الٓر ۚ تِلْكَ ءَايَـٰتُ ٱلْكِتَـٰبِ وَقُرْءَانٍۢ مُّبِينٍۢ ﴿١﴾
{अलिफ़, लाम, रा।} इन जैसे अक्षरों के संबंध में सूरतुल बक़रा के आरंभ में बात हो चुकी है। ये उच्चस्तरीय आयतें जो इस बात को दर्शाती हैं कि वे अल्लाह की ओर से अवतरित हैं, ये उस क़ु रआन की आयतें हैं, जो तौह़ीद (एके श्वरवाद) और धर्म के विधानों को स्पष्ट करता है।
رُّبَمَا يَوَدُّ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ لَوْ كَانُوا۟ مُسْلِمِينَ ﴿٢﴾
क़ियामत के दिन जब काफ़िरों के लिए मामला स्पष्ट हो जाएगा और वे दुनिया में जिस अविश्वास के रास्ते पर चल रहे थे, उसकी अमान्यता उनके सामने उजागर हो जाएगी, तो वे कामना करेंगे कि काश! वे मुसलमान होते।
ذَرْهُمْ يَأْكُلُوا۟ وَيَتَمَتَّعُوا۟ وَيُلْهِهِمُ ٱلْأَمَلُ ۖ فَسَوْفَ يَعْلَمُونَ ﴿٣﴾
(ऐ रसूल!) इन झुठलाने वालों को छोड़ दें कि वे पशुओं की तरह खाते रहें और दुनिया के नश्वर सुखों का आनंद लेते रहें तथा लंबी आशा उन्हें ईमान और अच्छे कार्य से गाफ़िलकिए रखे। जब वे क़ियामत के दिन अल्लाह के सामने उपस्थित होंगे, तो उन्हें पता चलजाएगा कि वे कितने घाटे में हैं।
وَمَآ أَهْلَكْنَا مِن قَرْيَةٍ إِلَّا وَلَهَا كِتَابٌۭ مَّعْلُومٌۭ ﴿٤﴾
और अत्याचारी बस्तियों में से जिस बस्ती पर भी हमने विनाश उतारा, उसका अल्लाह के ज्ञान में एक निर्धारित समय था, जिससे वह न आगे बढ़ सकती और न पीछे हट सकती थी। ما تسبق من أمة أجلها وما يستٔخرون
مَّا تَسْبِقُ مِنْ أُمَّةٍ أَجَلَهَا وَمَا يَسْتَـْٔخِرُونَ ﴿٥﴾
किसी भी समुदाय पर उसका विनाश उसके नियत समय से पहले नहीं आता। तथा जब उसका नियत समय आ जाए, तो उसका विनाश उससे पीछे नहीं रहता। इसलिए अत्याचारियों को, अल्लाह के उन्हें ढीलदेने से, धोखे में नहीं पड़ना चाहिए।
وَقَالُوا۟ يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِى نُزِّلَ عَلَيْهِ ٱلذِّكْرُ إِنَّكَ لَمَجْنُونٌۭ ﴿٦﴾
मक्का के काफ़िरों ने रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से कहा: ऐ वह व्यक्ति जिसपर स्मरण (क़ु रआन) उतारा गया है (जैसा कि वह दावा करता है), निश्चित रूप से तू अपने इस दावे से पागल लगता है, जो पागलों की तरह व्यवहार करता है।
لَّوْ مَا تَأْتِينَا بِٱلْمَلَـٰٓئِكَةِ إِن كُنتَ مِنَ ٱلصَّـٰدِقِينَ ﴿٧﴾
तुम हमारे पास फ़रिश्तों को क्यों नहीं ले आते, जो तुम्हारे हक़ में गवाही दें, यदि तुम सच्चे हो कि तुम एक भेजे गए रसूल हो और यह कि हमपर यातना उतरने वाली है।
مَا نُنَزِّلُ ٱلْمَلَـٰٓئِكَةَ إِلَّا بِٱلْحَقِّ وَمَا كَانُوٓا۟ إِذًۭا مُّنظَرِينَ ﴿٨﴾
अल्लाह तआला ने उनके फ़रिश्तों के आने के सुझाव के जवाब में कहा: हम फ़रिश्तों को उसी समय उतारते हैं, जब हमारी हिकमत के अनुसार उन्हें अज़ाब के द्वारा विनष्ट करने का समय आ जाए। और - अगर हम फ़रिश्तों को ले आएँ और वे ईमान न लाएँ, तो - उन्हें मोहलत नहीं दी जाएगी, बल्कि उन्हें तुरंत दंडित किया जाएगा। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर
إِنَّا نَحْنُ نَزَّلْنَا ٱلذِّكْرَ وَإِنَّا لَهُۥ لَحَـٰفِظُونَ ﴿٩﴾
निःसंदेह हमने ही इस क़ु रआन को मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के दिल पर लोगों के अनुस्मरण (याद-दहानी) के लिए उतारा है, और निःसंदेह हम ही क़ु रआन को वृद्धि और कमी, परिवर्तन और विकृ ति से सुरक्षित रखने वाले हैं।
وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا مِن قَبْلِكَ فِى شِيَعِ ٱلْأَوَّلِينَ ﴿١٠﴾
(ऐ रसूल!) हमने आपसे पहले पिछले काफ़िर समुदायों में (भी) रसूल भेजे थे, तो उन्होंने उन रसूलों को झुठला दिया था। इसलिए, आपके समुदाय के आपको झुठलाने के मामले में, आप अनूठे रसूल नहीं हैं। وما يأتيهم من رسول إلا كانوا به يستهزءون
وَمَا يَأْتِيهِم مِّن رَّسُولٍ إِلَّا كَانُوا۟ بِهِۦ يَسْتَهْزِءُونَ ﴿١١﴾
पिछले काफ़िर समुदायों के पास जो भी रसूल आता था, वे उसे झुठला देते और उसका मज़ाक उड़ाया करते थे।
كَذَٰلِكَ نَسْلُكُهُۥ فِى قُلُوبِ ٱلْمُجْرِمِينَ ﴿١٢﴾
जिस तरह हमने उन (विगत) समुदायों के दिलों में झुठलाने की प्रवृत्ति डालदी थी, उसी तरह हमउसे मक्का के मुश्रिकों के दिलों में डालदेंगे, उनकी विमुखता और हठ के कारण।
لَا يُؤْمِنُونَ بِهِۦ ۖ وَقَدْ خَلَتْ سُنَّةُ ٱلْأَوَّلِينَ ﴿١٣﴾
ये लोग मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर अवतरित इस क़ु रआन पर ईमान नहीं लाएँगे। और अल्लाह की यह परंपरा रही है कि वह अपने रसूलों के लाए हुए संदेश को झुठलाने वालों को विनष्ट कर देता है। इसलिए आपको झुठलाने वाले लोगों को इससे सीख लेनी चाहिए।
وَلَوْ فَتَحْنَا عَلَيْهِم بَابًۭا مِّنَ ٱلسَّمَآءِ فَظَلُّوا۟ فِيهِ يَعْرُجُونَ ﴿١٤﴾
ये झुठलाने वाले लोग हठी हैं, भले ही स्पष्ट प्रमाणों के साथ सत्य उनके सामने उजागर हो जाए। चुनाँचे यदि हम उनके लिए आसमान का कोई द्वार खोल दें और वे उसमें चढ़ते चले जाएँ।
لَقَالُوٓا۟ إِنَّمَا سُكِّرَتْ أَبْصَـٰرُنَا بَلْ نَحْنُ قَوْمٌۭ مَّسْحُورُونَ ﴿١٥﴾
तब भी वे सत्य को नहीं मानते और कहते: हमारी दृष्टि को देखने से अवरुद्ध कर दिया गया है, बल्कि हम जो कु छ देख रहे हैं, वह जादू का प्रभाव है। क्योंकि हम मंत्रमुग्ध हैं।
وَلَقَدْ جَعَلْنَا فِى ٱلسَّمَآءِ بُرُوجًۭا وَزَيَّنَّـٰهَا لِلنَّـٰظِرِينَ ﴿١٦﴾
निःसंदेह हमने आसमान में महान सितारे बनाए हैं, जिनके माध्यमसे लोग जलएवं थलके अंधेरों में अपनी यात्राओं के दौरान रास्ता मालूमकरते हैं। और उन्हें देखने वालों के लिए सुशोभित किया है। ताकि वे उनसे सर्वशक्तिमान अल्लाह की शक्ति का प्रमाण प्राप्त करें। وحفظنها من كل شيطن رجيم
وَحَفِظْنَـٰهَا مِن كُلِّ شَيْطَـٰنٍۢ رَّجِيمٍ ﴿١٧﴾
और हमने आसमान को अल्लाह की दया से निष्कासित हर शैतान से सुरक्षित कर दिया है। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर
إِلَّا مَنِ ٱسْتَرَقَ ٱلسَّمْعَ فَأَتْبَعَهُۥ شِهَابٌۭ مُّبِينٌۭ ﴿١٨﴾
परंतु जो निकटवर्ती फ़रिश्तों (मलए-आला) की बात चुपके से सुन ले, तो एक चमकदार ज्वाला (उल्का) उसका पीछा करती है और उसे जला देती है।
وَٱلْأَرْضَ مَدَدْنَـٰهَا وَأَلْقَيْنَا فِيهَا رَوَٰسِىَ وَأَنۢبَتْنَا فِيهَا مِن كُلِّ شَىْءٍۢ مَّوْزُونٍۢ ﴿١٩﴾
और हमने धरती को फैलाया ताकि लोग उसके ऊपर रह सकें, और उसमें मज़बूत (अटल) पहाड़ बनाए ताकि वह (धरती) लोगों को लेकर डगमगाने न लगे, तथा उसमें विभिन्न प्रकार के पौधे उगाए जो हिकमत की अपेक्षानुसार निर्धारित व निर्दिष्ट हैं। وجعلنا لكم فيها معيش ومن لستمله برزقين
وَجَعَلْنَا لَكُمْ فِيهَا مَعَـٰيِشَ وَمَن لَّسْتُمْ لَهُۥ بِرَٰزِقِينَ ﴿٢٠﴾
और (ऐ लोगो!) हमने धरती में तुम्हारे लिए ऐसी खाने और पीने की चीज़ें बनाईं, जिनसे तुम्हारा जीवन यापन हो सके जब तक तुम दुनिया के जीवन में रहो। और हमने तुम्हारे सिवा उन लोगों और जानवरों के लिए (भी) जीवन यापन के साधन बनाए, जिन्हें तुमरोज़ी नहीं देते।
وَإِن مِّن شَىْءٍ إِلَّا عِندَنَا خَزَآئِنُهُۥ وَمَا نُنَزِّلُهُۥٓ إِلَّا بِقَدَرٍۢ مَّعْلُومٍۢ ﴿٢١﴾
इनसानों और जानवरों के लाभ की जितनी वस्तुएँ हैं, हम उन्हें पैदा करने और लोगों को उनसे लाभ पहुँचाने का सामर्थ्य रखते हैं। और हम उनमें से जिस चीज़ को पैदा करते हैं, उसे अपनी हिकमत और अपनी इच्छा के अनुसार एक निश्चित मात्रा ही में पैदा करते हैं।
وَأَرْسَلْنَا ٱلرِّيَـٰحَ لَوَٰقِحَ فَأَنزَلْنَا مِنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءًۭ فَأَسْقَيْنَـٰكُمُوهُ وَمَآ أَنتُمْ لَهُۥ بِخَـٰزِنِينَ ﴿٢٢﴾
और हमने हवाएँ भेजीं जो बादलों को पानी से गर्भित करती हैं। फिर उन गर्भित बादलों से बारिश बरसाई और तुम्हें बारिश के पानी से सैराब किया। और (ऐ लोगो!) तुम इस पानी को धरती के अंदर स्रोतों और कु ओं के रूप में संग्रह करने वाले नहीं हो। परंतु यह के वलअल्लाह है जो इसे धरती में संग्रह करता है।
وَإِنَّا لَنَحْنُ نُحْىِۦ وَنُمِيتُ وَنَحْنُ ٱلْوَٰرِثُونَ ﴿٢٣﴾
निःसंदेह हमही मृतकों को, उन्हें अनस्तित्व से अस्तित्व में लाकर तथा मृत्यु के बाद उन्हें पुनर्जीवित कर, जीवन प्रदान करते हैं। और जब जीवित लोग अपनी नियत अवधि पूरी कर लेते हैं, तो हम उन्हें मौत देते हैं। तथा हम ही बाक़ी रहने वाले हैं, जो धरती एवं उसके ऊपर मौजूद सारी चीज़ों के उत्तराधिकारी बनेंगे।
وَلَقَدْ عَلِمْنَا ٱلْمُسْتَقْدِمِينَ مِنكُمْ وَلَقَدْ عَلِمْنَا ٱلْمُسْتَـْٔخِرِينَ ﴿٢٤﴾
निश्चित रूप से हमें उन लोगों का ज्ञान है, जो तुमसे पहले पैदा हुए और मर चुके , तथा हमें उन लोगों का भी ज्ञान है जिनका बाद में जन्म एवं मृत्यु होगी। इसमें से कु छ भी हमसे छिपा नहीं है।
وَإِنَّ رَبَّكَ هُوَ يَحْشُرُهُمْ ۚ إِنَّهُۥ حَكِيمٌ عَلِيمٌۭ ﴿٢٥﴾
(ऐ रसूल!) निश्चय आपका पालनहार क़ियामत के दिन उन सबको एकत्र करेगा। ताकि अच्छे कार्य करने वाले को उसके अच्छे कार्य का बदला दे और बुरे कार्य करने वाले को उसके बुरे कार्य का बदला दे। वह अपने प्रबंधन में हिकमत वाला, तथा सब कु छ जानने वाला है, उससे कोई बात छिपी नहीं रहती।
وَلَقَدْ خَلَقْنَا ٱلْإِنسَـٰنَ مِن صَلْصَـٰلٍۢ مِّنْ حَمَإٍۢ مَّسْنُونٍۢ ﴿٢٦﴾
हमने आदम को सूखी मिट्टी से पैदा किया, जिसे ठोकर मारी जाए तो आवाज़ दे। और यह मिट्टी जिससे उन्हें बनाया गया, काले रंग की थी और ज़्यादा दिनों तक रहने के कारण बदबूदार हो गई थी। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर
وَٱلْجَآنَّ خَلَقْنَـٰهُ مِن قَبْلُ مِن نَّارِ ٱلسَّمُومِ ﴿٢٧﴾
और हमने आदम अलैहिस्सलाम को पैदा करने से पहले जिन्नों के पिता को तीव्र गर्मी वाली आग से पैदा किया।
وَإِذْ قَالَ رَبُّكَ لِلْمَلَـٰٓئِكَةِ إِنِّى خَـٰلِقٌۢ بَشَرًۭا مِّن صَلْصَـٰلٍۢ مِّنْ حَمَإٍۢ مَّسْنُونٍۢ ﴿٢٨﴾
(ऐ रसूल!) उस समय को याद कीजिए, जब आपके पालनहार ने फ़रिश्तों से और इबलीस से (जो कि फ़रिश्तों के साथ था) कहा: मैं काली बदबूदार, खनखनाती हुई सूखी मिट्टी से एक इनसान बनाऊँ गा। فإذا سويته ونفخت فيه من روحى فقعواله سجدين
فَإِذَا سَوَّيْتُهُۥ وَنَفَخْتُ فِيهِ مِن رُّوحِى فَقَعُوا۟ لَهُۥ سَـٰجِدِينَ ﴿٢٩﴾
जब मैं उसकी शक्ल-सूरत ठीक-ठाक कर दूँ और उसकी रचना को पूरा कर लूँ, तो तुम सब मेरी आज्ञा के अनुपालन में और उसे अभिवादन करते हुए उसके आगे सजदे में गिर जाओ।
فَسَجَدَ ٱلْمَلَـٰٓئِكَةُ كُلُّهُمْ أَجْمَعُونَ ﴿٣٠﴾
तो फ़रिश्तों ने आज्ञापालन किया और सब के सब उनके आगे सजदे में गिर गए, जैसा कि उनके पालनहार ने उन्हें आदेश दिया था।
إِلَّآ إِبْلِيسَ أَبَىٰٓ أَن يَكُونَ مَعَ ٱلسَّـٰجِدِينَ ﴿٣١﴾
परंतु इबलीस(जो फ़रिश्तों के साथ रहता था, लेकिन उनमें से नहीं था) फ़रिश्तों के साथ आदमको सजदा करने से उपेक्षा किया।
قَالَ يَـٰٓإِبْلِيسُ مَا لَكَ أَلَّا تَكُونَ مَعَ ٱلسَّـٰجِدِينَ ﴿٣٢﴾
अल्लाह ने इबलीस से उसके आदम को सजदा करने से मना कर देने के बाद कहा: तुझे मेरी आज्ञा का पालन करते हुए सजदा करने वाले फ़रिश्तों के साथ सजदा करने से किस चीज़ ने रोकाॽ قال لم أكن لأسجدلبشر خلقته من صلصل من حمإ مسنون
قَالَ لَمْ أَكُن لِّأَسْجُدَ لِبَشَرٍ خَلَقْتَهُۥ مِن صَلْصَـٰلٍۢ مِّنْ حَمَإٍۢ مَّسْنُونٍۢ ﴿٣٣﴾
इबलीस ने अहंकारपूर्वक कहा: मेरे लिए यह उचित नहीं कि मैं एक मनुष्य को सजदा करूँ , जिसे तूने सूखी मिट्टी से पैदा किया, जो पहले एक काली बदबूदार मिट्टी थी।
قَالَ فَٱخْرُجْ مِنْهَا فَإِنَّكَ رَجِيمٌۭ ﴿٣٤﴾
अल्लाह ने इबलीस से कहा: तू जन्नत से निकलजा। क्योंकि तू धिक्कार दिया गया है।
وَإِنَّ عَلَيْكَ ٱللَّعْنَةَ إِلَىٰ يَوْمِ ٱلدِّينِ ﴿٣٥﴾
और निश्चय ही क़ियामत के दिन तक तुझपर धिक्कार और मेरी दया से दूरी है।
قَالَ رَبِّ فَأَنظِرْنِىٓ إِلَىٰ يَوْمِ يُبْعَثُونَ ﴿٣٦﴾
इबलीस ने कहा: ऐ मेरे पालनहार! मुझे उस दिन तक मोहलत दे और जीवित रख, जिस दिन सभी लोग दोबारा जीवित किए जाएँगे। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर
قَالَ فَإِنَّكَ مِنَ ٱلْمُنظَرِينَ ﴿٣٧﴾
अल्लाह ने उससे कहा: निःसंदेह तू मोहलत दिए गए लोगों में से है जिनकी मृत्यु को मैंने विलंबित कर दी है।
إِلَىٰ يَوْمِ ٱلْوَقْتِ ٱلْمَعْلُومِ ﴿٣٨﴾
उस समय तक, जब प्रथम बार सूर फूँ के जाने पर सभी लोग मर जाएँगे।
قَالَ رَبِّ بِمَآ أَغْوَيْتَنِى لَأُزَيِّنَنَّ لَهُمْ فِى ٱلْأَرْضِ وَلَأُغْوِيَنَّهُمْ أَجْمَعِينَ ﴿٣٩﴾
इबलीस ने कहा: ऐ मेरे रब! तूने मुझे गुमराह किया है, इस कारण मैं अवश्य ही उनके लिए धरती में गुनाहों को सुंदर बनाऊँगा और उन सभी को सीधे रास्ते से गुमराह करूँ गा।
إِلَّا عِبَادَكَ مِنْهُمُ ٱلْمُخْلَصِينَ ﴿٤٠﴾
सिवाय तेरे उन बंदों के , जिन्हें तूने अपनी इबादत के लिए चुन लिया है। قال هذا صرط على مستقيم
قَالَ هَـٰذَا صِرَٰطٌ عَلَىَّ مُسْتَقِيمٌ ﴿٤١﴾
अल्लाह ने फरमाया: यही मेरे पास पहुँचाने वाला सीधा रास्ता है।
إِنَّ عِبَادِى لَيْسَ لَكَ عَلَيْهِمْ سُلْطَـٰنٌ إِلَّا مَنِ ٱتَّبَعَكَ مِنَ ٱلْغَاوِينَ ﴿٤٢﴾
मेरे चयनित बंदों को गुमराह करने की तेरा कोई शक्ति और अधिकार नहीं, सिवाय इसके गुमराहों में से जो खुद तेरे पीछे चलने लगें। وإ ن جهن م لموعدهم أجمعين
وَإِنَّ جَهَنَّمَ لَمَوْعِدُهُمْ أَجْمَعِينَ ﴿٤٣﴾
निश्चय इबलीसऔर उसके पीछे चलने वाले सभी भटके हुए लोगों के वादा का स्थान जहन्नमहै। لها سبعةأبوب لكل باب منهم جزءمقسوم
لَهَا سَبْعَةُ أَبْوَٰبٍۢ لِّكُلِّ بَابٍۢ مِّنْهُمْ جُزْءٌۭ مَّقْسُومٌ ﴿٤٤﴾
जहन्नमके सात द्वार हैं, जिनसे वे प्रवेश करेंगे। उनमें से हर द्वार से इबलीस के पीछे चलने वालों की एक निश्चित संख्या प्रवेश करेगी।
إِنَّ ٱلْمُتَّقِينَ فِى جَنَّـٰتٍۢ وَعُيُونٍ ﴿٤٥﴾
निश्चय अपने पालनहार के आदेश का पालन करके और उसकी मना की हुई चीज़ों से बचकर, उससे डरने वाले लोग बाग़ों और स्रोतों में होंगे।
ٱدْخُلُوهَا بِسَلَـٰمٍ ءَامِنِينَ ﴿٤٦﴾
उसमें प्रवेश के समय उनसे कहा जाएगा: इसमें हर प्रकार की आपदा से सुरक्षित होकर और भयमुक्त होकर प्रवेश कर जाओ। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर ونزعنا ما فى صدورهم من غل إخونا عل سرر متقبلين
وَنَزَعْنَا مَا فِى صُدُورِهِم مِّنْ غِلٍّ إِخْوَٰنًا عَلَىٰ سُرُرٍۢ مُّتَقَـٰبِلِينَ ﴿٤٧﴾
और हमउनके दिलों को हर तरह के द्वेष और दुश्मनी से पवित्र कर देंगे। वे भाई-भाई बनकर, एक-दूसरे को देखते हुए तख़्तों पर बैठे होंगे। لا يمسهم فيها نصب وما هم منها بمخرجين
لَا يَمَسُّهُمْ فِيهَا نَصَبٌۭ وَمَا هُم مِّنْهَا بِمُخْرَجِينَ ﴿٤٨﴾
उन्हें वहाँ न कोई थकान होगी और न वे वहाँ से निकाले जाएँगे। बल्कि वे वहाँ हमेशा रहेंगे।
۞ نَبِّئْ عِبَادِىٓ أَنِّىٓ أَنَا ٱلْغَفُورُ ٱلرَّحِيمُ ﴿٤٩﴾
(ऐ रसूल!) मेरे बंदों को बता दें कि मैं अपने तौबा करने वाले बंदों को क्षमा करने वाला, उनपर दयावान् हूँ।
وَأَنَّ عَذَابِى هُوَ ٱلْعَذَابُ ٱلْأَلِيمُ ﴿٥٠﴾
और उन्हें बता दें कि मेरी यातना ही कष्टदायक यातना है। इसलिए वे मुझ से तौबा करें, ताकि मेरी क्षमा के भागीदार बन सकें और मेरी यातना से बच सकें । ونبئهم عن ضيف إبرهيم
وَنَبِّئْهُمْ عَن ضَيْفِ إِبْرَٰهِيمَ ﴿٥١﴾
और आप उन्हें इबराहीम अलैहिस्सलाम के पास अतिथि बनकर आने वाले फ़रिश्तों के बारे में बताएँ, जो उनके पास बेटे की शुभ सूचना और लूत अलैहिस्सलाम की जाति के विनाश की सूचना लेकर आए थे। إذ دخلواعليه فقالواسلما قال إنا منكم وجلون
إِذْ دَخَلُوا۟ عَلَيْهِ فَقَالُوا۟ سَلَـٰمًۭا قَالَ إِنَّا مِنكُمْ وَجِلُونَ ﴿٥٢﴾
जब वे इबराहीम अलैहिस्सलाम के पास आए, तो उन्होंने उसे सलाम किया। उसने उन्हें उनके सलाम से बेहतर जवाब दिया और उनके सामने खाने के लिए एक भूना हुआ बछड़ा रखा। क्योंकि वह उन्हें इनसान समझरहे थे, परंतु जब उन्होंने खाने को हाथ नहीं लगाया, तो बोले: हमें तुमसे डर महसूसहो रहा है। قالوالا توجل إنا نبشرك بغلم عليم
قَالُوا۟ لَا تَوْجَلْ إِنَّا نُبَشِّرُكَ بِغُلَـٰمٍ عَلِيمٍۢ ﴿٥٣﴾
तो संदेश लाने वाले फ़रिश्तों ने कहा: डरिए नहीं। हमआपको एक ऐसी चीज़ की सूचना दे रहे हैं जिससे आपको खुशी प्राप्त होगी। आपको एक ज्ञानी बेटा होगा।
قَالَ أَبَشَّرْتُمُونِى عَلَىٰٓ أَن مَّسَّنِىَ ٱلْكِبَرُ فَبِمَ تُبَشِّرُونَ ﴿٥٤﴾
इबराहीम अलैहिस्सलाम ने बेटे की शुभ सूचना पर आश्चर्य प्रकट करते हुए कहा: क्या तुम मुझे इस बुढ़ापे के बावजूद बेटे की शुभ सूचना देते हो, तो तुम किस आधार पर मुझे शुभ सूचना दे रहे हो?
قَالُوا۟ بَشَّرْنَـٰكَ بِٱلْحَقِّ فَلَا تَكُن مِّنَ ٱلْقَـٰنِطِينَ ﴿٥٥﴾
शुभ सूचना लाने वाले फ़रिश्तों ने इबराहीम अलैहिस्सलाम से कहा: हमने आपको उस सत्य की शुभ सूचना दी है जिसमें कोई संदेह नहीं है। इसलिए आप उस चीज़ से निराश न हों, जिसकी हमने आपको शुभ सूचना दी है।
قَالَ وَمَن يَقْنَطُ مِن رَّحْمَةِ رَبِّهِۦٓ إِلَّا ٱلضَّآلُّونَ ﴿٥٦﴾
इबराहीमअलैहिस्सलामने कहा: क्या अल्लाह के सीधे रास्ते से भटके हुए लोगों के सिवा भी कोई अपने रब की दया से निराश होता है?! بلغ क़ुरआन · तफ़सीर
قَالَ فَمَا خَطْبُكُمْ أَيُّهَا ٱلْمُرْسَلُونَ ﴿٥٧﴾
इबराहीमअलैहिस्सलामने कहा: ऐ अल्लाह के भेजे हुए फ़रिश्तो! तुमकिस अभियान के तहत आए हो?
قَالُوٓا۟ إِنَّآ أُرْسِلْنَآ إِلَىٰ قَوْمٍۢ مُّجْرِمِينَ ﴿٥٨﴾
संदेश लाने वाले फ़रिश्तों ने कहा: अल्लाह ने हमें एक महा भ्रष्टाचारी, महा बुराई वाले समुदाय को नष्ट करने के लिए भेजा है, और वे लूत की जाति के लोग हैं।
إِلَّآ ءَالَ لُوطٍ إِنَّا لَمُنَجُّوهُمْ أَجْمَعِينَ ﴿٥٩﴾
लूत के घर वालों और उनके अनुयायी मोमिनों के सिवा। विनाश का आदेश उनके लिए नहीं है। हमउन सबको उससे अवश्य बचा लेने वाले हैं।
إِلَّا ٱمْرَأَتَهُۥ قَدَّرْنَآ ۙ إِنَّهَا لَمِنَ ٱلْغَـٰبِرِينَ ﴿٦٠﴾
परंतु उनकी पत्नी का मामला अलग है। हमारा निर्णय है कि वह उन बाक़ी लोगों में से है, जो विनाश से पीड़ित होंगे।
فَلَمَّا جَآءَ ءَالَ لُوطٍ ٱلْمُرْسَلُونَ ﴿٦١﴾
फिर जब अल्लाह के भेजे हुए फ़रिश्ते पुरुषों की शक्लमें लूत के घर वालों के पासआए। قال إنكم قوم م نكرون
قَالَ إِنَّكُمْ قَوْمٌۭ مُّنكَرُونَ ﴿٦٢﴾
लूत अलैहिस्सलाम ने उनसे कहा: तुम अनजान लोग हो। قالوابل جئنك بما كانوافيه يمترون
قَالُوا۟ بَلْ جِئْنَـٰكَ بِمَا كَانُوا۟ فِيهِ يَمْتَرُونَ ﴿٦٣﴾
संदेशवाहक फ़रिश्तों ने लूत अलैहिस्सलामसे कहा: डरिए मत। बल्कि - ऐ लूत! - हमआपके पास वह यातना लेकर आए हैं, जिसके बारे में आपकी जाति के लोग संदेह किया करते थे, जो उनका विनाश करने वाली है।
وَأَتَيْنَـٰكَ بِٱلْحَقِّ وَإِنَّا لَصَـٰدِقُونَ ﴿٦٤﴾
हमआपके पासवह सच्चाई लेकर आए हैं जिसमें कोई मज़ाक़ नहीं है, और हमने आपको जो कु छ बताया है उसमें हमबिल्कु लसच्चे हैं।
فَأَسْرِ بِأَهْلِكَ بِقِطْعٍۢ مِّنَ ٱلَّيْلِ وَٱتَّبِعْ أَدْبَـٰرَهُمْ وَلَا يَلْتَفِتْ مِنكُمْ أَحَدٌۭ وَٱمْضُوا۟ حَيْثُ تُؤْمَرُونَ ﴿٦٥﴾
इसलिए रात के एक हिस्से के बीत जाने के बाद अपने परिवार के साथ चलपड़ें। तथा आप स्वयं उनके पीछे-पीछे चलें। और आप लोगों में से कोई भी पीछे मुड़कर न देखे कि उनके साथ क्या हुआ। और अल्लाह ने आप लोगों को जहाँ जाने का आदेश दिया है, वहाँ चलते जाओ।
وَقَضَيْنَآ إِلَيْهِ ذَٰلِكَ ٱلْأَمْرَ أَنَّ دَابِرَ هَـٰٓؤُلَآءِ مَقْطُوعٌۭ مُّصْبِحِينَ ﴿٦٦﴾
और हमने लूत अलैहिस्सलाम को वह़्य (प्रकाशना) द्वारा उस मामले से सूचित कर दिया जिसका हमने निर्णय किया था कि सुबह होते ही इनके अंतिम व्यक्ति तक को विनष्ट करके इनका उन्मूलन कर दिया जाएगा। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर
وَجَآءَ أَهْلُ ٱلْمَدِينَةِ يَسْتَبْشِرُونَ ﴿٦٧﴾
और सदूम वाले, दुष्कर्म करने की लालच में, लूत अलैहिस्सलाम के अतिथियों पर बहुत खुश होकर आए।
قَالَ إِنَّ هَـٰٓؤُلَآءِ ضَيْفِى فَلَا تَفْضَحُونِ ﴿٦٨﴾
लूत अलैहिस्सलामने उनसे कहा: ये लोग मेरे अतिथि हैं। अतः मुझे उस चीज़ के द्वारा अपमानित न करो जो तुमउनके साथ करना चाहते हो।
وَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ وَلَا تُخْزُونِ ﴿٦٩﴾
इस अश्लीलता को छोड़कर अल्लाह से डरो और अपने इस जघन्य कार्य से मुझे अपमानित न करो।
قَالُوٓا۟ أَوَلَمْ نَنْهَكَ عَنِ ٱلْعَـٰلَمِينَ ﴿٧٠﴾
उनकी जाति ने उनसे कहा: क्या हमने आपको किसी भी व्यक्ति को अतिथि बनाने से मना नहीं किया?
قَالَ هَـٰٓؤُلَآءِ بَنَاتِىٓ إِن كُنتُمْ فَـٰعِلِينَ ﴿٧١﴾
लूत अलैहिस्सलामने अपने अतिथियों के सामने अपने लिए उज़्र प्रस्तुत करते हुए अपनी जाति के लोगों से कहा: ये तुम्हारी कु लस्त्रियों में से मेरी बेटियाँ हैं। अतः यदि तुम अपनी कामवासना की पूर्ति चाहते हो, तो इनसे शादी कर लो। لعمرك إن هم لفى سكرتهم يعمهون
لَعَمْرُكَ إِنَّهُمْ لَفِى سَكْرَتِهِمْ يَعْمَهُونَ ﴿٧٢﴾
(ऐ रसूल!) आपके जीवन की क़सम, निःसंदेह लूत अलैहिस्सलाम की जाति के लोग अपनी कामवासना की प्रबलता में भटक रहे थे।
فَأَخَذَتْهُمُ ٱلصَّيْحَةُ مُشْرِقِينَ ﴿٧٣﴾
अंततः उनके सूरज निकलने के समय में प्रवेश करते ही उन्हें एक तेज़ विनाशकारी आवाज़ ने पकड़ लिया। فجعلنا عليها سافلها وأمطرنا عليهم حجارةمن سجيل
فَجَعَلْنَا عَـٰلِيَهَا سَافِلَهَا وَأَمْطَرْنَا عَلَيْهِمْ حِجَارَةًۭ مِّن سِجِّيلٍ ﴿٧٤﴾
तो हमने उनकी बस्तियों को ऊपर-नीचे पलट दिया और उनपर कं कड़ के पत्थर बरसाए। إن فىذلك لٔايت للمتوسمين
إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَـَٔايَـٰتٍۢ لِّلْمُتَوَسِّمِينَ ﴿٧٥﴾
लूत अलैहिस्सलाम की जाति पर उतरने वाले विनाश की घटना में, सोच-विचार करने वालों के लिए बहुत-सी निशानियाँ हैं। وإن ها لبسبيل مقيم
وَإِنَّهَا لَبِسَبِيلٍۢ مُّقِيمٍ ﴿٧٦﴾
लूत अलैहिस्सलाम की जाति की बस्तियाँ एक स्थायी रास्ते (सार्वजनिक मार्ग) पर स्थित हैं, वहाँ से गुज़रने वाले यात्री उन्हें देख सकते हैं। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर إن فى ذلك لٔايةللمؤمنين
إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَـَٔايَةًۭ لِّلْمُؤْمِنِينَ ﴿٧٧﴾
यह जो कु छ घटित हुआ, इसमें ईमान वालों के लिए एक निशानी है, जिससे वे सीख ले सकते हैं।
وَإِن كَانَ أَصْحَـٰبُ ٱلْأَيْكَةِ لَظَـٰلِمِينَ ﴿٧٨﴾
घने पेड़ों वाली बस्ती वाले, शुऐब अलैहिस्सलाम की जाति के लोग भी अत्याचारी थे। क्योंकि उन्होंने अल्लाह का इनकार किया था और उसके रसूल शुऐब अलैहिस्सलाम को झुठलाया था।
فَٱنتَقَمْنَا مِنْهُمْ وَإِنَّهُمَا لَبِإِمَامٍۢ مُّبِينٍۢ ﴿٧٩﴾
तो हमने उनसे प्रतिशोध (बदला) लिया। चुनाँचे उन्हें यातना ने पकड़ लिया। और लूत अलैहिस्सलामकी जाति की बस्तियाँ और शुऐब अलैहिस्सलामके मानने वालों के घर ऐसे मार्ग पर स्थित हैं जो वहाँ से गुज़रने वाले के लिए बिल्कु लस्पष्ट है।
وَلَقَدْ كَذَّبَ أَصْحَـٰبُ ٱلْحِجْرِ ٱلْمُرْسَلِينَ ﴿٨٠﴾
और समूद की जाति अर्थात् ह़िज्र (हिजाज़ और शाम के बीच एक स्थान) के रहने वालों ने अपने नबी सालेह अलैहिस्सलाम को झुठलाकर सभी रसूलों को झुठलाया। وءاتينهم ءايتنا فكانواعنها معرضين
وَءَاتَيْنَـٰهُمْ ءَايَـٰتِنَا فَكَانُوا۟ عَنْهَا مُعْرِضِينَ ﴿٨١﴾
और हमने उन्हें उनके सच्चे नबी होने के प्रमाण और निशानियाँ दी थीं, जिनमें से एक निशानी ऊँटनी थी। परंतु उन्होंने उन प्रमाणों से सीख नहीं लिया और उनकी कोई परवाह नहीं की।
وَكَانُوا۟ يَنْحِتُونَ مِنَ ٱلْجِبَالِ بُيُوتًا ءَامِنِينَ ﴿٨٢﴾
वे पहाड़ों को काटते थे ताकि अपने लिए घर बनाकर उनमें भयमुक्त होकर निवासकरें।
فَأَخَذَتْهُمُ ٱلصَّيْحَةُ مُصْبِحِينَ ﴿٨٣﴾
अंततः उनके सुबह के समय में प्रवेश करते ही, उन्हें यातना के चीत्कार ने पकड़ लिया।
فَمَآ أَغْنَىٰ عَنْهُم مَّا كَانُوا۟ يَكْسِبُونَ ﴿٨٤﴾
परंतु उनके कमाए हुए धन और उनके घर उनसे अल्लाह की यातना को टालन सके ।
وَمَا خَلَقْنَا ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضَ وَمَا بَيْنَهُمَآ إِلَّا بِٱلْحَقِّ ۗ وَإِنَّ ٱلسَّاعَةَ لَـَٔاتِيَةٌۭ ۖ فَٱصْفَحِ ٱلصَّفْحَ ٱلْجَمِيلَ ﴿٨٥﴾
हमने आसमानों और ज़मीन और उनके बीच की समस्त चीज़ों को बिना हिकमत के व्यर्थ (निरुद्देश्य) पैदा नहीं किया है। हमने यह सब सत्य के साथ पैदा किया है और निःसंदेह क़ियामत अवश्य आने वाली है। अतः (ऐ रसूल!) आप झुठलाने वालों को नज़रअंदाज़ कर दें और उन्हें भले तौर पर क्षमा कर दें।
إِنَّ رَبَّكَ هُوَ ٱلْخَلَّـٰقُ ٱلْعَلِيمُ ﴿٨٦﴾
निःसंदेह (ऐ रसूल!) आपका पालनहार ही हर चीज़ को पैदा करने वाला और उसका ज्ञान रखने वाला है। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर
وَلَقَدْ ءَاتَيْنَـٰكَ سَبْعًۭا مِّنَ ٱلْمَثَانِى وَٱلْقُرْءَانَ ٱلْعَظِيمَ ﴿٨٧﴾
और हमने आपको सूरतुल-फ़ातिहा प्रदान की, जो सात आयतें हैं और वही महान क़ु रआन है।
لَا تَمُدَّنَّ عَيْنَيْكَ إِلَىٰ مَا مَتَّعْنَا بِهِۦٓ أَزْوَٰجًۭا مِّنْهُمْ وَلَا تَحْزَنْ عَلَيْهِمْ وَٱخْفِضْ جَنَاحَكَ لِلْمُؤْمِنِينَ ﴿٨٨﴾
हमने काफ़िरों के विभिन्न प्रकार के लोगों को, नष्ट हो जाने वाली जीवन की जो सामग्रियाँ दे रखी हैं, आप उनकी ओर न देखें और उनके झुठलाने पर दुखी न हों और मोमिनों के प्रति विनम्रता अपनाएँ।
وَقُلْ إِنِّىٓ أَنَا ٱلنَّذِيرُ ٱلْمُبِينُ ﴿٨٩﴾
(ऐ रसूल!) आप कह दें कि मैं यातना से खुले तौर पर सावधान करने वाला हूँ।
كَمَآ أَنزَلْنَا عَلَى ٱلْمُقْتَسِمِينَ ﴿٩٠﴾
मैं तुम्हें इस बात से डराता हूँ कि तुमपर उसी तरह की यातना आए, जिस तरह की यातना अल्लाह ने उन लोगो पर अवतिरत की थी, जिन्होंने अल्लाह की किताबों को विभिन्न भागों में बाँट दिया था। चुनाँचे वे कु छ भागों पर ईमान रखते थे और कु छ भागों का इनकार करते थे।
ٱلَّذِينَ جَعَلُوا۟ ٱلْقُرْءَانَ عِضِينَ ﴿٩١﴾
जिन्होंने क़ु रआन को खंड-खंड कर डाला। चुनाँचे उन्होंने कहा: यह जादू है, या कहानत (ज्योतिष) है, या शे'र (काव्य) है। فوربك لنسٔلن هم أجمعين
فَوَرَبِّكَ لَنَسْـَٔلَنَّهُمْ أَجْمَعِينَ ﴿٩٢﴾
अतः (ऐ रसूल!) आपके पालनहार की क़सम! हमक़ियामत के दिन उन सभी लोगों से अवश्य पूछेंगे, जिन्होंने क़ु रआन को खंड-खंड बना लिया। عما كانوا يعملون
عَمَّا كَانُوا۟ يَعْمَلُونَ ﴿٩٣﴾
हमउनसे कु फ़्र और गुनाहों के बारे में अवश्य पूछेंगे, जो वे दुनिया में किया करते थे।
فَٱصْدَعْ بِمَا تُؤْمَرُ وَأَعْرِضْ عَنِ ٱلْمُشْرِكِينَ ﴿٩٤﴾
अतः (ऐ रसूल!) अल्लाह ने आपको जिसकी ओर लोगों को बुलाने का आदेश दिया है, उसकी घोषणा कर दें और मुश्रिक लोग जो कु छ कहते और करते हैं, उस पर ध्यान न दें।
إِنَّا كَفَيْنَـٰكَ ٱلْمُسْتَهْزِءِينَ ﴿٩٥﴾
आप उनसे न डरें। क्योंकि हमक़ु रैश के मज़ाक़ उड़ाने वाले कु फ़्र के प्रमुखों की चालों को नाकामबनाने के लिए आपकी ओर से काफ़ी हैं।
ٱلَّذِينَ يَجْعَلُونَ مَعَ ٱللَّهِ إِلَـٰهًا ءَاخَرَ ۚ فَسَوْفَ يَعْلَمُونَ ﴿٩٦﴾
जो अल्लाह के साथ अन्य पूज्य बनाते हैं। अतः वे अपने शिर्क का बुरा परिणामजान लेंगे। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर ولقد نعلمأنك يضيق صدرك بما يقولون
وَلَقَدْ نَعْلَمُ أَنَّكَ يَضِيقُ صَدْرُكَ بِمَا يَقُولُونَ ﴿٩٧﴾
और निश्चय हम जानते हैं कि (ऐ रसूल!) उनके आपको झुठलाने और आपका मज़ाक़ उड़ाने के कारण आपका सीना तंग होता है।
فَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ وَكُن مِّنَ ٱلسَّـٰجِدِينَ ﴿٩٨﴾
अतः आप अल्लाह को उन चीज़ों से पाक करके जो उसके योग्य नहीं हैं, तथा उसके पूर्णता के गुणों के साथ उसकी प्रशंसा करते हुए अल्लाह का आश्रय लें, तथा अल्लाह की उपासना करने वालों, उसके लिए नमाज़ पढ़ने वालों में से हो जाएँ। क्योंकि इसमें आपके दिल की तंगी का इलाज है।
وَٱعْبُدْ رَبَّكَ حَتَّىٰ يَأْتِيَكَ ٱلْيَقِينُ ﴿٩٩﴾
तथा जब तक आप जीवित हैं, अपने रब की इबादत करना जारी रखें और उसपर क़ायम रहें, यहाँ तक कि इसी अवस्था में आपके पास मौत आ जाए। स्रोत:अल-मुख़्तसर फ़ी तफ़सीरिल क़ु रआनिल करीम