होमतफ़सीरSaad (38)

तफ़सीर Saad (38) — ص

मक्की · 88 आयतें

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صٓ ۚ وَٱلْقُرْءَانِ ذِى ٱلذِّكْرِ ﴿١﴾

{सॉद} इसतरह के अक्षरों (हुरूफ़-ए-मुक़त्तआत) के विषय में सूरतुल-बक़रा के आरंभ में बात गुज़र चुकी है। अल्लाह ने क़ु रआन की क़समखाई है, जिसमें लोगों को उस चीज़ की याद दिलाना शामिल है, जो दुनिया और आखिरत में उनके लिए लाभदायक है। बात वैसी नहीं है, जैसा मुश्रिक लोग समझते हैं कि अल्लाह के साथ कोई भागीदार हैं।

بَلِ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ فِى عِزَّةٍۢ وَشِقَاقٍۢ ﴿٢﴾

लेकिन काफ़िर लोग अल्लाह की तौहीद (एके श्वरवाद) के बार में स्वाभिमान और अहंकार में हैं, तथा मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के विरोध और उनसे दुश्मनी में पड़े हुए हैं। كم أهلكنا من قبلهم من قرن فنادواولات حين مناص

كَمْ أَهْلَكْنَا مِن قَبْلِهِم مِّن قَرْنٍۢ فَنَادَوا۟ وَّلَاتَ حِينَ مَنَاصٍۢ ﴿٣﴾

इनसे पहले हमने कितने ही समुदायों को विनष्ट कर दिया, जिन्होंने अपने रसूलों को झुठलाया था। फिर जब उनपर अज़ाब उतर आया, तो उन्होंने मदद की गुहार लगाई। लेकिन वह समय उनके लिए अज़ाब से बचने का समय नहीं था कि उन्हें मदद की गुहार लगाना कोई लाभ देता।

وَعَجِبُوٓا۟ أَن جَآءَهُم مُّنذِرٌۭ مِّنْهُمْ ۖ وَقَالَ ٱلْكَـٰفِرُونَ هَـٰذَا سَـٰحِرٌۭ كَذَّابٌ ﴿٤﴾

उन्होंने उस समय आश्चर्य प्रकट किया जब उनके पास उन्हीं में से एक रसूल आया, जो उन्हें उनके अपने कु फ़्र पर क़ायम रहने पर अल्लाह की यातना से डराता था। तथा काफ़िरों ने मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के लाए हुए धर्म की सच्चाई के प्रमाणों को देखकर कहा: यह एक जादूगर व्यक्ति है, जो लोगों को मोहित कर देता है। यह अपने इस दावे में बड़ा झूठा है कि वह अल्लाह का एक रसूल है, जिसकी ओर वह़्य (प्रकाशना) की जाती है।

أَجَعَلَ ٱلْـَٔالِهَةَ إِلَـٰهًۭا وَٰحِدًا ۖ إِنَّ هَـٰذَا لَشَىْءٌ عُجَابٌۭ ﴿٥﴾

क्या इस व्यक्ति ने विभिन्न पूज्यों को एक ही पूज्य बना दिया, जिसके सिवा कोई दूसरा पूज्य नहीं?! निश्चय उसका यह कार्य अत्यंत आश्चर्यजनक है।

وَٱنطَلَقَ ٱلْمَلَأُ مِنْهُمْ أَنِ ٱمْشُوا۟ وَٱصْبِرُوا۟ عَلَىٰٓ ءَالِهَتِكُمْ ۖ إِنَّ هَـٰذَا لَشَىْءٌۭ يُرَادُ ﴿٦﴾

उनके प्रमुख और बड़े लोग अपने अनुयायियों से यह कहते हुए चलखड़े हुए कि: तुमउसी पर चलते रहो, जिसपर पहले थे। मुहम्मद के धर्म में प्रवेश न करो। अपने पूज्यों की इबादत पर जमे रहो। क्योंकि मुहम्मद ने जो तुम्हें एक अल्लाह की इबादत करने के लिए बुलाया है, वह एक जानबूझकर की गई (सुनियोजित) बात है, वह चाहता है कि हमसे ऊपर उठ जाए और हम उसके अनुयायी (पीछे चलने वाले) बन जाएँ।

مَا سَمِعْنَا بِهَـٰذَا فِى ٱلْمِلَّةِ ٱلْـَٔاخِرَةِ إِنْ هَـٰذَآ إِلَّا ٱخْتِلَـٰقٌ ﴿٧﴾

मुहम्मद हमें जिस तौहीद (एके श्वरवाद) की ओर बुला रहे हैं, वह बात हमने उस धर्म में नहीं सुनी जिसपर हमने अपने बाप-दादा को पाया और न ही ईसा अलैहिस्सलाम के धर्म में वह (तौहीद की) बात सुनी। यह बात जो हमने उनसे सुनी है, झूठ और गढ़ी हुई बात के सिवा कु छ नहीं है।

أَءُنزِلَ عَلَيْهِ ٱلذِّكْرُ مِنۢ بَيْنِنَا ۚ بَلْ هُمْ فِى شَكٍّۢ مِّن ذِكْرِى ۖ بَل لَّمَّا يَذُوقُوا۟ عَذَابِ ﴿٨﴾

क्या यह सही है कि हमारे बीच में से उसी पर क़ु रआन उतरे और यह उसी के लिए विशिष्ट हो, और यह हमपर न उतरे, जबकि हम सरदार और प्रमुख लोग हैं?! बल्कि, इन बहुदेववादियों को आपपर उतरने वाली वह़्य (प्रकाशना) के बारे में संदेह है। तथा उन्होंने अभी तक अल्लाह की यातना नहीं चखी है, इसलिए वे मोहलत दिए जाने से بلغ क़ुरआन · तफ़सीर धोखे में पड़ गए हैं। यदि उन्होंने यातना का स्वाद चखा होता, तो अल्लाह का इनकार करने, उसके साथ साझी ठहराने और आपकी ओर जो वह़्य (प्रकाशना) की जाती है, उसके बारे में संदेह करने का साहसनहीं करते।

أَمْ عِندَهُمْ خَزَآئِنُ رَحْمَةِ رَبِّكَ ٱلْعَزِيزِ ٱلْوَهَّابِ ﴿٩﴾

क्या इन झुठलाने वाले मुश्रिकों के पास आपके उस प्रभुत्वशाली पालनहार के अनुग्रह के खज़ाने हैं, जिसपर किसी का ज़ोर नहीं चलता, जो जिसे चाहता है जो चाहता है, देता है। तथा उसके अनुग्रह के खज़ानों में नुबुव्वत भी शामिल है। अतः वह जिसे चाहता है, उससे सम्मानित करता है। यह उनका नहीं है कि वे उसे जिसे चाहें दें और जिसे चाहें उससे वंचित कर दें।

أَمْ لَهُم مُّلْكُ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا ۖ فَلْيَرْتَقُوا۟ فِى ٱلْأَسْبَـٰبِ ﴿١٠﴾

या आकाशों और धरती तथा उनके बीच मौजूद सारी चीज़ों की बादशाही उन्हीं के पास है? इसलिए उन्हें देने और न देने का अधिकार प्राप्त है? यदि यह उनका दावा है, तो उन्हें आकाश पर पहुँचाने वाले कारणों को अपनाना चाहिए, ताकि वे जो चाहें देने या न देने का फै सला जारी कर सकें । स्पष्ट है कि वे ऐसा हरगिज़ नहीं कर पाएँगे।

جُندٌۭ مَّا هُنَالِكَ مَهْزُومٌۭ مِّنَ ٱلْأَحْزَابِ ﴿١١﴾

मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लमको झुठलाने वाले ये लोग एक पराजित सेना हैं, अपने से पूर्व की उन सेनाओं की तरह, जिन्होंने अपने रसूलों को झुठलाया था।

كَذَّبَتْ قَبْلَهُمْ قَوْمُ نُوحٍۢ وَعَادٌۭ وَفِرْعَوْنُ ذُو ٱلْأَوْتَادِ ﴿١٢﴾

ये झुठलाने वाले, पहले झुठलाने वाले नहीं हैं। क्योंकि इनसे पहले नूह अलैहिस्सलामकी जाति ने झुठलाया, आद ने झुठलाया तथा फ़िरऔन ने झुठलाया, जिसके पास मेखें होती थीं, जिनसे वह लोगों को दंडित किया करता था।

وَثَمُودُ وَقَوْمُ لُوطٍۢ وَأَصْحَـٰبُ لْـَٔيْكَةِ ۚ أُو۟لَـٰٓئِكَ ٱلْأَحْزَابُ ﴿١٣﴾

तथा समूद ने झुठलाया, और लूत की जाति ने झुठलाया, और शुऐब की जाति ने झुठलाया। यही लोग वे गिरोह (सेनाएँ) हैं, जो अपने रसूलों को झुठलाने और उनके लाए हुए संदेश का इनकार करने पर एकजुट हुए।

إِن كُلٌّ إِلَّا كَذَّبَ ٱلرُّسُلَ فَحَقَّ عِقَابِ ﴿١٤﴾

इन गिरोहों में से हर एक ने रसूलों को झुठलाया। इसलिए उनपर अल्लाह की यातना सिद्ध हो गई और उनपर अल्लाह की सज़ा आ पहुँची, भले ही इसमें कुछ समय के लिए देरी हुई।

وَمَا يَنظُرُ هَـٰٓؤُلَآءِ إِلَّا صَيْحَةًۭ وَٰحِدَةًۭ مَّا لَهَا مِن فَوَاقٍۢ ﴿١٥﴾

मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को झुठलाने वाले ये लोग केवल इस बात की प्रतीक्षा कर रहे हैं कि सूर में दूसरी फूँक मार दी जाए, जो अपरिवर्तनीय है। फिर वे यातना से ग्रस्त होंगे, अगर वे आपको झुठलाने की अवस्था में मर गए।

وَقَالُوا۟ رَبَّنَا عَجِّل لَّنَا قِطَّنَا قَبْلَ يَوْمِ ٱلْحِسَابِ ﴿١٦﴾

उन्होंने मज़ाक़ उड़ाते हुए कहा: ऐ हमारे पालनहार! हमें हमारे हिस्से की यातना क़ियामत के दिन से पहले इससांसारिक जीवन ही में दे दे। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

ٱصْبِرْ عَلَىٰ مَا يَقُولُونَ وَٱذْكُرْ عَبْدَنَا دَاوُۥدَ ذَا ٱلْأَيْدِ ۖ إِنَّهُۥٓ أَوَّابٌ ﴿١٧﴾

(ऐ रसूल!) ये मुश्रिक लोग जो ऐसी बातें कहते हैं, जो आपको पसंद नहीं हैं, उनपर सब्र से काम लें और हमारे बंदे दाऊद को याद करें, जो अपने दुश्मनों से लड़ने की शक्ति रखते थे और अल्लाह के आज्ञापालन पर धैर्य से काम लेते थे। निश्चय वह तौबा करके और अल्लाह को प्रसन्न करने वाले कार्य करके, अल्लाह की ओर बहुत ज़्यादा लौटने वाले थे।

إِنَّا سَخَّرْنَا ٱلْجِبَالَ مَعَهُۥ يُسَبِّحْنَ بِٱلْعَشِىِّ وَٱلْإِشْرَاقِ ﴿١٨﴾

हमने दाऊद अलैहिस्सलाम के साथ पहाड़ों को वशीभूत कर दिया था। जब वह दिन के अंत में और उसकी शुरुआत में सूरज चढ़ने के समय अल्लाह की पवित्रता का गान करते थे, तो वे भी उनके साथ पवित्रता का गान करते थे। ل

وَٱلطَّيْرَ مَحْشُورَةًۭ ۖ كُلٌّۭ لَّهُۥٓ أَوَّابٌۭ ﴿١٩﴾

और हमने हवा में एकत्र पक्षियों को वशीभूत कर दिया था। सभी आज्ञाकारी थे, उनके अधीन होकर पवित्रता का गान करते थे।

وَشَدَدْنَا مُلْكَهُۥ وَءَاتَيْنَـٰهُ ٱلْحِكْمَةَ وَفَصْلَ ٱلْخِطَابِ ﴿٢٠﴾

और हमने उन्हें रोब दबदबा, शक्ति और उनके दुश्मनों पर विजय प्रदान करके, उनके राज्य को मज़बूत किया। तथा हमने उन्हें नुबुव्वत और उनके मामलों में यथार्थता प्रदान किया, तथा हमने हर इरादे में उन्हें संतोषजनक कथन शक्ति, तथा भाषण और फै सले में निर्णायकता प्रदान किया।

۞ وَهَلْ أَتَىٰكَ نَبَؤُا۟ ٱلْخَصْمِ إِذْ تَسَوَّرُوا۟ ٱلْمِحْرَابَ ﴿٢١﴾

और (ऐ रसूल!) क्या आपके पास दो झगड़ने वालों की खबर आई, जब वे दाऊद अलैहिस्सलाम के पास उनके उपासना स्थल में चढ़ आए।

إِذْ دَخَلُوا۟ عَلَىٰ دَاوُۥدَ فَفَزِعَ مِنْهُمْ ۖ قَالُوا۟ لَا تَخَفْ ۖ خَصْمَانِ بَغَىٰ بَعْضُنَا عَلَىٰ بَعْضٍۢ فَٱحْكُم بَيْنَنَا بِٱلْحَقِّ وَلَا تُشْطِطْ وَٱهْدِنَآ إِلَىٰ سَوَآءِ ٱلصِّرَٰطِ ﴿٢٢﴾

जब वे दोनों अचानक दाऊद अलैहिस्सलामके पास आए, तो वह उनके इस तरह अचानक और अपरिचित तरीक़े से प्रवेश करने से घबरा गए। जब उन्हें यह स्पष्ट हो गया कि दाऊद अलैहिस्सलामडर गए हैं, तो उन्होंने कहा: डरिए नहीं। क्योंकि हमदो झगड़ने वाले हैं, हममें से एक ने दूसरे पर अत्याचार किया है। अतः आप हमारे बीच न्याय के साथ फै सला कर दें और जब आप हमारे बीच फै सला करें, तो हमपर अन्याय न करें। तथा हमारा सीधे रास्ते की ओर मार्गदर्शन करें, जो कि यथार्थ रास्ता है।

إِنَّ هَـٰذَآ أَخِى لَهُۥ تِسْعٌۭ وَتِسْعُونَ نَعْجَةًۭ وَلِىَ نَعْجَةٌۭ وَٰحِدَةٌۭ فَقَالَ أَكْفِلْنِيهَا وَعَزَّنِى فِى ٱلْخِطَابِ ﴿٢٣﴾

दोनों विरोधियों में से एक ने दाऊद अलैहिस्सलाम से कहा: यह व्यक्ति मेरा भाई है। इसके पास निन्नानवे दुंबियाँ हैं और मेरे पास एक दुंबी है। तो इसने मुझसे कहा है कि वह एक भी मैं उसके हवाले कर दूँ और वह बहसमें मुझसे जीत गया है।

قَالَ لَقَدْ ظَلَمَكَ بِسُؤَالِ نَعْجَتِكَ إِلَىٰ نِعَاجِهِۦ ۖ وَإِنَّ كَثِيرًۭا مِّنَ ٱلْخُلَطَآءِ لَيَبْغِى بَعْضُهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍ إِلَّا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ وَقَلِيلٌۭ مَّا هُمْ ۗ وَظَنَّ دَاوُۥدُ أَنَّمَا فَتَنَّـٰهُ فَٱسْتَغْفَرَ رَبَّهُۥ وَخَرَّ رَاكِعًۭا وَأَنَابَ ۩ ﴿٢٤﴾

दाऊद अलैहिस्सलाम ने उन दोनों के बीच निर्णय किया और दावेदार को संबोधित करते हुए कहा: तुम्हारे भाई ने तुम्हारी दुंबी को अपनी दुंबियों के साथ मिलाने की माँग करके तुमपर ज़ुल्म किया है। सच्चाई यह है कि बहुत-से साझीदार अपने साथी का हक़ दबाकर और इंसाफ़ से मुँह मोड़कर एक-दूसरे पर अत्याचार करते हैं। अलबत्ता, उन ईमान वालों का मामला अलग है, जो अच्छे कार्य करते हैं। वे अपने साझीदारों के साथ न्याय करते हैं और उनपर अत्याचार नहीं करते। लेकिन इस तरह के लोग बहुत कमहैं। और दाऊद अलैहिस्सलामको यक़ीन हो गया कि इसझगड़े के द्वारा हमने उन्हें आज़माइश में डाला है। चुनाँचे उन्होंने अपने पालनहार से क्षमा याचना की, بلغ क़ुरआन · तफ़सीर अल्लाह की निकटता प्राप्त करने के लिए सजदे में गिर पड़े और उसकी ओर लौट आए।

فَغَفَرْنَا لَهُۥ ذَٰلِكَ ۖ وَإِنَّ لَهُۥ عِندَنَا لَزُلْفَىٰ وَحُسْنَ مَـَٔابٍۢ ﴿٢٥﴾

तो हमने उनकी बात स्वीकार कर ली और उनकी इस ग़लती को क्षमा कर दिया। और निश्चित रूप से वह हमारे पास समीपवर्ती लोगों में से हैं। और आखिरत में उनके लिए अच्छा ठिकाना है।

يَـٰدَاوُۥدُ إِنَّا جَعَلْنَـٰكَ خَلِيفَةًۭ فِى ٱلْأَرْضِ فَٱحْكُم بَيْنَ ٱلنَّاسِ بِٱلْحَقِّ وَلَا تَتَّبِعِ ٱلْهَوَىٰ فَيُضِلَّكَ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِ ۚ إِنَّ ٱلَّذِينَ يَضِلُّونَ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِ لَهُمْ عَذَابٌۭ شَدِيدٌۢ بِمَا نَسُوا۟ يَوْمَ ٱلْحِسَابِ ﴿٢٦﴾

ऐ दाऊद! हमने आपको धरती में ख़लीफ़ा बनाया है, जिसका काम धार्मिक और सांसारिक नियमों और फ़ै सलों को लागू करना होता है। अतः आप लोगों के बीच न्याय के साथ निर्णय करें। और लोगों के बीच अपने निर्णय में अपनी इच्छाओं का पालन न करें; कि रिश्तेदारी या दोस्ती के कारण किसी एक पक्ष की ओर झुक जाएँ, या किसी दुश्मनी की वजह से किसी को नज़र अंदाज़ करें। क्योंकि इच्छा का पालन करना आपको अल्लाह के सीधे रास्ते से भटका देगा। निश्चय जो लोग अल्लाह के सीधे रास्ते से भटक जाते हैं, उनके लिए उनके हिसाब के दिन को भूल जाने के कारण, कठोर यातना है। क्योंकि अगर वे उसे याद रखते और उससे डरते, तो अपनी इच्छाओं पर न चलते।

وَمَا خَلَقْنَا ٱلسَّمَآءَ وَٱلْأَرْضَ وَمَا بَيْنَهُمَا بَـٰطِلًۭا ۚ ذَٰلِكَ ظَنُّ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ ۚ فَوَيْلٌۭ لِّلَّذِينَ كَفَرُوا۟ مِنَ ٱلنَّارِ ﴿٢٧﴾

हमने आकाश और धरती को व्यर्थ पैदा नहीं किया। यह तो उन लोगों की सोच है, जिन्होंने कु फ़्र किया। अतः इन काफ़िरों के लिए, जो यह सोच रखते हैं, क़ियामत के दिन जहन्नमकी आग के रूप में बड़ा विनाश है, अगर वे अपने कु फ़्र और अल्लाह के बारे में बुरी सोच की अवस्था ही में मर गए।

أَمْ نَجْعَلُ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ كَٱلْمُفْسِدِينَ فِى ٱلْأَرْضِ أَمْ نَجْعَلُ ٱلْمُتَّقِينَ كَٱلْفُجَّارِ ﴿٢٨﴾

हम हरगिज़ अल्लाह पर ईमान रखने वालों, उसके रसूल का अनुसरण करने वालों और अच्छे कार्य करने वालों को, उन लोगों के जैसा नहीं बनाएँगे, जो कु फ़्र और पापों के साथ धरती में बिगाड़ पैदा करने वाले हैं। तथा हम उन लोगों को जो अपने पालनहार से, उसके आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर डरते हैं, पापों में लिप्त काफ़िरों और मुनाफ़िक़ों के समान नहीं बनाएँगे। उन दोनों के बीच बराबरी करना अन्याय है, जो अल्लाह के लिए शोभित नहीं है। बल्कि, अल्लाह परहेज़गार मोमिनों को जन्नत में प्रवेश के साथ पुरस्कृ त करेगा। और दुर्भाग्यशाली काफ़िरों को जहन्नममें दाखिलकरके दंडित करेगा। क्योंकि ये दोनों अल्लाह के निकट बराबर नहीं हैं। इसलिए उसके पास उनका बदला भी बराबर नहीं होगा।

كِتَـٰبٌ أَنزَلْنَـٰهُ إِلَيْكَ مُبَـٰرَكٌۭ لِّيَدَّبَّرُوٓا۟ ءَايَـٰتِهِۦ وَلِيَتَذَكَّرَ أُو۟لُوا۟ ٱلْأَلْبَـٰبِ ﴿٢٩﴾

यह क़ु रआन एक पुस्तक है, जिसे हमने आपकी ओर उतारा है, बड़ी भलाई और लाभ वाली पुस्तक है। ताकि लोग इसकी आयतों पर विचार करें और उनके अर्थों पर ग़ौर करें, और ताकि प्रबल एवं उज्ज्वल दिमाग वाले लोग इससे शिक्षा ग्रहण करें।

وَوَهَبْنَا لِدَاوُۥدَ سُلَيْمَـٰنَ ۚ نِعْمَ ٱلْعَبْدُ ۖ إِنَّهُۥٓ أَوَّابٌ ﴿٣٠﴾

हमने दाऊद को, अपनी ओर से उनपर अनुग्रह और उपकार करते हुए, उनका बेटा सुलैमान प्रदान किया, ताकि उससे उनकी आँखें ठंडी हो जाएँ। सुलैमान बहुत अच्छे बंदे थे। वह बहुत तौबा करने वाले और अल्लाह की ओर बहुत लौटने वाले और उसकी ओर रुजू' करने वाले थे।

إِذْ عُرِضَ عَلَيْهِ بِٱلْعَشِىِّ ٱلصَّـٰفِنَـٰتُ ٱلْجِيَادُ ﴿٣١﴾

उस समय को याद करें, जब अस्र के समय उनके सामने तेज़ दौड़ने वाले असली घोड़े लाए गए, जो तीन पैरों पर खड़े और चौथे को उठाए हुए थे। ये उत्तम नस्ल के घोड़े उनपर प्रदर्शित किए जाते रहे, यहाँ तक कि सूरज डूब गया। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

فَقَالَ إِنِّىٓ أَحْبَبْتُ حُبَّ ٱلْخَيْرِ عَن ذِكْرِ رَبِّى حَتَّىٰ تَوَارَتْ بِٱلْحِجَابِ ﴿٣٢﴾

तो सुलैमान अलैहिस्सलाम ने कहा: मैंने धन (जिसमें ये घोड़े भी शामिल हैं) के प्रेम को अपने पालनहार के ज़िक्र पर प्राथमिकता दी यहाँ तक कि सूर्य डूब गया और मुझे अस्र की नमाज़ अदा करने में देर हो गई।

رُدُّوهَا عَلَىَّ ۖ فَطَفِقَ مَسْحًۢا بِٱلسُّوقِ وَٱلْأَعْنَاقِ ﴿٣٣﴾

इन घोड़ों को मेरे पास वापस लाओ। चुनाँचे उन्हें उनके पास लाया गया। फिर वह तलवार से उनकी पिंडलियों और गरदनों को मारने लगे। ولقد فتنا سليمن وألقينا عل كرسيه جسدا ثم أناب

وَلَقَدْ فَتَنَّا سُلَيْمَـٰنَ وَأَلْقَيْنَا عَلَىٰ كُرْسِيِّهِۦ جَسَدًۭا ثُمَّ أَنَابَ ﴿٣٤﴾

और हमने सुलैमान को आज़माइश में डाला और उनके राज्य के सिंहासन पर शैतान को डाल दिया, जो मानव रूप धारण किए हुए था। उसने थोड़े समय के लिए उनके राज्य में शासन किया। फिर अल्लाह ने सुलैमान के लिए उनका राज्य बहालकर दिया और उन्हें शैतानों पर प्रभुत्व प्रदान किया।

قَالَ رَبِّ ٱغْفِرْ لِى وَهَبْ لِى مُلْكًۭا لَّا يَنۢبَغِى لِأَحَدٍۢ مِّنۢ بَعْدِىٓ ۖ إِنَّكَ أَنتَ ٱلْوَهَّابُ ﴿٣٥﴾

सुलैमान अलैहिस्सलाम ने कहा: ऐ मेरे पालनहार, मेरे गुनाह क्षमा कर दे, और मुझे ऐसी बादशाहत प्रदान कर जो मेरे ही लिए विशिष्ट हो, मेरे बाद किसी को प्राप्त न हो। निश्चय (ऐ मेरे पालनहार!) तू बहुत बड़ा दाता और बड़ा दानशील है।

فَسَخَّرْنَا لَهُ ٱلرِّيحَ تَجْرِى بِأَمْرِهِۦ رُخَآءً حَيْثُ أَصَابَ ﴿٣٦﴾

तो हमने उनकी दुआ क़बूल कर ली और हवा को उनके अधीन कर दिया, जो उनके आदेश से नरम होकर चलती थी। हवा के तेज़ और शक्तिशाली होने के बावजूद उसमें कोई झटका नहीं थी। वह उन्हें, जहाँ चाहते, ले जाती थी।

وَٱلشَّيَـٰطِينَ كُلَّ بَنَّآءٍۢ وَغَوَّاصٍۢ ﴿٣٧﴾

तथा हमने शैतानों को उनके अधीन कर दिया, जो उनके आदेश अनुसार काम करते थे। चुनाँचे उनमें से कुछ निर्माण करने वाले थे, तो कुछ ग़ोताख़ोर थे, जो समुद्र में गोता लगाकर मोती निकालते थे।

وَءَاخَرِينَ مُقَرَّنِينَ فِى ٱلْأَصْفَادِ ﴿٣٨﴾

और शैतानों में से कु छ सरकश थे, वे भी उनके अधीन कर दिए गए थे। चुनाँचे वे बेड़ियों में जकड़े हुए थे, हिल-डोलनहीं सकते थे।

هَـٰذَا عَطَآؤُنَا فَٱمْنُنْ أَوْ أَمْسِكْ بِغَيْرِ حِسَابٍۢ ﴿٣٩﴾

ऐ सुलैमान! यह हमारी बख़्शिश है, जो हमने तुम्हारी दुआ को स्वीकार करते हुए तुम्हें प्रदान की है। अब तुमजिसे चाहो, दो और जिसे चाहो, न दो। देने या न देने के मामले में तुमसे कोई हिसाब नहीं लिया जाएगा। وإن له عندنا لزلف وحسن مٔاب

وَإِنَّ لَهُۥ عِندَنَا لَزُلْفَىٰ وَحُسْنَ مَـَٔابٍۢ ﴿٤٠﴾

निश्चित रूप से सुलैमान हमारे पाससमीपवर्ती लोगों में से हैं। और उनके लिए लौटने की एक अच्छी जगह है और वह जन्नत है। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

وَٱذْكُرْ عَبْدَنَآ أَيُّوبَ إِذْ نَادَىٰ رَبَّهُۥٓ أَنِّى مَسَّنِىَ ٱلشَّيْطَـٰنُ بِنُصْبٍۢ وَعَذَابٍ ﴿٤١﴾

और (ऐ रसूल!) हमारे बंदे अय्यूब को याद करें, जब उन्होंने अपने पालनहार अल्लाह को पुकारा: शैतान ने मुझे दुःख तथा कष्ट पहुँचाया है।

ٱرْكُضْ بِرِجْلِكَ ۖ هَـٰذَا مُغْتَسَلٌۢ بَارِدٌۭ وَشَرَابٌۭ ﴿٤٢﴾

तो हमने उनसे कहा: अपने पाँव को धरती पर मारो। चुनाँचे उन्होंने अपना पाँव धरती पर मारा, तो उनके लिए उससे पानी का स्रोत फूट पड़ा, जिससे वह पी सकें और स्नान कर सकें और उनकी परेशानी और कष्ट दूर हो जाए।

وَوَهَبْنَا لَهُۥٓ أَهْلَهُۥ وَمِثْلَهُم مَّعَهُمْ رَحْمَةًۭ مِّنَّا وَذِكْرَىٰ لِأُو۟لِى ٱلْأَلْبَـٰبِ ﴿٤٣﴾

तो हमने उनकी दुआ क़बूल कर ली। चुनाँचे उनकी तकलीफ़ दूर कर दी, उन्हें उनके घर वाले दे दिए और अपनी ओर से उनपर दया करते हुए तथा उनके सब्र के बदले में, उनके समान और भी बेटे एवं पोते प्रदान किए। ताकि सही बुद्धि रखने वाले यह याद रखें कि धैर्य का परिणामराहत और सवाब है।

وَخُذْ بِيَدِكَ ضِغْثًۭا فَٱضْرِب بِّهِۦ وَلَا تَحْنَثْ ۗ إِنَّا وَجَدْنَـٰهُ صَابِرًۭا ۚ نِّعْمَ ٱلْعَبْدُ ۖ إِنَّهُۥٓ أَوَّابٌۭ ﴿٤٤﴾

जब अय्यूब (अलैहिस्सलाम) अपनी पत्नी पर क्रोधित हुए और उन्हें सौ कोड़े मारने की क़सम खाई, तो हमने उनसे कहा: (ऐ अय्यूब!) अपने हाथ में पतली और नर्म डालियों का एक गुच्छा लो और अपनी क़सम पूरी करने के लिए उनसे अपनी पत्नी को मार दो। और अपनी खाई हुई क़सम को न तोड़ो। चुनाँचे उन्होंने पतली और नर्म डालियों का एक गुच्छा लिया और उनसे उसे मारा। हमने उन्हें उसपर सब्र करने वाला पाया, जिससे उन्हें आज़माया था। वह अच्छे बंदे थे। निश्चय वह अल्लाह की तरफ़ बहुत ज़्यादा लौटने वाले थे।

وَٱذْكُرْ عِبَـٰدَنَآ إِبْرَٰهِيمَ وَإِسْحَـٰقَ وَيَعْقُوبَ أُو۟لِى ٱلْأَيْدِى وَٱلْأَبْصَـٰرِ ﴿٤٥﴾

(ऐ रसूल!) हमारे चुने हुए बंदों और भेजे हुए रसूलों: इबराहीम, इसहाक़ और याक़ूब को याद करें। वे अल्लाह की आज्ञा मानने और उसकी प्रसन्नता की तलाश में शक्तिशाली थे, तथा सत्य के मामले में सच्ची अंतर्दृष्टि के मालिक थे।

إِنَّآ أَخْلَصْنَـٰهُم بِخَالِصَةٍۢ ذِكْرَى ٱلدَّارِ ﴿٤٦﴾

और हमने उनपर एक विशेष गुण के साथ उपकार किया, जिसे उनके लिए विशिष्ट कर दिया, जो कि उनके दिलों को आख़िरत को याद करने, अच्छे कर्मों के साथ उसके लिए तैयारी करने और लोगों को उसके लिए कामकरने के लिए आमंत्रित करने के साथ आबाद करना है।

وَإِنَّهُمْ عِندَنَا لَمِنَ ٱلْمُصْطَفَيْنَ ٱلْأَخْيَارِ ﴿٤٧﴾

निश्चय वे हमारे निकट उन लोगों में से थे, जिन्हें हमने अपने आज्ञापालन और इबादत के लिए चुन लिया था, तथा अपने संदेश को उठाने और उसे लोगों तक पहुँचाने के लिए उनका चयन कर लिया था। ل

وَٱذْكُرْ إِسْمَـٰعِيلَ وَٱلْيَسَعَ وَذَا ٱلْكِفْلِ ۖ وَكُلٌّۭ مِّنَ ٱلْأَخْيَارِ ﴿٤٨﴾

और (ऐ नबी!) आप इसमाईल बिन इबराहीम को याद करें, अल-यसअ् को याद करें, तथा ज़ुल-किफ़्ल को याद करें और सबसे अच्छी प्रशंसा के साथ उनकी सराहना करें। क्योंकि वे इसके योग्य हैं। और ये सभी अल्लाह के निकट चीदा और चुने हुए लोगों में से हैं। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

هَـٰذَا ذِكْرٌۭ ۚ وَإِنَّ لِلْمُتَّقِينَ لَحُسْنَ مَـَٔابٍۢ ﴿٤٩﴾

यह इन लोगों का क़ु रआन में अच्छी प्रशंसा के साथ उल्लेख है। तथा निश्चय अल्लाह से, उसके आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर, डरने वालों के लिए आख़िरत के घर में बेहतर लौटने का स्थान है।

جَنَّـٰتِ عَدْنٍۢ مُّفَتَّحَةًۭ لَّهُمُ ٱلْأَبْوَٰبُ ﴿٥٠﴾

यह बेहतर लौटने का स्थान वह रहने के बाग़ हैं, जिनमें वे क़ियामत के दिन प्रवेश करेंगे और उनके स्वागत में उनके द्वार खोलदिए गए होंगे। متكٔين فيها يدعون فيها بفكهةكثيرة وشراب

مُتَّكِـِٔينَ فِيهَا يَدْعُونَ فِيهَا بِفَـٰكِهَةٍۢ كَثِيرَةٍۢ وَشَرَابٍۢ ﴿٥١﴾

अपने लिए सजाए गए तख़्तों पर तकिया लगाए बैठे होंगे। वे अपने सेवकों से अपनी इच्छाओं के अनुसार विभिन्न प्रकार के बहुत-से फल और अपने मनपसंद पेय, जैसे शराब आदि पेश करने के लिए कहेंगे।

۞ وَعِندَهُمْ قَـٰصِرَٰتُ ٱلطَّرْفِ أَتْرَابٌ ﴿٥٢﴾

उनके पास ऐसी स्त्रियाँ होंगी, जिनकी निगाहें उनके पतियों पर सीमित रहेंगी, उनके अलावा किसी अन्य की तरफ़ नहीं उठेंगी और वे एक-सी आयु वाली होंगी।

هَـٰذَا مَا تُوعَدُونَ لِيَوْمِ ٱلْحِسَابِ ﴿٥٣﴾

यह वही अच्छा बदला है जिसका (ऐ अल्लाह का भय रखने वालो!) तुमसे क़ियामत के दिन तुम्हारे उन नेक कामों के प्रतिफल के रूप में वादा किया जाता था, जो तुम दुनिया में किया करते थे। إن هذا لرزقنا ما له من نفاد

إِنَّ هَـٰذَا لَرِزْقُنَا مَا لَهُۥ مِن نَّفَادٍ ﴿٥٤﴾

यह बदला जिसका हमने उल्लेख किया है, यही हमारी जीविका है, जो हम क़ियामत के दिन अल्लाह का भय रखने वालों को प्रदान करेंगे। यह एक निरंतर जीविका है, जो न कभी बाधित होगी और न कभी समाप्त होगी।

هَـٰذَا ۚ وَإِنَّ لِلطَّـٰغِينَ لَشَرَّ مَـَٔابٍۢ ﴿٥٥﴾

यह जो हमने उल्लेख किया है, अल्लाह का भय रखने वालों का बदला है। जबकि कु फ़्र और गुनाहों के साथ अल्लाह की सीमाओं को पार करने वालों का बदला, अल्लाह का भय रखने वालों के बदले से अलग है। उनके लिए क़ियामत के दिन लौटने का बहुत बुरा स्थान है।

جَهَنَّمَ يَصْلَوْنَهَا فَبِئْسَ ٱلْمِهَادُ ﴿٥٦﴾

यह बदला जहन्नम है, जो उन्हें चारों ओर से घेर लेगी। वे उसकी ताप और लौ का सामना करते रहेंगे। उनके लिए उसी का बिछौना होगा। तो उनका बिछौना बहुत बुरा बिछौना है। هذا فليذوقوهحميم وغساق

هَـٰذَا فَلْيَذُوقُوهُ حَمِيمٌۭ وَغَسَّاقٌۭ ﴿٥٧﴾

यह यातना अत्यंत गर्म पानी और जहन्नम में यातना ग्रस्त लोगों के शरीर से निकलने वाली पीप है। सो वे इसे पिएं। क्योंकि यही उनका पेय है, जो उनकी प्यास नहीं बुझाएगी। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

وَءَاخَرُ مِن شَكْلِهِۦٓ أَزْوَٰجٌ ﴿٥٨﴾

उनके लिए इस यातना के रूप की एक और भी यातना है। इस तरह उनके लिए यातना के विभिन्न प्रकार हैं, जिनके साथ उन्हें आख़िरत में दंडित किया जाएगा।

هَـٰذَا فَوْجٌۭ مُّقْتَحِمٌۭ مَّعَكُمْ ۖ لَا مَرْحَبًۢا بِهِمْ ۚ إِنَّهُمْ صَالُوا۟ ٱلنَّارِ ﴿٥٩﴾

जब जहन्नमी लोग जहन्नम में प्रवेश कर जाएँगे, तो उनके बीच वैसी ही कहा-सुनी होगी, जो विरोधियों के बीच आपस में हुआ करती है और वे एक-दूसरे से अपनी बराअत का इज़हार करेंगे। चुनाँचे उनमें से कुछ लोग कहेंगे: यह जहन्नम वालों का एक समूह है जो तुम्हारे साथ जहन्नम में घुसता चला आ रहा है। तो वे जवाब देंगे: उनका स्वागत नहीं है। वे उसी तरह आग की यातना झेलने वाले हैं, जैसे हम झेल रहे हैं।

قَالُوا۟ بَلْ أَنتُمْ لَا مَرْحَبًۢا بِكُمْ ۖ أَنتُمْ قَدَّمْتُمُوهُ لَنَا ۖ فَبِئْسَ ٱلْقَرَارُ ﴿٦٠﴾

अनुयायियों का समूह अपने उन सरदारों से कहेगा, जिनके वे अधीनस्थ थे: बल्कि तुम(ऐ अनुसरण किए गए सरदारो!) तुम्हारा कोई स्वागत नहीं। क्योंकि तुमही हो, जो हमें गुमराह करके और बहकाकर हमारे लिए इस दर्दनाक यातना के कारण बने हो। चुनाँचे यह ठिकाना, सभी लोगों का ठिकाना, बहुत बुरा ठिकाना है, जो कि जहन्नम की आग है।

قَالُوا۟ رَبَّنَا مَن قَدَّمَ لَنَا هَـٰذَا فَزِدْهُ عَذَابًۭا ضِعْفًۭا فِى ٱلنَّارِ ﴿٦١﴾

अनुसरण करने वाले कहेंगे: ऐ हमारे पालनहार! जिसने हमारे पासहिदायत आ जाने के बाद हमें उससे गुमराह किया है, उसे जहन्नममें दोगुनी यातना दे।

وَقَالُوا۟ مَا لَنَا لَا نَرَىٰ رِجَالًۭا كُنَّا نَعُدُّهُم مِّنَ ٱلْأَشْرَارِ ﴿٦٢﴾

सरकश अभिमानी लोग कहेंगे: हमें क्या हुआ कि हमअपने साथ जहन्नममें उन लोगों को नहीं देखते, जिन्हें हमदुनिया में उन अभागा लोगों में से समझते थे जो यातना के पात्र थे।

أَتَّخَذْنَـٰهُمْ سِخْرِيًّا أَمْ زَاغَتْ عَنْهُمُ ٱلْأَبْصَـٰرُ ﴿٦٣﴾

क्या हमारा उनका मज़ाक़ उड़ाना और ठट्ठा करना गलत था, चुनाँचे वे यातना के पात्र नहीं थे, या हमारा उनका परिहास करना सही था और वे जहन्नम में दाखिल हुए हैं, किंतु हमारी नज़र उन पर नहीं पड़ी?! ق

إِنَّ ذَٰلِكَ لَحَقٌّۭ تَخَاصُمُ أَهْلِ ٱلنَّارِ ﴿٦٤﴾

यह जो हमने तुमसे काफ़िरों के , क़ियामत के दिन परस्पर झगड़ने का ज़िक्र किया है, निश्चित रूप से सत्य है। इसमें कोई संशय और संदेह नहीं है।

قُلْ إِنَّمَآ أَنَا۠ مُنذِرٌۭ ۖ وَمَا مِنْ إِلَـٰهٍ إِلَّا ٱللَّهُ ٱلْوَٰحِدُ ٱلْقَهَّارُ ﴿٦٥﴾

(ऐ मुहम्मद!) आप अपनी जाति के काफ़िरों से कह दें: मैं तो के वलतुम्हें अल्लाह की यातना से डराने वाला हूँ कि कहीं वह तुम्हारे कु फ़्र और रसूलों को झुठलाने के कारण तुम्हें उससे दंडित न कर दे। और अल्लाह सर्वशक्तिमान के सिवा कोई ऐसा पूज्य नहीं, जो इबादत के योग्य हो। क्योंकि वह अपनी महानता, गुणों और नामों में अके ला है। तथा वह परम प्रभुत्वशाली है, जिसने हर चीज़ को पराजित कर दिया। अतः हर चीज़ उसके अधीन है।

رَبُّ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا ٱلْعَزِيزُ ٱلْغَفَّـٰرُ ﴿٦٦﴾

वह आकाशों का पालनहार, धरती का पालनहार और उन दोनों के बीच मौजूद सारी चीज़ों का पालनहार है। वह अपने राज्य में प्रभुत्वशाली है, जिसे कोई पराजित नहीं कर सकता। तथा वह अपने तौबा करने वाले बंदों के गुनाहों को माफ़ करने वाला है। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर قل هو نبؤا عظيم

قُلْ هُوَ نَبَؤٌا۟ عَظِيمٌ ﴿٦٧﴾

(ऐ रसूल!) आप इन झुठलाने वालों से कह दें: निश्चय क़ु रआन बहुत महत्वपूर्ण ख़बर है। أ نتم عنه معرضون

أَنتُمْ عَنْهُ مُعْرِضُونَ ﴿٦٨﴾

तुमइस महत्वपूर्ण ख़बर से मुँह फे रने वाले हो। उसपर कोई ध्यान नहीं देते हो।

مَا كَانَ لِىَ مِنْ عِلْمٍۭ بِٱلْمَلَإِ ٱلْأَعْلَىٰٓ إِذْ يَخْتَصِمُونَ ﴿٦٩﴾

आदम की रचना के बारे में फ़रिश्तों के बीच जो बात चल रही थी मुझे उसका कभी कोई ज्ञान नहीं था, यदि अल्लाह ने मेरी ओर वह़्य न की होती और मुझे जानकारी न दी होती।

إِن يُوحَىٰٓ إِلَىَّ إِلَّآ أَنَّمَآ أَنَا۠ نَذِيرٌۭ مُّبِينٌ ﴿٧٠﴾

अल्लाह मेरी ओर जो कु छ भी वह़्य (प्रकाशना) करता है, वह के वल इसलिए वह़्य करता है कि मैं तुम्हें उसकी यातना से खुले तौर पर डराने वाला हूँ।

إِذْ قَالَ رَبُّكَ لِلْمَلَـٰٓئِكَةِ إِنِّى خَـٰلِقٌۢ بَشَرًۭا مِّن طِينٍۢ ﴿٧١﴾

उस समय को याद करें, जब आपके पालनहार ने फ़रिश्तों से कहा: मैं मिट्टी से एक मनुष्य पैदा करने वाला हूँ, और वह आदम अलैहिस्सलाम हैं। فإذا سويته ونفخت فيه من روحى فقعواله سجدين

فَإِذَا سَوَّيْتُهُۥ وَنَفَخْتُ فِيهِ مِن رُّوحِى فَقَعُوا۟ لَهُۥ سَـٰجِدِينَ ﴿٧٢﴾

जब मैं उसकी रचना का काम पूरा कर लूँ, उसकी शक्ल-सूरत ठीक कर दूँ और उसमें अपनी आत्मा फूँ क दूँ, तो तुम उसे सजदा करो।

فَسَجَدَ ٱلْمَلَـٰٓئِكَةُ كُلُّهُمْ أَجْمَعُونَ ﴿٧٣﴾

तो फ़रिश्तों ने अपने पालनहार के आदेश का पालन किया। चुनाँचे उन सब ने सम्मान स्वरूप सजदा किया, और उनमें से कोई भी न बचा, जिसने सजदा न किया हो।

إِلَّآ إِبْلِيسَ ٱسْتَكْبَرَ وَكَانَ مِنَ ٱلْكَـٰفِرِينَ ﴿٧٤﴾

सिवाय इबलीसके । उसने सजदा करने से अहंकार किया। और वह अपने पालनहार के आदेश के पालन से अभिमान करने के कारण काफ़िरों में से हो गया।

قَالَ يَـٰٓإِبْلِيسُ مَا مَنَعَكَ أَن تَسْجُدَ لِمَا خَلَقْتُ بِيَدَىَّ ۖ أَسْتَكْبَرْتَ أَمْ كُنتَ مِنَ ٱلْعَالِينَ ﴿٧٥﴾

अल्लाह ने कहा: ऐ इबलीस! तुझे आदमको सजदा करने से किस चीज़ ने रोका, जिसे मैंने अपने दोनों हाथों से बनाया?! क्या तुझे अभिमान ने सजदा करने से रोका, या तू इससे पहले ही से अपने रब से अभिमान और घमंड करने वाले था?!

قَالَ أَنَا۠ خَيْرٌۭ مِّنْهُ ۖ خَلَقْتَنِى مِن نَّارٍۢ وَخَلَقْتَهُۥ مِن طِينٍۢ ﴿٧٦﴾

इबलीस ने कहा: मैं आदमसे बेहतर हूँ। क्योंकि तूने मुझे आग से पैदा किया और उसे मिट्टी से बनाया। या उसका गुमान था कि आग मिट्टी से अधिक सम्माननीय तत्व है। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

قَالَ فَٱخْرُجْ مِنْهَا فَإِنَّكَ رَجِيمٌۭ ﴿٧٧﴾

अल्लाह ने इबलीससे कहा: जन्नत से निकलजा। क्योंकि तू शापित और धुत्कारा हुआ है।

وَإِنَّ عَلَيْكَ لَعْنَتِىٓ إِلَىٰ يَوْمِ ٱلدِّينِ ﴿٧٨﴾

और तेरे लिए बदले के दिन अर्थात् क़ियामत के दिन तक जन्नत से निष्कासन है।

قَالَ رَبِّ فَأَنظِرْنِىٓ إِلَىٰ يَوْمِ يُبْعَثُونَ ﴿٧٩﴾

इबलीस ने कहा: फिर मुझे मोहलत दे और मुझे उसदिन तक मौत न दे, जिस दिन तू अपने बंदों को दोबारा जीवित करके उठाएगा।

قَالَ فَإِنَّكَ مِنَ ٱلْمُنظَرِينَ ﴿٨٠﴾

अल्लाह ने कहा: निःसंदेह तू उन लोगों में से है जिन्हें मोहलत दी गई।

إِلَىٰ يَوْمِ ٱلْوَقْتِ ٱلْمَعْلُومِ ﴿٨١﴾

तुझे विनष्ट करने के लिए निर्धारित ज्ञात समय के दिन तक। قال فبعز تك لأغوين هم أجمعين

قَالَ فَبِعِزَّتِكَ لَأُغْوِيَنَّهُمْ أَجْمَعِينَ ﴿٨٢﴾

इबलीस ने कहा: मैं तेरी शक्ति और प्रभुत्व की क़सम खाता हूँ कि मैं आदम की समस्त संतान को अवश्य ही गुमराह कर दूँगा।

إِلَّا عِبَادَكَ مِنْهُمُ ٱلْمُخْلَصِينَ ﴿٨٣﴾

सिवाय उसके , जिसे तूने मेरे गुमराह करने से बचा लिया और उसे के वलअपनी इबादत के लिए चुन लिया।

قَالَ فَٱلْحَقُّ وَٱلْحَقَّ أَقُولُ ﴿٨٤﴾

अल्लाह तआला ने कहा: सत्य मेरी ओर से है। और मैं सत्य ही कहता हूँ। उसके सिवा कु छ नहीं कहता। لأملأن جهن م منك ومم نتبعك منهم أجمعين

لَأَمْلَأَنَّ جَهَنَّمَ مِنكَ وَمِمَّن تَبِعَكَ مِنْهُمْ أَجْمَعِينَ ﴿٨٥﴾

मैं क़ियामत के दिन जहन्नमको तुझसे और उन सभी लोगों से भर दूँगा, जो आदमकी संतान में से तेरे कु फ़्र में तेरा अनुसरण करेंगे।

قُلْ مَآ أَسْـَٔلُكُمْ عَلَيْهِ مِنْ أَجْرٍۢ وَمَآ أَنَا۠ مِنَ ٱلْمُتَكَلِّفِينَ ﴿٨٦﴾

(ऐ रसूल!) इन मुश्रिकों से कह दें: मैं तुम्हें जो संदेश पहुँचाता हूँ, उसका तुमसे कोई पारिश्रमिक नहीं माँगता, और मैं अपनी ओर से कु छ बनाने वाला भी नहीं हूँ कि मुझे जितना आदेश दिया गया है, उससे कु छ अधिक बताऊँ । بلغ क़ुरआन · तफ़सीर إن هو إل اذكر للعلمين

إِنْ هُوَ إِلَّا ذِكْرٌۭ لِّلْعَـٰلَمِينَ ﴿٨٧﴾

क़ु रआन के वलउन जिन्नों और इनसानों के लिए एक अनुस्मारक (उपदेश) है, जो शरई आदेश के बाध्य हैं। ولتعلمن نبأه بعد حين

وَلَتَعْلَمُنَّ نَبَأَهُۥ بَعْدَ حِينٍۭ ﴿٨٨﴾

और निश्चय तुममरने के बाद जल्द ही इसक़ु रआन की खबर अवश्य जान लोगे और यह कि यह सत्य है। स्रोत:अल-मुख़्तसर फ़ी तफ़सीरिल क़ु रआनिल करीम

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