होमतफ़सीरAl-Anbiyaa (21)

तफ़सीर Al-Anbiyaa (21) — الأنبياء

मक्की · 112 आयतें

पढ़ें · सुनेंPDF फ़ाइल

ٱقْتَرَبَ لِلنَّاسِ حِسَابُهُمْ وَهُمْ فِى غَفْلَةٍۢ مُّعْرِضُونَ ﴿١﴾

क़ियामत के दिन लोगों के लिए उनके कार्यों का हिसाब बहुत निकट आ गया। इसके बावजूद वे लापरवाही में पड़े हुए हैं, आख़िरत से मुँह मोड़कर दुनिया में व्यस्त हैं।

مَا يَأْتِيهِم مِّن ذِكْرٍۢ مِّن رَّبِّهِم مُّحْدَثٍ إِلَّا ٱسْتَمَعُوهُ وَهُمْ يَلْعَبُونَ ﴿٢﴾

उनके पास उनके पालनहार की ओर से क़ु रआन की जो भी नई अवतरित बात आती है, तो वे उसे लाभ उठाने के लिए (गंभीरता से) नहीं सुनते हैं। बल्कि, वे इस बात की परवाह किए बिना कि उसमें क्या है, हँसी-खेलकरते हुए सुनते हैं।

لَاهِيَةًۭ قُلُوبُهُمْ ۗ وَأَسَرُّوا۟ ٱلنَّجْوَى ٱلَّذِينَ ظَلَمُوا۟ هَلْ هَـٰذَآ إِلَّا بَشَرٌۭ مِّثْلُكُمْ ۖ أَفَتَأْتُونَ ٱلسِّحْرَ وَأَنتُمْ تُبْصِرُونَ ﴿٣﴾

उन्होंने इसे इस हाल में सुना कि उनके दिल इससे पूरी तरह ग़ाफ़िल थे। और कु फ़्र के द्वारा अत्याचार करने वालों ने उस बात को गुप्त रखा, जो वे आपस में यह कहते हुए कानाफू सी कर रहे थे: यह व्यक्ति जो रसूल होने का दावा करता है, तुम्हारे ही जैसे एक इनसान के सिवा क्या है, जिसे तुमसे हटकर कोई विशिष्टता प्राप्त नहीं है?! तथा वह जो कुछ लेकर आया है, केवल जादू है। तो क्या तुम यह जानते हुए भी कि वह तुम्हारे ही जैसा एक इनसान है और वह जो कुछ लेकर आया है, मात्र जादू है, तुम उसके पीछे चलनेके लिए तैयारहो?!

قَالَ رَبِّى يَعْلَمُ ٱلْقَوْلَ فِى ٱلسَّمَآءِ وَٱلْأَرْضِ ۖ وَهُوَ ٱلسَّمِيعُ ٱلْعَلِيمُ ﴿٤﴾

रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने कहा: तुमने गुप्त रूप से जो बात कही है, मेरा पालनहार उसे खूब जानता है। क्योंकि वह आकाशों और धरती में बोलने वाले के मुँह से निकलने वाली हर बात को जानता है। वह अपने बंदों की बातों को सुनने वाला, उनके कार्यों को जानने वाला है और वह उन्हें उनका बदला देगा।

بَلْ قَالُوٓا۟ أَضْغَـٰثُ أَحْلَـٰمٍۭ بَلِ ٱفْتَرَىٰهُ بَلْ هُوَ شَاعِرٌۭ فَلْيَأْتِنَا بِـَٔايَةٍۢ كَمَآ أُرْسِلَ ٱلْأَوَّلُونَ ﴿٥﴾

बल्कि सच्चाई यह है कि मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जो क़ु रआन लाए हैं, उसके बारे में वे असमंजस में पड़े हुए हैं। चुनाँचे कभी कहते हैं कि ये मिश्रित सपने हैं जिनकी कोई व्याख्या नहीं होती। कभी कहते हैं कि नहीं, बल्कि आप सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने इसे गढ़ लिया है, जिसका कोई आधार नहीं है। तथा कभी कहते हैं कि आप शायर हैं। और यदि आप अपने दावे में सच्चे हैं, तो पहले रसूलों की तरह हमारे पास कोई चमत्कार लेकर आएँ। क्योंकि वे चमत्कार लाए थे, जैसे कि मूसा अलैहिस्सलाम की लाठी और सालेह अलैहिस्सलाम की ऊँ टनी।

مَآ ءَامَنَتْ قَبْلَهُم مِّن قَرْيَةٍ أَهْلَكْنَـٰهَآ ۖ أَفَهُمْ يُؤْمِنُونَ ﴿٦﴾

इन चमत्कार की माँग करने वालों से पहले कोई बस्ती, जिसने चमत्कारों का प्रस्ताव रखा, फिर उसे उसके सुझाव के अनुसार दिया गया, ईमान नहीं लाई। बल्कि उन्होंने उसे झुठला दिया, तो हमने उन्हें नष्ट कर दिया। तो क्या ये लोग ईमान ले आएँगे।

وَمَآ أَرْسَلْنَا قَبْلَكَ إِلَّا رِجَالًۭا نُّوحِىٓ إِلَيْهِمْ ۖ فَسْـَٔلُوٓا۟ أَهْلَ ٱلذِّكْرِ إِن كُنتُمْ لَا تَعْلَمُونَ ﴿٧﴾

और (ऐ रसूल!) हमने आपसे पहले मनुष्यों ही में से कु छ पुरुषों को रसूल बनाकर भेजे, जिनकी ओर हम वह़्य (प्रकाशना) करते थे। हमने रसूल बनाकर फ़रिश्तों को नहीं भेजा। इसलिए, यदि तुमनहीं जानते हो, तो अपने से पहले किताब वालों से पूछ लो। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

وَمَا جَعَلْنَـٰهُمْ جَسَدًۭا لَّا يَأْكُلُونَ ٱلطَّعَامَ وَمَا كَانُوا۟ خَـٰلِدِينَ ﴿٨﴾

हमने उन रसूलों को, जिन्हें हम भेजते थे, ऐसे शरीर वाले नहीं बनाए थे, जो खाना न खाते हों। बल्कि वे अन्य लोगों की तरह खाते-पीते थे। तथा वे इस दुनिया में हमेशा रहने वाले अमर नहीं थे।

ثُمَّ صَدَقْنَـٰهُمُ ٱلْوَعْدَ فَأَنجَيْنَـٰهُمْ وَمَن نَّشَآءُ وَأَهْلَكْنَا ٱلْمُسْرِفِينَ ﴿٩﴾

फिर हमने अपने रसूलों से किए हुए अपने वचन को पूरा कर दिया। चुनाँचे हमने उन्हें और जिन मोमिनों को चाहा, विनाश से बचा लिया, और उन लोगों को नष्ट कर दिया, जो अल्लाह का इनकार करके और गुनाह के कार्यों में पड़कर हद से आगे बढ़ने वाले थे।

لَقَدْ أَنزَلْنَآ إِلَيْكُمْ كِتَـٰبًۭا فِيهِ ذِكْرُكُمْ ۖ أَفَلَا تَعْقِلُونَ ﴿١٠﴾

हमने तुम्हारी ओर क़ु रआन उतारा है, जिसमें तुम्हारा सम्मान और गौरव है अगर तुम उसे सत्य मानो और उसकी शिक्षाओं पर अमल करो। तो क्या तुम इस बात को नहीं समझते, कि तुम उसपर ईमान लाने में जल्दी करो और उसमें जो कु छ है, उसके अनुसार कार्य करो?! وكم قصمنا من قريةكانت ظالمة وأنشأنا بعدها قوما ءاخرين

وَكَمْ قَصَمْنَا مِن قَرْيَةٍۢ كَانَتْ ظَالِمَةًۭ وَأَنشَأْنَا بَعْدَهَا قَوْمًا ءَاخَرِينَ ﴿١١﴾

और कितनी ही बस्तियाँ ऐसी हैं, जिन्हें हमने उनके कु फ़्र के द्वारा अत्याचार करने के कारण नष्ट कर दिया और उनके बाद दूसरे लोगों को पैदा कर दिया।

فَلَمَّآ أَحَسُّوا۟ بَأْسَنَآ إِذَا هُم مِّنْهَا يَرْكُضُونَ ﴿١٢﴾

चुनाँजे जब विनष्ट लोगों ने हमारी उन्मूलनकारी यातना को देखा, तो विनाश से बचने के लिए अपनी बस्ती से बहुत तेज़ी के साथ भागने लगे।

لَا تَرْكُضُوا۟ وَٱرْجِعُوٓا۟ إِلَىٰ مَآ أُتْرِفْتُمْ فِيهِ وَمَسَـٰكِنِكُمْ لَعَلَّكُمْ تُسْـَٔلُونَ ﴿١٣﴾

तो उनसे उपहास के तौर पर कहा जाएगा: भागो नहीं, और अपने उन सुखों की ओर जिनका तुम आनंद ले रहे थे, और अपने घरों की ओर लौट चलो, ताकि तुमसे तुम्हारी दुनिया के बारे में कु छ पूछा जाए।

قَالُوا۟ يَـٰوَيْلَنَآ إِنَّا كُنَّا ظَـٰلِمِينَ ﴿١٤﴾

इन अत्याचारियों ने अपने पाप को स्वीकार करते हुए कहा: हाय हमारा विनाश और हमारा नुकसान! निश्चय हम अत्याचारी थे क्योंकि हम अल्लाह का इनकार करते थे। فما زالت تلك دعوىهم حت جعلنهم حصيدا خمدين

فَمَا زَالَت تِّلْكَ دَعْوَىٰهُمْ حَتَّىٰ جَعَلْنَـٰهُمْ حَصِيدًا خَـٰمِدِينَ ﴿١٥﴾

तो उनका अपने पाप को स्वीकार करना और अपने हक़ में विनाश की बद्-दुआ करना ही उनकी निरंतर पुकार रही, जिसे वे दोहराते रहे, यहाँ तक कि हमने उन्हें कटी हुई खेती की तरह, मरे हुए बना दिया, उनमें कोई हरकत नहीं थी।

وَمَا خَلَقْنَا ٱلسَّمَآءَ وَٱلْأَرْضَ وَمَا بَيْنَهُمَا لَـٰعِبِينَ ﴿١٦﴾

हमने आकाश और धरती तथा उन दोनों के बीच मौजूद चीज़ों को खेल-तमाशा के तौर पर और व्यर्थ नहीं बनाया, बल्कि हमने उन्हें अपनी शक्ति एवं सामर्थ्य के संके त के रूप में बनाया है। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

لَوْ أَرَدْنَآ أَن نَّتَّخِذَ لَهْوًۭا لَّٱتَّخَذْنَـٰهُ مِن لَّدُنَّآ إِن كُنَّا فَـٰعِلِينَ ﴿١٧﴾

यदि हम पत्नी या पुत्र बनाना चाहते, तो निश्चय हम उसे उससे बना लेते जो हमारे पास है। हालाँकि हम ऐसा करने वाले नहीं हैं, क्योंकि हम इससे पवित्र हैं।

بَلْ نَقْذِفُ بِٱلْحَقِّ عَلَى ٱلْبَـٰطِلِ فَيَدْمَغُهُۥ فَإِذَا هُوَ زَاهِقٌۭ ۚ وَلَكُمُ ٱلْوَيْلُ مِمَّا تَصِفُونَ ﴿١٨﴾

बल्कि हम उस सत्य को, जिसकी हम अपने रसूल की ओर वह़्य करते हैं, कु फ़्र वालों के असत्य पर फें क मारते हैं, तो वह उसे खंडित कर देता है। फिर एकाएक उनका असत्य नष्ट-भ्रष्ट होने वाला होता है। और (ऐ अल्लाह के पत्नी और पुत्र बनाने का दावा करने वालो!) तुम्हारे लिए विनाश है, क्योंकि तुम अल्लाह को ऐसी चीज़ के साथ विशेषित करते हो, जो उसके लिए योग्य नहीं है।

وَلَهُۥ مَن فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ ۚ وَمَنْ عِندَهُۥ لَا يَسْتَكْبِرُونَ عَنْ عِبَادَتِهِۦ وَلَا يَسْتَحْسِرُونَ ﴿١٩﴾

तथा अके ले अल्लाह ही के लिए आकाशों और धरती का राज्य है। और उसके पास जो फ़रिश्ते हैं, उसकी इबादत से अभिमान नहीं करते और न ही वे उससे थकते हैं।

يُسَبِّحُونَ ٱلَّيْلَ وَٱلنَّهَارَ لَا يَفْتُرُونَ ﴿٢٠﴾

वे हमेशा अल्लाह की पवित्रता का गान करते हैं। उससे उकताते नहीं हैं।

أَمِ ٱتَّخَذُوٓا۟ ءَالِهَةًۭ مِّنَ ٱلْأَرْضِ هُمْ يُنشِرُونَ ﴿٢١﴾

बल्कि मुश्रिकों ने अल्लाह के अलावा ऐसे पूज्य बना लिए हैं, जो मरे हुए लोगों को ज़िंदा नहीं कर सकते। तो फिर वे इससे असमर्थ की पूजा कै से करते हैं?!

لَوْ كَانَ فِيهِمَآ ءَالِهَةٌ إِلَّا ٱللَّهُ لَفَسَدَتَا ۚ فَسُبْحَـٰنَ ٱللَّهِ رَبِّ ٱلْعَرْشِ عَمَّا يَصِفُونَ ﴿٢٢﴾

यदि आकाशों और धरती में अल्लाह के अलावा कई पूज्य होते, तो राज्य (प्रभुत्व) को लेकर पूज्यों के बीच विवाद (संघर्ष) के कारण दोनों नष्ट-भ्रष्ट हो जाते। जबकि वस्तुस्थिति इसके विपरीत है। इसलिए, अर्श का मालिक अल्लाह उससे पवित्र है, जो मुश्रिक लोग झूठे तरीक़े से उसके बारे में वर्णन करते हैं कि उसके कोई साझेदार हैं। لا يسٔل عما يفعل وهم يسٔلون

لَا يُسْـَٔلُ عَمَّا يَفْعَلُ وَهُمْ يُسْـَٔلُونَ ﴿٢٣﴾

अल्लाह अपने राज्य और निर्णय में अके ला है। उसके किसी फ़ै सले और निर्णय के बारे में कोई उससे पूछ नहीं सकता। जबकि वह अपने बंदों से उनके कार्यों के बारे में पूछेगा और उन्हें उनके कर्मों का बदला देगा।

أَمِ ٱتَّخَذُوا۟ مِن دُونِهِۦٓ ءَالِهَةًۭ ۖ قُلْ هَاتُوا۟ بُرْهَـٰنَكُمْ ۖ هَـٰذَا ذِكْرُ مَن مَّعِىَ وَذِكْرُ مَن قَبْلِى ۗ بَلْ أَكْثَرُهُمْ لَا يَعْلَمُونَ ٱلْحَقَّ ۖ فَهُم مُّعْرِضُونَ ﴿٢٤﴾

बल्कि उन्होंने अल्लाह के अलावा कई पूज्य बना लिए हैं। (ऐ रसूल!) आप इन मुश्रिकों से कह दें: तुम इनके पूजा के योग्य होने पर अपना प्रमाण प्रस्तुत करो। क्योंकि मुझपर उतरने वाली इस किताब (क़ु रआन) और पिछले रसूलों पर उतरने वाली किताबों में तुम्हारे लिए कोई प्रमाण नहीं है। बल्कि असलबात यह है कि अधिकांश मुश्रिक के वलअज्ञानता और बाप-दादों के अनुकरण पर भरोसा करते हैं। अतः वे सत्य को स्वीकार करने से मुँह फे रने वाले हैं।

وَمَآ أَرْسَلْنَا مِن قَبْلِكَ مِن رَّسُولٍ إِلَّا نُوحِىٓ إِلَيْهِ أَنَّهُۥ لَآ إِلَـٰهَ إِلَّآ أَنَا۠ فَٱعْبُدُونِ ﴿٢٥﴾

(ऐ रसूल!) हमने आपसे पहले जो भी रसूल भेजा, उसकी ओर यही वह़्य (प्रकाशना) करते रहे कि मेरे सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं है। इसलिए एकमात्र मेरी इबादत करो और मेरे साथ किसी भी चीज़ को साझी न बनाओ। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

وَقَالُوا۟ ٱتَّخَذَ ٱلرَّحْمَـٰنُ وَلَدًۭا ۗ سُبْحَـٰنَهُۥ ۚ بَلْ عِبَادٌۭ مُّكْرَمُونَ ﴿٢٦﴾

और मुश्रिकों (बहुदेववादियों) ने कहा: अल्लाह ने फ़रिश्तों को बेटियाँ बना लिया है। अल्लाह उनके इस झूठ से पाक एवं पवित्र है। बल्कि फ़रिश्ते अल्लाह के बंदे हैं। उसकी ओर से सम्मान दिए गए हैं और उसके निकटवर्ती हैं।

لَا يَسْبِقُونَهُۥ بِٱلْقَوْلِ وَهُم بِأَمْرِهِۦ يَعْمَلُونَ ﴿٢٧﴾

वे अपने पालनहार से आगे बढ़कर नहीं बोलते। चुनाँचे उसकी अनुमति के बिना कोई बात नहीं करते, तथा वे उसके आदेश के अनुसार ही काम करते हैं। अतः उसके किसी आदेश का विरोध नहीं करते।

يَعْلَمُ مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ وَلَا يَشْفَعُونَ إِلَّا لِمَنِ ٱرْتَضَىٰ وَهُم مِّنْ خَشْيَتِهِۦ مُشْفِقُونَ ﴿٢٨﴾

वह उनके अगले और पिछले कर्मों को जानता है। वे (क़ियामत के दिन) उसकी अनुमति ही से के वलउसके हक़ में सिफ़ारिश करेंगे, जिसके लिए सिफ़ारिश को वह पसंद करेगा। तथा वे अल्लाह के भय से सहमे हुए रहते हैं। चुनाँचे किसी आदेश या निषेध में उसका विरोध नहीं करते।

۞ وَمَن يَقُلْ مِنْهُمْ إِنِّىٓ إِلَـٰهٌۭ مِّن دُونِهِۦ فَذَٰلِكَ نَجْزِيهِ جَهَنَّمَ ۚ كَذَٰلِكَ نَجْزِى ٱلظَّـٰلِمِينَ ﴿٢٩﴾

मान लिया जाए कि यदि फ़रिश्तों में से कोई यह कहे कि मैं अल्लाह के सिवा पूज्य हूँ, तो हम उसे उसके इस कथन के कारण क़ियामत के दिन जहन्नम की सज़ा देंगे, जिसमें वह हमेशा रहेगा। तथा हमअल्लाह के साथ कु फ़्र और शिर्क के द्वारा अत्याचार करने वालों को इसी तरह दंडित करते हैं।

أَوَلَمْ يَرَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوٓا۟ أَنَّ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضَ كَانَتَا رَتْقًۭا فَفَتَقْنَـٰهُمَا ۖ وَجَعَلْنَا مِنَ ٱلْمَآءِ كُلَّ شَىْءٍ حَىٍّ ۖ أَفَلَا يُؤْمِنُونَ ﴿٣٠﴾

يؤمنون क्या अल्लाह का इनकार करने वाले नहीं जानते कि आकाश और धरती दोनों आपस में मिले हुए थे, दोनों के बीच कोई खाली स्थान नहीं था, जहाँ से बारिश उतरती, तो हमने दोनों को अलग-अलग कर दिया। तथा हमने आसमान से धरती पर उतरने वाली बारिश से हर तरह की जानदार चीज़ें और पौधे बनाए। तो क्या वे इन बातों से सीख नहीं लेते और एक अल्लाह पर ईमान नहीं लाते?!

وَجَعَلْنَا فِى ٱلْأَرْضِ رَوَٰسِىَ أَن تَمِيدَ بِهِمْ وَجَعَلْنَا فِيهَا فِجَاجًۭا سُبُلًۭا لَّعَلَّهُمْ يَهْتَدُونَ ﴿٣١﴾

और हमने धरती में स्थिर पहाड़ बनाए, ताकि वह अपने ऊपर मौजूद लोगों को लेकर हिलने-डुलने न लगे, और हमने उसमें चौड़े रास्ते बना दिए, ताकि लोग अपनी यात्राओं में अपने गंतव्यों तक मार्ग प्राप्त कर सकें ।

وَجَعَلْنَا ٱلسَّمَآءَ سَقْفًۭا مَّحْفُوظًۭا ۖ وَهُمْ عَنْ ءَايَـٰتِهَا مُعْرِضُونَ ﴿٣٢﴾

और हमने आकाश को एक खंभे के बिना गिरने से संरक्षित, तथा शैतानों के चोरी-छिपे सुनने से सुरक्षित छत बनाया। जबकि मुश्रिकों का हाल यह है कि वे आकाश में मौजूद निशानियों (जैसे सूर्य और चाँद) से मुँह फे रने वालेلहैं, उनसे सीख नहीं लेते।

وَهُوَ ٱلَّذِى خَلَقَ ٱلَّيْلَ وَٱلنَّهَارَ وَٱلشَّمْسَ وَٱلْقَمَرَ ۖ كُلٌّۭ فِى فَلَكٍۢ يَسْبَحُونَ ﴿٣٣﴾

अके ला अल्लाह ही है, जिसने आराम के लिए रात बनाई और रोज़ी-रोटी कमाने के लिए दिन बनाया, तथा सूर्य को दिन का संके त और चाँद को रात का संके त बनाया। प्रत्येक सूर्य और चंद्रमा अपनी कक्षा में चल रहे हैं, कोई उससे विचलित और इधर-उधर नहीं होता। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

وَمَا جَعَلْنَا لِبَشَرٍۢ مِّن قَبْلِكَ ٱلْخُلْدَ ۖ أَفَإِي۟ن مِّتَّ فَهُمُ ٱلْخَـٰلِدُونَ ﴿٣٤﴾

(ऐ रसूल!) हमने आपसे पहले किसी मनुष्य को इस जीवन में हमेशा रहने वाला नहीं बनाया। फिर क्या यदि इस जीवन में आपका नियत समय पूरा हो जाए और आपकी मृत्यु हो जाए, तो ये लोग आपके बाद हमेशा रहने वाले हैं?! हरगिज़ नहीं।

كُلُّ نَفْسٍۢ ذَآئِقَةُ ٱلْمَوْتِ ۗ وَنَبْلُوكُم بِٱلشَّرِّ وَٱلْخَيْرِ فِتْنَةًۭ ۖ وَإِلَيْنَا تُرْجَعُونَ ﴿٣٥﴾

प्रत्येक प्राणी को, चाहे मोमिन हो या काफ़िर, इस दुनिया में मौत का स्वाद चखना है। और (ऐ लोगो!) हम दुनिया के जीवन में शरई कर्तव्यों का पाबंद बनाकर तथा नेमतों और विपत्तियों से ग्रस्त कर तुम्हारी आज़माइश करते हैं। फिर तुम अपनी मौत के बाद के वल हमारी ही ओर लौटाए जाओगे। फिर हम तुम्हें तुम्हारे कार्यों का बदला देंगे।

وَإِذَا رَءَاكَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوٓا۟ إِن يَتَّخِذُونَكَ إِلَّا هُزُوًا أَهَـٰذَا ٱلَّذِى يَذْكُرُ ءَالِهَتَكُمْ وَهُم بِذِكْرِ ٱلرَّحْمَـٰنِ هُمْ كَـٰفِرُونَ ﴿٣٦﴾

और (ऐ रसूल!) जब ये मुश्रिक लोग आपको देखते हैं, तो आपका मज़ाक़ उड़ाने लगते हैं और अपने अनुयायियों को यह कहकर आपसे नफ़रत दिलाते हैं कि: क्या यही वह व्यक्ति है, जो तुम्हारे देवताओं को, जिनकी तुम पूजा करते हो, बुरा-भला कहता है?! वे आपका मज़ाक उड़ाने के साथ-साथ उस क़ु रआन का भी इनकार करने वाले हैं, जो अल्लाह ने उनपर अवतरित किया है तथा उन नेमतों की नाशुक्री करते हैं, जो उसने उन्हें प्रदान की हैं। इसलिए वे खुद ही दोष के सबसे अधिक योग्य हैं क्योंकि उनके अंदर हर तरह की बुराई पाई जाती है।

خُلِقَ ٱلْإِنسَـٰنُ مِنْ عَجَلٍۢ ۚ سَأُو۟رِيكُمْ ءَايَـٰتِى فَلَا تَسْتَعْجِلُونِ ﴿٣٧﴾

जल्दबाज़ी मनुष्य की प्रकृि त में शामिल है। इसलिए वह चीज़ों के होने से पहले ही उनके लिए जल्दी मचाने लगता है। इसी का एक उदाहरण मुश्रिकों का यातना के लिए जल्दी मचाना है। (ऐ मेरी यातना के लिए जल्दी मचाने वालो!) मैं निकट ही तुम्हें वह चीज़ दिखाऊँ गा, जिसके लिए तुमने जल्दी मचाई है। इसलिए उसे जल्दी करने के लिए न कहो।

وَيَقُولُونَ مَتَىٰ هَـٰذَا ٱلْوَعْدُ إِن كُنتُمْ صَـٰدِقِينَ ﴿٣٨﴾

मरणोपरांत दोबारा जीवित होने का इनकार करने वाले जल्दी मचाते हुए कहते हैं: (ऐ मुसलमानो!) यदि तुम अपने इस दावे में सच्चे हो कि हमें मरने के बाद दोबारा जीवित होकर उठना है, तो यह वादा कब पूरा होगा?!

لَوْ يَعْلَمُ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ حِينَ لَا يَكُفُّونَ عَن وُجُوهِهِمُ ٱلنَّارَ وَلَا عَن ظُهُورِهِمْ وَلَا هُمْ يُنصَرُونَ ﴿٣٩﴾

अगर मरणोपरांत दोबारा जीवित होने का इनकार करने वाले ये काफ़िर उस समय को जान लेते, जब वे अपने चेहरों और अपनी पीठों से आग को दूर नहीं कर सकेंगे, और यह कि उनका कोई मददगार नहीं होगा, जो उनसे अज़ाब को दूर कर सके । अगर इन्हें इस बात का यक़ीन होता, तो वे अज़ाब की जल्दी न मचाते। بل تأتيهم بغتةفتبهتهم فلا يستطيعون ردها ولا هم ينظرون

بَلْ تَأْتِيهِم بَغْتَةًۭ فَتَبْهَتُهُمْ فَلَا يَسْتَطِيعُونَ رَدَّهَا وَلَا هُمْ يُنظَرُونَ ﴿٤٠﴾

यह आग, जिसके द्वारा उन्हें अज़ाब दिया जाएगा, इस तरह नहीं आएगी कि उन्हें उसका ज्ञान होगा। बल्कि, यह उनपर अचानक आएगी। इसलिए वे उसे अपने आपसे दूर नहीं कर पाएँगे, और न उन्हें इतनी मोहलत दी जाएगी कि तौबा कर लें और उन्हें अल्लाह की दया प्राप्त हो जाए।

وَلَقَدِ ٱسْتُهْزِئَ بِرُسُلٍۢ مِّن قَبْلِكَ فَحَاقَ بِٱلَّذِينَ سَخِرُوا۟ مِنْهُم مَّا كَانُوا۟ بِهِۦ يَسْتَهْزِءُونَ ﴿٤١﴾

यदि आपकी जाति ने आपका मज़ाक़ उड़ाया है, तो आप इस मामले में कोई अनूठे नहीं हैं। निश्चय (ऐ रसूल!) आपसे पहले भी कई रसूलों का मज़ाक़ उड़ाया गया। तो उन काफ़िरों को जो उनका मज़ाक़ उड़ाते थे, उसी यातना ने घेर लिया, जिसका वे दुनिया में मज़ाक़ उड़ाते थे, जब उनके रसूल उन्हें उससे डराते थे। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

قُلْ مَن يَكْلَؤُكُم بِٱلَّيْلِ وَٱلنَّهَارِ مِنَ ٱلرَّحْمَـٰنِ ۗ بَلْ هُمْ عَن ذِكْرِ رَبِّهِم مُّعْرِضُونَ ﴿٤٢﴾

(ऐ रसूल!) इन यातना की जल्दी मचाने वालों से कह दें: वह कौन है जो रात और दिन में 'रहमान' (अत्यंत दयावान् अल्लाह) की ओर से तुमपर उतरने वाले अज़ाब और विनाश से तुम्हारी रक्षा करता है? बल्कि वे अपने पालनहार के उपदेशों और तर्कों को याद करने से मुँह फेरने वाले हैं, अपनी अज्ञानता और मूर्खता के कारण उनमें से किसी भी चीज़ पर विचार नहीं करते हैं।

أَمْ لَهُمْ ءَالِهَةٌۭ تَمْنَعُهُم مِّن دُونِنَا ۚ لَا يَسْتَطِيعُونَ نَصْرَ أَنفُسِهِمْ وَلَا هُم مِّنَّا يُصْحَبُونَ ﴿٤٣﴾

या क्या उनके पास ऐसे पूज्य हैं, जो उन्हें हमारी यातना से बचाते हैं? वे तो अपने आपसे नुक़सान को दूर करके या अपने आपको लाभ पहुँचाकर खुद की भी मदद नहीं कर सकते। और जो खुद अपनी मदद नहीं कर सकता, वह किसी और की मदद कै से करेगा?! और न ही कोई उन्हें हमारी यातना से बचाने वाला होगा।

بَلْ مَتَّعْنَا هَـٰٓؤُلَآءِ وَءَابَآءَهُمْ حَتَّىٰ طَالَ عَلَيْهِمُ ٱلْعُمُرُ ۗ أَفَلَا يَرَوْنَ أَنَّا نَأْتِى ٱلْأَرْضَ نَنقُصُهَا مِنْ أَطْرَافِهَآ ۚ أَفَهُمُ ٱلْغَـٰلِبُونَ ﴿٤٤﴾

बल्कि हमने इन काफ़िरों और इनके बाप-दादों के लिए, उन्हें ढील देते हुए, दुनिया की नेमतें विस्तारित कर दीं, यहाँ तक कि उनपर लंबा समय बीत गया, तो इससे वे धोखे में पड़ गए, और अपने कु फ़्र पर क़ायम रहे। तो क्या हमारी नेमतों से धोखा खाने वाले और हमारी यातना के लिए जल्दी मचाने वाले ये काफ़िर नहीं देखते कि हम धरती के लोगों को पराजित करके, उसे उसके किनारों से कम करते आ रहे हैं। इसलिए उन्हें इससे सीख ग्रहण करना चाहिए ताकि उनके साथ भी वही न हो, जो दूसरों के साथ हुआ?! चुनाँचे ये लोग विजयी (प्रभावी) रहने वाले नहीं हैं, बल्कि ये पराजित (हारे हुए) हैं।

قُلْ إِنَّمَآ أُنذِرُكُم بِٱلْوَحْىِ ۚ وَلَا يَسْمَعُ ٱلصُّمُّ ٱلدُّعَآءَ إِذَا مَا يُنذَرُونَ ﴿٤٥﴾

(ऐ रसूल!) कह दें: (ऐ लोगो!) मैं तुम्हें अल्लाह की यातना से उस वह़्य के अनुसार डराता हूँ, जो मेरा रब मेरी ओर भेजता है। परंतु सत्य से बहरे, जब अल्लाह की यातना से डराए जाते हैं, तो उसे स्वीकार करने के उद्देश्य से नहीं सुनते।

وَلَئِن مَّسَّتْهُمْ نَفْحَةٌۭ مِّنْ عَذَابِ رَبِّكَ لَيَقُولُنَّ يَـٰوَيْلَنَآ إِنَّا كُنَّا ظَـٰلِمِينَ ﴿٤٦﴾

और यदि इन यातना के लिए जल्दी मचाने वाले लोगों को (ऐ रसूल!) आपके पालनहार की यातना का तनिक हिस्सा भी छू जाए, तो वे उस समय अवश्य कहेंगे: हाय हमारा विनाश और हमारा नुक़सान! निश्चय हम अल्लाह का साझी बनाकर और मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की लाई हुई शरीयत का इनकार करके अत्याचार करने वाले थे।

وَنَضَعُ ٱلْمَوَٰزِينَ ٱلْقِسْطَ لِيَوْمِ ٱلْقِيَـٰمَةِ فَلَا تُظْلَمُ نَفْسٌۭ شَيْـًۭٔا ۖ وَإِن كَانَ مِثْقَالَ حَبَّةٍۢ مِّنْ خَرْدَلٍ أَتَيْنَا بِهَا ۗ وَكَفَىٰ بِنَا حَـٰسِبِينَ ﴿٤٧﴾

بنا حسبين और हम क़ियामत के दिन लोगों के कर्मों को तौलने के लिए न्याय के तराज़ू स्थापित करेंगे। तो उस दिन किसी व्यक्ति पर उसके अच्छे कर्मों में कमी या उसके बुरे कर्मों में वृद्धि द्वारा ज़ुल्म नहीं किया जाएगा। यदि राई के एक दाने के बराबर भी कोई चीज़ होगी, तो हम उसे ले आएँगे। और हम अपने बंदों के कामों को गिनने के लिए काफ़ी हैं।

وَلَقَدْ ءَاتَيْنَا مُوسَىٰ وَهَـٰرُونَ ٱلْفُرْقَانَ وَضِيَآءًۭ وَذِكْرًۭا لِّلْمُتَّقِينَ ﴿٤٨﴾

हमने मूसा और हारून अलैहिमस्सलाम को तौरात दिया, जो सत्य तथा असत्य और हलाल तथा हराम के बीच अंतर करने वाला, उसपर ईमान लाने वालों को राह दिखाने वाला और अपने रब से डरने वालों के लिए उपदेश था। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

ٱلَّذِينَ يَخْشَوْنَ رَبَّهُم بِٱلْغَيْبِ وَهُم مِّنَ ٱلسَّاعَةِ مُشْفِقُونَ ﴿٤٩﴾

जो अपने उस रब की यातना से डरते हैं, जिसपर वे ईमान रखते हैं, जबकि उन्होंने उसे नहीं देखा है और वे क़ियामत से डरने वाले हैं।

وَهَـٰذَا ذِكْرٌۭ مُّبَارَكٌ أَنزَلْنَـٰهُ ۚ أَفَأَنتُمْ لَهُۥ مُنكِرُونَ ﴿٥٠﴾

मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर उतरने वाला यह क़ुरआन, उन लोगों के लिए एक स्मरण और उपदेश है, जो इससे उपदेश ग्रहण करना चाहें, बहुत लाभ और भलाई वाला है। तो क्या इन सब के बावजूद तुम इसका इनकार कर रहे हो?! न इसकी शिक्षाओं को स्वीकार करने वाले हो और न उनपर अमल करने वालो हो?!

۞ وَلَقَدْ ءَاتَيْنَآ إِبْرَٰهِيمَ رُشْدَهُۥ مِن قَبْلُ وَكُنَّا بِهِۦ عَـٰلِمِينَ ﴿٥١﴾

और हमने इबराहीम को बचपन में उनकी जाति के विरुद्ध तर्क प्रदान किया था और हम उन्हें अच्छी तरह जानते थे। इसलिए हमने उन्हें उनकी जाति के विरुद्ध वह तर्क प्रदान किया, जिसके वह हमारे ज्ञान के अनुसार योग्य थे।

إِذْ قَالَ لِأَبِيهِ وَقَوْمِهِۦ مَا هَـٰذِهِ ٱلتَّمَاثِيلُ ٱلَّتِىٓ أَنتُمْ لَهَا عَـٰكِفُونَ ﴿٥٢﴾

जब उन्होंने अपने पिता आज़र और अपनी जाति से कहा: ये मूर्तियाँ क्या हैं, जिन्हें तुमने अपने हाथों से बनाया है और जिनकी तुमपूजा में लगे हुए हो?!

قَالُوا۟ وَجَدْنَآ ءَابَآءَنَا لَهَا عَـٰبِدِينَ ﴿٥٣﴾

उनकी जाति के लोगों ने उनसे कहा: हमने अपने बाप-दादा को इनकी पूजा करते हुए पाया है, इसलिए उनका अनुकरण करते हुए हमने भी इनकी पूजा की।

قَالَ لَقَدْ كُنتُمْ أَنتُمْ وَءَابَآؤُكُمْ فِى ضَلَـٰلٍۢ مُّبِينٍۢ ﴿٥٤﴾

इबराहीम अलैहिस्सलाम ने उनसे कहा: (ऐ अपने बाप-दादा के अनुयायियो!) निश्चय तुम और तुम्हारे बाप-दादा, जिनका तुमने अनुकरण किया है, सत्य के मार्ग से स्पष्ट रूप से भटके हुए थे।

قَالُوٓا۟ أَجِئْتَنَا بِٱلْحَقِّ أَمْ أَنتَ مِنَ ٱللَّـٰعِبِينَ ﴿٥٥﴾

उनकी जाति के लोगों ने उनसे कहा: आपने जो यह बात कही है, गंभीरता से कही है या आप मज़ाक़ कर रहे हैं?

قَالَ بَل رَّبُّكُمْ رَبُّ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ ٱلَّذِى فَطَرَهُنَّ وَأَنَا۠ عَلَىٰ ذَٰلِكُم مِّنَ ٱلشَّـٰهِدِينَ ﴿٥٦﴾

इबराहीम अलैहिस्सलाम ने कहा: यह मज़ाक़ नहीं है, बल्कि मैंने गंभीरता से यह बात कही है। क्योंकि तुम्हारा रब वह है, जो आकाशों और धरती का रब है, जिसने उन्हें भूतपूर्व नमूने के बिना पैदा किया है। तथा मैं इस बात का गवाह हूँ कि वही तुम्हारा रब और आकाशों तथा धरती का रब है, और तुम्हारी मूर्तियों का इसमें कोई हिस्सा नहीं है।

وَتَٱللَّهِ لَأَكِيدَنَّ أَصْنَـٰمَكُم بَعْدَ أَن تُوَلُّوا۟ مُدْبِرِينَ ﴿٥٧﴾

इबराहीम अलैहिस्सलाम ने इस तरह से कहा कि उनकी जाति के लोग उसे न सुनें: अल्लाह की क़सम! मैं अवश्य ही तुम्हारी मूर्तियों के प्रति ऐसा उपाय करूँ गा, जो तुम नापसंद करोगे, इसके बाद कि तुमउन्हें छोड़कर अपने उत्सव में चले जाओगे। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर فجعلهم جذذا إلا كبيرا لهم لعلهم إليهيرجعون

فَجَعَلَهُمْ جُذَٰذًا إِلَّا كَبِيرًۭا لَّهُمْ لَعَلَّهُمْ إِلَيْهِ يَرْجِعُونَ ﴿٥٨﴾

इबराहीम अलैहिस्सलाम ने उनकी मूर्तियों को तोड़कर उनके छोटे-छोटे टुकड़े कर दिए। और उनमें से सबसे बड़े को रहने दिया, ताकि वे उससे यह पूछने के लिए लौटें कि उन्हें किसने तोड़ा।

قَالُوا۟ مَن فَعَلَ هَـٰذَا بِـَٔالِهَتِنَآ إِنَّهُۥ لَمِنَ ٱلظَّـٰلِمِينَ ﴿٥٩﴾

जब वे वापस आए और देखा कि उनकी मूर्तियों के टुकड़े-टुकड़े कर दिए गए हैं, तो उन्होंने एक-दूसरे से पूछा: हमारे पूज्यों को किसने तोड़ डाला? निःसंदेह जिसने उन्हें तोड़ा है, वह निश्चय ज़ालिमों में से है। क्योंकि उसने उसका तिरस्कार किया जो सम्मान और पवित्रीकरण के योग्य है। قالواسمعنا فتى يذكرهم يقال له إبرهيم

قَالُوا۟ سَمِعْنَا فَتًۭى يَذْكُرُهُمْ يُقَالُ لَهُۥٓ إِبْرَٰهِيمُ ﴿٦٠﴾

उनमें से किसी ने कहा: हमने एक नवयुवक को सुना है, जो इनकी बुराई कर रहा था, उसे इबराहीमकहा जाता है। शायद उसी ने इनके टुकड़े-टुकड़े किए हैं।

قَالُوا۟ فَأْتُوا۟ بِهِۦ عَلَىٰٓ أَعْيُنِ ٱلنَّاسِ لَعَلَّهُمْ يَشْهَدُونَ ﴿٦١﴾

उनके सरदारों ने कहा: इबराहीम को लोगों की दृष्टि के सामने लाओ, ताकि वे उसके अपने किए का इक़रार करने पर गवाह हो जाएँ। फिर उसका इक़रार तुम्हारे लिए उसके ख़िलाफ़ सबूत बन जाए।

قَالُوٓا۟ ءَأَنتَ فَعَلْتَ هَـٰذَا بِـَٔالِهَتِنَا يَـٰٓإِبْرَٰهِيمُ ﴿٦٢﴾

अतः उन्होंने इबराहीम अलैहिस्सलाम को हाज़िर किया और उनसे पूछा: ऐ इबराहीम! क्या तूने ही हमारी मूर्तियों के साथ यह घिनौना काम किया है?! قال بل فعله كبيرهم هذا فسٔلوهم إن كانواينطقون

قَالَ بَلْ فَعَلَهُۥ كَبِيرُهُمْ هَـٰذَا فَسْـَٔلُوهُمْ إِن كَانُوا۟ يَنطِقُونَ ﴿٦٣﴾

इबराहीम अलैहिस्सलाम ने (उनका मज़ाक़ उड़ाते हुए, लोगों की दृष्टि के सामने उनकी मूर्तियों की विवशता उजागर करते हुए) कहा: मैंने ऐसा नहीं किया, बल्कि यह काम सबसे बड़ी मूर्ति का है। इसलिए अपनी मूर्तियों से पूछ लो, यदि वे बोलती हैं।

فَرَجَعُوٓا۟ إِلَىٰٓ أَنفُسِهِمْ فَقَالُوٓا۟ إِنَّكُمْ أَنتُمُ ٱلظَّـٰلِمُونَ ﴿٦٤﴾

उन्होंने अपने मन में विचार और चिंतन किया, तो उनके लिए यह स्पष्ट हो गया कि उनकी मूर्तियाँ लाभ या हानि पहुँचाने की मालिक नहीं हैं। इसलिए वे अल्लाह को छोड़कर उनकी पूजा करने के कारण खुद ही ज़ालिम हैं।

ثُمَّ نُكِسُوا۟ عَلَىٰ رُءُوسِهِمْ لَقَدْ عَلِمْتَ مَا هَـٰٓؤُلَآءِ يَنطِقُونَ ﴿٦٥﴾

फिर वे अपने हठ और इनकार पर लौट आए और बोले: (ऐ इबराहीम!) तुम अच्छी तरह जानते हो कि ये मूर्तियाँ बोलती नहीं हैं, तो तुम हमें उनसे पूछने का आदेश कै से देते हो?यह बात उन्होंने अपने लिए एक तर्क के रूप में कही, लेकिन यह खुद उनके खिलाफ़ तर्क बन गई।

قَالَ أَفَتَعْبُدُونَ مِن دُونِ ٱللَّهِ مَا لَا يَنفَعُكُمْ شَيْـًۭٔا وَلَا يَضُرُّكُمْ ﴿٦٦﴾

इबराहीम अलैहिस्सलाम ने (उनका खंडन करते हुए) कहा: क्या तुम अल्लाह को छोड़कर ऐसी मूर्तियों की पूजा करते हो, जो न तुम्हें कु छ लाभ पहुँचाती हैं, और न तुम्हें हानि पहुँचाती है। बल्कि वे खुद से हानि को टालने या अपने आपको लाभ पहुँचाने में असमर्थ हैं। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

أُفٍّۢ لَّكُمْ وَلِمَا تَعْبُدُونَ مِن دُونِ ٱللَّهِ ۖ أَفَلَا تَعْقِلُونَ ﴿٦٧﴾

तुम्हारा बुरा हो, और उन मूर्तियों का भी बुरा हो, जिन्हें तुम अल्लाह को छोड़कर पूजने में लगे हो, जो न लाभ पहुँचाती हैं न हानि। क्या तुम यह बात नहीं समझते, कि उनकी पूजा छोड़ दो।

قَالُوا۟ حَرِّقُوهُ وَٱنصُرُوٓا۟ ءَالِهَتَكُمْ إِن كُنتُمْ فَـٰعِلِينَ ﴿٦٨﴾

जब वे तर्क द्वारा उनका सामना करने में असमर्थ रहे, तो उन्होंने बल का सहारा लिया और बोले: अपनी उन मूर्तियों का समर्थन करते हुए, इबराहीम को आग से जला दो, जिन्हें इसने तोड़कर नष्ट कर दिया, यदि तुम इसे एक निवारक सज़ा देना चाहते हो।

قُلْنَا يَـٰنَارُ كُونِى بَرْدًۭا وَسَلَـٰمًا عَلَىٰٓ إِبْرَٰهِيمَ ﴿٦٩﴾

उन्होंने एक आग जलाई और इबराहीम अलैहिस्सलाम को उसमें फेंक दिया, तो हमने कहा: ऐ आग! इबराहीम पर ठंडक और सुरक्षा बन जा। चुनाँचे वह ऐसी हो गई। इसलिए उन्हें कोई कष्ट नहीं पहुँचा।

وَأَرَادُوا۟ بِهِۦ كَيْدًۭا فَجَعَلْنَـٰهُمُ ٱلْأَخْسَرِينَ ﴿٧٠﴾

इबराहीम अलैहिस्सलाम की जाति के लोगों ने उनके साथ यह चाल चलनी चाही कि उन्हें जला दें, तो हमने उनकी चाल को निरस्त कर दिया और उन्हीं को विनष्ट एवं पराजित होने वाले कर दिया।

وَنَجَّيْنَـٰهُ وَلُوطًا إِلَى ٱلْأَرْضِ ٱلَّتِى بَـٰرَكْنَا فِيهَا لِلْعَـٰلَمِينَ ﴿٧١﴾

और हमने उन्हें और लूत को बचा लिया और दोनों को निकालकर शाम (लेवंत) की भूमि पर ले गए, जिसमें हमने बरकत रखी। क्योंकि हमने उसमें नबियों को भेजे और लोगों के लिए उसमें भलाइयाँ रख दीं। ل

وَوَهَبْنَا لَهُۥٓ إِسْحَـٰقَ وَيَعْقُوبَ نَافِلَةًۭ ۖ وَكُلًّۭا جَعَلْنَا صَـٰلِحِينَ ﴿٧٢﴾

हमने उन्हें इसहाक़ प्रदान किया, जब उन्होंने अपने रब से एक पुत्र देने के लिए दुआ की, तथा हमने उन्हें एक अतिरिक्त याक़ू ब भी प्रदान किया। इबराहीमऔर उनके बेटे इसहाक़ और (पोते) याक़ू ब में से हर एक को हमने नेक और अल्लाह का आज्ञाकारी बनाया।

وَجَعَلْنَـٰهُمْ أَئِمَّةًۭ يَهْدُونَ بِأَمْرِنَا وَأَوْحَيْنَآ إِلَيْهِمْ فِعْلَ ٱلْخَيْرَٰتِ وَإِقَامَ ٱلصَّلَوٰةِ وَإِيتَآءَ ٱلزَّكَوٰةِ ۖ وَكَانُوا۟ لَنَا عَـٰبِدِينَ ﴿٧٣﴾

और हमने उन्हें पेशवा बनाया, जिनसे लोग भलाई में मार्गदर्शन प्राप्त करते थे। वे अल्लाह की अनुमति से लोगों को अकेले अल्लाह की इबादत की ओर बुलाते थे। तथा हमने उनकी ओर वह़्य भेजी कि अच्छे कार्य करो, संपूर्ण तरीक़े से नमाज़ अदा करो और ज़कात दो। और वे हमारे आज्ञाकारी थे।

وَلُوطًا ءَاتَيْنَـٰهُ حُكْمًۭا وَعِلْمًۭا وَنَجَّيْنَـٰهُ مِنَ ٱلْقَرْيَةِ ٱلَّتِى كَانَت تَّعْمَلُ ٱلْخَبَـٰٓئِثَ ۗ إِنَّهُمْ كَانُوا۟ قَوْمَ سَوْءٍۢ فَـٰسِقِينَ ﴿٧٤﴾

और लूत को हमने विरोधियों के बीच निर्णय करने की क्षमता प्रदान की और उन्हें उनके धर्म का ज्ञान दिया, तथा उन्हें उस यातना से बचा लिया, जिसे हमने उनकी बस्ती (सदूम) पर उतारी थी, जिसके लोग अनैतिक कार्य करते थे। निश्चय वे भ्रष्ट लोग थे, जो अपने रब के आज्ञापालन से निकलने वाले थे।

وَأَدْخَلْنَـٰهُ فِى رَحْمَتِنَآ ۖ إِنَّهُۥ مِنَ ٱلصَّـٰلِحِينَ ﴿٧٥﴾

और हमने उन्हें उनकी जाति पर उतरने वाली यातना से बचाकर, अपनी दया में दाखिल कर लिया। वह उन नेक लोगों में से थे, जो हमारे आदेश का पालन करते हैं और हमारे निषेधों से बचते हैं। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

وَنُوحًا إِذْ نَادَىٰ مِن قَبْلُ فَٱسْتَجَبْنَا لَهُۥ فَنَجَّيْنَـٰهُ وَأَهْلَهُۥ مِنَ ٱلْكَرْبِ ٱلْعَظِيمِ ﴿٧٦﴾

और (ऐ रसूल!) नूह़ अलैहिस्सलाम की कहानी को याद करो, जब उन्होंने इबराहीम और लूत अलैहिमस्सलाम से पहले अल्लाह को पुकारा, तो हमने उनकी पुकार का जवाब देते हुए उनकी माँग पूरी कर दी। फिर हमने उन्हें और उनके ईमान वाले परिजनों को बड़े दुःख से बचा लिया।

وَنَصَرْنَـٰهُ مِنَ ٱلْقَوْمِ ٱلَّذِينَ كَذَّبُوا۟ بِـَٔايَـٰتِنَآ ۚ إِنَّهُمْ كَانُوا۟ قَوْمَ سَوْءٍۢ فَأَغْرَقْنَـٰهُمْ أَجْمَعِينَ ﴿٧٧﴾

और हमने उन्हें उस जाति की चाल से बचाया, जिन्होंने रसूल की सच्चाई को दर्शाने वाली उन निशानियों को झुठलाया, जिनके द्वारा हमने उनका समर्थन किया था। निश्चय वे बिगाड़ और बुराई वाले लोग थे। तो हमने उन सभी को डुबो कर नष्ट कर दिया।

وَدَاوُۥدَ وَسُلَيْمَـٰنَ إِذْ يَحْكُمَانِ فِى ٱلْحَرْثِ إِذْ نَفَشَتْ فِيهِ غَنَمُ ٱلْقَوْمِ وَكُنَّا لِحُكْمِهِمْ شَـٰهِدِينَ ﴿٧٨﴾

और (ऐ रसूल!) दाऊद और उनके बेटे सुलैमान अलैहिमस्सलाम की कहानी को याद करें, जब दोनों, दो झगड़ने वालों के मामले में फ़ै सला कर रहे थे, जो उनके पास आए थे। मामला यह था एक व्यक्ति की बकरियों ने रात को दूसरे व्यक्ति के खेत में घुसकर नुक़सान कर दिया था। और हम दाऊद और सुलैमान के फ़ै सले को देख रहे थे। उनके फै सले से कु छ भी हमारी निगाहों से ओझलनहीं था।

فَفَهَّمْنَـٰهَا سُلَيْمَـٰنَ ۚ وَكُلًّا ءَاتَيْنَا حُكْمًۭا وَعِلْمًۭا ۚ وَسَخَّرْنَا مَعَ دَاوُۥدَ ٱلْجِبَالَ يُسَبِّحْنَ وَٱلطَّيْرَ ۚ وَكُنَّا فَـٰعِلِينَ ﴿٧٩﴾

तो हमने दाऊद के बजाय, उनके बेटे सुलैमान को इस मामले का सही निर्णय सुझा दिया। जबकि दाऊद और सुलैमान में से हर एक को हमने नुबुव्वत और शरीयत के अहकाम का ज्ञान दिया था। ऐसा नहीं था कि ये चीज़ें के वल सुलैमान को प्रदान की गई हों। और हमने पहाड़ों को दाऊद के अधीन कर दिया था, जो उनके साथ अल्लाह की पवित्रता बयान करते थे। और पक्षियों को भी उनके अधीन कर दिया था। और ये मामले की समझ, हुक्म और ज्ञान प्रदान करने वाले तथा वस्तुओं को उनके अधीन करने वाले हम ही थे।

وَعَلَّمْنَـٰهُ صَنْعَةَ لَبُوسٍۢ لَّكُمْ لِتُحْصِنَكُم مِّنۢ بَأْسِكُمْ ۖ فَهَلْ أَنتُمْ شَـٰكِرُونَ ﴿٨٠﴾

और हमने सुलैमान के बिना, दाऊद को कवच बनाने का हुनर सिखाया, ताकि वह हथियारों के तुम्हारे शरीर को आघात पहुँचाने से तुम्हारी रक्षा करें। तो क्या (ऐ लोगो!) तुम अपने ऊपर अल्लाह की इस नेमत का शुक्रिया अदा करने वाले हो?!

وَلِسُلَيْمَـٰنَ ٱلرِّيحَ عَاصِفَةًۭ تَجْرِى بِأَمْرِهِۦٓ إِلَى ٱلْأَرْضِ ٱلَّتِى بَـٰرَكْنَا فِيهَا ۚ وَكُنَّا بِكُلِّ شَىْءٍ عَـٰلِمِينَ ﴿٨١﴾

और हमने तेज़ बहने वाली हवा को सुलैमान के अधीन कर दिया, जो उनके आदेश पर शाम (लेवंत) की भूमि की ओर बहती थी, जिसमें हमने नबियों को भेजकर और भलाइयाँ फै लाकर बरकतें रखी थीं। और हमहमेशा से हर वस्तु को जानने वाले हैं। उसमें से कोई चीज़ हमसे छिपी नहीं है।

وَمِنَ ٱلشَّيَـٰطِينِ مَن يَغُوصُونَ لَهُۥ وَيَعْمَلُونَ عَمَلًۭا دُونَ ذَٰلِكَ ۖ وَكُنَّا لَهُمْ حَـٰفِظِينَ ﴿٨٢﴾

और हमने शैतानों में से भी कु छ उनके अधीन कर दिए थे, जो उनके लिए समुद्रों में डुबकी लगाकर मोतियाँ और दूसरी चीज़ें निकालते थे और इसके अलावा अन्य कार्य भी करते थे, जैसे घर बनाना। और हमउनकी संख्या और उनके कार्यों को संरक्षित करने वाले थे। उसमें से कोई चीज़ हमसे नहीं छू टती।

۞ وَأَيُّوبَ إِذْ نَادَىٰ رَبَّهُۥٓ أَنِّى مَسَّنِىَ ٱلضُّرُّ وَأَنتَ أَرْحَمُ ٱلرَّٰحِمِينَ ﴿٨٣﴾

और (ऐ रसूल!) अय्यूब अलैहिस्सलाम की कहानी को याद करें, जब उन्होंने विपत्ति से ग्रस्त होने पर अपने रब को यह कहते हुए पुकारा: ऐ मेरे रब! मुझे बीमारी लग गई है और घर वाले बिछड़ गए। और तू सभी दया करने वालों में सबसे अधिक दया करने वाला है। अतः मुझसे उसविपत्ति को दूर कर दे, जो मुझे पहुँची है। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

فَٱسْتَجَبْنَا لَهُۥ فَكَشَفْنَا مَا بِهِۦ مِن ضُرٍّۢ ۖ وَءَاتَيْنَـٰهُ أَهْلَهُۥ وَمِثْلَهُم مَّعَهُمْ رَحْمَةًۭ مِّنْ عِندِنَا وَذِكْرَىٰ لِلْعَـٰبِدِينَ ﴿٨٤﴾

तो हमने उनकी दुआ स्वीकार कर ली और उन्हें जो भी कष्ट पहुँचा था, उनसे दूर कर दिया और उन्हें उनके बिछड़े हुए परिजन और बच्चे प्रदान कर दिए और उनके साथ उनके बराबर और भी दिए। यह सब कुछ हमने अपनी ओर से दया के रूप में और हर उस व्यक्ति की याद-दहानी के लिए किया, जो इबादत के साथ अल्लाह का आज्ञापालन करने वाला है, ताकि वह भी अय्यूब अलैहिस्सलामلकी तरह सब्र करे।

وَإِسْمَـٰعِيلَ وَإِدْرِيسَ وَذَا ٱلْكِفْلِ ۖ كُلٌّۭ مِّنَ ٱلصَّـٰبِرِينَ ﴿٨٥﴾

और (ऐ रसूल!) इसमाईल, इदरीस और ज़ुल-किफ़्ल अलैहिमुस्सलाम को याद करें। इनमें से हर एक विपत्ति पर और अल्लाह की दी हुई ज़िम्मेवारी को अदा करने पर धैर्य से कामलेने वालों में से था।

وَأَدْخَلْنَـٰهُمْ فِى رَحْمَتِنَآ ۖ إِنَّهُم مِّنَ ٱلصَّـٰلِحِينَ ﴿٨٦﴾

हमने उन्हें अपनी दया में दाख़िल कर लिया। चुनाँचे हमने उन्हें नबी बनाए और उन्हें जन्नत में दाखिल किए। वे अल्लाह के उन सदाचारी बंदों में से थे, जिन्होंने अपने पालनहार की आज्ञा का पालन किया और उनके ज़ाहिर-ओ-बातिन (अंदर और बाहर) अच्छे थे।

وَذَا ٱلنُّونِ إِذ ذَّهَبَ مُغَـٰضِبًۭا فَظَنَّ أَن لَّن نَّقْدِرَ عَلَيْهِ فَنَادَىٰ فِى ٱلظُّلُمَـٰتِ أَن لَّآ إِلَـٰهَ إِلَّآ أَنتَ سُبْحَـٰنَكَ إِنِّى كُنتُ مِنَ ٱلظَّـٰلِمِينَ ﴿٨٧﴾

और (ऐ रसूल!) मछली वाले नबी, यूनुस अलैहिस्सलाम की कहानी याद करें, जब वह अपनी जाति के लोगों की लगातार अवज्ञा के कारण उनसे नाराज़ होकर अपने रब की अनुमति के बिना चले गए। उन्होंने समझा कि हम उनके चले जाने की सज़ा के तौर पर उन्हें तंगी में नहीं डालेंगे। लेकिन जब मछली ने उन्हें निगल लिया, तो वह गंभीर तंगी और क़ैद से पीड़ित हुए। तो उन्होंने मछली के पेट, समुद्र और रात के अंधेरे में, अपने पाप को स्वीकार करते हुए, अल्लाह के सामने तौबा करते हुए दुआ की: तेरे सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं, तू पाक एवं पवित्र है। निश्चय मैं ही अत्याचारियों में से हो गया हूँ।

فَٱسْتَجَبْنَا لَهُۥ وَنَجَّيْنَـٰهُ مِنَ ٱلْغَمِّ ۚ وَكَذَٰلِكَ نُـۨجِى ٱلْمُؤْمِنِينَ ﴿٨٨﴾

तो हमने उनकी दुआ स्वीकार कर ली और उन्हें अंधेरों से और मछली के पेट से निकालकर, उस संकट की तीव्रता से मुक्ति प्रदान की। और जिस तरह यूनुस अलैहिस्सलाम को संकट से मुक्ति दी, उसी तरह हम मोमिनों को मुक्ति देते हैं, यदि वे किसी संकट में पड़ जाएँ और अल्लाह से दुआ करें।

وَزَكَرِيَّآ إِذْ نَادَىٰ رَبَّهُۥ رَبِّ لَا تَذَرْنِى فَرْدًۭا وَأَنتَ خَيْرُ ٱلْوَٰرِثِينَ ﴿٨٩﴾

और (ऐ रसूल!) ज़करिया अलैहिस्सलाम की कहानी को याद करें, जब उन्होंने अपने पालनहार को यह कहते हुए पुकारा: ऐ मेरे रब! मुझे अके ला न छोड़ कि मेरी कोई औलाद न हो। और तू सबसे बेहतर बाक़ी रहने वाला है। इसलिए मुझे एक बेटा प्रदान कर, जो मेरे बाद बाक़ी रहे।

فَٱسْتَجَبْنَا لَهُۥ وَوَهَبْنَا لَهُۥ يَحْيَىٰ وَأَصْلَحْنَا لَهُۥ زَوْجَهُۥٓ ۚ إِنَّهُمْ كَانُوا۟ يُسَـٰرِعُونَ فِى ٱلْخَيْرَٰتِ وَيَدْعُونَنَا رَغَبًۭا وَرَهَبًۭا ۖ وَكَانُوا۟ لَنَا خَـٰشِعِينَ ﴿٩٠﴾

وكانوا لنا خشعين तो हमने उनकी दुआ स्वीकार कर ली और उन्हें यह़या के रूप में एक बेटा प्रदान किया और उनकी पत्नी को ठीक कर दिया। चुनाँचे वह बच्चा जनने वाली हो गई, जबकि वह पहले बच्चा जनने के योग्य नहीं थी। निश्चय ज़करिया, उनकी पत्नी और उनके बेटे, नेकियाँ करने में बहुत जल्दी करते थे तथा वे हमें हमारे सवाब के लोभ में और हमारी सज़ा से डरते हुए पुकारते थे और हमारे सामने गिड़गिड़ाने वाले थे। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

وَٱلَّتِىٓ أَحْصَنَتْ فَرْجَهَا فَنَفَخْنَا فِيهَا مِن رُّوحِنَا وَجَعَلْنَـٰهَا وَٱبْنَهَآ ءَايَةًۭ لِّلْعَـٰلَمِينَ ﴿٩١﴾

तथा (ऐ रसूल!) मरयम अलैहस्सलाम की कहानी को याद करें, जिसने अपने गुप्तांग को व्यभिचार से सुरक्षित रखा, तो अल्लाह ने उनकी ओर जिबरील अलैहिस्सलाम को भेजा, जिन्होंने उनके भीतर फूँ क मारी, तो उन्होंने ईसा अलैहिस्सलाम का गर्भ धारण कर लिया। वह और उनके बेटे ईसा अलैहिस्सलाम, लोगों के लिए अल्लाह के सामर्थ्य की निशानी थे, और यह कि उसे कोई भी चीज़ विवश नही कर सकती, क्योंकि उसने उन्हें बिना पिता के पैदा किया था।

إِنَّ هَـٰذِهِۦٓ أُمَّتُكُمْ أُمَّةًۭ وَٰحِدَةًۭ وَأَنَا۠ رَبُّكُمْ فَٱعْبُدُونِ ﴿٩٢﴾

(ऐ लोगो!) यह तुम्हारा धर्म एक ही धर्म है। और वह एके श्वरवाद (तौहीद) है, जो इस्लाम का धर्म है। और मैं तुम्हारा रब हूँ, इसलिए एकमात्र मेरी ही इबादत करो।

وَتَقَطَّعُوٓا۟ أَمْرَهُم بَيْنَهُمْ ۖ كُلٌّ إِلَيْنَا رَٰجِعُونَ ﴿٩٣﴾

और लोग विभिन्न गुटों में बट गए। चुनाँचे उनमें कोई एके श्वरवादी तो कोई बहुदेववादी, कोई काफ़िर तो कोई मोमिन हो गया। तथा ये सभी अलग-अलग हो जाने वाले लोग क़ियामत के दिन के वल हमारी ही ओर लौटकर आने वाले हैं। फिर हम उन्हें उनके कर्मों का बदला देंगे।

فَمَن يَعْمَلْ مِنَ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ وَهُوَ مُؤْمِنٌۭ فَلَا كُفْرَانَ لِسَعْيِهِۦ وَإِنَّا لَهُۥ كَـٰتِبُونَ ﴿٩٤﴾

उनमें से जो व्यक्ति भी नेक अमल करेगा और वह अल्लाह, उसके रसूल और आख़िरत के दिन पर ईमान रखने वाला होगा, तो उसके अच्छे कार्य को नकारा नहीं जाएगा, बल्कि अल्लाह उसका आदर करते हुए उसके प्रतिफल को कई गुना कर देगा, और वह उसे उस दिन अपने कर्म पत्र में लिखा हुआ पाएगा, जिस दिन मरणोपरांत दोबारा जीवित होगा, तो वह उसे देखकर प्रसन्न हो जाएगा।

وَحَرَٰمٌ عَلَىٰ قَرْيَةٍ أَهْلَكْنَـٰهَآ أَنَّهُمْ لَا يَرْجِعُونَ ﴿٩٥﴾

जिस बस्ती के लोगों को हम उनके कु फ़्र के कारण नष्ट कर दें, उनके लिए यह असंभव कि वे इस दुनिया में लौटें; ताकि वे तौबा कर लें और उनकी तौबा स्वीकार कर ली जाए।

حَتَّىٰٓ إِذَا فُتِحَتْ يَأْجُوجُ وَمَأْجُوجُ وَهُم مِّن كُلِّ حَدَبٍۢ يَنسِلُونَ ﴿٩٦﴾

वे दोबारा कभी नहीं लौटेंगे, यहाँ तक कि जब याजूज और माजूज का बाँध खोल दिया जाएगा और वे उस दिन धरती के हर ऊँ चे स्थान से तेज़ी से दौड़ते हुए आएँगे।

وَٱقْتَرَبَ ٱلْوَعْدُ ٱلْحَقُّ فَإِذَا هِىَ شَـٰخِصَةٌ أَبْصَـٰرُ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ يَـٰوَيْلَنَا قَدْ كُنَّا فِى غَفْلَةٍۢ مِّنْ هَـٰذَا بَلْ كُنَّا ظَـٰلِمِينَ ﴿٩٧﴾

उनके निकलने से क़ियामत क़रीब आ जाएगी और उसकी भयावहता और कठिनाइयाँ दिखाई देनी लगेंगी, जिनकी सख़्त भयंकरता से काफ़िरों की आँखें खुली रह जाएँगी और वे कहेंगे: हाय हमारा विनाश, हम दुनिया में इस महान दिन की तैयारी से मस्ती और ग़फ़लत में थे। बल्कि हम कु फ़्र एवं अवज्ञा करके स्वयं पर अत्याचार करने वाले थे।

إِنَّكُمْ وَمَا تَعْبُدُونَ مِن دُونِ ٱللَّهِ حَصَبُ جَهَنَّمَ أَنتُمْ لَهَا وَٰرِدُونَ ﴿٩٨﴾

(ऐ मुश्रिको!) निश्चय तुम और वे मूर्तियाँ, जिन्हें तुम अल्लाह के सिवा पूजते हो और ऐसे जिन्न तथा इनसान जिनकी तुम पूजा करते हो और वे तुम्हारी इस पूजा से खुश हैं, ये सभी जहन्नमका ईंधन बनेंगे, तुमअपने पूज्यों के साथ उसमें प्रवेश करोगे। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर ل

لَوْ كَانَ هَـٰٓؤُلَآءِ ءَالِهَةًۭ مَّا وَرَدُوهَا ۖ وَكُلٌّۭ فِيهَا خَـٰلِدُونَ ﴿٩٩﴾

यदि उनके ये पूज्य (देवता), वास्तव में पूजे जाने के योग्य होते, तो वे उन लोगों के साथ नरक में प्रवेश नहीं करते, जो उनकी पूजा करते थे। तथा पूजा करने वालों और पूज्यों में से प्रत्येक जहन्नममें जाएँगे, जिनमें वे हमेशा के लिए रहेंगे, कभी भी उससे बाहर नहीं निकलेंगे। لهم فيها زفير وهم فيها لا يسمعون

لَهُمْ فِيهَا زَفِيرٌۭ وَهُمْ فِيهَا لَا يَسْمَعُونَ ﴿١٠٠﴾

उसमें (दर्द की तीव्रता से) उनकी साँसे ज़ोर-ज़ोर से निकल रही होंगी, तथा जहन्नम में उन्हें पहुँचने वाली भयानक भयावहता की तीव्रता से वे कोई आवाज़ नहीं सुनेंगे।

إِنَّ ٱلَّذِينَ سَبَقَتْ لَهُم مِّنَّا ٱلْحُسْنَىٰٓ أُو۟لَـٰٓئِكَ عَنْهَا مُبْعَدُونَ ﴿١٠١﴾

जब मुश्रिकों ने कहा: (निश्चय ईसा और वे फ़रिश्ते जिनकी पूजा की गई है, जहन्नममें जाएँगे) तो अल्लाह ने फ़रमाया: निश्चय जिनके बारे में पहले से अल्लाह के ज्ञान में है कि वे सौभाग्यशाली हैं, जैसे ईसा अलैहिस्सलाम, वे जहन्नम से दूर रखे जाएँगे।

لَا يَسْمَعُونَ حَسِيسَهَا ۖ وَهُمْ فِى مَا ٱشْتَهَتْ أَنفُسُهُمْ خَـٰلِدُونَ ﴿١٠٢﴾

उनके कानों तक जहन्नम की आवाज़ नहीं पहुँचेगी और वे अपनी मनपसंद नेमतों और सुख-सुविधाओं में हमेशा रहने वाले होंगे। उनकी नेमतें कभी खत्म नहीं होंगी।

لَا يَحْزُنُهُمُ ٱلْفَزَعُ ٱلْأَكْبَرُ وَتَتَلَقَّىٰهُمُ ٱلْمَلَـٰٓئِكَةُ هَـٰذَا يَوْمُكُمُ ٱلَّذِى كُنتُمْ تُوعَدُونَ ﴿١٠٣﴾

उस दिन बड़ी घबराहट उनको भयभीत नहीं करेगी, जब जहन्नम को जहन्नम वासियों समेत बंद कर दिया जाएगा और फ़रिश्ते उनका यह कहकर स्वागत करेंगे: यह है तुम्हारा वह दिन जिसका तुम दुनिया में वादा दिए जाते थे और उसमें मिलने वाली नेमतों की तुम्हें खुशख़बरी दी जाती थी।

يَوْمَ نَطْوِى ٱلسَّمَآءَ كَطَىِّ ٱلسِّجِلِّ لِلْكُتُبِ ۚ كَمَا بَدَأْنَآ أَوَّلَ خَلْقٍۢ نُّعِيدُهُۥ ۚ وَعْدًا عَلَيْنَآ ۚ إِنَّا كُنَّا فَـٰعِلِينَ ﴿١٠٤﴾

जिस दिन हम आकाश को उसी तरह लपेट देंगे जिस तरह पंजिका के पन्ने पर लिखकर उसे लपेट दिया जाता है, तथा हम लोगों को उसी हाल में जमा करेंगे, जिस हाल में वे पहली बार पैदा किए गए थे। यह हमारा सच्चा वादा है जिसका उल्लंघन नहीं हो सकता। हम जो वादा करते हैं, उसे पूरा करने वाले हैं।

وَلَقَدْ كَتَبْنَا فِى ٱلزَّبُورِ مِنۢ بَعْدِ ٱلذِّكْرِ أَنَّ ٱلْأَرْضَ يَرِثُهَا عِبَادِىَ ٱلصَّـٰلِحُونَ ﴿١٠٥﴾

हमने 'लौह़े मह़फ़ूज़' में लिखने के बाद, उन किताबों में लिख दिया, जिन्हें हमने अपने रसूलों पर उतारा कि धरती के उत्तराधिकारी अल्लाह के सदाचारी और उसका आज्ञापालन करने वाले बंदे ही होंगे। और वे मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लमकी उम्मत के लोग हैं। إن فى هذا لبلغا لقوم عبدين

إِنَّ فِى هَـٰذَا لَبَلَـٰغًۭا لِّقَوْمٍ عَـٰبِدِينَ ﴿١٠٦﴾

निःसंदेह हमारी उतारी हुई इस नसीहत में, उन लोगों के लिए लाभ और पर्याप्तता है, जो अपने रब के बताए हुए तरीक़े के अनुसार उसकी इबादत करने वाले हैं। क्योंकि वही लोग हैं जो इससे लाभान्वित होते हैं।

وَمَآ أَرْسَلْنَـٰكَ إِلَّا رَحْمَةًۭ لِّلْعَـٰلَمِينَ ﴿١٠٧﴾

और (ऐ मुह़म्मद!) हमने आपको समस्त मख़लूक़ के लिए दया बनाकर भेजा है, क्योंकि आप लोगों को सीधा रास्ता दिखाने और उन्हें अल्लाह की यातना से बचाने के लिए बड़े उत्सुक हैं। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

قُلْ إِنَّمَا يُوحَىٰٓ إِلَىَّ أَنَّمَآ إِلَـٰهُكُمْ إِلَـٰهٌۭ وَٰحِدٌۭ ۖ فَهَلْ أَنتُم مُّسْلِمُونَ ﴿١٠٨﴾

(ऐ रसूल!) मेरी ओर, मेरे पालनहार की तरफ़ से, के वल यही वह़्य की जाती है कि तुम्हारा सच्चा पूज्य के वल एक पूज्य है, जिसका कोई साझी नहीं और वह अल्लाह है। इसलिए उसपर ईमान लाओ और उसकी आज्ञा का पालन करो।

فَإِن تَوَلَّوْا۟ فَقُلْ ءَاذَنتُكُمْ عَلَىٰ سَوَآءٍۢ ۖ وَإِنْ أَدْرِىٓ أَقَرِيبٌ أَم بَعِيدٌۭ مَّا تُوعَدُونَ ﴿١٠٩﴾

फिर अगर ये लोग उस संदेश से मुँह फेरें जो आप उनके पास लाए हैं, तो (ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें: मैंने तुम्हें बता दिया है कि मैं और तुम अलगाव के एक समान मामले पर हैं। और मुझे नहीं पता कि अल्लाह ने अपनी जिस यातना का वादा किया है, वह तुम पर कब आएगी।

إِنَّهُۥ يَعْلَمُ ٱلْجَهْرَ مِنَ ٱلْقَوْلِ وَيَعْلَمُ مَا تَكْتُمُونَ ﴿١١٠﴾

निःसंदेह अल्लाह वह बात जानता है जो तुमखुल्लम-खुल्ला कहते हो और उसे भी जानता है जो तुमछिपाते हो। उसमें से कु छ भी उससे छिपा नहीं है और वह तुम्हें उसका बदला देगा। وإن أدرى لعله فتنة ل كم ومتع إلى حين

وَإِنْ أَدْرِى لَعَلَّهُۥ فِتْنَةٌۭ لَّكُمْ وَمَتَـٰعٌ إِلَىٰ حِينٍۢ ﴿١١١﴾

मुझे नहीं पता शायद तुम्हें यातना देने में देरी करना, तुम्हारे लिए एक परीक्षा, ढील(प्रलोभन) और अल्लाह के ज्ञान में एक निर्धारित अवधि के लिए आपको लाभ उठाने का अवसर देना हो; ताकि तुमअपने कु फ़्र और गुमराही में अत्यधिक हो जाओ।

قَـٰلَ رَبِّ ٱحْكُم بِٱلْحَقِّ ۗ وَرَبُّنَا ٱلرَّحْمَـٰنُ ٱلْمُسْتَعَانُ عَلَىٰ مَا تَصِفُونَ ﴿١١٢﴾

अल्लाह के रसूलसल्लल्लाहु अलैहि व सल्लमने अपने रब से दुआ करते हुए कहा: ऐ मेरे रब! हमारे बीच और हमारे इस कु फ़्र पर क़ायमरहने वाले समुदाय के बीच सच्चे फै सले के साथ निर्णय कर दे। और हम तुम्हारे इनकार और झुठलाने पर अपने अत्यंत दयावान् पालनहार ही की सहायता माँगते हैं। स्रोत:अल-मुख़्तसर फ़ी तफ़सीरिल क़ु रआनिल करीम

सीखें · Al-Anbiyaa — الأنبياء

साथ पढ़ें · दोहराएँ · सुनाएँ · बिना पंजीकरण

तफ़सीर · 31 भाषाएँ