قٓ ۚ وَٱلْقُرْءَانِ ٱلْمَجِيدِ ﴿١﴾
{क़ाफ़} सूरतुल-बक़रा के आरंभ में इस प्रकार के अक्षरों के बारे में बात गुज़र चुकी है।। अल्लाह ने महान क़ुरआन की क़सम खाई है क्योंकि उसके अर्थ बहुत व्यापक तथा उसकी भलाइयाँ और बरकतें बहुत अधिक हैं; कि तुमक़ियामत के दिन हिसाब और बदले के लिए ज़रूर उठाए जाओगे।
بَلْ عَجِبُوٓا۟ أَن جَآءَهُم مُّنذِرٌۭ مِّنْهُمْ فَقَالَ ٱلْكَـٰفِرُونَ هَـٰذَا شَىْءٌ عَجِيبٌ ﴿٢﴾
उनके इनकार करने का कारण यह नहीं था कि वे आपसे झूठ बोलने की उम्मीद करते थे, क्योंकि वे आपकी सच्चाई जानते थे। बल्कि, उन्हें आश्चर्य हुआ कि उनके पास, फ़रिश्तों में से न होकर, उन्हीं में से एक डराने वाला रसूलआया। उन्होंने आश्चर्य चकित होकर कहा: एक मानव रसूलका हमारे पासआना बड़ी विचित्र बात है!
أَءِذَا مِتْنَا وَكُنَّا تُرَابًۭا ۖ ذَٰلِكَ رَجْعٌۢ بَعِيدٌۭ ﴿٣﴾
क्या जब हम मर गए और मिट्टी हो गए, तो दोबारा जीवित करके उठाए जाएँगे?! यह दोबारा जीवित होना और हमारे शरीर में उनके सड़-गल जाने के बाद जीवन की वापसी एक असंभावित चीज़ है, यह नहीं हो सकता।
قَدْ عَلِمْنَا مَا تَنقُصُ ٱلْأَرْضُ مِنْهُمْ ۖ وَعِندَنَا كِتَـٰبٌ حَفِيظٌۢ ﴿٤﴾
निश्चय हमें मालूम है कि उनकी मृत्यु के बाद धरती उनके शरीर का क्या खाती और नष्ट करती है, उसमें से कु छ भी हमसे छिपा नहीं है। तथा हमारे पास एक पुस्तक है, जो उन सभी चीज़ों को सुरक्षित रखने वाली है, जो अल्लाह उनके जीवन के दौरान और उनकी मृत्यु के बाद उनके लिए निर्धारित करता है।
بَلْ كَذَّبُوا۟ بِٱلْحَقِّ لَمَّا جَآءَهُمْ فَهُمْ فِىٓ أَمْرٍۢ مَّرِيجٍ ﴿٥﴾
बल्कि इन मुश्रिकों ने क़ु रआन को झुठला दिया, जब रसूल उसे उनके पास लेकर आए। अतः वे एक उलझी हुई स्थिति में हैं, उसके बारे में किसी एक चीज़ पर स्थिर नहीं हैं।
أَفَلَمْ يَنظُرُوٓا۟ إِلَى ٱلسَّمَآءِ فَوْقَهُمْ كَيْفَ بَنَيْنَـٰهَا وَزَيَّنَّـٰهَا وَمَا لَهَا مِن فُرُوجٍۢ ﴿٦﴾
क्या इन पुनर्जीवन का इनकार करने वालों ने अपने ऊपर फै ले आकाश पर विचार नहीं किया कि हमने कै से उसकी रचना की और उसे बनाया तथा उसे उन सितारों से सजाया, जो हमने उसमें रखे हैं, तथा उसमें कोई दरारें नहीं हैं, जो उसे दोषपूर्ण बनाती हों?! अतः जिसने इस आकाश को बनाया, वह मरे हुए लोगों को फिर से जीवित करने में असमर्थ नहीं है।
وَٱلْأَرْضَ مَدَدْنَـٰهَا وَأَلْقَيْنَا فِيهَا رَوَٰسِىَ وَأَنۢبَتْنَا فِيهَا مِن كُلِّ زَوْجٍۭ بَهِيجٍۢ ﴿٧﴾
और हमने धरती को फै लाकर उसे रहने योग्य बनाया और उसमें मज़बूत पहाड़ गाड़ दिए, ताकि वह हिले-डुले नहीं, और उसमें हर प्रकार के अच्छी दृष्टि वाले पौधे और वृक्ष उगाए। تبصرةوذكر لكل عبد منيب
تَبْصِرَةًۭ وَذِكْرَىٰ لِكُلِّ عَبْدٍۢ مُّنِيبٍۢ ﴿٨﴾
हमने यह सब हर उस बंदे को दिखाने और याद दिलाने के उद्देश्य से पैदा किया, जो आज्ञाकारिता के साथ अपने पालनहार की ओर लौटने वाला है। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर
وَنَزَّلْنَا مِنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءًۭ مُّبَـٰرَكًۭا فَأَنۢبَتْنَا بِهِۦ جَنَّـٰتٍۢ وَحَبَّ ٱلْحَصِيدِ ﴿٩﴾
और हमने आकाश से बहुत लाभ और भलाई वाला पानी उतारा, फिर उस पानी से हमने बाग़ उगाए, तथा जौ आदि के दाने उगाए, जिन्हें तुम काटते हो।
وَٱلنَّخْلَ بَاسِقَـٰتٍۢ لَّهَا طَلْعٌۭ نَّضِيدٌۭ ﴿١٠﴾
और उस पानी से लंबे-लंबे ऊँ चे खजूर के पेड़ उगाए, जिनके गुच्छे गुथे हुए और एक दूसरे के ऊपर हैं।
رِّزْقًۭا لِّلْعِبَادِ ۖ وَأَحْيَيْنَا بِهِۦ بَلْدَةًۭ مَّيْتًۭا ۚ كَذَٰلِكَ ٱلْخُرُوجُ ﴿١١﴾
हमने इसमें से जो कु छ उगाया, उसे बंदों की रोज़ी के लिए उगाया, जिससे वे खाते हैं। और इसके साथ हमने एक ऐसे शहर को पुनर्जीवित कर दिया जिसमें कोई वनस्पति नहीं है। जिस तरह हमने इस बारिश से एक वनस्पति रहित शहर को पुनर्जीवित किया, उसी तरह हम मरे हुए लोगों को पुनर्जीवित करेंगे। चुनाँचे वे जीवित होकर बाहर निकलेंगे।
كَذَّبَتْ قَبْلَهُمْ قَوْمُ نُوحٍۢ وَأَصْحَـٰبُ ٱلرَّسِّ وَثَمُودُ ﴿١٢﴾
(ऐ रसूल!) आपको झुठलाने वाले इन लोगों से पहले भी कई समुदाय अपने नबियों को झुठला चुके हैं। चुनाँचे नूह की जाति, कु एँ वालों और समूद ने झुठलाया। وعاد وفرعون وإخون لوط
وَعَادٌۭ وَفِرْعَوْنُ وَإِخْوَٰنُ لُوطٍۢ ﴿١٣﴾
तथा आद, फ़िरऔन और लूत की जाति ने झुठलाया। ل
وَأَصْحَـٰبُ ٱلْأَيْكَةِ وَقَوْمُ تُبَّعٍۢ ۚ كُلٌّۭ كَذَّبَ ٱلرُّسُلَ فَحَقَّ وَعِيدِ ﴿١٤﴾
शुऐब अलैहिस्सलाम की जाति 'ऐका' वालों ने और यमन के राजा तुब्ब' की जाति के लोगों ने (अपने रसूल को) झुठलाया। इन सभी जातियों के लोगों ने अल्लाह के उन रसूलों को झुठलाया जिन्हें उसने भेजा था। सो उनपर अल्लाह के अज़ाब का वादा साबित (प्रमाणित) हो गया।
أَفَعَيِينَا بِٱلْخَلْقِ ٱلْأَوَّلِ ۚ بَلْ هُمْ فِى لَبْسٍۢ مِّنْ خَلْقٍۢ جَدِيدٍۢ ﴿١٥﴾
क्या हमतुम्हें पहली बार पैदा करने में असमर्थ रहे थे कि तुम्हें दोबारा जीवित करने में असमर्थ रहेंगे?! बल्कि वे अपनी पहली रचना के बाद दूसरी रचना के बारे में संदेह में पड़े हुए हैं।
وَلَقَدْ خَلَقْنَا ٱلْإِنسَـٰنَ وَنَعْلَمُ مَا تُوَسْوِسُ بِهِۦ نَفْسُهُۥ ۖ وَنَحْنُ أَقْرَبُ إِلَيْهِ مِنْ حَبْلِ ٱلْوَرِيدِ ﴿١٦﴾
निःसंदेह हमने इनसान को पैदा किया और हम उन विचारों और ख़यालों से अवगत हैं, जो उसके दिल में आते हैं। और हम उससे उसके गले की उस नस से भी अधिक क़रीब हैं जो दिल से जुड़ी होती है।
إِذْ يَتَلَقَّى ٱلْمُتَلَقِّيَانِ عَنِ ٱلْيَمِينِ وَعَنِ ٱلشِّمَالِ قَعِيدٌۭ ﴿١٧﴾
जब दो लेने वाले फ़रिश्ते उसके अमल को लेते हैं। उनमें से एक उसके दाहिनी ओर बैठा है, और दूसरा उसके बाईं ओर बैठा है। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर ما يلفظ من قول إلا لديه رقيب عتيد
مَّا يَلْفِظُ مِن قَوْلٍ إِلَّا لَدَيْهِ رَقِيبٌ عَتِيدٌۭ ﴿١٨﴾
वह कोई बात नहीं बोलता, परंतु उसके पास एक निरीक्षक फ़रिश्ता उसकी बात लिखने के लिए उपस्थित होता है।
وَجَآءَتْ سَكْرَةُ ٱلْمَوْتِ بِٱلْحَقِّ ۖ ذَٰلِكَ مَا كُنتَ مِنْهُ تَحِيدُ ﴿١٩﴾
और मौत की सख़्ती उस सच्चाई के साथ आ गई, जिससे बचने का कोई उपाय नहीं है। यही है वह जिससे (ऐ बेख़बर इनसान!) तू कतराता और भागता था।
وَنُفِخَ فِى ٱلصُّورِ ۚ ذَٰلِكَ يَوْمُ ٱلْوَعِيدِ ﴿٢٠﴾
और सूर (नरसिंघा) में फूँ क मारने पर नियुक्त फ़रिश्ते ने दूसरी बार फूँ क मार दी। यही क़ियामत का दिन, काफ़िरों और पापियों के लिए यातना की धमकी का दिन है।
وَجَآءَتْ كُلُّ نَفْسٍۢ مَّعَهَا سَآئِقٌۭ وَشَهِيدٌۭ ﴿٢١﴾
और हर व्यक्ति इसहालमें आएगा कि उसके साथ एक फ़रिश्ता उसे हाँकने के लिए और एक फ़रिश्ता उसके विरुद्ध उसके कामों की गवाही देने के लिए होगा।
لَّقَدْ كُنتَ فِى غَفْلَةٍۢ مِّنْ هَـٰذَا فَكَشَفْنَا عَنكَ غِطَآءَكَ فَبَصَرُكَ ٱلْيَوْمَ حَدِيدٌۭ ﴿٢٢﴾
और इस हाँककर लाए गए व्यक्ति से कहा जाएगा: निश्चय तुम दुनिया में इस दिन से बहुत ग़ाफ़िल थे; क्योंकि तुम अपनी इच्छाओं और सुखों से धोखा खा गए थे। अब तुम जिस यातना और पीड़ा को देख रहे हो, उसके द्वारा हमने तुम्हारी गफ़लत का परदा हटा दिया। सो आज तुम्हारी निगाह बड़ी तेज़ है, जिससे तुम उस चीज़ का बोध कर सकते हो, जिससे तुमगफ़लत में पड़े थे। وقال قرينه هذا ما لدى عتيد
وَقَالَ قَرِينُهُۥ هَـٰذَا مَا لَدَىَّ عَتِيدٌ ﴿٢٣﴾
और फ़रिश्तों में से उसपर नियुक्त उसका साथी कहेगा: यह मेरे पास उसके काम का विवरण है, जो बिना किसी कमी-बेशी के मौजूद है। ألقيا فى جهنمكل كف ار عنيد
أَلْقِيَا فِى جَهَنَّمَ كُلَّ كَفَّارٍ عَنِيدٍۢ ﴿٢٤﴾
और अल्लाह हाँककर लाने वाले और गवाही देने वाले, दोनों फ़रिश्तों से कहेगा: हर सत्य के इनकार करने वाले और उससे दुराग्रह रखने वाले को जहन्नममें डालदो। م ناع للخير معتد مريب
مَّنَّاعٍۢ لِّلْخَيْرِ مُعْتَدٍۢ مُّرِيبٍ ﴿٢٥﴾
जो अपने ऊपर अल्लाह के अनिवार्य किए हुए अधिकार को बहुत रोकने वाला, अल्लाह की सीमाओं को लाँघने वाला, उसने वादे या धमकी के बारे में जो सूचना दी है उसमें संदेह करने वाला है।
ٱلَّذِى جَعَلَ مَعَ ٱللَّهِ إِلَـٰهًا ءَاخَرَ فَأَلْقِيَاهُ فِى ٱلْعَذَابِ ٱلشَّدِيدِ ﴿٢٦﴾
जिसने अल्लाह के साथ दूसरा पूज्य बना लिया, जिसे वह उसके साथ इबादत में साझी ठहराता है। अतः तुमदोनों उसे कठोर यातना में डालदो।
۞ قَالَ قَرِينُهُۥ رَبَّنَا مَآ أَطْغَيْتُهُۥ وَلَـٰكِن كَانَ فِى ضَلَـٰلٍۭ بَعِيدٍۢ ﴿٢٧﴾
शैतानों में से उसका साथी उससे अलगाव प्रकट करते हुए कहेगा: ऐ हमारे पालनहार! मैंने उसे गुमराह नहीं किया था। परंतु वह खुद ही सत्य से परे दूर की गुमराही में पड़ा हुआ था। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर
قَالَ لَا تَخْتَصِمُوا۟ لَدَىَّ وَقَدْ قَدَّمْتُ إِلَيْكُم بِٱلْوَعِيدِ ﴿٢٨﴾
अल्लाह ने कहा: तुम मेरे पास मत झगड़ो। क्योंकि इससे कोई फायदा नहीं है। क्योंकि मैंने तुम्हें दुनिया ही में अपने रसूलों के माध्यम से मेरा इनकार करने वाले और मेरी अवज्ञा करने वाले को सख्त धमकी से सावधान कर दिया था।
مَا يُبَدَّلُ ٱلْقَوْلُ لَدَىَّ وَمَآ أَنَا۠ بِظَلَّـٰمٍۢ لِّلْعَبِيدِ ﴿٢٩﴾
मेरे यहाँ बात बदली नहीं जाती और मेरा वादा नहीं टूटता, तथा मैं बंदों पर उनके अच्छे कामों को कम करके या उनके बुरे कामों को बढ़ाकर अत्याचार नहीं करता।बल्कि मैं उन्हें उनके किए का बदला देता हूँ।
يَوْمَ نَقُولُ لِجَهَنَّمَ هَلِ ٱمْتَلَأْتِ وَتَقُولُ هَلْ مِن مَّزِيدٍۢ ﴿٣٠﴾
जिस दिन हम जहन्नम से कहेंगे: क्या तू उन काफ़िरों और पापियों से भर गया, जो तेरे अंदर डाले गए हैं? तो वह अपने रब को जवाब देगा: क्या कु छ और भी है? उसका यह कहना अपने रब के लिए क्रोध के तौर पर वृद्धि के अनुरोध के लिए होगा।
وَأُزْلِفَتِ ٱلْجَنَّةُ لِلْمُتَّقِينَ غَيْرَ بَعِيدٍ ﴿٣١﴾
और जन्नत उन लोगों के लिए निकट कर दी जाएगी, जो अपने पालनहार से, उसके आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से परहेज़ करके , डरने वाले हैं। चुनाँचे वे उसमें मौजूद नेमतों को देखेंगे, वह उनसे दूर नहीं होगी। هذا ما توعدون لكل أواب حفيظ
هَـٰذَا مَا تُوعَدُونَ لِكُلِّ أَوَّابٍ حَفِيظٍۢ ﴿٣٢﴾
और उनसे कहा जाएगा: यही है जिसका अल्लाह ने तुमसे वादा किया था, हर उस व्यक्ति के लिए जो अपने रब की ओर तौबा के द्वारा बहुत लौटने वाला है, उसके पालनहार ने उसे जिस चीज़ के लिए बाध्य किया है, उसका संरक्षण करने वाला है।
مَّنْ خَشِىَ ٱلرَّحْمَـٰنَ بِٱلْغَيْبِ وَجَآءَ بِقَلْبٍۢ مُّنِيبٍ ﴿٣٣﴾
जो परोक्ष में अल्लाह से डरा, जहाँ उसे अल्लाह के सिवा कोई नहीं देखता, और अल्लाह से ऐसे शुद्ध हृदय के साथ मिला, जो अल्लाह की ओर ध्यान करने वाला और उसकी ओर बहुत ज़्यादा लौटने वाला है।
ٱدْخُلُوهَا بِسَلَـٰمٍۢ ۖ ذَٰلِكَ يَوْمُ ٱلْخُلُودِ ﴿٣٤﴾
उनसे कहा जाएगा: जिस चीज़ को तुम नापसंद करते हो, उससे सुरक्षा और सलामती के साथ जन्नत में प्रवेश कर जाओ। यही हमेशा रहने का दिन है, जिसके बाद कोई विनाश नहीं है।
لَهُم مَّا يَشَآءُونَ فِيهَا وَلَدَيْنَا مَزِيدٌۭ ﴿٣٥﴾
उनके लिए उसके अंदर वह सारी अनंत नेमतें होंगी, जो वे चाहेंगे। और हमारे पास इससे भी अधिक ऐसी नेमतें हैं, जिन्हें न किसी आँख ने देखा है, न किसी कान ने सुना है और न किसी मानव हृदय ने कभी सोचा है, और इसी में - सबसे महान - सर्वशक्तिमान अल्लाह का दर्शन शामिल है।
وَكَمْ أَهْلَكْنَا قَبْلَهُم مِّن قَرْنٍ هُمْ أَشَدُّ مِنْهُم بَطْشًۭا فَنَقَّبُوا۟ فِى ٱلْبِلَـٰدِ هَلْ مِن مَّحِيصٍ ﴿٣٦﴾
हमने मक्का के इन झुठलाने वाले मुश्रिकों से पहले कितने ही समुदायों को विनष्ट कर दिया, जो इनसे अधिक शक्तिशाली थे। उन्होंने नगरों को छान मारा, शायद उन्हें यातना से भागने का कोई स्थान मिल जाए, पर उन्हें वह नहीं मिला। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर
إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَذِكْرَىٰ لِمَن كَانَ لَهُۥ قَلْبٌ أَوْ أَلْقَى ٱلسَّمْعَ وَهُوَ شَهِيدٌۭ ﴿٣٧﴾
पिछले समुदायों के विनाश का जो यह उल्लेख किया गया है, निश्चय ही इसमें उस व्यक्ति के लिए याद-दहानी और उपदेश है, जिसके पास समझने वाला दिल हो, या वह उसपर अपना कान लगाए इस हाल में कि उसका दिल उपस्थित हो, असावधान न हो।
وَلَقَدْ خَلَقْنَا ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضَ وَمَا بَيْنَهُمَا فِى سِتَّةِ أَيَّامٍۢ وَمَا مَسَّنَا مِن لُّغُوبٍۢ ﴿٣٨﴾
निश्चय हमने आकाशों और धरती को, तथा जो कु छ आकाशों और धरती के बीच है; छह दिनों में पैदा किया, जबकि हम उन्हें एक पल में बनाने की क्षमता रखते हैं, और हमें कोई थकान नहीं हुई, जैसा कि यहूदी कहते हैं।
فَٱصْبِرْ عَلَىٰ مَا يَقُولُونَ وَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ قَبْلَ طُلُوعِ ٱلشَّمْسِ وَقَبْلَ ٱلْغُرُوبِ ﴿٣٩﴾
अतः जो कुछ यहूदी और अन्य लोग कहते हैं, (ऐ रसूल!) आप उसपर धैर्य रखें और अपने रब के लिए, उसकी प्रशंसा करते हुए, सूर्योदय से पहले फ़ज्र की नमाज़ पढ़ें और उसके अस्त होने से पहले अस्र की नमाज़ पढ़ें।
وَمِنَ ٱلَّيْلِ فَسَبِّحْهُ وَأَدْبَـٰرَ ٱلسُّجُودِ ﴿٤٠﴾
और रात के कु छ भाग में फिर उसके लिए नमाज़ पढ़ें और नमाज़ों के बाद उसकी पवित्रता (तसबीह) का वर्णन करें।
وَٱسْتَمِعْ يَوْمَ يُنَادِ ٱلْمُنَادِ مِن مَّكَانٍۢ قَرِيبٍۢ ﴿٤١﴾
और (ऐ रसूल!) ध्यान से सुनें, जिस दिन सूर में दूसरी बार फूँ क मारने पर नियुक्त फ़रिश्ता निकट स्थान से आवाज़ देगा।
يَوْمَ يَسْمَعُونَ ٱلصَّيْحَةَ بِٱلْحَقِّ ۚ ذَٰلِكَ يَوْمُ ٱلْخُرُوجِ ﴿٤٢﴾
जिस दिन सभी लोग दोबारा जीवित होकर उठने की तेज़ आवाज़ को उस सत्य के साथ सुनेंगे जिसमें कोई संदेह नहीं। जिस दिन लोग यह आवाज़ सुनेंगे, वही मरे हुए लोगों के अपनी कब्रों से हिसाब और बदले के लिए निकलने का दिन है।
إِنَّا نَحْنُ نُحْىِۦ وَنُمِيتُ وَإِلَيْنَا ٱلْمَصِيرُ ﴿٤٣﴾
निश्चय हम ही जीवन देते हैं और हम ही मारते हैं। हमारे सिवा न कोई जीवन देने वाला है और न मारने वाला है। और बंदों को क़ियामत के दिन हिसाब और बदले के लिए के वल हमारी ही ओर लौटकर आना है।
يَوْمَ تَشَقَّقُ ٱلْأَرْضُ عَنْهُمْ سِرَاعًۭا ۚ ذَٰلِكَ حَشْرٌ عَلَيْنَا يَسِيرٌۭ ﴿٤٤﴾
जिस दिन धरती उनसे फटेगी और वे तेज़ी से दौड़ते हुए निकलेंगे। यह एकत्र करना हमारे लिए आसान है।
نَّحْنُ أَعْلَمُ بِمَا يَقُولُونَ ۖ وَمَآ أَنتَ عَلَيْهِم بِجَبَّارٍۢ ۖ فَذَكِّرْ بِٱلْقُرْءَانِ مَن يَخَافُ وَعِيدِ ﴿٤٥﴾
हमउसे अधिक जानने वाले हैं, जो कु छ ये झुठलाने वाले कहते हैं। और (ऐ रसूल!) आप उनपर कोई थोपे हुए नहीं हैं कि उन्हें ईमान लाने पर मजबूर करें। आप तो के वल उस चीज़ को पहुँचाने वाले हैं, जिसे पहुँचाने का अल्लाह ने आपको आदेश दिया है। अतः आप क़ुरआन के साथ उस व्यक्ति को उपदेश दें, जो काफ़िरों और अवज्ञाकारियों के लिए मेरी धमकी से डरता है; क्योंकि डरने वाला ही याद दिलाए जाने (उपदेश दिए जाने) पर याद करता और उपदेश ग्रहण करता है। स्रोत:अल-मुख़्तसर फ़ी तफ़सीरिल क़ु रआनिल करीम