ٱلرَّحْمَـٰنُ ﴿١﴾
अर-रहमान' व्यापक दया वाला।
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मदनी · 78 आयतें
ٱلرَّحْمَـٰنُ ﴿١﴾
अर-रहमान' व्यापक दया वाला।
عَلَّمَ ٱلْقُرْءَانَ ﴿٢﴾
उसने लोगों को क़ु रआन सिखाया, उसका याद करना आसान करके और उसके अर्थ को समझना सुगमबनाकर।
خَلَقَ ٱلْإِنسَـٰنَ ﴿٣﴾
उसने इनसान को ठीक-ठाक बनाया और उसे अच्छी शक्ल-सूरत दी।
عَلَّمَهُ ٱلْبَيَانَ ﴿٤﴾
उसे सिखाया कि अपने दिल की बात को मौखिक और लिखित रूप में कै से व्यक्त करे।
ٱلشَّمْسُ وَٱلْقَمَرُ بِحُسْبَانٍۢ ﴿٥﴾
सूरज और चाँद दोनों की गति निर्धारित की। दोनों एक सटीक गणना के अनुसार चल रहे हैं; ताकि लोगों को वर्षों की गिनती और हिसाब का ज्ञान प्राप्त हो।
وَٱلنَّجْمُ وَٱلشَّجَرُ يَسْجُدَانِ ﴿٦﴾
और बिना तने वाले पौधे और पेड़ अल्लाह को, उसके आदेश के अधीन होकर और उसके प्रति समर्पित होकर सजदा करते हैं।
وَٱلسَّمَآءَ رَفَعَهَا وَوَضَعَ ٱلْمِيزَانَ ﴿٧﴾
तथा उसने आकाश को धरती के ऊपर उसके छत के रूप में ऊँ चा किया। तथा धरती पर न्याय को स्थापित किया और अपने बंदों को उसका आदेश दिया।
أَلَّا تَطْغَوْا۟ فِى ٱلْمِيزَانِ ﴿٨﴾
उसने न्याय को इसलिए स्थापित किया, ताकि (ऐ लोगो!) तुम अन्याय न करो और माप-तौल में धोखाधड़ी से काम न लो।
وَأَقِيمُوا۟ ٱلْوَزْنَ بِٱلْقِسْطِ وَلَا تُخْسِرُوا۟ ٱلْمِيزَانَ ﴿٩﴾
और अपने बीच न्याय के साथ तौल को सीधा रखो और जब तुम दूसरों को नाप या तौलकर दो, तो नाप या तौल में कमी न करो।
وَٱلْأَرْضَ وَضَعَهَا لِلْأَنَامِ ﴿١٠﴾
और उसने धरती को प्राणियों के लिए उसपर रहने योग्य बनाया। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर
فِيهَا فَـٰكِهَةٌۭ وَٱلنَّخْلُ ذَاتُ ٱلْأَكْمَامِ ﴿١١﴾
उसमें ऐसे पेड़ हैं जो फलदेते हैं, तथा आवरणों वाले खजूर के वृक्ष हैं जिनमें से खजूर बनते हैं।
وَٱلْحَبُّ ذُو ٱلْعَصْفِ وَٱلرَّيْحَانُ ﴿١٢﴾
और उसमें भूसे वाले अनाज जैसे गेहूँ और जौ हैं, तथा उसमें ऐसे पौधे हैं, जिनकी सुगंध तुम्हें अच्छी लगती है।
فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ﴿١٣﴾
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुमअपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किसका इनकार करोगे?
خَلَقَ ٱلْإِنسَـٰنَ مِن صَلْصَـٰلٍۢ كَٱلْفَخَّارِ ﴿١٤﴾
उसने आदम अलैहिस्सलाम को पकी हुई मिट्टी की तरह, बजने वाली सूखी मिट्टी से पैदा किया।
وَخَلَقَ ٱلْجَآنَّ مِن مَّارِجٍۢ مِّن نَّارٍۢ ﴿١٥﴾
और जिन्नों के पिता को धुआँ रहित आग की ज्वाला से पैदा किया।
فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ﴿١٦﴾
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुमअपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किसका इनकार करोगे?
رَبُّ ٱلْمَشْرِقَيْنِ وَرَبُّ ٱلْمَغْرِبَيْنِ ﴿١٧﴾
वह सर्दी और गर्मी में सूर्य के उदय होने के दोनों स्थानों और उसके अस्त होने के दोनों स्थानों का रब है।
فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ﴿١٨﴾
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुमअपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किसका इनकार करोगे?
مَرَجَ ٱلْبَحْرَيْنِ يَلْتَقِيَانِ ﴿١٩﴾
अल्लाह ने खारे और मीठे दो सागरों को मिला दिया, जो आँखों को आपस में मिलते हुए दिखते हैं। بينهما برزخ لا يبغيان
بَيْنَهُمَا بَرْزَخٌۭ لَّا يَبْغِيَانِ ﴿٢٠﴾
(जबकि) उन दोनों के बीच एक अवरोध है, जो उन्हें एक-दूसरे पर हावी होने से रोकता है; ताकि मीठा पानी, मीठा और नमकीन पानी, नमकीन बना रहे।
فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ﴿٢١﴾
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुमअपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किसका इनकार करोगे? بلغ क़ुरआन · तफ़सीर
يَخْرُجُ مِنْهُمَا ٱللُّؤْلُؤُ وَٱلْمَرْجَانُ ﴿٢٢﴾
दोनों सागरों से छोटे और बड़े मोती निकलते हैं।
فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ﴿٢٣﴾
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुमअपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किसका इनकार करोगे?
وَلَهُ ٱلْجَوَارِ ٱلْمُنشَـَٔاتُ فِى ٱلْبَحْرِ كَٱلْأَعْلَـٰمِ ﴿٢٤﴾
और के वलउसी पवित्र और महान अल्लाह का अधिकार चलता है, पहाड़ों की तरह समुद्र में चलने वाले जहाज़ों पर।
فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ﴿٢٥﴾
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुमअपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किसका इनकार करोगे? كل من عليهافان
كُلُّ مَنْ عَلَيْهَا فَانٍۢ ﴿٢٦﴾
धरती के ऊपर मौजूद सभी प्राणी अनिवार्य रूप से नष्ट होने वाले हैं।
وَيَبْقَىٰ وَجْهُ رَبِّكَ ذُو ٱلْجَلَـٰلِ وَٱلْإِكْرَامِ ﴿٢٧﴾
और (ऐ रसूल!) आपके रब का चेहरा, जो महानता और अपने बंदों पर उपकार और कृ तज्ञता वाला है, बाक़ी रहेगा। उसपर कभी भी विनाश नहीं आएगा।
فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ﴿٢٨﴾
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुमअपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किसका इनकार करोगे?
يَسْـَٔلُهُۥ مَن فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ ۚ كُلَّ يَوْمٍ هُوَ فِى شَأْنٍۢ ﴿٢٩﴾
आकाशों में जो भी फ़रिश्ते हैं तथा धरती पर जो भी जिन्न और इनसान हैं, सब अपनी ज़रूरतें उसी से माँगते हैं। हर दिन वह अपने बंदों से संबंधित किसी कार्य में होता है; जैसे जीवन देना, मारना, रोज़ी देना, इत्यादि।
فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ﴿٣٠﴾
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुमअपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किसका इनकार करोगे?
سَنَفْرُغُ لَكُمْ أَيُّهَ ٱلثَّقَلَانِ ﴿٣١﴾
हम जल्द ही (ऐ जिन्नो और इनसानो!) तुम्हारे हिसाब के लिए फ़ारिग़ होंगे और हर एक को वह सवाब या सज़ा देंगे, जिसका वह हक़दार है। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर
فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ﴿٣٢﴾
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुमअपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किसका इनकार करोगे?
يَـٰمَعْشَرَ ٱلْجِنِّ وَٱلْإِنسِ إِنِ ٱسْتَطَعْتُمْ أَن تَنفُذُوا۟ مِنْ أَقْطَارِ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ فَٱنفُذُوا۟ ۚ لَا تَنفُذُونَ إِلَّا بِسُلْطَـٰنٍۢ ﴿٣٣﴾
जब अल्लाह क़ियामत के दिन जिन्नों और इनसानों को इकट्ठा करेगा, तो कहेगा: ऐ जिन्नों और इनसानों के समूह! अगर तुम अपने लिए आकाशों और धरती के किसी किनारे से भाग निकलने का कोई रास्ता खोज सको, तो ऐसा करो। लेकिन तुम बिना शक्ति और प्रमाण के ऐसा हरगिज़ नहीं कर पाओगे। और तुम्हारे पास वह कहाँ है?
فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ﴿٣٤﴾
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुमअपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किसका इनकार करोगे? يرسل عليكما شواظ من نار ونحاس فلا تنتصران
يُرْسَلُ عَلَيْكُمَا شُوَاظٌۭ مِّن نَّارٍۢ وَنُحَاسٌۭ فَلَا تَنتَصِرَانِ ﴿٣٥﴾
तुम दोनों पर (ऐ जिन्नो और इनसानो!) धुआँ रहित आग का ज्वाला और लौ से मुक्त धुआँ छोड़ा जाएगा, फिर तुम अपने आपको को उससे बचा नहीं पाओगे।
فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ﴿٣٦﴾
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुमअपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किसका इनकार करोगे?
فَإِذَا ٱنشَقَّتِ ٱلسَّمَآءُ فَكَانَتْ وَرْدَةًۭ كَٱلدِّهَانِ ﴿٣٧﴾
फिर जब आसमान फट जाएगा, ताकि उससे फ़रिश्ते उतरें, तो वह अपने रंग की चमक में तेल की तरह लाल हो जाएगा।
فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ﴿٣٨﴾
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुम अपनेنऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किस का इनकार करोगे?
فَيَوْمَئِذٍۢ لَّا يُسْـَٔلُ عَن ذَنۢبِهِۦٓ إِنسٌۭ وَلَا جَآنٌّۭ ﴿٣٩﴾
फिर उस महान दिन किसी इनसान या किसी जिन्न से उसके गुनाह के बारे में नहीं पूछा जाएगा। क्योंकि अल्लाह उनके कर्मों को जानता है।
فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ﴿٤٠﴾
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुमअपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किसका इनकार करोगे?
يُعْرَفُ ٱلْمُجْرِمُونَ بِسِيمَـٰهُمْ فَيُؤْخَذُ بِٱلنَّوَٰصِى وَٱلْأَقْدَامِ ﴿٤١﴾
क़ियामत के दिन अपराधियों को उनके निशान से पहचाना जाएगा, जो उनके चेहरे का कालापन और उनकी आँखों का नीलापन है। फिर उनके माथे के बालों को उनके पैरों से मिलाकर पकड़ा जाएगा और उन्हें जहन्नम में डाल दिया जाएगा। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर
فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ﴿٤٢﴾
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुमअपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किसका इनकार करोगे?
هَـٰذِهِۦ جَهَنَّمُ ٱلَّتِى يُكَذِّبُ بِهَا ٱلْمُجْرِمُونَ ﴿٤٣﴾
और उन्हें फटकारते हुए कहा जाएगा: यह जहन्नम, जिसे अपराधी लोग दुनिया में झुठलाते थे, उनकी आँखों के सामने है और वे इसका इनकार नहीं कर सकते। يطوفون بينها وبين حميم ءان
يَطُوفُونَ بَيْنَهَا وَبَيْنَ حَمِيمٍ ءَانٍۢ ﴿٤٤﴾
वे उसके और अत्यंत गर्म पानी के बीच चक्कर लगा रहे होंगे।
فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ﴿٤٥﴾
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुमअपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किसका इनकार करोगे? ولمن خاف مقام ربه جنتان
وَلِمَنْ خَافَ مَقَامَ رَبِّهِۦ جَنَّتَانِ ﴿٤٦﴾
जो व्यक्ति आख़िरत में अपने रब के सामने खड़े होने से डरा, अतः वह ईमान लाया और नेक कार्य किया - उसके लिए दो बाग़ हैं।
فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ﴿٤٧﴾
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुमअपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किसका इनकार करोगे?
ذَوَاتَآ أَفْنَانٍۢ ﴿٤٨﴾
वे दोनों बाग़ बड़ी-बड़ी, ताज़ी और फलदार शाखाओं वाले हैं।
فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ﴿٤٩﴾
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुमअपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किसका इनकार करोगे? فيهما عينان تجريان
فِيهِمَا عَيْنَانِ تَجْرِيَانِ ﴿٥٠﴾
उन दोनों बाग़ों में दो जलस्रोत हैं, जो उनके बीच पानी के साथ गुज़रते हैं।
فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ﴿٥١﴾
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुमअपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किसका इनकार करोगे? فيهما من كل فكهة زوجان
فِيهِمَا مِن كُلِّ فَـٰكِهَةٍۢ زَوْجَانِ ﴿٥٢﴾
उन दोनों बाग़ों में हर तरह के स्वादिष्ट फलों के दो प्रकार हैं। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर
فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ﴿٥٣﴾
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुमअपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किसका इनकार करोगे?
مُتَّكِـِٔينَ عَلَىٰ فُرُشٍۭ بَطَآئِنُهَا مِنْ إِسْتَبْرَقٍۢ ۚ وَجَنَى ٱلْجَنَّتَيْنِ دَانٍۢ ﴿٥٤﴾
वे ऐसे बिछौनों पर तकिया लगाए होंगे, जिनके अस्तर मोटे रेशम के होंगे। तथा दोनों बाग़ों से तोड़े जाने वाले फल एवं मेवे बहुत निकट होंगे, जिन्हें आदमी खड़े, बैठे और लेटे हुए तोड़ सके गा।
فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ﴿٥٥﴾
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!)نतुमअपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किसका इनकार करोगे?
فِيهِنَّ قَـٰصِرَٰتُ ٱلطَّرْفِ لَمْ يَطْمِثْهُنَّ إِنسٌۭ قَبْلَهُمْ وَلَا جَآنٌّۭ ﴿٥٦﴾
उनमें ऐसी स्त्रियाँ हैं, जिनकी निगाहें अपने पतियों तक ही सीमित हैं। उन्हें उनके पतियों से पहले किसी जिन्न या इनसान ने हाथ नहीं लगाया।
فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ﴿٥٧﴾
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुमअपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किसका इनकार करोगे?
كَأَنَّهُنَّ ٱلْيَاقُوتُ وَٱلْمَرْجَانُ ﴿٥٨﴾
वे इतनी सुंदर और निखरे हुए रंग की होंगी, मानो माणिक और मूँगा हैं।
فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ﴿٥٩﴾
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुमअपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किसका इनकार करोगे?
هَلْ جَزَآءُ ٱلْإِحْسَـٰنِ إِلَّا ٱلْإِحْسَـٰنُ ﴿٦٠﴾
जिसने अपने रब का आज्ञापालन उत्तम ढंग से किया, उसका बदला इसके सिवा क्या है कि अल्लाह उसे उत्तम प्रतिफल प्रदान करे?!
فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ﴿٦١﴾
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुमअपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किसका इनकार करोगे? ومن دونهما جنتان
وَمِن دُونِهِمَا جَنَّتَانِ ﴿٦٢﴾
तथा इन दोनों पूर्वोक्त बाग़ों के अलावा दो अन्य बाग़ हैं। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर
فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ﴿٦٣﴾
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुमअपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किसका इनकार करोगे?
مُدْهَآمَّتَانِ ﴿٦٤﴾
इन दोनों बाग़ों की हरियाली बहुत अधिक है।
فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ﴿٦٥﴾
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुमअपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किसका इनकार करोगे? فيهما عينان نض اختان
فِيهِمَا عَيْنَانِ نَضَّاخَتَانِ ﴿٦٦﴾
इन दोनों बाग़ों में दो जल स्रोत हैं, जिनसे बड़ी तेज़ी से पानी उबल रहा है, उनके पानी का उबलना बंद नहीं होता।
فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ﴿٦٧﴾
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुमअपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किसका इनकार करोगे? فيهما فكهة ونخل ورمان
فِيهِمَا فَـٰكِهَةٌۭ وَنَخْلٌۭ وَرُمَّانٌۭ ﴿٦٨﴾
इन दोनों बाग़ों में बहुत-से फल, बड़े-बड़े खजूर के पेड़ और अनार हैं।
فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ﴿٦٩﴾
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुमअपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किसका इनकार करोगे? فيهن خيرت حسان
فِيهِنَّ خَيْرَٰتٌ حِسَانٌۭ ﴿٧٠﴾
इन जन्नतों में अच्छी नैतिकता और सुंदर चेहरों वाली स्त्रियाँ हैं।
فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ﴿٧١﴾
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुमअपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किसका इनकार करोगे?
حُورٌۭ مَّقْصُورَٰتٌۭ فِى ٱلْخِيَامِ ﴿٧٢﴾
हूरें, जो उनकी रक्षा के लिए खेमों में रखी गई होंगी।
فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ﴿٧٣﴾
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुमअपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किसका इनकार करोगे? بلغ क़ुरआन · तफ़सीर ن
لَمْ يَطْمِثْهُنَّ إِنسٌۭ قَبْلَهُمْ وَلَا جَآنٌّۭ ﴿٧٤﴾
उनके पतियों से पहले कोई इनसान या जिन्न उनके पासनहीं आया।
فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ﴿٧٥﴾
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुमअपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किसका इनकार करोगे? متكٔينعل رفرف خضروعبقرى حسان
مُتَّكِـِٔينَ عَلَىٰ رَفْرَفٍ خُضْرٍۢ وَعَبْقَرِىٍّ حِسَانٍۢ ﴿٧٦﴾
वे हरे गिलाफों वाले तकियों और सुंदर बिछौनों पर टेक लगाए हुए होंगे।
فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ﴿٧٧﴾
तो (ऐ जिन्नों और इनसानों के समुदाय!) तुमअपने ऊपर अल्लाह की ढेरों नेमतों में से किस-किसका इनकार करोगे?
تَبَـٰرَكَ ٱسْمُ رَبِّكَ ذِى ٱلْجَلَـٰلِ وَٱلْإِكْرَامِ ﴿٧٨﴾
तुम्हारे पालनहार के नाम की भलाई बहुत अधिक और बड़ी है, जो महानता और अपने बंदों पर उपकार और कृ तज्ञता वाला है। स्रोत:अल-मुख़्तसर फ़ी तफ़सीरिल क़ु रआनिल करीम
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