وَيْلٌۭ لِّلْمُطَفِّفِينَ ﴿١﴾
नाप-तौलमें कमी करने वालों के लिए विनाश और हानि है।
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मक्की · 36 आयतें
وَيْلٌۭ لِّلْمُطَفِّفِينَ ﴿١﴾
नाप-तौलमें कमी करने वालों के लिए विनाश और हानि है।
ٱلَّذِينَ إِذَا ٱكْتَالُوا۟ عَلَى ٱلنَّاسِ يَسْتَوْفُونَ ﴿٢﴾
वे ऐसे लोग हैं जो दूसरों से नापकर लेते समय अपना हक़ बिना किसी कमी के पूरा लेते हैं। وإذا كالوهم أو وزنوهم يخسرون
وَإِذَا كَالُوهُمْ أَو وَّزَنُوهُمْ يُخْسِرُونَ ﴿٣﴾
और जब वे लोगों को नापकर या तौलकर देते हैं, तो नाप और तौल में कमी करते हैं। जब नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम मदीना की ओर हिजरत करके आए, तो वहाँ के लोगों की यही स्थिति थी।
أَلَا يَظُنُّ أُو۟لَـٰٓئِكَ أَنَّهُم مَّبْعُوثُونَ ﴿٤﴾
क्या इसबुराई को करने वाले ये लोग इस बात पर विश्वास (यक़ीन) नहीं रखते कि वे (मरने के बाद दोबारा) अल्लाह की ओर उठाए जाने वाले हैं?! ليوم عظيم
لِيَوْمٍ عَظِيمٍۢ ﴿٥﴾
हिसाब और बदले के लिए, एक ऐसे दिन में, जो उसमें पाए जाने वाले क्लेशों और भयावहताओं के कारण बहुत बड़ा और सख़्त होगा।
يَوْمَ يَقُومُ ٱلنَّاسُ لِرَبِّ ٱلْعَـٰلَمِينَ ﴿٦﴾
जिस दिन लोग सभी प्राणियों के पालनहार के सामने हिसाब के लिए खड़े होंगे।
كَلَّآ إِنَّ كِتَـٰبَ ٱلْفُجَّارِ لَفِى سِجِّينٍۢ ﴿٧﴾
मामला ऐसा नहीं है, जैसा तुमने समझ रखा है कि मौत के बाद दोबारा जीवित नहीं होना है। निश्चय काफ़िरों और मुनाफ़िकों जैसे दुराचारियों का कर्म-पत्र निचली धरती के एक तंग स्थान में है।
وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا سِجِّينٌۭ ﴿٨﴾
और (ऐ रसूल) आपको क्या मालूम कि 'सिज्जीन' क्या है?! كتب م رقوم
كِتَـٰبٌۭ مَّرْقُومٌۭ ﴿٩﴾
उनका कर्म-पत्र लिखा हुआ है, जो मिट नहीं सकता, और न उसमें कु छ बढ़ाया जा सकता है और न ही घटाया जा सकता है। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर ويل يومئذ للمكذبين
وَيْلٌۭ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْمُكَذِّبِينَ ﴿١٠﴾
उसदिन झुठलाने वालों के लिए विनाश और नुकसान है।
ٱلَّذِينَ يُكَذِّبُونَ بِيَوْمِ ٱلدِّينِ ﴿١١﴾
जो बदले के दिन को झुठलाते हैं, जिसदिन अल्लाह अपने बंदों को दुनिया में उनके किए हुए कामों का बदला देगा।
وَمَا يُكَذِّبُ بِهِۦٓ إِلَّا كُلُّ مُعْتَدٍ أَثِيمٍ ﴿١٢﴾
और उस दिन को के वल वही झुठलाता है, जो अल्लाह की सीमाओं का उल्लंघन करने वाला, बहुत बड़ा पापी है।
إِذَا تُتْلَىٰ عَلَيْهِ ءَايَـٰتُنَا قَالَ أَسَـٰطِيرُ ٱلْأَوَّلِينَ ﴿١٣﴾
जब उसके सामने हमारे रसूल पर अवतिरत होने वाली हमारी आयतों को पढ़ा जाता है, तो वह कहता है: यह तो पहले समुदायों की कहानियाँ हैं, अल्लाह की ओर से नहीं हैं।
كَلَّا ۖ بَلْ ۜ رَانَ عَلَىٰ قُلُوبِهِم مَّا كَانُوا۟ يَكْسِبُونَ ﴿١٤﴾
मामला वैसा नहीं है, जैसा इन झुठलाने वालों ने समझ रखा है। बल्कि वे जो कु छ पाप किया करते थे, वह उनकी बुद्धियों पर छा गया है और उन्हें ढाँप दिया है। इसलिए वे सत्य को अपने दिलों से नहीं देख सकते।
كَلَّآ إِنَّهُمْ عَن رَّبِّهِمْ يَوْمَئِذٍۢ لَّمَحْجُوبُونَ ﴿١٥﴾
वे सचमुच क़ियामत के दिन अपने पालनहार को देखने से वंचित कर दिए जाएँँगे।
ثُمَّ إِنَّهُمْ لَصَالُوا۟ ٱلْجَحِيمِ ﴿١٦﴾
फिर वे अवश्य जहन्नम में दाख़िल होकर उसकी गर्मी को झेलेंगे।
ثُمَّ يُقَالُ هَـٰذَا ٱلَّذِى كُنتُم بِهِۦ تُكَذِّبُونَ ﴿١٧﴾
फिर उनसे क़ियामत के दिन उन्हें फटकार लगाते हुए कहा जाएगा: यह यातना जो तुम्हें झेलनी पड़ी है, यह वही है, जिसे तुम दुनिया में झुठलाया करते थे, जब तुम्हारे रसूल तुम्हें इसके बारे में बताते थे।
كَلَّآ إِنَّ كِتَـٰبَ ٱلْأَبْرَارِ لَفِى عِلِّيِّينَ ﴿١٨﴾
मामला वैसा नहीं है, जैसा तुमने समझ रखा है कि न हिसाब होगा, न बदला दिया जाएगा। निःसंदेह नेक लोगों का कर्म-पत्र निश्चय 'इल्लिय्यीन' में है।
وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا عِلِّيُّونَ ﴿١٩﴾
और (ऐ रसूल) आपको क्या मालूम कि 'इल्लिय्यीन' क्या है?! بلغ क़ुरआन · तफ़सीर كتب م رقوم
كِتَـٰبٌۭ مَّرْقُومٌۭ ﴿٢٠﴾
उनका कर्म-पत्र लिखा हुआ है, जो मिट नहीं सकता, और न उसमें कु छ बढ़ाया जा सकता है और न ही घटाया जा सकता है।
يَشْهَدُهُ ٱلْمُقَرَّبُونَ ﴿٢١﴾
इस कर्म-पत्र के पासहर आसमान के निकटवर्ती फ़रिश्ते उपस्थित रहते हैं।
إِنَّ ٱلْأَبْرَارَ لَفِى نَعِيمٍ ﴿٢٢﴾
निःसंदेह बहुत अधिक नेकी करने वाले लोग क़ियामत के दिन स्थायी आनंद में होंगे।
عَلَى ٱلْأَرَآئِكِ يَنظُرُونَ ﴿٢٣﴾
वे अलंकृ त बिस्तरों पर बैठे अपने पालनहार को तथा हर उस चीज़ को देख रहे होंगे, जो उनके दिलों को प्रसन्न और हर्षित कर देगी।
تَعْرِفُ فِى وُجُوهِهِمْ نَضْرَةَ ٱلنَّعِيمِ ﴿٢٤﴾
आप जब उन्हें देखेंगे, तो आपको उनके चेहरों पर सुंदरता और मनोहरता के रूप में उनके नेमतों से आनंदित होने का निशान दिखाई देगा। يسقون من رحيق م ختوم
يُسْقَوْنَ مِن رَّحِيقٍۢ مَّخْتُومٍ ﴿٢٥﴾
उनके सेवक उन्हें ऐसी शुद्ध शराब पिलाएँगे, जिसके बर्तन पर मुहर लगी होगी।
خِتَـٰمُهُۥ مِسْكٌۭ ۚ وَفِى ذَٰلِكَ فَلْيَتَنَافَسِ ٱلْمُتَنَـٰفِسُونَ ﴿٢٦﴾
उससे उसके अंत तक कस्तूरी की खुशबू आ रही होगी। अतः प्रतिस्पर्धा करने वालों को, अल्लाह को प्रसन्न करने वाले कार्य करके और उसे क्रोधित करने वाले कार्य छोड़कर, इस उदार बदले (को प्राप्त करने) में प्रतिस्पर्धा करना चाहिए। ومزاجه من تسنيم
وَمِزَاجُهُۥ مِن تَسْنِيمٍ ﴿٢٧﴾
और इस मुहरबंद शराब में तसनीम नामी चश्मे का पानी मिलाया जाएगा।
عَيْنًۭا يَشْرَبُ بِهَا ٱلْمُقَرَّبُونَ ﴿٢٨﴾
यह जन्नत के शीर्ष पर एक चश्मा है, जिससे अल्लाह के निकटवर्ती बंदे शुद्ध पानी पिएँगे। जबकि अन्य सभी ईमान वाले उसका पानी दूसरे पेय के साथ मिश्रित करके पिएँ गे।
إِنَّ ٱلَّذِينَ أَجْرَمُوا۟ كَانُوا۟ مِنَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ يَضْحَكُونَ ﴿٢٩﴾
निश्चय जिन लोगों ने कु फ़्र की राह पर क़ायमरहकर जुर्म किया, वे ईमान वालों पर उनका मज़ाक़ उड़ाते हुए हँसते थे। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर وإذا مر وابهم يتغامزون
وَإِذَا مَرُّوا۟ بِهِمْ يَتَغَامَزُونَ ﴿٣٠﴾
और जब वे ईमान वालों के पाससे गुज़रते, तो एक-दूसरे को मज़ाक़ और उपहासके तौर पर आँखों से इशारे करते थे।
وَإِذَا ٱنقَلَبُوٓا۟ إِلَىٰٓ أَهْلِهِمُ ٱنقَلَبُوا۟ فَكِهِينَ ﴿٣١﴾
और जब वे अपने परिवारों में लौटते, तो वे अपने कु फ़्र और मोमिनों के परिहासका आनंद लेते हुए लौटते थे।
وَإِذَا رَأَوْهُمْ قَالُوٓا۟ إِنَّ هَـٰٓؤُلَآءِ لَضَآلُّونَ ﴿٣٢﴾
और जब वे मुसलमानों को देखते, तो कहते थे: निश्चय ये लोग सत्य के मार्ग से भटके हुए हैं, क्योंकि उन्होंने अपने माता-पिता के धर्म को छोड़ दिया है।
وَمَآ أُرْسِلُوا۟ عَلَيْهِمْ حَـٰفِظِينَ ﴿٣٣﴾
जबकि अल्लाह ने उन्हें इन (ईमान वालों) के कामों को संरक्षित करने की ज़िम्मेवारी नहीं सौंपी थी कि वे इसतरह की बात कहते।
فَٱلْيَوْمَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ مِنَ ٱلْكُفَّارِ يَضْحَكُونَ ﴿٣٤﴾
तो क़ियामत के दिन, अल्लाह पर ईमान रखने वाले काफ़िरों पर हँसेंगे, जैसे कि काफिर दुनिया में उन पर हँसा करते थे।
عَلَى ٱلْأَرَآئِكِ يَنظُرُونَ ﴿٣٥﴾
वे सजाए गए बिस्तरों पर बैठे उसस्थायी आनंद को देख रहे होंगे, जो अल्लाह ने उनके लिए तैयार किया है।
هَلْ ثُوِّبَ ٱلْكُفَّارُ مَا كَانُوا۟ يَفْعَلُونَ ﴿٣٦﴾
निश्चय काफ़िरों को उनके उन कर्मों का, जो उन्होंने दुनिया में किया था, अपमानजनक यातना के रूप में बदला दिया गया। स्रोत:अल-मुख़्तसर फ़ी तफ़सीरिल क़ु रआनिल करीम
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