حمٓ ﴿١﴾
{हा, मीम।} सूरतुल-बक़रा की शुरुआत में इस प्रकार के अक्षरों के बारे में बात गुज़र चुकी है।
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मक्की · 89 आयतें
حمٓ ﴿١﴾
{हा, मीम।} सूरतुल-बक़रा की शुरुआत में इस प्रकार के अक्षरों के बारे में बात गुज़र चुकी है।
وَٱلْكِتَـٰبِ ٱلْمُبِينِ ﴿٢﴾
अल्लाह ने सत्य का मार्ग दर्शाने वाले क़ु रआन की क़समखाई है। ي إنا جعلنه قرءنا عربا لعل كم تعقلون
إِنَّا جَعَلْنَـٰهُ قُرْءَٰنًا عَرَبِيًّۭا لَّعَلَّكُمْ تَعْقِلُونَ ﴿٣﴾
हमने इसे अरबों की भाषा का क़ु रआन बनाया है, ताकि (ऐ वे लोगो! जिनकी भाषा में कु रआन उतरा है) तुम उसके अर्थ को समझ सको और फिर उसे दूसरे समुदायों तक स्थानांतरित करो।
وَإِنَّهُۥ فِىٓ أُمِّ ٱلْكِتَـٰبِ لَدَيْنَا لَعَلِىٌّ حَكِيمٌ ﴿٤﴾
निःसंदेह यह क़ु रआन लौह़े मह़फ़ू ज़ में बड़े ऊँ चे स्थान वाला और हिकमत वाला है। उसकी आयतों को उसके आदेशों और निषेधों में सुदृढ़ बनाया गया है।
أَفَنَضْرِبُ عَنكُمُ ٱلذِّكْرَ صَفْحًا أَن كُنتُمْ قَوْمًۭا مُّسْرِفِينَ ﴿٥﴾
क्या हम तुम्हारे ऊपर क़ु रआन उतारना, इस कारण से छोड़ दें कि तुम बहुत ज़्यादा शिर्क और पाप करते हो? हम ऐसा नहीं करेंगे। बल्कि तुम्हारे प्रति दया इसके विपरीत की अपेक्षा करती है।
وَكَمْ أَرْسَلْنَا مِن نَّبِىٍّۢ فِى ٱلْأَوَّلِينَ ﴿٦﴾
और हमने पिछले समुदायों में कितने ही नबी भेजे। وما يأتيهم من نبى إلا كانوا به يستهزءون
وَمَا يَأْتِيهِم مِّن نَّبِىٍّ إِلَّا كَانُوا۟ بِهِۦ يَسْتَهْزِءُونَ ﴿٧﴾
तथा उन पिछले समुदायों के पास अल्लाह की ओर से जब भी कोई नबी आता, तो वे उसका मज़ाक़ उड़ाया करते थे।
فَأَهْلَكْنَآ أَشَدَّ مِنْهُم بَطْشًۭا وَمَضَىٰ مَثَلُ ٱلْأَوَّلِينَ ﴿٨﴾
अंततः हमने उन समुदायों को विनष्ट कर दिया, जो अधिक बलवान थे। इसलिए हमउनसे कमज़ोर लोगों को विनष्ट करने से विवश नहीं हो सकते। और क़ु रआन में पिछले समुदायों, जैसे आद, समूद, लूत अलैहिस्सलाम की जाति और मद्यन वालों के विनाश का हाल गुज़र चुका है।
وَلَئِن سَأَلْتَهُم مَّنْ خَلَقَ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضَ لَيَقُولُنَّ خَلَقَهُنَّ ٱلْعَزِيزُ ٱلْعَلِيمُ ﴿٩﴾
(ऐ रसूल!) अगर आप इन झुठलाने वाले मुश्रिकों से पूछें कि आकाशों को किसने पैदा किया और धरती को किसने पैदा किया? तो वे आपके सवाल का जवाब देते हुए अवश्य कहेंगे: उन्हें उस प्रभुत्वशाली अल्लाह ने पैदा किया है, जिसपर किसी का ज़ोर नहीं चलता, जो हर चीज़ को जानने वाला है। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर
ٱلَّذِى جَعَلَ لَكُمُ ٱلْأَرْضَ مَهْدًۭا وَجَعَلَ لَكُمْ فِيهَا سُبُلًۭا لَّعَلَّكُمْ تَهْتَدُونَ ﴿١٠﴾
वही अल्लाह जिसने तुम्हारे लिए पृथ्वी को समतलबनाया। चुनाँचे उसे तुम्हारे लिए हमवार कर दिया जिसपर तुमअपने पैरों से चलते हो, तथा उसके पहाड़ों और घाटियों में तुम्हारे लिए रास्ते बना दिए, ताकि तुमअपने चलने में उनसे मार्गदर्शन प्राप्त कर सको।
وَٱلَّذِى نَزَّلَ مِنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءًۢ بِقَدَرٍۢ فَأَنشَرْنَا بِهِۦ بَلْدَةًۭ مَّيْتًۭا ۚ كَذَٰلِكَ تُخْرَجُونَ ﴿١١﴾
और वह जिसने आकाश से इतना पानी उतारा, जो तुम्हारे लिए पर्याप्त है और तुम्हारे पशुधन और फसलों के लिए पर्याप्त है। फिर हमने उससे एक बंजर भूमि को जीवित कर दिया, जो पेड़-पौधों से खाली थी। और जैसे अल्लाह ने उस बंजर भूमि को पौधों के द्वारा जीवित किया है, वैसे ही वह तुम्हें क़ियामत (महा-प्रलय) के लिए पुनर्जीवित करेगा।
وَٱلَّذِى خَلَقَ ٱلْأَزْوَٰجَ كُلَّهَا وَجَعَلَ لَكُم مِّنَ ٱلْفُلْكِ وَٱلْأَنْعَـٰمِ مَا تَرْكَبُونَ ﴿١٢﴾
और वह जिसने रात और दिन, नर और मादा, और अन्य सभी प्रकार की चीजें पैदा कीं तथा तुम्हारे लिए नाव एवं जानवर बनाए, जिनकी तुम अपनी यात्राओं में सवारी करते हो। चुनाँचे तुमजलमें नावों पर सवार होते हो और थलमें अपने जानवरों पर सवार होते हो।
لِتَسْتَوُۥا۟ عَلَىٰ ظُهُورِهِۦ ثُمَّ تَذْكُرُوا۟ نِعْمَةَ رَبِّكُمْ إِذَا ٱسْتَوَيْتُمْ عَلَيْهِ وَتَقُولُوا۟ سُبْحَـٰنَ ٱلَّذِى سَخَّرَ لَنَا هَـٰذَا وَمَا كُنَّا لَهُۥ مُقْرِنِينَ ﴿١٣﴾
مقرنين यह सब उसने तुम्हारे लिए इसलिए बनाया है, ताकि सफ़र में उनकी पीठ पर जमकर बैठ सको। फिर जब तुम उनकी पीठ पर बैठ जाओ, तो अपने पालनहार की नेमत को याद करो कि उसने इन्हें तुम्हारे वश में कर दिया और तुम अपनी ज़बान से कहो: पवित्र है वह अल्लाह, जिसने इस सवारी को हमारे वश में कर दिया, तो हम इसपर नियंत्रण रखते हैं। हालाँकि यदि अल्लाह ने उसे हमारे वश में न कर दिया होता, तो हमऐसा करने में सक्षमनहीं थे।
وَإِنَّآ إِلَىٰ رَبِّنَا لَمُنقَلِبُونَ ﴿١٤﴾
निःसंदेह हमअपनी मृत्यु के बाद, हिसाब और बदले के लिए अके ले अपने पालनहार की ओर लौटने वाले हैं।
وَجَعَلُوا۟ لَهُۥ مِنْ عِبَادِهِۦ جُزْءًا ۚ إِنَّ ٱلْإِنسَـٰنَ لَكَفُورٌۭ مُّبِينٌ ﴿١٥﴾
मुश्रिकों ने दावा किया कि कु छ जीव महिमावान सृष्टिकर्ता (अल्लाह) से पैदा हुए हैं, जब उन्होंने कहा: फ़रिश्ते अल्लाह की बेटियाँ हैं। निश्चय ही ऐसा कहने वाला व्यक्ति स्पष्ट कृ तघ्न और गुमराह है।
أَمِ ٱتَّخَذَ مِمَّا يَخْلُقُ بَنَاتٍۢ وَأَصْفَىٰكُم بِٱلْبَنِينَ ﴿١٦﴾
(ऐ मुश्रिको!) क्या तुमकहते हो कि अल्लाह ने अपनी पैदा की हुई चीज़ों में से अपने लिए बेटियाँ बना ली हैं और तुम्हें बेटों के लिए चुन लिया है?! भला यह कै सा विभाजन है, जिसका तुमने दावा किया है?! د وإذا بشرأحدهم بما ضرب للرحمن مثلا ظل وجهه مسو اوهوكظيم
وَإِذَا بُشِّرَ أَحَدُهُم بِمَا ضَرَبَ لِلرَّحْمَـٰنِ مَثَلًۭا ظَلَّ وَجْهُهُۥ مُسْوَدًّۭا وَهُوَ كَظِيمٌ ﴿١٧﴾
हालाँकि जब उनमें से किसी को उस बेटी की शुभ सूचना दी जाए, जिसकी निस्बत वह अपने पालनहार की ओर करता है, तो शोक और दु:ख की तीव्रता से उसका चेहरा काला हो जाता है और वह क्रोध से भर जाता है। तो वह अपने पालनहार की ओर ऐसी चीज़ की निस्बत कै से करता है, जिसकी शुभ सूचना दिए जाने पर वह शोकाकु ल हो जाता है। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर
أَوَمَن يُنَشَّؤُا۟ فِى ٱلْحِلْيَةِ وَهُوَ فِى ٱلْخِصَامِ غَيْرُ مُبِينٍۢ ﴿١٨﴾
क्या वे अपने पालनहार की ओर उसकी निस्बत करते हैं, जो आभूषणों में पलती है और वह अपने स्त्रीत्व के कारण विवाद के समय खुलकर बात (भी) नहीं कर सकती?!
وَجَعَلُوا۟ ٱلْمَلَـٰٓئِكَةَ ٱلَّذِينَ هُمْ عِبَـٰدُ ٱلرَّحْمَـٰنِ إِنَـٰثًا ۚ أَشَهِدُوا۟ خَلْقَهُمْ ۚ سَتُكْتَبُ شَهَـٰدَتُهُمْ وَيُسْـَٔلُونَ ﴿١٩﴾
उन्होंने फ़रिश्तों को, जो कि परम दयालु अल्लाह के बंदे हैं, नारी ठहरा लिया है। क्या वे उस समय उपस्थित थे जब अल्लाह ने उन्हें बनाया था, इसलिए उन्हें पता चल गया कि वे नारी हैं?! फ़रिश्ते उनकी इस गवाही को लिख लेंगे और वे क़ियामत के दिन इसके बारे में पूछे जाएँगे तथा उनके झूठ बोलने के कारण इसपर उन्हें यातना दी जाएगी।
وَقَالُوا۟ لَوْ شَآءَ ٱلرَّحْمَـٰنُ مَا عَبَدْنَـٰهُم ۗ مَّا لَهُم بِذَٰلِكَ مِنْ عِلْمٍ ۖ إِنْ هُمْ إِلَّا يَخْرُصُونَ ﴿٢٠﴾
उन्होंने तक़दीर को तर्क (बहाना) बनाते हुए कहा: अगर अल्लाह चाहता कि हम फ़रिश्तों की पूजा न करें, तो हम उनकी पूजा न करते। अतः उसका हमसे यह चाहना उसकी संतुष्टि को इंगित करता है। उन्हें अपनी इस बात का कोई ज्ञान नहीं है, वे के वल झूठ बोल रहे हैं। أم ءاتينهم كتبا من قبله فهم به مستمسكون
أَمْ ءَاتَيْنَـٰهُمْ كِتَـٰبًۭا مِّن قَبْلِهِۦ فَهُم بِهِۦ مُسْتَمْسِكُونَ ﴿٢١﴾
क्या हमने इन मुश्रिकों को क़ुरआन से पहले कोई पुस्तक दी है, जो उन्हें अल्लाह के अलावा किसी अन्य की पूजा करने की अनुमति देती है?! अतः वे उसी पुस्तक को थामे हुए हैं, उसी को तर्क बनाते हैं।
بَلْ قَالُوٓا۟ إِنَّا وَجَدْنَآ ءَابَآءَنَا عَلَىٰٓ أُمَّةٍۢ وَإِنَّا عَلَىٰٓ ءَاثَـٰرِهِم مُّهْتَدُونَ ﴿٢٢﴾
नहीं, ऐसा नहीं हुआ। बल्कि, उन्होंने (बाप-दादा के ) अनुकरण को तर्क बनाते हुए कहा: हमने अपने बाप-दादा को एक धर्म और एक मार्ग पर पाया है, और वे मूर्तियों की पूजा करते थे। हम इन (मूर्तियों) की पूजा में उन्हीं के पदचिह्नों पर चल रहे हैं।
وَكَذَٰلِكَ مَآ أَرْسَلْنَا مِن قَبْلِكَ فِى قَرْيَةٍۢ مِّن نَّذِيرٍ إِلَّا قَالَ مُتْرَفُوهَآ إِنَّا وَجَدْنَآ ءَابَآءَنَا عَلَىٰٓ أُمَّةٍۢ وَإِنَّا عَلَىٰٓ ءَاثَـٰرِهِم مُّقْتَدُونَ ﴿٢٣﴾
م قتدون जिस तरह इन लोगों ने झुठलाया और अपने बाप-दादा का अनुकरण करने को तर्क बनाया, उसी तरह (ऐ रसूल) हमने आपसे पहले जिस बस्ती में भी किसी रसूल को उसकी जाति के लोगों को सावधान करने के लिए भेजा, तो उनके समृद्ध प्रमुखों तथा बड़े लोगों ने कहा: हमने अपने बाप-दादा को एक धर्म और एक मार्ग पर पाया है और हम उन्हीं के पदचिह्नों पर चल रहे हैं। अतः आपकी जाति इस मामले में कोई अनूठी नहीं है।
۞ قَـٰلَ أَوَلَوْ جِئْتُكُم بِأَهْدَىٰ مِمَّا وَجَدتُّمْ عَلَيْهِ ءَابَآءَكُمْ ۖ قَالُوٓا۟ إِنَّا بِمَآ أُرْسِلْتُم بِهِۦ كَـٰفِرُونَ ﴿٢٤﴾
उनके रसूल ने उनसे कहा: क्या तुम अपने बाप-दादा का अनुसरण करते रहोगे, अगरचे मैं तुम्हारे पास उससे बेहतर मार्ग लाया हूँ जिसपर तुम्हारे बाप-दादा थे? उन्होंने कहा: जो (धर्म) तुम और तुमसे पहले के रसूल देकर भेजे गए हैं, हम उसका इनकार करते हैं।
فَٱنتَقَمْنَا مِنْهُمْ ۖ فَٱنظُرْ كَيْفَ كَانَ عَـٰقِبَةُ ٱلْمُكَذِّبِينَ ﴿٢٥﴾
चुनाँचे हमने आपसे पूर्व रसूलों को झुठलाने वाले समुदायों से बदला लिया, सो हमने उन्हें विनष्ट कर दिया। अतः विचार करें कि अपने रसूलों को झुठलाने वालों का अंत कै सा हुआ। वास्तव में, वह एक दर्दनाक अंत था। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर
وَإِذْ قَالَ إِبْرَٰهِيمُ لِأَبِيهِ وَقَوْمِهِۦٓ إِنَّنِى بَرَآءٌۭ مِّمَّا تَعْبُدُونَ ﴿٢٦﴾
(ऐ रसूल!) उस समय को याद करें, जब इबराहीम अलैहिस्सलाम ने अपने बाप और अपनी जाति से कहा: तुम अल्लाह के सिवा जिन मूर्तियों को पूजते हो, मैं उनसे बरी हूँ।
إِلَّا ٱلَّذِى فَطَرَنِى فَإِنَّهُۥ سَيَهْدِينِ ﴿٢٧﴾
सिवाय उसअल्लाह के , जिसने मुझे पैदा किया है। अतः निःसंदेह वही मुझे अपने सीधे धर्म का पालन करने के लिए मार्गदर्शन करेगा, जिसमें मेरा लाभ निहित है। وجعلها كلمةباقية فى عقبه لعلهم يرجعون
وَجَعَلَهَا كَلِمَةًۢ بَاقِيَةًۭ فِى عَقِبِهِۦ لَعَلَّهُمْ يَرْجِعُونَ ﴿٢٨﴾
इबराहीम अलैहिस्सालाम ने तौहीद (एकेश्वरवाद) के वाक्य: (ला इलाहा इल्लल्लाह) को, अपने बाद, अपनी संतान में बाक़ी रहने वाला वाक्य बना दिया। चुनाँचे उनके अंदर हमेशा ऐसे लोग रहे हैं, जो अल्लाह को एकमात्र पूज्य मानते हैं और उसके साथ किसी भी चीज़ को साझी नहीं बनाते। इस आशा में कि वे शिर्क और पाप से तौबा करके अल्लाह की ओर लौट आएँ।
بَلْ مَتَّعْتُ هَـٰٓؤُلَآءِ وَءَابَآءَهُمْ حَتَّىٰ جَآءَهُمُ ٱلْحَقُّ وَرَسُولٌۭ مُّبِينٌۭ ﴿٢٩﴾
मैंने इन झूठलाने वाले मुश्रिकों को नष्ट करने में जल्दी नहीं की, बल्कि उन्हें दुनिया में बाकी रहने दिया और उनसे पहले उनके बाप-दादा को भी बाकी रहने दिया था, यहाँ तक कि उनके पासक़ु रआन और स्पष्ट रसूलअर्थात मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लमआ गए।
وَلَمَّا جَآءَهُمُ ٱلْحَقُّ قَالُوا۟ هَـٰذَا سِحْرٌۭ وَإِنَّا بِهِۦ كَـٰفِرُونَ ﴿٣٠﴾
और जब उनके पास यह क़ु रआन आ गया, जो ऐसा सत्य है, जिसमें कोई संदेह नहीं है, तो उन्होंने कहा: यह तो एक जादू है, जिसके द्वारा मुहम्मद हमपर जादू कर देता है। हम तो इसका इनकार करते हैं। अतः हम कदापि इसपर ईमान नहीं लाएँगे।
وَقَالُوا۟ لَوْلَا نُزِّلَ هَـٰذَا ٱلْقُرْءَانُ عَلَىٰ رَجُلٍۢ مِّنَ ٱلْقَرْيَتَيْنِ عَظِيمٍ ﴿٣١﴾
झूठलाने वाले मुश्रिकों ने कहा: अल्लाह ने इसक़ु रआन को मुहम्मद जैसे निर्धन अनाथ पर उतारने के बजाय, मक्का अथवा तायफ़ के दो महान व्यक्तियों में से किसी एक पर क्यों नहीं उतारा?
أَهُمْ يَقْسِمُونَ رَحْمَتَ رَبِّكَ ۚ نَحْنُ قَسَمْنَا بَيْنَهُم مَّعِيشَتَهُمْ فِى ٱلْحَيَوٰةِ ٱلدُّنْيَا ۚ وَرَفَعْنَا بَعْضَهُمْ فَوْقَ بَعْضٍۢ دَرَجَـٰتٍۢ لِّيَتَّخِذَ بَعْضُهُم بَعْضًۭا سُخْرِيًّۭا ۗ وَرَحْمَتُ رَبِّكَ خَيْرٌۭ مِّمَّا يَجْمَعُونَ ﴿٣٢﴾
(ऐ रसूल!) क्या आपके पालनहार की दया को ये लोग बाँटते हैं कि जिसे चाहते हैं देते हैं और जिसे चाहते हैं नहीं देते हैं या अल्लाह बाँटता है? हमने ही दुनिया में उनके बीच उनकी रोज़ी को बाँटा है और उनमें से किसी को धनवान् और किसी को निर्धन बनाया है; ताकि उनमें से कु छ लोग कु छ के अधीन हो जाएँ। और आख़िरत में आपके पालनहार की अपने बंदों के प्रति दया, उससे बेहतर है, जिसे ये लोग इस नश्वर दुनिया के सामान से इकट्ठा कर रहे हैं।
وَلَوْلَآ أَن يَكُونَ ٱلنَّاسُ أُمَّةًۭ وَٰحِدَةًۭ لَّجَعَلْنَا لِمَن يَكْفُرُ بِٱلرَّحْمَـٰنِ لِبُيُوتِهِمْ سُقُفًۭا مِّن فِضَّةٍۢ وَمَعَارِجَ عَلَيْهَا يَظْهَرُونَ ﴿٣٣﴾
अगर यह बात न होती कि सभी लोग कु फ़्र की राह पर चल पड़ेंगे, तो हम उन लोगों के घरों की छतों को, जो अल्लाह का इनकार करते हैं, चाँदी की बना देते और उनके लिए सीढ़ियाँ भी बना देते, जिनपर वे चढ़ते। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर ولبيوتهم أبوبا وسررا عليها يتكٔون
وَلِبُيُوتِهِمْ أَبْوَٰبًۭا وَسُرُرًا عَلَيْهَا يَتَّكِـُٔونَ ﴿٣٤﴾
और हम उन्हें ढील देने तथा आज़माने के उद्देश्य से, उनके घरों के द्वार बना देते और उनके लिए ऐसे तख़्त बना देते, जिनपर वे तकिया लगाकर बैठते।
وَزُخْرُفًۭا ۚ وَإِن كُلُّ ذَٰلِكَ لَمَّا مَتَـٰعُ ٱلْحَيَوٰةِ ٱلدُّنْيَا ۚ وَٱلْـَٔاخِرَةُ عِندَ رَبِّكَ لِلْمُتَّقِينَ ﴿٣٥﴾
तथा हम उनके लिए सोना बना देते। ये सारी चीज़ें सांसारिक जीवन की सुख सामग्री के सिवा कु छ नहीं हैं। इनका लाभ बहुत कम है, क्योंकि ये बाकी रहने वाली नहीं हैं। और आख़िरत में जो नेमत है, वह (ऐ रसूल!) आपके पालनहार के निकट उन लोगों के लिए उत्तम है, जो अल्लाह से, उसके आदेशों का पालन करके और उसकी मना की हुई चीज़ों से बचकर, डरते हैं।
وَمَن يَعْشُ عَن ذِكْرِ ٱلرَّحْمَـٰنِ نُقَيِّضْ لَهُۥ شَيْطَـٰنًۭا فَهُوَ لَهُۥ قَرِينٌۭ ﴿٣٦﴾
जो क़ु रआन को ध्यानपूर्वक न पढ़ने के कारणवश उससे विमुख हो जाता है, उसपर, सज़ा के तौर पर, एक शैतान नियुक्त कर दिया जाता है, जो हमेशा उसके साथ लगा रहता है और उसे पथभ्रष्टता में बढ़ाता रहता है।
وَإِنَّهُمْ لَيَصُدُّونَهُمْ عَنِ ٱلسَّبِيلِ وَيَحْسَبُونَ أَنَّهُم مُّهْتَدُونَ ﴿٣٧﴾
और ये साथ रहने वाले (शैतान), जो क़ुरआन से मुँह फेरने वाले लोगों पर नियुक्त कर दिए जाते हैं, अवश्य उन्हें अल्लाह के धर्म से रोकते हैं। चुनाँचे वे न अल्लाह के आदेशों का पानल करते हैं और न उसकी मना की हुई चीज़ों से बचते हैं। और यह समझते हैं कि वे सत्य के मार्ग पर चलने वाले हैं। इसी कारण वे अपनी गुमराही से तौबा नहीं करते हैं।
حَتَّىٰٓ إِذَا جَآءَنَا قَالَ يَـٰلَيْتَ بَيْنِى وَبَيْنَكَ بُعْدَ ٱلْمَشْرِقَيْنِ فَبِئْسَ ٱلْقَرِينُ ﴿٣٨﴾
यहाँ तक कि जब अल्लाह के ज़िक्र से मुँह मोड़ने वाला व्यक्ति क़ियामत के दिन हमारे पास आएगा, तो कामना करते हुए कहेगा: ऐ काश! मेरे और (ऐ हमेशा साथ रहने वाले शैतान!) तेरे बीच पूर्व और पश्चिम के बीच की दूरी होती। तू तो बहुत बुरा साथी है।
وَلَن يَنفَعَكُمُ ٱلْيَوْمَ إِذ ظَّلَمْتُمْ أَنَّكُمْ فِى ٱلْعَذَابِ مُشْتَرِكُونَ ﴿٣٩﴾
अल्लाह क़ियामत के दिन काफ़िरों से कहेगा: आज तुम्हारा यातना में एक साथ होना, तुम्हें हरगिज़ लाभ न देगा, जबकि तुम शिर्क और पाप के द्वारा अपने ऊपर अत्याचार कर चुके हो। क्योंकि तुम्हारे साथी तुम्हारी ओर से तुम्हारी यातना का कु छ भी वहन नहीं करेंगे।
أَفَأَنتَ تُسْمِعُ ٱلصُّمَّ أَوْ تَهْدِى ٱلْعُمْىَ وَمَن كَانَ فِى ضَلَـٰلٍۢ مُّبِينٍۢ ﴿٤٠﴾
ये लोग सत्य सुनने से बहरे और उसे देखने से अंधे हैं। तो क्या (ऐ रसूल!) आप बहरे को सुना सकते हैं, अथवा अंधे को रास्ता दिखा सकते हैं, अथवा उन्हें राह पर ला सकते हैं, जो सीधे मार्ग से खुले तौर पर भटके हुए हैं?! فإما نذهبن بك فإنا منهم م نتقمون
فَإِمَّا نَذْهَبَنَّ بِكَ فَإِنَّا مِنْهُم مُّنتَقِمُونَ ﴿٤١﴾
फिर अगर हम आपको उठा लें - इस प्रकार कि उन्हें यातना देने से पहले आपको मृत्यु दे दें - तो भी हम उन्हें दुनिया और आख़िरत में यातना देकर उनसे बदला लेने वाले हैं। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर
أَوْ نُرِيَنَّكَ ٱلَّذِى وَعَدْنَـٰهُمْ فَإِنَّا عَلَيْهِم مُّقْتَدِرُونَ ﴿٤٢﴾
या हम आपको उस यातना का कु छ भाग दिखा दें, जिसका हम उनसे वादा कर रहे हैं, तो निश्चय ही हम उनपर शक्तिमान हैं। वे किसी भी चीज़ में हमारा मुक़ाबला नहीं कर सकते।
فَٱسْتَمْسِكْ بِٱلَّذِىٓ أُوحِىَ إِلَيْكَ ۖ إِنَّكَ عَلَىٰ صِرَٰطٍۢ مُّسْتَقِيمٍۢ ﴿٤٣﴾
अतः (ऐ रसूल!) आप उसे मज़बूती से थामे रहें, जिसकी आपके पालनहार ने आपकी ओर वह़्य की है और उसपर अमल करते रहें। निःसंदेह आप सत्य मार्ग पर हैं, जिसमें कोई संशय नहीं है।
وَإِنَّهُۥ لَذِكْرٌۭ لَّكَ وَلِقَوْمِكَ ۖ وَسَوْفَ تُسْـَٔلُونَ ﴿٤٤﴾
निःसंदेह यह क़ुरआन आपके लिए तथा आपकी जाति के लिए एक सम्मान है। और क़ियामत के दिन तुमसे इसपर ईमान लाने, इसके मार्गदर्शन का पालन करने और इसकी ओर लोगों को आमंत्रित करने के बारे में पूछा जाएगा।
وَسْـَٔلْ مَنْ أَرْسَلْنَا مِن قَبْلِكَ مِن رُّسُلِنَآ أَجَعَلْنَا مِن دُونِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ءَالِهَةًۭ يُعْبَدُونَ ﴿٤٥﴾
(ऐ रसूल!) आप उन रसूलों से पूछ लें, जिन्हें हमने आपसे पहले भेजा था: क्या हमने रहमान (परम दयालु अल्लाह) के सिवा भी कुछ पूज्य बनाए हैं, जिनकी पूजा की जाए?!
وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا مُوسَىٰ بِـَٔايَـٰتِنَآ إِلَىٰ فِرْعَوْنَ وَمَلَإِي۟هِۦ فَقَالَ إِنِّى رَسُولُ رَبِّ ٱلْعَـٰلَمِينَ ﴿٤٦﴾
और हमने मूसा को अपनी निशानियाँ देकर फ़िरऔन और उसकी जाति के प्रमुख लोगों के पास भेजा, तो उसने उनसे कहा: मैं सभी प्राणियों के पालनहार का रसूल हूँ।
فَلَمَّا جَآءَهُم بِـَٔايَـٰتِنَآ إِذَا هُم مِّنْهَا يَضْحَكُونَ ﴿٤٧﴾
तो जब वह उनके पास हमारी निशानियाँ लेकर आए, तो वे मज़ाक़ और उपहास के तौर पर उनपर हँसने लगे।
وَمَا نُرِيهِم مِّنْ ءَايَةٍ إِلَّا هِىَ أَكْبَرُ مِنْ أُخْتِهَا ۖ وَأَخَذْنَـٰهُم بِٱلْعَذَابِ لَعَلَّهُمْ يَرْجِعُونَ ﴿٤٨﴾
और हम फ़िरऔन तथा उसकी जाति के प्रमुखों को, मूसा अलैहिस्सलाम के लाए हुए धर्म के सही होने की जो भी निशानी दिखाते, वह उससे पहले की निशानी से बढ़कर होती थी। और हमने उन्हें दुनिया में यातना से ग्रस्त किया, ताकि वे अपने कु फ़्र से बाज़ आ जाएँ। लेकिन इसका कोई फ़ायदा न हुआ।
وَقَالُوا۟ يَـٰٓأَيُّهَ ٱلسَّاحِرُ ٱدْعُ لَنَا رَبَّكَ بِمَا عَهِدَ عِندَكَ إِنَّنَا لَمُهْتَدُونَ ﴿٤٩﴾
जब उन्हें कु छ यातना का सामना हुआ, तो उन्होंने मूसा अलैहिस्सलाम से कहा: ऐ जादूगर! अपने पालनहार से हमारे लिए उसके द्वारा दुआ कर, जो उसने तुझे बताया है कि हमारे ईमान लाने पर वह यातना हटा देगा। अगर वह हमसे यातना हटा देता है, तो हम अवश्य उसकी राह पर चल पड़ेंगे।
فَلَمَّا كَشَفْنَا عَنْهُمُ ٱلْعَذَابَ إِذَا هُمْ يَنكُثُونَ ﴿٥٠﴾
फिर जब हम उनसे यातना को दूर कर देते, तो वे (तुरंत) अपना वचन तोड़ देते और उसे पूरा नहींं करते। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर
وَنَادَىٰ فِرْعَوْنُ فِى قَوْمِهِۦ قَالَ يَـٰقَوْمِ أَلَيْسَ لِى مُلْكُ مِصْرَ وَهَـٰذِهِ ٱلْأَنْهَـٰرُ تَجْرِى مِن تَحْتِىٓ ۖ أَفَلَا تُبْصِرُونَ ﴿٥١﴾
और फ़िरऔन ने अपने राज्य पर गर्व करते हुए अपनी जाति के बीच पुकारते हुए कहा: ऐ मेरी जाति के लोगो! क्या मिस्र का राज्य मेरा नहीं है और नीलनदी से निकलने वाली ये नहरें मेरे महलों के नीचे नहीं बहती हैं? क्या तुम मेरे राज्य को नहीं देखते और मेरी महानता को नहीं पहचानते?!
أَمْ أَنَا۠ خَيْرٌۭ مِّنْ هَـٰذَا ٱلَّذِى هُوَ مَهِينٌۭ وَلَا يَكَادُ يُبِينُ ﴿٥٢﴾
मैं प्रतिष्ठाहीन और कमज़ोर मूसा से बेहतर हूँ, जो सही से बात भी नहीं कर पाता।
فَلَوْلَآ أُلْقِىَ عَلَيْهِ أَسْوِرَةٌۭ مِّن ذَهَبٍ أَوْ جَآءَ مَعَهُ ٱلْمَلَـٰٓئِكَةُ مُقْتَرِنِينَ ﴿٥٣﴾
तो उसे रसूल बनाकर भेजने वाले अल्लाह ने उसपर सोने के कं गन क्यों नहीं उतारे; यह दिखाने के लिए कि वह अल्लाह का रसूल है, या उसके साथ सिलसिलेवार फ़रिश्ते क्यों न आए?!
فَٱسْتَخَفَّ قَوْمَهُۥ فَأَطَاعُوهُ ۚ إِنَّهُمْ كَانُوا۟ قَوْمًۭا فَـٰسِقِينَ ﴿٥٤﴾
इस तरह फ़िरऔन ने अपनी जाति के लोगों को बहकाया और उन्होंने उसकी गुमराही में उसका पालन किया। निःसंदेह वे अल्लाह की आज्ञाकारिता से निकले हुए लोग थे।
فَلَمَّآ ءَاسَفُونَا ٱنتَقَمْنَا مِنْهُمْ فَأَغْرَقْنَـٰهُمْ أَجْمَعِينَ ﴿٥٥﴾
फिर जब उन्होंने कु फ़्र पर स्थिर रहकर हमें क्रोधित कर दिया, तो हमने उनसे बदला लिया और उन सभी को डुबो दिया। فجعلنهم سلفا ومثلا للٔاخرين
فَجَعَلْنَـٰهُمْ سَلَفًۭا وَمَثَلًۭا لِّلْـَٔاخِرِينَ ﴿٥٦﴾
तो हमने फ़िरऔन और उसकी जाति के प्रमुखों को लोगों के लिए अग्रगामी बना दिया और आपकी जाति के काफ़िर उन्हीं के पदचिह्नों पर चल रहे हैं। तथा हमने उन्हें सीख लेने वाले के लिए शिक्षाप्रद उदाहरण बना दिया, ताकि वह उन्हीं जैसा कर्म करके उन्हीं के अंजामको न पहुँचे।
۞ وَلَمَّا ضُرِبَ ٱبْنُ مَرْيَمَ مَثَلًا إِذَا قَوْمُكَ مِنْهُ يَصِدُّونَ ﴿٥٧﴾
)إنكم وما تعبدون من دون الله حص ب جهنم أنتم لها واردون(: फरमान के अल्लाह हैं, करते पूजा ईसाई जिनकी अलैहिस्सलाम, ईसा कि समझा यह ने मुश्रिकों जब ''निःसंदेह तुम और जिन्हें तुम अल्लाह के सिवा पूजते हो, सब नरक का ईंधन बनेंगे, तुम उसमें प्रवेश करने वाले हो।'' (सूरतुल अंबिया: 98) में दाखिल हैं, तथा अल्लाह ने ईसा अलैहिस्सलाम की पूजा करने से वैसे ही रोका है, जैसे मूर्तियों की पूजा से रोका है, तो अचानक (ऐ रसूल!) आपकी जाति के लोग खुशी सेم शोर मचाने लगे और कहने लगे: हम इस बात से संतुष्ट हैं कि हमारे देवता ईसा (अलैहिस्सलाम) की तरह हैं। इसपर अल्लाह ने उनके जवाब में यह आयत उतारी: نا( مله تقبس ينالذ إن وندمبع اعنه أولئك نى س)الح ''निःसंदेह जिनके के लिए हमारी ओर से पहले भलाई निर्धारित हो चुकी है, वे उस (नरक) से दूर रखे जाएँगे।'' (सूरतुल अंबिया: 101)
وَقَالُوٓا۟ ءَأَـٰلِهَتُنَا خَيْرٌ أَمْ هُوَ ۚ مَا ضَرَبُوهُ لَكَ إِلَّا جَدَلًۢا ۚ بَلْ هُمْ قَوْمٌ خَصِمُونَ ﴿٥٨﴾
और उन्होंने कहा: क्या हमारे पूज्य बेहतर हैं या ईसा?! ज़िबा'रा के पुत्र और उस जैसे लोगों ने यह उदाहरण सत्य तक पहुँचने के लिए नहीं दिया है, बल्कि बहस करने और झगड़ने के लिए दिया है। क्योंकि वे ऐसे लोग हैं कि झगड़ना उनके स्वभाव में दाखिलहै।
إِنْ هُوَ إِلَّا عَبْدٌ أَنْعَمْنَا عَلَيْهِ وَجَعَلْنَـٰهُ مَثَلًۭا لِّبَنِىٓ إِسْرَٰٓءِيلَ ﴿٥٩﴾
मर्यम का पुत्र ईसा के वल अल्लाह का एक बंदा है, जिसे हमने नबी और रसूल बनाया। तथा हमने उसे बनी इसराईल के लिए एक उदाहरण बना दिया, जिससे वे अल्लाह की शक्ति का अनुमान लगाते हैं कि उसने ईसा अलैहिस्सलाम को बिना पिता के बनाया, जिस तरह कि आदम अलैहिस्सलाम को बिना माता-पिता के बनाया था। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर
وَلَوْ نَشَآءُ لَجَعَلْنَا مِنكُم مَّلَـٰٓئِكَةًۭ فِى ٱلْأَرْضِ يَخْلُفُونَ ﴿٦٠﴾
और अगर हम (ऐ आदम की संतान!) तुम्हें नष्ट करना चाहें, तो अवश्य तुम्हें नष्ट कर दें और तुम्हारे स्थान पर फ़रिश्तों को ले आएँ, जो धरती में तुम्हारे उत्तराधिकारी बनें। वे अल्लाह की इबादत करें और उसके साथ किसी को साझी न करें।
وَإِنَّهُۥ لَعِلْمٌۭ لِّلسَّاعَةِ فَلَا تَمْتَرُنَّ بِهَا وَٱتَّبِعُونِ ۚ هَـٰذَا صِرَٰطٌۭ مُّسْتَقِيمٌۭ ﴿٦١﴾
ईसा अलैहिस्सलाम का आख़िरी ज़माने में उतरना क़ियामत की बड़ी निशानियों में से एक निशानी है। अतः तुम क़ियामत के आने के बारे में संदेह न करो, तथा मैं अल्लाह की ओर से तुम्हारे पास जो कु छ लेकर आया हूँ, उसमें मेराو अनुसरण करो। यह जो मैं तुम्हारे पास लेकर आया हूँ, वही सीधा मार्ग है जिसमें कोई टेढ़ापन नहीं है।
وَلَا يَصُدَّنَّكُمُ ٱلشَّيْطَـٰنُ ۖ إِنَّهُۥ لَكُمْ عَدُوٌّۭ مُّبِينٌۭ ﴿٦٢﴾
और शैतान तुम्हें बहकाकर और प्रलोभन देकर सीधे रास्ते से विचलित न कर दे। निःसंदेह वह तुम्हारा खुला दुश्मन है।
وَلَمَّا جَآءَ عِيسَىٰ بِٱلْبَيِّنَـٰتِ قَالَ قَدْ جِئْتُكُم بِٱلْحِكْمَةِ وَلِأُبَيِّنَ لَكُم بَعْضَ ٱلَّذِى تَخْتَلِفُونَ فِيهِ ۖ فَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ وَأَطِيعُونِ ﴿٦٣﴾
जब ईसा अलैहिस्सलाम अपनी जाति के पास अपने रसूल होने के सपष्ट प्रमाण लेकर आए, तो उनसे कहा: मैं तुम्हारे पास अल्लाह की ओर से हिकमत लेकर आया हुँ और (इसलिए भी) ताकि मैं तुम्हारे लिए तुम्हारे धर्म की कु छ उन बातों को स्पष्ट कर दूँ, जिनमें तुममतभेद करते हो। अतः तुमअल्लाह से, उसके आदेशों का पालन करके और उसकी मना की हुई बातों से बचकर, डरो और उन बातों में मेरा अनुसरण करो, जिनका मैं तुम्हें आदेश दूँ और जिनसे मैं तुम्हें मना करूँ ।
إِنَّ ٱللَّهَ هُوَ رَبِّى وَرَبُّكُمْ فَٱعْبُدُوهُ ۚ هَـٰذَا صِرَٰطٌۭ مُّسْتَقِيمٌۭ ﴿٦٤﴾
निःसंदेह अल्लाह ही मेरा पालनहार और तुम्हारा पालनहार है, उसके सिवा हमारा कोई पालनहार नहीं है। अतः केवल उसी की इबादत करो। और यह एकेश्वरवाद (तौहीद) ही वह सीधा रास्ता है, जिसमें कोई टेढ़ापन नहीं है।
فَٱخْتَلَفَ ٱلْأَحْزَابُ مِنۢ بَيْنِهِمْ ۖ فَوَيْلٌۭ لِّلَّذِينَ ظَلَمُوا۟ مِنْ عَذَابِ يَوْمٍ أَلِيمٍ ﴿٦٥﴾
फिर ईसाइयों के समूहों ने ईसा अलैहिस्सलामके बारे में परस्पर मतभेद किया; चुनाँचे उनमें से कु छ का कहना है कि वह पूज्य हैं, तथा कु छ का कहना है कि वह अल्लाह के बेटे हैं। जबकि उनमें से कु छ कहते हैं कि वह और उनकी माँ दोनों पूज्य हैं। तो जिन लोगों ने (ईसा अलैहिस्सलामके बारे में पूज्य होने, या अल्लाह का बेटा होने या तीन पूज्यों में से तीसरा होने की बात कहकर) अपने ऊपर अत्याचार किया है, उनके लिए दुःखदायी यातना की ख़राबी है, जो क़ियामत के दिन उनकी प्रतीक्षा कर रही है।
هَلْ يَنظُرُونَ إِلَّا ٱلسَّاعَةَ أَن تَأْتِيَهُم بَغْتَةًۭ وَهُمْ لَا يَشْعُرُونَ ﴿٦٦﴾
क्या ईसा अलैहिस्सलामके बारे में मतभेद करने वाले ये समूह इस बात की प्रतीक्षा कर रहे हैं कि क़ियामत उनके पास अचानक आ जाए और उन्हें उसके आने की आहट तक न लगे?! यदि वह उनपर उनके कु फ़्र की अवस्था में आ जाती है, तो उनका अंजामपीड़ादायक यातना है।
ٱلْأَخِلَّآءُ يَوْمَئِذٍۭ بَعْضُهُمْ لِبَعْضٍ عَدُوٌّ إِلَّا ٱلْمُتَّقِينَ ﴿٦٧﴾
कुफ़्र तथा गुमराही के आधार पर मित्रता और दोस्ती रखने वाले क़ियामत के दिन एक-दूसरे के शत्रु होंगे, लेकिन जो लोग अल्लाह के आदेशों का पालन करके और उसकी मना की हुई चीज़ों से बचते हुए उससे डरने वाले हैं, उनकी मित्रता स्थायी और अंतहीन होगी। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर
يَـٰعِبَادِ لَا خَوْفٌ عَلَيْكُمُ ٱلْيَوْمَ وَلَآ أَنتُمْ تَحْزَنُونَ ﴿٦٨﴾
और अल्लाह उनसे कहेगा: ऐ मेरे बंदो! जो कुछ तुम सामना करने वाले हो, उसमें आज तुम्हारे लिए कोई भय नहीं है, और न ही तुम उसपर शोक करोगे जो संसार के आनंदों में से तुमसे छू ट गया है।
ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ بِـَٔايَـٰتِنَا وَكَانُوا۟ مُسْلِمِينَ ﴿٦٩﴾
वे लोग जो अपने रसूलपर उतरने वाले क़ु रआन पर ईमान लाए तथा वे क़ु रआन के आज्ञाकारी थे; उसके आदेशों का पालन करते और उसके निषेधों से बचते थे।
ٱدْخُلُوا۟ ٱلْجَنَّةَ أَنتُمْ وَأَزْوَٰجُكُمْ تُحْبَرُونَ ﴿٧٠﴾
तुम और तुम जैसे ईमान वाले लोग जन्नत में प्रवेश कर जाओ। तुम उसमें प्राप्त होने वाले शाश्वत आनंद से प्रसन्न किए जाओगे, जो न कभी ख़त्म होगा और न बाधित होगा।
يُطَافُ عَلَيْهِم بِصِحَافٍۢ مِّن ذَهَبٍۢ وَأَكْوَابٍۢ ۖ وَفِيهَا مَا تَشْتَهِيهِ ٱلْأَنفُسُ وَتَلَذُّ ٱلْأَعْيُنُ ۖ وَأَنتُمْ فِيهَا خَـٰلِدُونَ ﴿٧١﴾
उनके सेवक उनके चारों ओर सोने के थाल और बिना हत्थे वाले प्याले लेकर फिरेंगे। तथा जन्नत के अंदर, हर वह चीज़ उपलब्ध होगी, जिसको दिल चाहेंगे और जिसे देखकर आँखें आनंदित होंगी। तथा तुम उसी में रहोगे, वहाँ से कभी बाहर नहीं निकलोगे।
وَتِلْكَ ٱلْجَنَّةُ ٱلَّتِىٓ أُورِثْتُمُوهَا بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ ﴿٧٢﴾
वह जन्नत जिसकी विशेषताएँ तुम्हारे सामने बयान की गईं, यही वह जन्नत है जिसका अल्लाह ने तुम्हें, अपनी कृ पा से, तुम्हारे कर्मों के कारण वारिस बनाया है। لكم فيها فكهةكثيرةمنها تأكلون
لَكُمْ فِيهَا فَـٰكِهَةٌۭ كَثِيرَةٌۭ مِّنْهَا تَأْكُلُونَ ﴿٧٣﴾
तुम्हारे लिए उसमें न खत्महोने वाले बहुत-से फलहोंगे, जिनमें से तुमखाओगे।
إِنَّ ٱلْمُجْرِمِينَ فِى عَذَابِ جَهَنَّمَ خَـٰلِدُونَ ﴿٧٤﴾
निःसंदेह कु फ़्र और पाप करने वाले अपराधी क़ियामत के दिन जहन्नमकी यातना में होंगे, जिसमें वे सदैव रहेंगे। لا يفترعنهم وهم فيهمبلسون
لَا يُفَتَّرُ عَنْهُمْ وَهُمْ فِيهِ مُبْلِسُونَ ﴿٧٥﴾
उनसे यातना कम नहीं की जाएगी और वे उसमें अल्लाह की दया से निराश होंगे।
وَمَا ظَلَمْنَـٰهُمْ وَلَـٰكِن كَانُوا۟ هُمُ ٱلظَّـٰلِمِينَ ﴿٧٦﴾
हमने उन्हें जहन्नममें दाखिलकरके उनपर अत्याचार नहीं किया, बल्कि वे कु फ़्र करके स्वयं ही अपने आप पर अत्याचार करने वाले थे।
وَنَادَوْا۟ يَـٰمَـٰلِكُ لِيَقْضِ عَلَيْنَا رَبُّكَ ۖ قَالَ إِنَّكُم مَّـٰكِثُونَ ﴿٧٧﴾
वे जहन्नम के दारोग़ा मालिक को पुकारकर कहेंगे: ऐ मालिक! तुम्हारा पालनहार हमें मृत्यु दे दे, ताकि हम यातना से आराम पा जाएँ। तो मालिक उन्हें जवाब देते हुए कहेगा: तुम सदैव यातना में रहने वाले हो, तुम्हारी मृत्यु नहीं होगी और न तुम्हारी यातना रुके गी। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर
لَقَدْ جِئْنَـٰكُم بِٱلْحَقِّ وَلَـٰكِنَّ أَكْثَرَكُمْ لِلْحَقِّ كَـٰرِهُونَ ﴿٧٨﴾
निश्चय ही हम दुनिया में तुम्हारे पास संदेहरहित सत्य लेकर आए थे, लेकिन तुममें से अधिकतर लोग सत्य को नापसंद करने वाले थे।
أَمْ أَبْرَمُوٓا۟ أَمْرًۭا فَإِنَّا مُبْرِمُونَ ﴿٧٩﴾
यदि वे नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के साथ कोई चाल चलते हैं और आपके विरुद्ध कोई षड्यंत्र करते हैं, तो हम उनके लिए उनके षड्यंत्र से बढ़कर उपाय करने वाले हैं।
أَمْ يَحْسَبُونَ أَنَّا لَا نَسْمَعُ سِرَّهُمْ وَنَجْوَىٰهُم ۚ بَلَىٰ وَرُسُلُنَا لَدَيْهِمْ يَكْتُبُونَ ﴿٨٠﴾
क्या वे समझ्ते हैं कि हम उनकी छिपी बात (भेद) को जो उन्होंने अपने दिलों में छिपा रखी है या उनकी कानाफू सी को जो वे एक-दूसरे से करते हैं, नहीं सुनते हैं? क्यों नहीं, हमउनकी सारी बातें सुनते हैं और उनके साथ नियुक्त फ़रिश्ते उनके प्रत्येक कार्य को लिखते रहते हैं।
قُلْ إِن كَانَ لِلرَّحْمَـٰنِ وَلَدٌۭ فَأَنَا۠ أَوَّلُ ٱلْعَـٰبِدِينَ ﴿٨١﴾
(ऐ रसूल!) आप उन लोगों से, जो अल्लाह की ओर बेटियों की निस्बत करते हैं, (अल्लाह उनकी इस बात से बहुत ऊँचा है) कह दें: अल्लाह की कोई संतान नहीं है; अल्लाह इससे बहुत पाक एवं पवित्र है। मैं तो अल्लाह की सबसे पहले इबादत करने वाला तथा उसकी पवित्रता बयान करने वाला हूँ।
سُبْحَـٰنَ رَبِّ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ رَبِّ ٱلْعَرْشِ عَمَّا يَصِفُونَ ﴿٨٢﴾
आकाशों और धरती का रब तथा अर्श (सिंहासन) का स्वामी उससे पवित्र है, जो ये मुश्रिक (बहुदेववादी) लोग उसकी ओर साझी, पत्नी और संतान की निस्बत करते हैं।
فَذَرْهُمْ يَخُوضُوا۟ وَيَلْعَبُوا۟ حَتَّىٰ يُلَـٰقُوا۟ يَوْمَهُمُ ٱلَّذِى يُوعَدُونَ ﴿٨٣﴾
अतः (ऐ रसूल!) आप उन्हें छोड़ दें कि वे अपनी झूठ और व्यर्थ की बहसों में पड़े रहें और खेलते रहें, यहाँ तक कि उनका सामना उस दिन से हो जाए, जिसका उनसे वादा किया जा रहा है और वह क़ियामत का दिन है।
وَهُوَ ٱلَّذِى فِى ٱلسَّمَآءِ إِلَـٰهٌۭ وَفِى ٱلْأَرْضِ إِلَـٰهٌۭ ۚ وَهُوَ ٱلْحَكِيمُ ٱلْعَلِيمُ ﴿٨٤﴾
और वही पवित्र अल्लाह आकाश में सत्य पूज्य है और वही धरती में भी सत्य पूज्य है। तथा वह अपनी रचना, तक़दीर (नियति) और प्रबंधन में पूर्ण हिकमत वाला, तथा अपने बंदों की स्थितियों से अवगत है। उससे उनमें से कु छ भी छिपा नहीं है।
وَتَبَارَكَ ٱلَّذِى لَهُۥ مُلْكُ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا وَعِندَهُۥ عِلْمُ ٱلسَّاعَةِ وَإِلَيْهِ تُرْجَعُونَ ﴿٨٥﴾
बड़ी भलाई तथा बरकत वाला है वह पवित्र अल्लाह, जिस अके ले के पास ही आकाशों का राज्य, धरती का राज्य तथा उन दोनों के बीच की सारी चीज़ों का राज्य है। तथा अके ले उसी के पास उस घड़ी का ज्ञान है, जिसमें क़ियामत क़ायम होगी, उसे उसके सिवा कोई नहीं जानता। और तुम आख़िरत में हिसाब और बदले के लिए अके ले उसी की ओर लौटाए जाओगे।
وَلَا يَمْلِكُ ٱلَّذِينَ يَدْعُونَ مِن دُونِهِ ٱلشَّفَـٰعَةَ إِلَّا مَن شَهِدَ بِٱلْحَقِّ وَهُمْ يَعْلَمُونَ ﴿٨٦﴾
और वे लोग, जिन्हें ये मुश्रिक अल्लाह को छोड़कर पूजते हैं, अल्लाह के निकट सिफ़ारिश का अधिकार नहीं रखते। अधिकार के वल वही रखता है, जो इस बात की गवाही दे कि अल्लाह के सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं और वह उस बात को जानता हो, जिसकी उसने गवाही दी है; जैसे कि ईसा, उज़ैर और फ़रिश्ते। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर
وَلَئِن سَأَلْتَهُم مَّنْ خَلَقَهُمْ لَيَقُولُنَّ ٱللَّهُ ۖ فَأَنَّىٰ يُؤْفَكُونَ ﴿٨٧﴾
यदि आप उनसे पूछें कि उन्हें किसने पैदा किया है?तो वे अवश्य कहेंगे: हमें अल्लाह ने पैदा किया है। फिर इस स्वीकृ ति के बाद वे उसकी इबादत से कै से फे र दिए जाते हैं?!
وَقِيلِهِۦ يَـٰرَبِّ إِنَّ هَـٰٓؤُلَآءِ قَوْمٌۭ لَّا يُؤْمِنُونَ ﴿٨٨﴾
अल्लाह महिमावान को अपने रसूल की इस शिकायत का ज्ञान है कि उसकी जाति ने उसे झुठलाया है और उसमें उनका कहना है कि: ऐ मेरे पालनहार! ये ऐसे लोग हैं, जो उसपर ईमान लाने वाले नहीं हैं, जिसके साथ तूने मुझे उनकी ओर भेजा है।
فَٱصْفَحْ عَنْهُمْ وَقُلْ سَلَـٰمٌۭ ۚ فَسَوْفَ يَعْلَمُونَ ﴿٨٩﴾
अतः आप उनसे मुँह फे र लें और उनसे ऐसी बात करें, जिससे उनकी बुराई से बच सकें । (यह उस समय की बात है जब आप मक्का में थे।) क्योंकि शीघ्र ही उन्हें पता चल जाएगा कि उन्हें किस सज़ा का सामना करना पड़ेगा। स्रोत:अल-मुख़्तसर फ़ी तफ़सीरिल क़ु रआनिल करीम
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