के काफ़िर लोगों को डुबो दिया।

وَتَرَكْنَا عَلَيْهِ فِى ٱلْـَٔاخِرِينَ ﴿٧٨﴾

और हमने बाद में आने वाले समुदायों में उनकी अच्छी प्रशंसा बाकी रखी, जिसके साथ लोग उनकी प्रशंसा करते रहेंगे।

سَلَـٰمٌ عَلَىٰ نُوحٍۢ فِى ٱلْعَـٰلَمِينَ ﴿٧٩﴾

नूह़ अलैहिस्सलामके लिए इस बात से सुरक्षा और सलामती है कि बाद में आने वाली जातियों के लोग उनके बारे में कोई बुरी बात कहें। बल्कि सदा उनके लिए प्रशंसा और अच्छा स्मरण ही बाक़ी रहेगा।

إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِى ٱلْمُحْسِنِينَ ﴿٨٠﴾

यह बदला जो हमने नूह अलैहिस्सलाम को दिया, इसी तरह का बदला हम उन लोगों को देते हैं, जो बेहतर तौर पर केवल अल्लाह की इबादत करते और उसका आज्ञापालन करते हैं।

إِنَّهُۥ مِنْ عِبَادِنَا ٱلْمُؤْمِنِينَ ﴿٨١﴾

निश्चय नूह़ अलैहिस्सलामहमारे मोमिन और अल्लाह का आज्ञापालन करने वाले बंदों में से थे।

ثُمَّ أَغْرَقْنَا ٱلْـَٔاخَرِينَ ﴿٨٢﴾

फिर हमने बाकी लोगों को उस तूफान (बाढ़) में डुबो दिया, जिसे हमने उनपर भेजा था और परिणामस्वरूप उनमें से कोई भी बाकी नहीं बचा।

۞ وَإِنَّ مِن شِيعَتِهِۦ لَإِبْرَٰهِيمَ ﴿٨٣﴾

और इबराहीमअलैहिस्सलामभी उन्हीं के धर्म पर चलने वाले उन लोगों में से थे, जो अल्लाह की तौह़ीद (एके श्वरवाद) की ओर बुलाने में उनके साथ सहमत थे।

إِذْ جَآءَ رَبَّهُۥ بِقَلْبٍۢ سَلِيمٍ ﴿٨٤﴾

उस समय को याद करें, जब वह अपने रब के पास शिर्क से पाक और अल्लाह के लिए उसकी मखलूक़ का भला चाहने वाला दिल लेकर आए। إذ قال لأبيه وقومه ماذا تعبدون

إِذْ قَالَ لِأَبِيهِ وَقَوْمِهِۦ مَاذَا تَعْبُدُونَ ﴿٨٥﴾

जिस समय उन्होंने अपने पिता तथा अपनी जाति के बहुदेववादियों से उन्हें फटकार लगाते हुए कहा: तुम अल्लाह के सिवा किस चीज़ की पूजा करते हो? بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

أَئِفْكًا ءَالِهَةًۭ دُونَ ٱللَّهِ تُرِيدُونَ ﴿٨٦﴾

क्या अल्लाह को छोड़कर अपने झूठे पूज्यों की इबादत करते हो?

فَمَا ظَنُّكُم بِرَبِّ ٱلْعَـٰلَمِينَ ﴿٨٧﴾

(ऐ मेरी जाति के लोगो!) सर्व संसार के पालनहार के विषय में तुम्हारा क्या गुमान है, जब तुम उससे उसके अलावा किसी और की पूजा करते हुए मिलोगे?! तुम ही बताओ कि वह तुम्हारे साथ क्या करेगा?!

فَنَظَرَ نَظْرَةًۭ فِى ٱلنُّجُومِ ﴿٨٨﴾

तो इबराहीम(अलैहिस्सलाम) ने एक दृष्टि तारों पर डाली, जबकि वह अपनी जाति के लोगों के साथ बाहर जाने से छु टकारा पाने के लिए उपाय कर रहे थे। فقال إنى سقيم

فَقَالَ إِنِّى سَقِيمٌۭ ﴿٨٩﴾

तो उसने अपनी जाति के लोगों के साथ उनके त्योहार में जाने से बहाना बनाते हुए कहा: मैं बीमार हूँ। فتولوا عنه مدبرين

فَتَوَلَّوْا۟ عَنْهُ مُدْبِرِينَ ﴿٩٠﴾

तो उन्होंने उसे अपने पीछे छोड़ दिया और चले गए।

فَرَاغَ إِلَىٰٓ ءَالِهَتِهِمْ فَقَالَ أَلَا تَأْكُلُونَ ﴿٩١﴾

फिर वह उनके उन बुतों की ओर गए, जिनकी वे अल्लाह को छोड़कर पूजा करते थे। चुनाँचे उनके बुतों का मज़ाक़ उड़ाते हुए बोले: क्या तुमउस भोजन से नहीं खाते जो बहुदेववादी तुम्हारे लिए बनाते हैं?! ما لكم لا تنطقون

مَا لَكُمْ لَا تَنطِقُونَ ﴿٩٢﴾

तुम्हें क्या हुआ कि तुम बोलते नहीं, और जो तुमसे पूछता है उसे कोई जवाब नहीं देते ?! क्या ऐसे की अल्लाह को छोड़कर पूजा की जानी चाहिए?!

فَرَاغَ عَلَيْهِمْ ضَرْبًۢا بِٱلْيَمِينِ ﴿٩٣﴾

फिर इबराहीमअलैहिस्सलामउन्हें अपने दाहिने हाथ से मारते हुए उनपर पिलपड़े, ताकि उन्हें तोड़ दें।

فَأَقْبَلُوٓا۟ إِلَيْهِ يَزِفُّونَ ﴿٩٤﴾

फिर इन बुतों को पूजने वाले तेज़ी से दौड़ते हुए इबराहीमअलैहिस्सलामके पासआए। قال أتعبدون ما تنحتون

قَالَ أَتَعْبُدُونَ مَا تَنْحِتُونَ ﴿٩٥﴾

तो इबराहीम अलैहिस्सलाम ने स्थिरता से उनका सामना किया और उन्हें फटकारते हुए कहा: क्या तुम अल्लाह को छोड़कर ऐसे बुतों की पूजा करते हो, जिन्हें अपने हाथों से तराशते हो?! بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

وَٱللَّهُ خَلَقَكُمْ وَمَا تَعْمَلُونَ ﴿٩٦﴾

जबकि अल्लाह ही ने तुम्हें पैदा किया तथा तुम्हारे कार्यों को पैदा किया, और तुम्हारे कार्यों में से ये मूर्तियाँ भी हैं। अतः अल्लाह ही इस बात का हक़दार है कि एकमात्र उसी की इबादत की जाए और उसके साथ किसी दूसरे को साझी न बनाया जाए।

قَالُوا۟ ٱبْنُوا۟ لَهُۥ بُنْيَـٰنًۭا فَأَلْقُوهُ فِى ٱلْجَحِيمِ ﴿٩٧﴾

जब वे उससे वाद-विवाद करने में असमर्थ हो गए, तो उन्होंने बल प्रयोग किया। चुनाँचे उन्होंने आपस में परामर्श किया कि वे इब्राहीम के साथ क्या करें। उन्होंने कहा: इसके लिए एक इमारत बनाओ, उसे लकड़ी से भरकर आग लगाओ और जब वह खूब भड़क उठे, तो इसे उसमें फें क दो।

فَأَرَادُوا۟ بِهِۦ كَيْدًۭا فَجَعَلْنَـٰهُمُ ٱلْأَسْفَلِينَ ﴿٩٨﴾

इबराहीम अलैहिस्सलाम की जाति के लोगों ने उनके साथ उन्हें विनष्ट करने का बुरा इरादा किया, ताकि उनसे आराम पा जाएँ, तो हमने आग को इबराहीम अलैहिस्सलाम के लिए ठंडी और सलामती वाली बनाकर उन्हीं लोगों को असफल (हानि उठाने वाला) बना दिया। وقال إنى ذاهب إلى ربى سيهدين

وَقَالَ إِنِّى ذَاهِبٌ إِلَىٰ رَبِّى سَيَهْدِينِ ﴿٩٩﴾

इबराहीम अलैहिस्सलाम ने कहा: मैं अपनी जाति के देश को छोड़कर अपने पालनहार की ओर हिजरत करने वाला हूँ, ताकि उसकी इबादत कर सकूँ। मेरा पालनहार मुझे वह रास्ता दिखाएगा, जिसमें मेरे लिए दुनिया और आखिरत की भलाई है।

رَبِّ هَبْ لِى مِنَ ٱلصَّـٰلِحِينَ ﴿١٠٠﴾

ऐ मेरे पालनहार! मुझे एक नेक पुत्र प्रदान कर, जो परदेसमें मेरा सहायक और मेरी जाति के लोगों का एवज़ (प्रतिकार) हो। فبشرنه بغلم حليم

فَبَشَّرْنَـٰهُ بِغُلَـٰمٍ حَلِيمٍۢ ﴿١٠١﴾

तो हमने उनकी दुआ क़बूल की और उन्हें ऐसी सूचना दी, जिससे उनका दिल प्रसन्न हो जाए। हमने उन्हें एक लड़के की खुशख़बरी दी, जो बड़ा होकर सहनशील बनेगा। यह लड़का इसमाईल अलैहिस्सलाम हैं।

فَلَمَّا بَلَغَ مَعَهُ ٱلسَّعْىَ قَالَ يَـٰبُنَىَّ إِنِّىٓ أَرَىٰ فِى ٱلْمَنَامِ أَنِّىٓ أَذْبَحُكَ فَٱنظُرْ مَاذَا تَرَىٰ ۚ قَالَ يَـٰٓأَبَتِ ٱفْعَلْ مَا تُؤْمَرُ ۖ سَتَجِدُنِىٓ إِن شَآءَ ٱللَّهُ مِنَ ٱلصَّـٰبِرِينَ ﴿١٠٢﴾

जब इसमाईल जवान हो गए और अपने पिता के साथ दौड़-धूप करने के योग्य हो गाए, तो उनके पिता इबराहीम अलैहिस्सलाम ने एक सपना देखा। याद रहे कि नबियों का सपना वह़्य (प्रकाशना) होता है। इबराहीम अलैहिस्सलाम ने अपने बेटे इसमाईल अलैहिस्सलाम को इस सपने के आशय के बारे में सूचित करते हुए कहा: ऐ मेरे प्यारे बेटे! मैंने सपने में देखा है कि मैं तुझे ज़बह कर रहा हूँ। तो अब देख, इस बारे में तेरा क्या खयाल है? इसमाईल अलैहिस्सलाम ने अपने पिता को उत्तर दिया: ऐ मेरे पिता! अल्लाह ने आपको मुझे ज़बह करने का जो आदेश दिया है, उसे कर डालिए। अगर अल्लाह ने चाहा तो आप मुझे धैर्यवानों और अल्लाह के निर्णय से संतुष्ट होने वालों में से पाएँ गे।

فَلَمَّآ أَسْلَمَا وَتَلَّهُۥ لِلْجَبِينِ ﴿١٠٣﴾

फिर जब दोनों अल्लाह के आदेश के प्रति समर्पित हो गए और उसकी आज्ञा के पालन के लिए तैयार हो गए, तो इबराहीम अलैहिस्सलाम ने अपने बेटे को उसकी पेशानी के एक किनारे पर लिटा दिया, ताकि उसे ज़बह करने का उन्हें जो आदेश मिला था उसका पालन करें। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

وَنَـٰدَيْنَـٰهُ أَن يَـٰٓإِبْرَٰهِيمُ ﴿١٠٤﴾

तथा हमने इबराहीमअलैहिस्सलामको, जब वह अपने बेटे को ज़बह करने के अल्लाह के आदेश को लागू करने वाले थे, आवाज़ दी: ऐ इबराहीम!

قَدْ صَدَّقْتَ ٱلرُّءْيَآ ۚ إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِى ٱلْمُحْسِنِينَ ﴿١٠٥﴾

आपने अपने बेटे को ज़बह करने का दृढ़ संकल्प करके उस सपने को पूरा कर दिया, जो आपने देखा था। निश्चित रूप से (जिस तरह हमने आपको इस महान परीक्षा से छु टकारा दिलाकर आपको बदला दिया है) उसी तरह हम सदाचारियों को बदला देते हैं, चुनाँचे उन्हें विपत्तियों और कठिनाइयों से छु टकारा दिलाते हैं।

إِنَّ هَـٰذَا لَهُوَ ٱلْبَلَـٰٓؤُا۟ ٱلْمُبِينُ ﴿١٠٦﴾

निःसंदेह यही तो स्पष्ट परीक्षण है और इबराहीम अलैहिस्सलाम इसमें सफल हुए। وفدينهبذب ح عظيم

وَفَدَيْنَـٰهُ بِذِبْحٍ عَظِيمٍۢ ﴿١٠٧﴾

और हमने इसमाईलअलैहिस्सलामके बदले में एक महान मेढ़ा दिया कि उसे उनकी ओर से ज़बह किया जाए।

وَتَرَكْنَا عَلَيْهِ فِى ٱلْـَٔاخِرِينَ ﴿١٠٨﴾

और हमने बाद में आने वाले समुदायों में इबराहीम अलैहिस्सलाम की अच्छी प्रशंसा बाक़ी रखी।

سَلَـٰمٌ عَلَىٰٓ إِبْرَٰهِيمَ ﴿١٠٩﴾

इबराहीम अलैहिस्सलाम के लिए अल्लाह की ओर से सलाम (अभिवादन), तथा हर नुक़सान और विपत्ति से सुरक्षा की दुआ हो।

كَذَٰلِكَ نَجْزِى ٱلْمُحْسِنِينَ ﴿١١٠﴾

जिस तरह हमने इबराहीम अलैहिस्सलाम को उनके आज्ञापालन का यह बदला दिया, उसी तरह हम सदाचारियों को (भी) बदला देते हैं।

إِنَّهُۥ مِنْ عِبَادِنَا ٱلْمُؤْمِنِينَ ﴿١١١﴾

निश्चय इबराहीम अलैहिस्सलाम हमारे मोमिन बंदों में से थे, जो अल्लाह कीيबंदगी के तक़ाज़ों को पूरा करते हैं।

وَبَشَّرْنَـٰهُ بِإِسْحَـٰقَ نَبِيًّۭا مِّنَ ٱلصَّـٰلِحِينَ ﴿١١٢﴾

तथा हमने उन्हें एक और बालक की शुभ सूचना दी, जो नबी और नेक बंदा बनेगा, और वह इसहाक़ अलैहिस्सलाम हैं। यह उनके अपने इकलौते बेटे इसमाईल अलैहिस्सलामको ज़बह करने में अल्लाह का आज्ञापालन करने के बदले के तौर पर है।

وَبَـٰرَكْنَا عَلَيْهِ وَعَلَىٰٓ إِسْحَـٰقَ ۚ وَمِن ذُرِّيَّتِهِمَا مُحْسِنٌۭ وَظَالِمٌۭ لِّنَفْسِهِۦ مُبِينٌۭ ﴿١١٣﴾

और हमने उनपर और उनके बेटे इसहाक़ पर अपनी ओर से बरकत उतारी। चुनाँचे उन दोनों को ढेर सारी नेमतें प्रदान कीं, जिनमें उनकी संतान को खूब बढ़ाना भी शामिल है। उनके वंश में से कु छ लोग अपने पालनहार की आज्ञा का पालन करके अच्छे काम करने वाले हैं, जबकि उनमें से कु छ लोग कु फ़्र और पाप करके अपने आप पर खुला अत्याचार करने वाले हैं। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर ولقدمنناعل موس وهرون

وَلَقَدْ مَنَنَّا عَلَىٰ مُوسَىٰ وَهَـٰرُونَ ﴿١١٤﴾

और हमने मूसा और उनके भाई हारून को नबी बनाकर उनपर उपकार किया।

وَنَجَّيْنَـٰهُمَا وَقَوْمَهُمَا مِنَ ٱلْكَرْبِ ٱلْعَظِيمِ ﴿١١٥﴾

तथा हमने उन दोनों को और उनकी जाति बनी इसराईल को फ़िरऔन की ग़ुलामी और डूबने से बचा लिया।

وَنَصَرْنَـٰهُمْ فَكَانُوا۟ هُمُ ٱلْغَـٰلِبِينَ ﴿١١٦﴾

हमने फ़िरऔन और उसकी सेना के विरुद्ध उनकी मदद की, जिसके परिणामस्वरूप वे अपने शत्रु पर प्रबलहुए।

وَءَاتَيْنَـٰهُمَا ٱلْكِتَـٰبَ ٱلْمُسْتَبِينَ ﴿١١٧﴾

हमने मूसा और उनके भाई हारून को तौरात प्रदान की, जो अल्लाह की ओर से एक स्पष्ट पुस्तक है, जिसमें कोई संशयता नहीं है।

وَهَدَيْنَـٰهُمَا ٱلصِّرَٰطَ ٱلْمُسْتَقِيمَ ﴿١١٨﴾

और हमने दोनों को सीधे मार्ग पर चलाया, जिसमें कोई टेढ़ापन नहीं है। और वह इस्लामधर्म का मार्ग है, जो अल्लाह महिमावान की प्रसन्नता तक पहुँचाने वाला है।

وَتَرَكْنَا عَلَيْهِمَا فِى ٱلْـَٔاخِرِينَ ﴿١١٩﴾

और हमने बाद में आने वाले समुदायों में उन दोनों की अच्छी प्रशंसा और अच्छा स्मरण बाक़ी रखा। سلمعل موس وهرون

سَلَـٰمٌ عَلَىٰ مُوسَىٰ وَهَـٰرُونَ ﴿١٢٠﴾

उन दोनों के लिए अल्लाह की ओर से पवित्र सलाम, उनकी प्रशंसा तथा हर विपत्ति से सुरक्षा की दुआ हो।

إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِى ٱلْمُحْسِنِينَ ﴿١٢١﴾

निश्चित रूप से जिस तरह हमने मूसा और हारून को यह उत्तम बदला दिया, उसी तरह हम अपने पालनहार की आज्ञा का पालन करके अच्छे काम करने वालों को बदला देते हैं।

إِنَّهُمَا مِنْ عِبَادِنَا ٱلْمُؤْمِنِينَ ﴿١٢٢﴾

निश्चय मूसा और हारून हमारे उन बंदों में से थे, जो अल्लाह पर ईमान रखने वाले, उसके निर्धारित किए हुए विधानों का पालन करने वाले थे।

وَإِنَّ إِلْيَاسَ لَمِنَ ٱلْمُرْسَلِينَ ﴿١٢٣﴾

निश्चय इलयास अपने पालनहार की ओर से भेजे गए रसूलों में से थे, जिन्हें अल्लाह ने नुबुव्वत व रिसालत (पैग़ंबरी) से सम्मानित किया था। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

إِذْ قَالَ لِقَوْمِهِۦٓ أَلَا تَتَّقُونَ ﴿١٢٤﴾

जब उन्होंने अपनी जाति बनी इसराईल से कहा, जिनकी ओर वह रसूल बनाकर भेजे गए थे: ऐ मेरी जाति के लोगो! क्या तुम अल्लाह के आदेशों का पालन करके , जिसमें तौहीद शामिलहै, और उसके निषेधों से बचकर, जिसमें शिर्क शामिलहै, उससे डरते नहीं हो?!

أَتَدْعُونَ بَعْلًۭا وَتَذَرُونَ أَحْسَنَ ٱلْخَـٰلِقِينَ ﴿١٢٥﴾

क्या तुम अल्लाह के अलावा अपनी मूर्ति 'बअ्ल' की पूजा करते हो और अल्लाह की इबादत छोड़ देते हो, जो पैदा करने वालों में सबस बेहतर है?!

ٱللَّهَ رَبَّكُمْ وَرَبَّ ءَابَآئِكُمُ ٱلْأَوَّلِينَ ﴿١٢٦﴾

जबकि अल्लाह ही तुम्हारा पालनहार है, जिसने तुम्हें पैदा किया और इससे पहले तुम्हारे बाप-दादा को भी पैदा किया। अतः वही इबादत का हक़दार है, न कि उसके अलावा वे मूर्तियाँ जो न तो लाभ पहुँचा सकती हैं और न हानि। فكذبوه فإن هم لمحضرون

فَكَذَّبُوهُ فَإِنَّهُمْ لَمُحْضَرُونَ ﴿١٢٧﴾

तो उनकी जाति की प्रतिक्रिया यह थी कि उन्होंने उसे झुठला दिया, इसलिए वे अपने झुठलाने के कारण यातना में उपस्थित किए जाने वाले हैं।

إِلَّا عِبَادَ ٱللَّهِ ٱلْمُخْلَصِينَ ﴿١٢٨﴾

परंतु उनकी जाति में से जो व्यक्ति मोमिन और अल्लाह की इबादत में इख़्लास (निष्ठा) से काम लेने वाला है; तो वह यातना में उपस्थित किए जाने से मुक्ति पाने वाला है।

وَتَرَكْنَا عَلَيْهِ فِى ٱلْـَٔاخِرِينَ ﴿١٢٩﴾

और हमने बाद में आने वाले समुदायों में उनकी अच्छी प्रशंसा और अच्छा स्मरण बाक़ी रखा।

سَلَـٰمٌ عَلَىٰٓ إِلْ يَاسِينَ ﴿١٣٠﴾

इलयास के लिए अल्लाह की ओर से सलाम और प्रशंसा हो।

إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِى ٱلْمُحْسِنِينَ ﴿١٣١﴾

निश्चित रूप से जिसतरह हमने इलयासको यह उत्तमबदला दिया, उसी तरह हमअपने मोमिन बंदों में से अच्छे कार्य करने वालों को बदला देते हैं।

إِنَّهُۥ مِنْ عِبَادِنَا ٱلْمُؤْمِنِينَ ﴿١٣٢﴾

निश्चय इलयासहमारे सच्चे मोमिन बंदों में से थे, जो अपने पालनहार पर अपने ईमान में सच्चे थे।

وَإِنَّ لُوطًۭا لَّمِنَ ٱلْمُرْسَلِينَ ﴿١٣٣﴾

निश्चय लूत अलैहिस्सलाम अल्लाह के उन रसूलों में से थे, जिन्हें अल्लाह ने उनकी जातियों की ओर शुभ सूचना देने वाला और डराने वाला बनाकर भेजा था। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर إ ذ نجينه وأهله أجمعين

إِذْ نَجَّيْنَـٰهُ وَأَهْلَهُۥٓ أَجْمَعِينَ ﴿١٣٤﴾

आप उस समय को याद करें, जब हमने उन्हें और उनके सभी परिजनों को उनके समुदाय पर भेजी गई यातना से बचाया।

إِلَّا عَجُوزًۭا فِى ٱلْغَـٰبِرِينَ ﴿١٣٥﴾

सिवाय उनकी पत्नी के । क्योंकि वह भी अपनी जाति पर आने वाली यातना की चपेट में आ गई। इसलिए कि वह भी उन्हीं की तरह काफ़िर थी।

ثُمَّ دَمَّرْنَا ٱلْـَٔاخَرِينَ ﴿١٣٦﴾

फिर हमने उनके समुदाय के बाकी उन लोगों को नष्ट कर दिया, जिन्होंने उन्हें झुठलाया था और जो कु छ वह लेकर आए थे उसपर विश्वास नहीं किया था। وإ نكم لتمرون عليهم م ص بحين

وَإِنَّكُمْ لَتَمُرُّونَ عَلَيْهِم مُّصْبِحِينَ ﴿١٣٧﴾

और तुम (ऐ मक्का वालो!) सुबह के समय शाम (लेवंत) की यात्रा पर, उनके घरों से गुज़रते हो।

وَبِٱلَّيْلِ ۗ أَفَلَا تَعْقِلُونَ ﴿١٣٨﴾

तथा रात में भी तुम उनके पास से गुज़रते हो। तो क्या तुम समझते नहीं, तथा उनके झुठलाने और इनकार करने तथा ऐसा अनैतिक कार्य करने के बाद, जो उनसे पहले किसी ने नहीं किया था, उनके साथ जो कु छ हुआ, उससे नसीहत नहीं पकड़ते?!

وَإِنَّ يُونُسَ لَمِنَ ٱلْمُرْسَلِينَ ﴿١٣٩﴾

और हमारे बंदे यूनुसअल्लाह के उन रसूलों में से थे, जिन्हें अल्लाह ने उनकी जातियों की ओर शुभ सूचना देने वाला और डराने वाला बनाकर भेजा था।

إِذْ أَبَقَ إِلَى ٱلْفُلْكِ ٱلْمَشْحُونِ ﴿١٤٠﴾

जब वह अपने पालनहार की आज्ञा के बिना अपनी जाति के पास से भाग खड़े हुए और यात्रियों तथा सामान से भरी हुई कश्ती में सवार हो गए।

فَسَاهَمَ فَكَانَ مِنَ ٱلْمُدْحَضِينَ ﴿١٤١﴾

जब कश्ती अपनी समाई से अधिक भरी होने के कारण डूबने के क़रीब हो गई, तो उसमें सवार लोगों ने, यात्रियों की बड़ी संख्या के कारण कश्ती के डूबने के डर से, क़ु र'आ-अंदाज़ी की, ताकि कु छ लोगों को फें क दें। तो यूनुसअलैहिस्सलामउन हारने वाले लोगों में से एक थे, चुनाँचे उन्होंने आपको समुद्र में फें क दिया।

فَٱلْتَقَمَهُ ٱلْحُوتُ وَهُوَ مُلِيمٌۭ ﴿١٤٢﴾

जब उन लोगों ने उन्हें समुद्र में फें क दिया, तो मछली ने उन्हें पकड़कर निगल लिया। जबकि उन्होंने अल्लाह की अनुमति के बिना समुद्र की ओर जाकर, ऐसा कार्य किया था, जो निंदा का पात्र था।

فَلَوْلَآ أَنَّهُۥ كَانَ مِنَ ٱلْمُسَبِّحِينَ ﴿١٤٣﴾

अगर यह बात न होती कि यूनुस अलैहिस्सलाम इस विपत्ति से ग्रस्त होने से पहले भी अल्लाह को बहुत ज़्यादा याद करने वालों में से थे, तथा यदि वह मछली के पेट में भी अल्लाह की तसबीह करने वाले न होते। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

لَلَبِثَ فِى بَطْنِهِۦٓ إِلَىٰ يَوْمِ يُبْعَثُونَ ﴿١٤٤﴾

तो वह मछली के पेट में क़ियामत के दिन तक रहते और वही उनकी क़ब्र बन जाता।

۞ فَنَبَذْنَـٰهُ بِٱلْعَرَآءِ وَهُوَ سَقِيمٌۭ ﴿١٤٥﴾

फिर हमने उन्हें मछली के पेट से पेड़ों और निर्माण से रहित भूमि पर फें क दिया, इस अवस्था में कि उनका शरीर एक अवधि तक मछली के पेट में रहने के कारण कमज़ोर हो गया था। وأنبتنا عليه شجرة من يقطين

وَأَنۢبَتْنَا عَلَيْهِ شَجَرَةًۭ مِّن يَقْطِينٍۢ ﴿١٤٦﴾

और हमने उनपर उस खाली भूमि में कु म्हड़े का एक पेड़ (बेल) उगा दिया, ताकि वह उससे साया प्राप्त करें और उसका फल खाएँ। وأرسلنهإ لى مائة ألف أو يزيدون

وَأَرْسَلْنَـٰهُ إِلَىٰ مِا۟ئَةِ أَلْفٍ أَوْ يَزِيدُونَ ﴿١٤٧﴾

और हमने उन्हें उनकी जाति की ओर भेज दिया, जिनकी संख्या एक लाख थी, बल्कि वे उससे अधिक होंगे। فٔامنوافمتعنهم إلى حين

فَـَٔامَنُوا۟ فَمَتَّعْنَـٰهُمْ إِلَىٰ حِينٍۢ ﴿١٤٨﴾

चुनाँचे वे ईमान ले आए और यूनुस अलैहिस्सलाम के लाए हुए संदेश को सत्य माना। तो अल्लाह ने उन्हें, उनके सांसारिक जीवन में लाभ उठाने दिया, यहाँ तक कि उनके लिए उनकी निर्धारित समय सीमा समाप्त हो गई।

فَٱسْتَفْتِهِمْ أَلِرَبِّكَ ٱلْبَنَاتُ وَلَهُمُ ٱلْبَنُونَ ﴿١٤٩﴾

तो (ऐ मुहम्मद!) आप मुश्रिकों से खंडन के तौर पर पूछें: क्या तुम अल्लाह के लिए बेटियाँ ठहराते हो, जिन्हें तुम नापसंद करते हो, और अपने लिए बेटे सिद्ध करते हो, जिन्हें तुमपसंद करते हों?! भला यह कौन सा विभाजन है?!

أَمْ خَلَقْنَا ٱلْمَلَـٰٓئِكَةَ إِنَـٰثًۭا وَهُمْ شَـٰهِدُونَ ﴿١٥٠﴾

उन्होंने कै से दावा किया कि फ़रिश्ते मादा हैं, जबकि वे उनकी रचना के समय उपस्थित नहीं थे और उन्होंने उनकी रचना को नहीं देखा है?!

أَلَآ إِنَّهُم مِّنْ إِفْكِهِمْ لَيَقُولُونَ ﴿١٥١﴾

وَلَدَ ٱللَّهُ وَإِنَّهُمْ لَكَـٰذِبُونَ ﴿١٥٢﴾

सुन लो, निःसंदेह बहुदेववादी लोग अल्लाह पर झूठ बाँधते हुए और मिथ्यारोपण करते हुए उसकी ओर संतान की निसबत करते हैं, और निश्चित रूप से वे अपने इस दावे में झूठे हैं।

أَصْطَفَى ٱلْبَنَاتِ عَلَى ٱلْبَنِينَ ﴿١٥٣﴾

क्या अल्लाह ने अपने लिए उन बेटों के स्थान पर जिन्हें तुमपसंद करते हो, उन लड़कियों को चुना है जिन्हें तुमनापसंद करते हो?! हरगिज़ नहीं। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर مالكم كيف تحكمون

مَا لَكُمْ كَيْفَ تَحْكُمُونَ ﴿١٥٤﴾

(ऐ मुश्रिको!) तुम्हें क्या हो गया है कि यह अन्यायपूर्ण फ़ै सला कर रहे हो, कि अल्लाह के लिए बेटियाँ ठहराते हो और अपने लिए बेटे?! أفلا تذك رون

أَفَلَا تَذَكَّرُونَ ﴿١٥٥﴾

क्या तुम अपने इस असत्य अक़ीदे के गलत होने के बारे में सोच-विचार नहीं करते?! क्योंकि अगर तुम सोच-विचार किए होते, तो इस तरह की बात न कहते। أم لكم سلطن مبين

أَمْ لَكُمْ سُلْطَـٰنٌۭ مُّبِينٌۭ ﴿١٥٦﴾

क्या तुम्हारे पास किसी किताब या रसूल से इसका कोई स्पष्ट तर्क और प्रत्यक्ष प्रमाण है?! فأتوا بكتبكم إن كنتم صدقين

فَأْتُوا۟ بِكِتَـٰبِكُمْ إِن كُنتُمْ صَـٰدِقِينَ ﴿١٥٧﴾

अगर तुमअपने दावे में सच्चे हो, तो अपनी वह पुस्तक लाओ जिसमें इसका प्रमाण हो।

وَجَعَلُوا۟ بَيْنَهُۥ وَبَيْنَ ٱلْجِنَّةِ نَسَبًۭا ۚ وَلَقَدْ عَلِمَتِ ٱلْجِنَّةُ إِنَّهُمْ لَمُحْضَرُونَ ﴿١٥٨﴾

मुश्रिकों ने यह दावा करके कि फ़रिश्ते अल्लाह की बेटियाँ हैं, अल्लाह और फ़रिश्तों के बीच, जो उनसे पोशीदा हैं, रिश्तेदारी बना दी। हालाँकि फ़रिश्तों को मालूम है कि अल्लाह मुश्रिकों को हिसाब के लिए ज़रूर हाज़िर करेगा।

سُبْحَـٰنَ ٱللَّهِ عَمَّا يَصِفُونَ ﴿١٥٩﴾

अल्लाह उन बातों से पवित्र और सर्वोच्च है, जो मुश्रिक लोग उसके बारे में ऐसी चीज़ें वर्णन करते हैं जो उसकी महिमा के योग्य नहीं हैं, जैसे उसका बेटा और साझी होना आदि।

إِلَّا عِبَادَ ٱللَّهِ ٱلْمُخْلَصِينَ ﴿١٦٠﴾

सिवाय अल्लाह के चुने हुए बंदों के । क्योंकि वे अल्लाह को के वलउसकी महिमा के योग्य उसके प्रताप और पूर्णता के गुणों के साथ वर्णित करते हैं। فإنكم وما تعبدون

فَإِنَّكُمْ وَمَا تَعْبُدُونَ ﴿١٦١﴾

तो (ऐ मुश्रिको!) तुम और तुम्हारे वे पूज्य जिन्हें तुम अल्लाह को छोड़कर पूजते हो।

مَآ أَنتُمْ عَلَيْهِ بِفَـٰتِنِينَ ﴿١٦٢﴾

तुम किसी को भी सत्य धर्म से नहीं भटका सकते।

إِلَّا مَنْ هُوَ صَالِ ٱلْجَحِيمِ ﴿١٦٣﴾

सिवाय उसके , जिसके बारे में अल्लाह ने निर्णय कर दिया है कि वह जहन्नम में प्रवेश करने वालों में से है। तो अल्लाह उसके बारे में अपने निर्णय को लागू करेगा। चुनाँचे वह कु फ़्र करेगा और जहन्नममें प्रवेश करेगा। जहाँ तक तुम्हारा और तुम्हारे पूज्यों का संबंध है, तो तुम्हें ऐसा करने की कोई शक्ति हासिलनहीं है। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

وَمَا مِنَّآ إِلَّا لَهُۥ مَقَامٌۭ مَّعْلُومٌۭ ﴿١٦٤﴾

फ़रिश्तों ने अल्लाह के प्रति अपनी दासता और मुश्रिकों के दावों से अपने बरी होने को स्पष्ट करते हुआ कहा: हममें से प्रत्येक व्यक्ति का अल्लाह की इबादत और उसकी आज्ञाकारिता में एक नियत स्थान है।

وَإِنَّا لَنَحْنُ ٱلصَّآفُّونَ ﴿١٦٥﴾

وَإِنَّا لَنَحْنُ ٱلْمُسَبِّحُونَ ﴿١٦٦﴾

तथा निःसंदेह हम - फ़रिश्ते - अल्लाह की इबादत और उसके आज्ञापालन में पंक्तियों में खड़े रहते हैं। और निश्चय हम अल्लाह को उन विशेषताओं और गुणों से पवित्र ठहराते हैं, जो उसकी महिमा के योग्य नहीं हैं। وإ نكانوا ليقولون

وَإِن كَانُوا۟ لَيَقُولُونَ ﴿١٦٧﴾

لَوْ أَنَّ عِندَنَا ذِكْرًۭا مِّنَ ٱلْأَوَّلِينَ ﴿١٦٨﴾

لَكُنَّا عِبَادَ ٱللَّهِ ٱلْمُخْلَصِينَ ﴿١٦٩﴾

فَكَفَرُوا۟ بِهِۦ ۖ فَسَوْفَ يَعْلَمُونَ ﴿١٧٠﴾

मक्का के मुश्रिक मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लमके नबी बनाए जाने से पहले कहा करते थे: अगर हमारे पास पहले लोगों की किताबों, उदाहरण के तौर पर तौरात, जैसी कोई किताब होती; तो हम अल्लाह ही के लिए इबादत को ख़ालिस करते। जबकि वे इस बारे में झूठे हैं। क्योंकि उनके पास मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम क़ु रआन लेकर आए, परंतु उन्होंने उसका इनकार कर दिया। अतः शीघ्र ही वे उस गंभीर यातना को जान लेंगे जो क़ियामत के दिन उनकी प्रतीक्षा कर रही है।

وَلَقَدْ سَبَقَتْ كَلِمَتُنَا لِعِبَادِنَا ٱلْمُرْسَلِينَ ﴿١٧١﴾

إِنَّهُمْ لَهُمُ ٱلْمَنصُورُونَ ﴿١٧٢﴾

وَإِنَّ جُندَنَا لَهُمُ ٱلْغَـٰلِبُونَ ﴿١٧٣﴾

और हमारे रसूलों के संबंध में हमारी बात गुज़र चुकी है कि वही अपने दुश्मनों पर विजयी रहेंगे क्योंकि अल्लाह ने उन्हें तर्क और शक्ति प्रदान की है। और यह कि हमारे उन सैनिकों ही को प्रभुत्व प्राप्त होगा, जो अल्लाह के मार्ग में इसलिए लड़ाई करते हैं ताकि अल्लाह का वचन सर्वोच्च हो। فتول عنهمحت حين

فَتَوَلَّ عَنْهُمْ حَتَّىٰ حِينٍۢ ﴿١٧٤﴾

तो (ऐ रसूल!) इन दुश्मनी रखने वाले मुश्रिकों से एक अवधि तक के लिए, जिसे अल्लाह जानता है, मुँह फे रे रहें यहाँ तक कि उनकी यातना का समय आ जाए। وأبصرهم فسوف يبصرون

وَأَبْصِرْهُمْ فَسَوْفَ يُبْصِرُونَ ﴿١٧٥﴾

तथा उन्हें देखें जब उनपर यातना उतरे। चुनाँचे वे भी उस समय देख लेंगे, जब उन्हें देखने से कोई लाभ नहीं होगा। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर أ فبعذابنا يستعجلون

أَفَبِعَذَابِنَا يَسْتَعْجِلُونَ ﴿١٧٦﴾

क्या ये मुश्रिक लोग अल्लाह की यातना के लिए जल्दी कर रहे हैं?!

فَإِذَا نَزَلَ بِسَاحَتِهِمْ فَسَآءَ صَبَاحُ ٱلْمُنذَرِينَ ﴿١٧٧﴾

चुनाँचे जब उनपर अल्लाह की यातना उतरेगी, तो उनकी सुबह बहुत ही बुरी सुबह होगी। وتول عنهمحت حين

وَتَوَلَّ عَنْهُمْ حَتَّىٰ حِينٍۢ ﴿١٧٨﴾

और (ऐ रसूल!) उनसे मुँह फे र लें, यहाँ तक कि अल्लाह उनकी यातना का फै सला कर दे। وأبصر فسوف يبصرون

وَأَبْصِرْ فَسَوْفَ يُبْصِرُونَ ﴿١٧٩﴾

और आप देखते रहें। बहुत जल्द ये लोग भी देख लेंगे कि उनपर अल्लाह की कौन-सी यातना और सज़ा उतरती है।

سُبْحَـٰنَ رَبِّكَ رَبِّ ٱلْعِزَّةِ عَمَّا يَصِفُونَ ﴿١٨٠﴾

(ऐ मुहम्मद!) आपका पालनहार, जो सारी शक्ति का मालिक है, उन सभी कमियों और त्रुटियों से पवित्र और सर्वोच्च है, जो बहुदेववादी उसके बारे में बयान करते हैं।

وَسَلَـٰمٌ عَلَى ٱلْمُرْسَلِينَ ﴿١٨١﴾

और अल्लाह का सलाम (अभिवादन) और उसकी प्रशंसा है, उसके सम्माननीय रसूलों के लिए।

وَٱلْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ ٱلْعَـٰلَمِينَ ﴿١٨٢﴾

हर प्रकार की प्रशंसा और स्तुति सर्वशक्तिमान व महिमावान अल्लाह के लिए है। क्योंकि वही उसके योग्य है, और वह सारे संसार का पालनहार है, उसके सिवा उनका कोई पालनहार नहीं है। स्रोत:अल-मुख़्तसर फ़ी तफ़सीरिल क़ु रआनिल करीम

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