إِذَا وَقَعَتِ ٱلْوَاقِعَةُ ﴿١﴾
जब अनिवार्य रूप से क़ियामत घटित हो जाएगी। ليس لوقعتها كاذبة
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मक्की · 96 आयतें
إِذَا وَقَعَتِ ٱلْوَاقِعَةُ ﴿١﴾
जब अनिवार्य रूप से क़ियामत घटित हो जाएगी। ليس لوقعتها كاذبة
لَيْسَ لِوَقْعَتِهَا كَاذِبَةٌ ﴿٢﴾
कोई प्राणी ऐसा नहीं होगा, जो उसका इनकार करे, जैसे दुनिया में इनकार कर देता था। خافضة ر افعة
خَافِضَةٌۭ رَّافِعَةٌ ﴿٣﴾
वह पापी काफ़िरों को जहन्नम में दाखिल करके उन्हें नीचा करनेجवाली, और पुनीत ईमान वालों को जन्नत में दाखिल करके उन्हें ऊँ चा करने वाली होगी।
إِذَا رُجَّتِ ٱلْأَرْضُ رَجًّۭا ﴿٤﴾
जब धरती को बहुत ज़ोर से हिलाया जाएगा। س
وَبُسَّتِ ٱلْجِبَالُ بَسًّۭا ﴿٥﴾
और पहाड़ बिलकु ल महीन-महीन कर दिए जाएँगे। ث
فَكَانَتْ هَبَآءًۭ مُّنۢبَثًّۭا ﴿٦﴾
सो वे चकना चूर होने के कारण बिखरी हुई धूल बन जाएँगे, जिसमें स्थिरता नहीं होगी। وكنتم أزوجا ثلثة
وَكُنتُمْ أَزْوَٰجًۭا ثَلَـٰثَةًۭ ﴿٧﴾
और तुम उस दिन तीन प्रकार के लोग हो जाओगे।
فَأَصْحَـٰبُ ٱلْمَيْمَنَةِ مَآ أَصْحَـٰبُ ٱلْمَيْمَنَةِ ﴿٨﴾
तो दाहिने हाथ वाले, जो अपने कर्मपत्र दाहिने हाथ से लेंगे। उनका पद कितना ऊँ चा और महान है!
وَأَصْحَـٰبُ ٱلْمَشْـَٔمَةِ مَآ أَصْحَـٰبُ ٱلْمَشْـَٔمَةِ ﴿٩﴾
और बाएँ हाथ वाले, जो अपने कर्मपत्र बाएँ हाथ से लेंगे। उनकी स्थिति कितनी हीन और बदतर है!
وَٱلسَّـٰبِقُونَ ٱلسَّـٰبِقُونَ ﴿١٠﴾
और जो लोग दुनिया में नेक कामकरने में पहलकरने वाले हैं, वही लोग आख़िरत में जन्नत में प्रवेश करने में दूसरों से आगे रहने वाले हैं। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर
أُو۟لَـٰٓئِكَ ٱلْمُقَرَّبُونَ ﴿١١﴾
यही लोग अल्लाह की (विशेष) निकटता प्राप्त किए हुए हैं।
فِى جَنَّـٰتِ ٱلنَّعِيمِ ﴿١٢﴾
वे नेमत के बाग़ों में विभिन्न प्रकार की नेमतों का आनंद लेते होंगे।
ثُلَّةٌۭ مِّنَ ٱلْأَوَّلِينَ ﴿١٣﴾
इस उम्मत (के अगले लोगों) में से और पिछली उम्मतों में से एक समूह होगा।
وَقَلِيلٌۭ مِّنَ ٱلْـَٔاخِرِينَ ﴿١٤﴾
और आखिरी ज़माने के थोड़े लोग ही आगे रहने वाले समीपवर्ती लोगों में से होंगे। عل سرر موضونة
عَلَىٰ سُرُرٍۢ مَّوْضُونَةٍۢ ﴿١٥﴾
सोने से बुने हुए पलंगों पर। متكٔين عليها متقبلين
مُّتَّكِـِٔينَ عَلَيْهَا مُتَقَـٰبِلِينَ ﴿١٦﴾
इन पलंगों पर तकिया लगाए आमने-सामने बैठे होंगे। उनमें से कोई दूसरे की पीठ को नहीं देखेगा। يطوف عليهم ولدن مخلدون
يَطُوفُ عَلَيْهِمْ وِلْدَٰنٌۭ مُّخَلَّدُونَ ﴿١٧﴾
उनके पासउनकी सेवा के लिए ऐसे बालक घूमरहे होंगे, जो न कभी बूढ़े होंगे और न मरेंगे। بأ ك واب وأباريق وكأس من م عين
بِأَكْوَابٍۢ وَأَبَارِيقَ وَكَأْسٍۢ مِّن مَّعِينٍۢ ﴿١٨﴾
वे उनके आस-पास ऐसे प्यालों के साथ जिनके दस्ते नहीं होते, ऐसी सुराहियों के साथ जिनके दस्ते होते हैं और छलकते जाम लेकर फिर रहे होंगे, जो जन्नत में बहने वाली शराब के होंगे, जिनके सोते कभी बंद नहीं होंगे। لا يصدعون عنها ولا ينزفون
لَّا يُصَدَّعُونَ عَنْهَا وَلَا يُنزِفُونَ ﴿١٩﴾
वह मदिरा दुनिया की मदिरा की तरह नहीं होगी। क्योंकि उसके पीने वाले को न सिर दर्द होगा और न ही उसकी बुद्धि प्रभावित होगी। وفكهة مما يتخيرون
وَفَـٰكِهَةٍۢ مِّمَّا يَتَخَيَّرُونَ ﴿٢٠﴾
और ये बालक उनके पास उनकी पसंद के फल लेकर फिर रहे होंगे। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर ولحم طير مما يشتهون
وَلَحْمِ طَيْرٍۢ مِّمَّا يَشْتَهُونَ ﴿٢١﴾
तथा पक्षियों का मांस लेकर फिर रहे होंगे, जिसकी वे इच्छा रखते हैं। وحور عين
وَحُورٌ عِينٌۭ ﴿٢٢﴾
और उनके लिए जन्नत में बड़ी आँखों वाली सुंदर स्त्रियाँ होंगी।
كَأَمْثَـٰلِ ٱللُّؤْلُؤِ ٱلْمَكْنُونِ ﴿٢٣﴾
सीपियों में संरक्षित मोतियों की तरह।
جَزَآءًۢ بِمَا كَانُوا۟ يَعْمَلُونَ ﴿٢٤﴾
उनके लिए उन अच्छे कर्मों के प्रतिफलके तौर पर जो वे दुनिया में किया करते थे। لا يسمعون فيها لغوا ولا تأثيما
لَا يَسْمَعُونَ فِيهَا لَغْوًۭا وَلَا تَأْثِيمًا ﴿٢٥﴾
वे जन्नत में अश्लील बातें नहीं सुनेंगे, और न ही कोई ऐसी बात जिसके कहने वाले को पाप लगे। إلا قيلا سلما سلما
إِلَّا قِيلًۭا سَلَـٰمًۭا سَلَـٰمًۭا ﴿٢٦﴾
वे के वल अपने आपपर फ़रिश्तों का सलाम और उनका आपस में एक-दूसरे को सलाम करना सुनेंगे।
وَأَصْحَـٰبُ ٱلْيَمِينِ مَآ أَصْحَـٰبُ ٱلْيَمِينِ ﴿٢٧﴾
और दाहिने हाथ वाले - जो अपने कर्मपत्र अपने दाहिने हाथ में दिए जाएँगे - अल्लाह के निकट उनकी स्थिति और उनका पद कितना महान है! فى سدر مخضود
فِى سِدْرٍۢ مَّخْضُودٍۢ ﴿٢٨﴾
(वे) ऐसी बेरियों में होंगे जिनके काँटे काटे हुए हैं, उनमें कोई कष्ट नहीं है। وطلح م نضود
وَطَلْحٍۢ مَّنضُودٍۢ ﴿٢٩﴾
और परत दर परत लगे हुए के लों में। وظل م مدود
وَظِلٍّۢ مَّمْدُودٍۢ ﴿٣٠﴾
और ऐसी छाया में जो अच्छी तरह फै ली हुई, निरंतर रहने वाली है, जो कभी समाप्त न होगी।
وَمَآءٍۢ مَّسْكُوبٍۢ ﴿٣١﴾
और सदा बहते पानी में। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर وفكهةكثيرة
وَفَـٰكِهَةٍۢ كَثِيرَةٍۢ ﴿٣٢﴾
तथा ढेर सारे फलों में जो सीमित नहीं हैं। لا مقطوعة ولا ممنوعة
لَّا مَقْطُوعَةٍۢ وَلَا مَمْنُوعَةٍۢ ﴿٣٣﴾
ये फल उनके पास से कभी समाप्त नहीं होंगे। क्योंकि उनका कोई मौसम नहीं होगा। तथा जब भी वे उन्हें लेना चाहेंगे, उसमें कोई बाधा नहीं होगी। وفرش م رفوعة
وَفُرُشٍۢ مَّرْفُوعَةٍ ﴿٣٤﴾
और पलंगों पर लगे ऊँ चे बिस्तरों पर (होंगे)।
إِنَّآ أَنشَأْنَـٰهُنَّ إِنشَآءًۭ ﴿٣٥﴾
हमने उपर्युक्त हूरों को असामान्य तरीके से बनाया है। فجعلنهن أ بكارا
فَجَعَلْنَـٰهُنَّ أَبْكَارًا ﴿٣٦﴾
चुनाँचे हमने उन्हें कुँ वारियाँ बनाया, जिन्हें पहले छु आ नहीं गया। عربا أ ترابا
عُرُبًا أَتْرَابًۭا ﴿٣٧﴾
जो अपने पतियों को प्रिय और समान उम्र वाली हैं।
لِّأَصْحَـٰبِ ٱلْيَمِينِ ﴿٣٨﴾
हमने उन्हें दाहिने हाथ वालों के लिए बनाया है, जिन्हें उनके सौभाग्यशाली होने की निशानी के तौर पर दाईं ओर ले जाया जाएगा।
ثُلَّةٌۭ مِّنَ ٱلْأَوَّلِينَ ﴿٣٩﴾
वे पिछले नबियों की उम्मतों में से एक समूह हैं।
وَثُلَّةٌۭ مِّنَ ٱلْـَٔاخِرِينَ ﴿٤٠﴾
तथा मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की उम्मत में से एक समूह हैं, जो किअंतिम उम्मत है।
وَأَصْحَـٰبُ ٱلشِّمَالِ مَآ أَصْحَـٰبُ ٱلشِّمَالِ ﴿٤١﴾
और बाएँ हाथ वाले - जो अपने कर्मपत्र अपने बाएँ हाथ में दिए जाएँगे - उनकी स्थिति और उनका परिणाम कितना खराब है! فى سموم وحميم
فِى سَمُومٍۢ وَحَمِيمٍۢ ﴿٤٢﴾
(वे) बहुत गर्म हवा में और बहुत गर्म पानी में (होंगे)। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर وظل من يحموم
وَظِلٍّۢ مِّن يَحْمُومٍۢ ﴿٤٣﴾
और काले धुएँ की छाया में होंगे। لا بارد ولا كريم
لَّا بَارِدٍۢ وَلَا كَرِيمٍ ﴿٤٤﴾
जो न चलते हुए सुहावनी होगी और न अच्छा दिखने वाली होगी। إن هم كانواقبل ذلك مترفين
إِنَّهُمْ كَانُوا۟ قَبْلَ ذَٰلِكَ مُتْرَفِينَ ﴿٤٥﴾
वे इस यातना तक पहुँचने से पहले, दुनिया की सुख-सुविधाओं का आनंद ले रहे थे, उन्हें अपनी इच्छाओं की पूर्ति के सिवा किसी चीज़ की परवाह नहीं थी।
وَكَانُوا۟ يُصِرُّونَ عَلَى ٱلْحِنثِ ٱلْعَظِيمِ ﴿٤٦﴾
और वे अल्लाह का इनकार करने और उसे छोड़कर मूर्तियों की पूजा करने पर अड़े रहते थे। وكانوايقولون أ ذا متنا وكنا ترابا وعظما أءنا لمبعوثون
وَكَانُوا۟ يَقُولُونَ أَئِذَا مِتْنَا وَكُنَّا تُرَابًۭا وَعِظَـٰمًا أَءِنَّا لَمَبْعُوثُونَ ﴿٤٧﴾
और वे मरने के बाद पुनः जीवित किए जाने का इनकार करते थे। चुनाँचे उसका मज़ाक उड़ाते हुए और उसे असंभव समझते हुए कहते थे: क्या जब हम मर जाएँगे तथा मिट्टी और सड़ी हुई हड्डियाँ बन जाएँगे, तो क्या हम उसके बाद फिर से जीवित करके उठाए जाएँगे?!
أَوَءَابَآؤُنَا ٱلْأَوَّلُونَ ﴿٤٨﴾
और क्या हमारे पहले बाप-दादा भी उठाए जाएँगे, जो हमसे पहले मर गए?!
قُلْ إِنَّ ٱلْأَوَّلِينَ وَٱلْـَٔاخِرِينَ ﴿٤٩﴾
(ऐ रसूल!) आप इन पुनर्जीवन का इनकार करने वाले लोगों से कह दें: निःसंदेह अगले और पिछले (सभी) लोग। لمجموعون إلى ميقت يوم معلوم
لَمَجْمُوعُونَ إِلَىٰ مِيقَـٰتِ يَوْمٍۢ مَّعْلُومٍۢ ﴿٥٠﴾
क़ियामत के दिन हिसाब और बदले के लिए निश्चित रूप से एकत्र किए जाएँगे।
ثُمَّ إِنَّكُمْ أَيُّهَا ٱلضَّآلُّونَ ٱلْمُكَذِّبُونَ ﴿٥١﴾
لٔاكلون من شجر من زقوم
لَـَٔاكِلُونَ مِن شَجَرٍۢ مِّن زَقُّومٍۢ ﴿٥٢﴾
फिर निःसंदेह (ऐ मरणोपरांत पुनः जीवित किए जाने का इनकार करने वालो! सीधे मार्ग से भटके हुए लोगो!) तुम निश्चय क़ियामत के दिन ज़क़्क़ूम (थूहड़) के वृक्ष का फल खाने वाले हो, जो कि सबसे बुरा और सबसे गंदा फल है।
فَمَالِـُٔونَ مِنْهَا ٱلْبُطُونَ ﴿٥٣﴾
फिर उस कड़वे पेड़ (के फल) से अपने खाली पेट भरने वाले हो। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर
فَشَـٰرِبُونَ عَلَيْهِ مِنَ ٱلْحَمِيمِ ﴿٥٤﴾
फिर उसपर अत्यधिक गर्म (खौलता हुआ) पानी पीने वाले हो।
فَشَـٰرِبُونَ شُرْبَ ٱلْهِيمِ ﴿٥٥﴾
फिर उसे बहुत ज़्यादा पीने वाले हो, जिस तरह न बुझने वाले प्यास के रोग से पीड़ित ऊँ ट पीता चला जाता है।
هَـٰذَا نُزُلُهُمْ يَوْمَ ٱلدِّينِ ﴿٥٦﴾
यह उल्लेख किया गया कड़वा भोजन और गर्म पानी उनका आतिथ्य है, जिसके साथ बदले के दिन उनका स्वागत किया जाएगा। نحن خلقنكم فلولا تصدقون
نَحْنُ خَلَقْنَـٰكُمْ فَلَوْلَا تُصَدِّقُونَ ﴿٥٧﴾
हमही ने (ऐ झुठलाने वालो!) तुम्हें पैदा किया, जबकि तुमकु छ नहीं थे। फिर तुमक्यों सच नहीं मानते कि हमतुम्हारी मृत्यु के बाद तुम्हें दोबारा जीवित करके उठाएँगे?! أفرءيتم ما تمنون
أَفَرَءَيْتُم مَّا تُمْنُونَ ﴿٥٨﴾
तो क्या (ऐ लोगो!) तुमने उस वीर्य पर विचार किया, जो तुम अपनी स्त्रियों के गर्भाशयों में टपकाते हो?!
ءَأَنتُمْ تَخْلُقُونَهُۥٓ أَمْ نَحْنُ ٱلْخَـٰلِقُونَ ﴿٥٩﴾
क्या तुम उस वीर्य को पैदा करते हो या हम ही उसे पैदा करते हैं?!
نَحْنُ قَدَّرْنَا بَيْنَكُمُ ٱلْمَوْتَ وَمَا نَحْنُ بِمَسْبُوقِينَ ﴿٦٠﴾
हम ही ने तुम्हारे बीच मृत्यु का समय निश्चित किया है। चुनाँचे तुममें से प्रत्येक व्यक्ति का एक निर्धारित समय है, जिससे वह न आगे बढ़ सकता है और न ही देर कर सकता है। और हम असमर्थ नहीं हैं।
عَلَىٰٓ أَن نُّبَدِّلَ أَمْثَـٰلَكُمْ وَنُنشِئَكُمْ فِى مَا لَا تَعْلَمُونَ ﴿٦١﴾
कि हम तुम्हारी वर्तमान रचना और रूप को, जिसे तुम जानते हो, बदल दें और तुम्हें ऐसी रचना और रूप में पैदा कर दें, जिसे तुम नहीं जानते।
وَلَقَدْ عَلِمْتُمُ ٱلنَّشْأَةَ ٱلْأُولَىٰ فَلَوْلَا تَذَكَّرُونَ ﴿٦٢﴾
निश्चय तुम तो यह जान चुके हो कि हमने तुम्हें पहली बार कै से पैदा किया, फिर तुम विचार क्यों नहीं करते और जानते कि जिसने तुम्हें पहली बार पैदा किया है, वह तुम्हारी मृत्यु के बाद तुम्हें पुनर्जीवित करने में सक्षमहै?! أفرءيتم ما تحرثون
أَفَرَءَيْتُم مَّا تَحْرُثُونَ ﴿٦٣﴾
फिर क्या तुमने उस बीज पर विचार किया जो तुम धरती में डालते हो?! بلغ क़ुरआन · तफ़सीर
ءَأَنتُمْ تَزْرَعُونَهُۥٓ أَمْ نَحْنُ ٱلزَّٰرِعُونَ ﴿٦٤﴾
क्या तुम उस बीज को उगाते हो, या हम ही हैं जो उसे उगाते हैं?!
لَوْ نَشَآءُ لَجَعَلْنَـٰهُ حُطَـٰمًۭا فَظَلْتُمْ تَفَكَّهُونَ ﴿٦٥﴾
यदि हम उस खेती को चूर-चूर करना चाहें, तो उसके पकने और काटे जाने के निकट होने के बाद, अवश्य उसे चूर-चूर कर दें। फिर उसके बाद तुम उसे पहुँचने वाली आपदा पर आश्चर्य करते रह जाओ। إ ن المغرمون
إِنَّا لَمُغْرَمُونَ ﴿٦٦﴾
तुम कहने लगो: हमने जो कु छ खर्च किया था, उसकी हानि के द्वारा हमें दंडित किया गया है। بل نحن محرومون
بَلْ نَحْنُ مَحْرُومُونَ ﴿٦٧﴾
बल्कि हम रोज़ी से वंचित कर दिए गए हैं।
أَفَرَءَيْتُمُ ٱلْمَآءَ ٱلَّذِى تَشْرَبُونَ ﴿٦٨﴾
फिर क्या तुमने उस पानी पर विचार किया, जो तुम प्यास लगने पर पीते हो?!
ءَأَنتُمْ أَنزَلْتُمُوهُ مِنَ ٱلْمُزْنِ أَمْ نَحْنُ ٱلْمُنزِلُونَ ﴿٦٩﴾
क्या तुमने उसे आसमान में बादलों से उतारा है, या हमही ने उसे उतारा है?!
لَوْ نَشَآءُ جَعَلْنَـٰهُ أُجَاجًۭا فَلَوْلَا تَشْكُرُونَ ﴿٧٠﴾
अगर हम उस पानी को अत्यंत खारा बनाना चाहें कि वह पीने या पानी देने के काम न आए, तो हम उसे अत्यंत खारा बना दें। फिर तुम अल्लाह का शुक्र अदा क्यों नहीं करते कि उसने तुमपर दया करते हुए मीठा पानी उतारा है?!
أَفَرَءَيْتُمُ ٱلنَّارَ ٱلَّتِى تُورُونَ ﴿٧١﴾
फिर क्या तुमने उस आग पर विचार किया जिसे तुम अपने फायदे के लिए जलाते हो?!
ءَأَنتُمْ أَنشَأْتُمْ شَجَرَتَهَآ أَمْ نَحْنُ ٱلْمُنشِـُٔونَ ﴿٧٢﴾
क्या तुमने उस पेड़ को पैदा किया है, जिससे आग जलाई जाती है, या हम ही ने उसे तुमपर दया के स्वरूप पैदा किया है?! نحن جعلنها تذكرة ومتعا للمقوين
نَحْنُ جَعَلْنَـٰهَا تَذْكِرَةًۭ وَمَتَـٰعًۭا لِّلْمُقْوِينَ ﴿٧٣﴾
हमने इस आग को तुम्हारे लिए आख़िरत की आग की याद दिलाने के लिए एक अनुस्मारक बना दिया है, तथा हमने इसे तुम्हारे यात्रियों के लिए एक लाभ बना दिया है। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर
فَسَبِّحْ بِٱسْمِ رَبِّكَ ٱلْعَظِيمِ ﴿٧٤﴾
अतः (ऐ रसूल) आप अपने महान पालनहार को उन चीज़ों से पवित्र ठहराएँ , जो उसके योग्य नहीं हैं।
۞ فَلَآ أُقْسِمُ بِمَوَٰقِعِ ٱلنُّجُومِ ﴿٧٥﴾
अल्लाह ने सितारों के स्थानों और उनके गिरने की जगहों की क़समखाई है। وإنه لقسم لو تعلمون عظيم
وَإِنَّهُۥ لَقَسَمٌۭ لَّوْ تَعْلَمُونَ عَظِيمٌ ﴿٧٦﴾
और निःसंदेह इन स्थानों की क़सम खाना (यदि तुम उसकी महानता जानते हो) बहुत बड़ी बात है; क्योंकि इनके अंदर अनगिनत निशानियाँ और पाठ मौजूद हैं। إنه لقرءان كريم
إِنَّهُۥ لَقُرْءَانٌۭ كَرِيمٌۭ ﴿٧٧﴾
निश्चय (ऐ लोगो!) तुम्हारे सामने पढ़ा जाने वाला यह क़ु रआन, एक सम्मानित एवं प्रतिष्ठित क़ु रआन है। क्योंकि इसमें महान लाभ निहित हैं। فى كتب مكنون
فِى كِتَـٰبٍۢ مَّكْنُونٍۢ ﴿٧٨﴾
एक ऐसी किताब में अंकित है, जो लोगों की निगाहों से सुरक्षित है। और वह 'लौहे महफ़ू ज़' है।
لَّا يَمَسُّهُۥٓ إِلَّا ٱلْمُطَهَّرُونَ ﴿٧٩﴾
उसे के वलवे फरिशते छू ते हैं, जो गुनाहों और दोषों से पवित्र किए गए हैं।
تَنزِيلٌۭ مِّن رَّبِّ ٱلْعَـٰلَمِينَ ﴿٨٠﴾
यह सारी सृष्टि के पालनहार की ओर से उसके नबी मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर उतारा गया है।
أَفَبِهَـٰذَا ٱلْحَدِيثِ أَنتُم مُّدْهِنُونَ ﴿٨١﴾
तो फिर क्या (ऐ मुश्रिको!) तुम इस वाणी को झुठलाने वाले हो, उसकी पुष्टि करने वाले नहीं हो?! وتجعلون رزقكم أنكم تكذبون
وَتَجْعَلُونَ رِزْقَكُمْ أَنَّكُمْ تُكَذِّبُونَ ﴿٨٢﴾
और तुम अल्लाह की दी हुई नेमतों पर उसका शुक्र इस तरह अदा करते हो कि उन्हें झुठला देते हो। इसलिए बारिश का श्रेय नक्षत्र को देते हो और कहते हो: हमपर अमुक औरअमुक नक्षत्र के कारण बारिश हुई?!
فَلَوْلَآ إِذَا بَلَغَتِ ٱلْحُلْقُومَ ﴿٨٣﴾
फिर क्यों नहीं जब रूह (आत्मा) गले को पहुँचती है। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर وأنتم حينئ ذ تنظرون
وَأَنتُمْ حِينَئِذٍۢ تَنظُرُونَ ﴿٨٤﴾
और उस समय तुम अपने सामने मरने वाले को देख रहे होते हो। ونحن أقرب إليهمنكم ولكن لا تبصرون
وَنَحْنُ أَقْرَبُ إِلَيْهِ مِنكُمْ وَلَـٰكِن لَّا تُبْصِرُونَ ﴿٨٥﴾
और हमअपने ज्ञान और सामर्थ्य से और अपने फ़रिश्तों के माध्यमसे, तुम्हारे मरने वाले के तुमसे अधिक निकट होते हैं, लेकिन तुमइन फ़रिश्तों को नहीं देखते।
فَلَوْلَآ إِن كُنتُمْ غَيْرَ مَدِينِينَ ﴿٨٦﴾
फिर क्यों नहीं (यदि तुम, अपने दावे के अनुसार, अपने कर्मों का बदला दिए जाने के लिए उठाए जाने वाले नहीं हो)
تَرْجِعُونَهَآ إِن كُنتُمْ صَـٰدِقِينَ ﴿٨٧﴾
इस आत्मा को वापस ले आते, जो तुम्हारे मरने वाले के शरीर से निकली है, यदि तुम सच्चे हो?! हालाँकि तुम ऐसा नहीं कर सकते।
فَأَمَّآ إِن كَانَ مِنَ ٱلْمُقَرَّبِينَ ﴿٨٨﴾
फिर अगर वह मरने वाला व्यक्ति अच्छे कामों में पहलकरने वालों में से है। فروح وريحان وجنت نعيم
فَرَوْحٌۭ وَرَيْحَانٌۭ وَجَنَّتُ نَعِيمٍۢ ﴿٨٩﴾
तो उसके लिए ऐसा आराम जिसके बाद कोई थकान नहीं, उत्तम रोज़ी और दया है, तथा उसके लिए ऐसी जन्नत है, जिसमें वह अपनी मनचाही चीज़ों का आनंद लेगा।
وَأَمَّآ إِن كَانَ مِنْ أَصْحَـٰبِ ٱلْيَمِينِ ﴿٩٠﴾
فَسَلَـٰمٌۭ لَّكَ مِنْ أَصْحَـٰبِ ٱلْيَمِينِ ﴿٩١﴾
और अगर वह मृतक दाहिने हाथ वालों में से है, तो उनकी चिंता न करें। क्योंकि उनके लिए सुरक्षा और शांति है।
وَأَمَّآ إِن كَانَ مِنَ ٱلْمُكَذِّبِينَ ٱلضَّآلِّينَ ﴿٩٢﴾
और अगर वह मृतक अल्लाह के रसूलसल्लल्लाहु अलैहि व सल्लमके लाए हुए धर्म को झुठलाने वालों और सीधे मार्ग से भटके हुए लोगों में से है। فنزل من حميم
فَنُزُلٌۭ مِّنْ حَمِيمٍۢ ﴿٩٣﴾
तो उसका आतिथ्य जिसके साथ उसका स्वागत किया जाएगा, अत्यंत गर्म पानी है। وتص لية جحيم
وَتَصْلِيَةُ جَحِيمٍ ﴿٩٤﴾
और उसे जहन्नम की आग में जलना है। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर
إِنَّ هَـٰذَا لَهُوَ حَقُّ ٱلْيَقِينِ ﴿٩٥﴾
निःसंदेह यह जो हमने (ऐ रसूल!) आपके सामने बयान किया है, यही निश्चित सत्य है, जो निर्विवाद एवं संदेह रहित है।
فَسَبِّحْ بِٱسْمِ رَبِّكَ ٱلْعَظِيمِ ﴿٩٦﴾
अतः आप अपने महान रब के नामकी पवित्रता का गुणगान कीजिए तथा उसे हर प्रकार के दोषों और त्रुटियों से पाक ठहराईये। स्रोत:अल-मुख़्तसर फ़ी तफ़सीरिल क़ु रआनिल करीम
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