أَرَءَيْتَ ٱلَّذِى يُكَذِّبُ بِٱلدِّينِ ﴿١﴾
क्या आपने उसे पहचाना, जो क़ियामत के दिन बदला दिए जाने को झुठलाता है?!
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मक्की · 7 आयतें
أَرَءَيْتَ ٱلَّذِى يُكَذِّبُ بِٱلدِّينِ ﴿١﴾
क्या आपने उसे पहचाना, जो क़ियामत के दिन बदला दिए जाने को झुठलाता है?!
فَذَٰلِكَ ٱلَّذِى يَدُعُّ ٱلْيَتِيمَ ﴿٢﴾
यही वह व्यक्ति है, जो अनाथ को उसकी जरूरतों से वंचित कर उसे सख़्ती के साथ भगा देता है।
وَلَا يَحُضُّ عَلَىٰ طَعَامِ ٱلْمِسْكِينِ ﴿٣﴾
वह ग़रीबों को खाना खिलाने के लिए न खुद से आग्रह करता है और न ही दूसरों से आग्रह करता है। فويل للمص لين
فَوَيْلٌۭ لِّلْمُصَلِّينَ ﴿٤﴾
ٱلَّذِينَ هُمْ عَن صَلَاتِهِمْ سَاهُونَ ﴿٥﴾
तो उन नमाज़ियों के लिए विनाश और यातना है, जो अपनी नमाज़ से लापरवाह हैं, वे उसकी परवाह नहीं करते हैं यहाँ तक कि उसका समय समाप्त हो जाता है।
ٱلَّذِينَ هُمْ يُرَآءُونَ ﴿٦﴾
जो लोग दिखावे के लिए नमाज़ पढ़ते और कार्य करते हैं। वे विशुद्ध रूप से अल्लाह के लिए कार्य नहीं करते हैं।
وَيَمْنَعُونَ ٱلْمَاعُونَ ﴿٧﴾
और वे ऐसी चीज़ के द्वारा भी दूसरों की मदद करने से कतराते हैं, जिससे मदद करने में कोई नुक़सान नहीं है। स्रोत:अल-मुख़्तसर फ़ी तफ़सीरिल क़ु रआनिल करीम
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