होमतफ़सीरAr-Ra'd (13)

तफ़सीर Ar-Ra'd (13) — الرعد

मदनी · 43 आयतें

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الٓمٓر ۚ تِلْكَ ءَايَـٰتُ ٱلْكِتَـٰبِ ۗ وَٱلَّذِىٓ أُنزِلَ إِلَيْكَ مِن رَّبِّكَ ٱلْحَقُّ وَلَـٰكِنَّ أَكْثَرَ ٱلنَّاسِ لَا يُؤْمِنُونَ ﴿١﴾

{अलिफ़॰ लाम॰ मीम॰ रा॰।} सूरतुल-बक़रा के आरंभ में इस प्रकार के अक्षरों के बारे में बात गुज़र चुकी है। इस सूरत की ये उच्च आयतें और क़ु रआन जिसे अल्लाह ने (ऐ रसूल!) आपपर उतारा है, वह सत्य हैं, जिसमें कोई संशय नहीं है, और इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह अल्लाह की ओर से है। किंतु अधिकांश लोग हठ और अहंकार के कारण इसपर ईमान नहींلलाते।

ٱللَّهُ ٱلَّذِى رَفَعَ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ بِغَيْرِ عَمَدٍۢ تَرَوْنَهَا ۖ ثُمَّ ٱسْتَوَىٰ عَلَى ٱلْعَرْشِ ۖ وَسَخَّرَ ٱلشَّمْسَ وَٱلْقَمَرَ ۖ كُلٌّۭ يَجْرِى لِأَجَلٍۢ مُّسَمًّۭى ۚ يُدَبِّرُ ٱلْأَمْرَ يُفَصِّلُ ٱلْـَٔايَـٰتِ لَعَلَّكُم بِلِقَآءِ رَبِّكُمْ تُوقِنُونَ ﴿٢﴾

अल्लाह वह है, जिसने खंभों के बिना आकाशों को ऊँ चा बनाया, जिन्हें तुम देखते हो। फिर अर्श (सिंहासन) पर बुलंद हुआ, जैसा उसकी महिमा के योग्य है। हम उसके बुलंद होने की कोई दशा एवं स्थिति नहीं निर्धारित करते और न उसे किसी चीज़ के समान क़रार देते हैं। उसने सूर्य एवं चंद्रमा को अपनी सृष्टि के लाभों के लिए वशीभूत कर दिया। सूर्य और चंद्रमा में से प्रत्येक अल्लाह के ज्ञान में एक विशिष्ट अवधि के लिए चलरहा है। वह पाक अल्लाह आसमानों और धरती में पूर्ण मामले का जैसे चाहता है, संचालन करता है। वह अपनी शक्ति को दर्शाने वाली निशानियाँ खोल-खोलकर बयान करता है, ताकि तुम क़ियामत के दिन अपने रब से मिलने पर विश्वास कर लो, फिर उसके लिए अच्छे कार्यों के साथ तैयारी करने लगो।

وَهُوَ ٱلَّذِى مَدَّ ٱلْأَرْضَ وَجَعَلَ فِيهَا رَوَٰسِىَ وَأَنْهَـٰرًۭا ۖ وَمِن كُلِّ ٱلثَّمَرَٰتِ جَعَلَ فِيهَا زَوْجَيْنِ ٱثْنَيْنِ ۖ يُغْشِى ٱلَّيْلَ ٱلنَّهَارَ ۚ إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَـَٔايَـٰتٍۢ لِّقَوْمٍۢ يَتَفَكَّرُونَ ﴿٣﴾

वही अल्लाह है, जिसने धरती को फै लाया और उसमें मज़बूत पर्वत बनाए, ताकि धरती लोगों को लेकर हिलने-डुलने न लगे, तथा लोगों, उनके पशुओं और उनकी फसलों को पानी की आपूर्ति करने के लिए उसमें जल की नदियाँ बनाईं। और सभी तरह के फलों के उसने दो-दो प्रकार बनाए, जैसे कि पशु में नर और मादा। वह रात को दिन पर उढ़ा देता है, तो वह प्रकाशमान होने के बाद अंधेरा हो जाता है। निःसंदेह इस पूर्वोक्त में उन लोगों के लिए निशानियाँ और प्रमाण हैं, जो अल्लाह की रचना में सोच- विचार और चिंतन करते हैं। क्योंकि वही उन प्रमाणों और दलीलों से लाभान्वित होते हैं।

وَفِى ٱلْأَرْضِ قِطَعٌۭ مُّتَجَـٰوِرَٰتٌۭ وَجَنَّـٰتٌۭ مِّنْ أَعْنَـٰبٍۢ وَزَرْعٌۭ وَنَخِيلٌۭ صِنْوَانٌۭ وَغَيْرُ صِنْوَانٍۢ يُسْقَىٰ بِمَآءٍۢ وَٰحِدٍۢ وَنُفَضِّلُ بَعْضَهَا عَلَىٰ بَعْضٍۢ فِى ٱلْأُكُلِ ۚ إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَـَٔايَـٰتٍۢ لِّقَوْمٍۢ يَعْقِلُونَ ﴿٤﴾

ى और धरती पर पास-पास विभिन्न भू-भाग हैं, और उसमें अंगूरों के बाग़ हैं, तथा उसमें खेती और खजूर के एक ही जड़ से कई तनों वाले पेड़ और एक जड़ से एकल तनों वाले खजूर के पेड़ भी हैं। इन बाग़ों और उन फ़सलों को एक ही पानी से सिंचित किया जाता है। और उनके परस्पर मिले हुए होने और एक ही पानी से सिंचित किए जाने के बावजूद, हमस्वाद और अन्य लाभों में उनमें से कु छ को कु छ पर श्रेष्ठता प्रदान करते हैं। निःसंदेह इसपूर्वोक्त में उन लोगों के लिए दलीलें और प्रमाण हैं, जो बुद्धि रखते हैं। क्योंकि वही उनसे सीख प्राप्त करते हैं।

۞ وَإِن تَعْجَبْ فَعَجَبٌۭ قَوْلُهُمْ أَءِذَا كُنَّا تُرَٰبًا أَءِنَّا لَفِى خَلْقٍۢ جَدِيدٍ ۗ أُو۟لَـٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ بِرَبِّهِمْ ۖ وَأُو۟لَـٰٓئِكَ ٱلْأَغْلَـٰلُ فِىٓ أَعْنَاقِهِمْ ۖ وَأُو۟لَـٰٓئِكَ أَصْحَـٰبُ ٱلنَّارِ ۖ هُمْ فِيهَا خَـٰلِدُونَ ﴿٥﴾

(ऐ रसूल) यदि आप किसी चीज़ पर आश्चर्य करते हैं, तो आपके लिए सबसे अधिक आश्चर्य की बात उनका पुनर्जीवन का इनकार करना और इसके इनकार के तर्क के रूप में उनका यह कहना है: क्या जब हम मर जाएँगे और मिट्टी तथा सड़ी-गली हड्डियाँ हो जाएँगे, तो क्या हमें दोबारा जीवित किया जाएगा?! यही मृत्यु के बाद दोबारा जीवित किए जाने का इनकार करने वाले लोग हैं, जिन्होंने अपने पालनहार के साथ कु फ़्र किया, इसलिए मृतकों को पुनर्जीवित कर उठाने की उसकी शक्ति का इनकार कर दिया। और यही लोग हैं जिनके गले में क़ियामत के दिन आग की ज़ंजीरें डाली जाएँगी और यही दोज़ख़ वाले हैं, जो उसमें हमेशा के लिए रहने वाले हैं, न उनका विनाश होगा और न उनकी यातना ख़त्म होगी। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

وَيَسْتَعْجِلُونَكَ بِٱلسَّيِّئَةِ قَبْلَ ٱلْحَسَنَةِ وَقَدْ خَلَتْ مِن قَبْلِهِمُ ٱلْمَثُلَـٰتُ ۗ وَإِنَّ رَبَّكَ لَذُو مَغْفِرَةٍۢ لِّلنَّاسِ عَلَىٰ ظُلْمِهِمْ ۖ وَإِنَّ رَبَّكَ لَشَدِيدُ ٱلْعِقَابِ ﴿٦﴾

(ऐ रसूल!) मुश्रिक लोग आपसे यातना जल्दी माँग रहे हैं और उसके आने में देरी की शिकायत कर रहे हैं, इससे पहले कि वे अल्लाह के द्वारा उनके लिए निर्धारित नेमतों को पूरा करें। जबकि उनसे पहले उन्हीं जैसे झुठलाने वाले समुदायों पर यातनाएँ गुज़र चुकी हैं। फिर वे उनसे सीख क्यों नहीं लेते? और (ऐ रसूल!) निःसंदेह आपका पालनहार लोगों को, उनके अत्याचार के बावजूद, नज़र अंदाज़ करने वाला है। चुनाँचे वह उन्हें अज़ाब देने में जल्दी नहीं करता, ताकि वे अल्लाह के समक्ष तौबा कर लें। और निःसंदेह वह अपने कु फ़्र पर अडिग रहने वालों को, यदि वे तौबा न करें, निश्चित रूप से सख़्त सज़ा देने वाला है।

وَيَقُولُ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ لَوْلَآ أُنزِلَ عَلَيْهِ ءَايَةٌۭ مِّن رَّبِّهِۦٓ ۗ إِنَّمَآ أَنتَ مُنذِرٌۭ ۖ وَلِكُلِّ قَوْمٍ هَادٍ ﴿٧﴾

तथा अल्लाह का इनकार करने वाले (अपने इनकार और शत्रुता में अति करते हुए) कहते हैं: मुहम्मद पर उनके पालनहार की ओर से उस प्रकार की कोई निशानी क्यों नहीं उतारी गई, जो मूसा और ईसा पर उतारा गई थी? आप तो (ऐ नबी!) केवल एक डराने वाले हैं। आप लोगों को अल्लाह की यातना से डराते हैं। और आपके लिए के वल वही निशानी है, जो अल्लाह ने आपको प्रदान की है। और हर समुदाय के लिए एक नबी होता है, जो उन्हें सत्य के मार्ग पर ले जाता है, और उन्हें उसका मार्गदर्शन करता है।

ٱللَّهُ يَعْلَمُ مَا تَحْمِلُ كُلُّ أُنثَىٰ وَمَا تَغِيضُ ٱلْأَرْحَامُ وَمَا تَزْدَادُ ۖ وَكُلُّ شَىْءٍ عِندَهُۥ بِمِقْدَارٍ ﴿٨﴾

अल्लाह जानता है जो कु छ हर मादा अपने पेट में उठाए होती है। वह उसके बारे में सब कु छ जानता है। तथा गर्भाशयों में जो कमी, वृद्धि, स्वास्थ्य और बीमारी होती है, उसे भी जानता है। और अल्लाह के निकट हर वस्तु की एक मात्रा निश्चित है, जिससे वह घट-बढ़ नहीं सकती।

عَـٰلِمُ ٱلْغَيْبِ وَٱلشَّهَـٰدَةِ ٱلْكَبِيرُ ٱلْمُتَعَالِ ﴿٩﴾

क्योंकि अल्लाह उन सभी चीज़ों को जानता है, जो उसकी सृष्टि की इंद्रियों से अनुपस्थित हैं, तथा उन सभी चीज़ों को भी जानता है जिनका उनकी इंद्रियाँ बोध रखती हैं। वह अपनी विशेषताओं, नामों और कार्यों में महान है। अपने अस्तित्व और विशेषताओं के साथ अपने प्रत्येक प्राणी से ऊँ चा है।

سَوَآءٌۭ مِّنكُم مَّنْ أَسَرَّ ٱلْقَوْلَ وَمَن جَهَرَ بِهِۦ وَمَنْ هُوَ مُسْتَخْفٍۭ بِٱلَّيْلِ وَسَارِبٌۢ بِٱلنَّهَارِ ﴿١٠﴾

वह भेद और छिपे हुए को जानता है। (ऐ लोगो!) तुममें से जो व्यक्ति बात को छिपाता है और जो इसकी घोषणा करता है, दोनों उसके ज्ञान में बराबर हैं। इसी तरह जो रात के अंधेरे में लोगों की आँखों से छिपा हुआ है और जो दिन के उजाले में अपने कार्यों से स्पष्ट है, सब उसके ज्ञान में बराबर हैं।

لَهُۥ مُعَقِّبَـٰتٌۭ مِّنۢ بَيْنِ يَدَيْهِ وَمِنْ خَلْفِهِۦ يَحْفَظُونَهُۥ مِنْ أَمْرِ ٱللَّهِ ۗ إِنَّ ٱللَّهَ لَا يُغَيِّرُ مَا بِقَوْمٍ حَتَّىٰ يُغَيِّرُوا۟ مَا بِأَنفُسِهِمْ ۗ وَإِذَآ أَرَادَ ٱللَّهُ بِقَوْمٍۢ سُوٓءًۭا فَلَا مَرَدَّ لَهُۥ ۚ وَمَا لَهُم مِّن دُونِهِۦ مِن وَالٍ ﴿١١﴾

إ ه सर्वशक्तिमान अल्लाह के कुछ फ़रिश्ते ऐसे हैं, जो इनसान के पास बारी-बारी आते हैं। उनमें से कुछ रात में आते हैं, और कुछ दिन के दौरान। वे अल्लाह के आदेश से इनसान की उन समस्त विपत्तियों से रक्षा करते हैं, जिनसे इनसान के बचाव का अल्लाह ने फ़ै सला कर रखा होता है। तथा वे इनसान की बातों और कार्यों को लिखते हैं। निःसंदेह अल्लाह किसी समुदाय की दशा को एक अच्छी स्थिति से उसके विपरीत एक अप्रिय स्थिति में नहीं बदलता, जब तक कि वे अपने स्वयं के धन्यवाद (शुक्र) की स्थिति को न बदल लें। और जब अल्लाह किसी क़ौम को विनष्ट करना चाहता है, तो उसके इरादे को कोई टाल नहीं सकता। और (ऐ लोगो!) तुम्हारा अल्लाह के सिवा कोई संरक्षक नहीं है, जो तुम्हारे मामलों का संरक्षण कर सके , कि तुम अपनी विपत्ति को दूर करने के लिए उसका सहारा ले सको।

هُوَ ٱلَّذِى يُرِيكُمُ ٱلْبَرْقَ خَوْفًۭا وَطَمَعًۭا وَيُنشِئُ ٱلسَّحَابَ ٱلثِّقَالَ ﴿١٢﴾

वही है जो तुम्हें (ऐ लोगो!) बिजली दिखाता है, और उसके द्वारा तुम्हारे लिए चिर्री का भय और वर्षा की आशा इकट्ठा कर देता है। तथा वही है जो तुम्हारे लिए भारी वर्षा के पानी से भरा हुआ बादल पैदा करता है। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

وَيُسَبِّحُ ٱلرَّعْدُ بِحَمْدِهِۦ وَٱلْمَلَـٰٓئِكَةُ مِنْ خِيفَتِهِۦ وَيُرْسِلُ ٱلصَّوَٰعِقَ فَيُصِيبُ بِهَا مَن يَشَآءُ وَهُمْ يُجَـٰدِلُونَ فِى ٱللَّهِ وَهُوَ شَدِيدُ ٱلْمِحَالِ ﴿١٣﴾

और बिजली की कड़क अपने पालनहार की प्रशंसा के साथ उसकी पवित्रता का गान करती है और फ़रिश्ते अपने पालनहार की पवित्रता का गुणगान उसके भय से तथा उसके प्रताप और सम्मान में करते हैं। और अल्लाह अपने प्राणियों में से जिसपर चाहता है, जलाने वाली बिजलियाँ भेजकर उसे विनष्ट कर देता है। जबकि काफ़िर लोग अल्लाह की एकता (एके श्वरवाद) के विषय में झगड़ते हैं, और अल्लाह बहुत समर्थ और शक्तिशाली है। अतः वह जो चीज़ भी चाहता है, उसे कर गुज़रता है।

لَهُۥ دَعْوَةُ ٱلْحَقِّ ۖ وَٱلَّذِينَ يَدْعُونَ مِن دُونِهِۦ لَا يَسْتَجِيبُونَ لَهُم بِشَىْءٍ إِلَّا كَبَـٰسِطِ كَفَّيْهِ إِلَى ٱلْمَآءِ لِيَبْلُغَ فَاهُ وَمَا هُوَ بِبَـٰلِغِهِۦ ۚ وَمَا دُعَآءُ ٱلْكَـٰفِرِينَ إِلَّا فِى ضَلَـٰلٍۢ ﴿١٤﴾

केवल अल्लाह ही के लिए तौह़ीद (एकेश्वरवाद) की पुकार है, जिसमें उसका कोई साझी नहीं है। और जिन मूर्तियों को मुश्रिक लोग अल्लाह को छोड़कर पुकारते हैं, वे किसी भी मामले में उन्हें पुकारने वाले की पुकार का जवाब नहीं देतीं। उनका उन मूर्तियों को पुकारना एक प्यासे की तरह है, जो पानी की ओर अपना हाथ फै लाता है, ताकि वह उसके मुँह तक पहुँच जाए और वह उसे पी ले। हालाँकि पानी उसके मुँह तक कभी भी पहुँचने वाला नहीं। दरअसल काफ़िरों का अपनी मूर्तियों को पुकारना व्यर्थ है और सही से दूर है। क्योंकि वे उन्हें न कोई लाभ पहुँचा सकती हैं और न कोई हानि दूर कर सकती हैं।

وَلِلَّهِ يَسْجُدُ مَن فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ طَوْعًۭا وَكَرْهًۭا وَظِلَـٰلُهُم بِٱلْغُدُوِّ وَٱلْـَٔاصَالِ ۩ ﴿١٥﴾

आकाशों और धरती में जो भी हैं, सब अकेले अल्लाह ही को सजदा करते हैं। इसमें मोमिन और काफ़िर बराबर हैं। सिवाय इसके कि मोमिन उसके सामने स्वेच्छा से झुकता और सजदा करता है। जबकि काफ़िर न चाहते हुए भी उसके सामने झुकने पर मजबूर होता है। तथा उसकी प्रकृति उसे उसके सामने स्वेच्छा से झुकने के लिए निर्देशر देती है। और प्राणियों में से जिसकी भी परछाई है, उसकी परछाई दिन की शुरुआत और उसके अंत में उसी के अधीन होती है।

قُلْ مَن رَّبُّ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ قُلِ ٱللَّهُ ۚ قُلْ أَفَٱتَّخَذْتُم مِّن دُونِهِۦٓ أَوْلِيَآءَ لَا يَمْلِكُونَ لِأَنفُسِهِمْ نَفْعًۭا وَلَا ضَرًّۭا ۚ قُلْ هَلْ يَسْتَوِى ٱلْأَعْمَىٰ وَٱلْبَصِيرُ أَمْ هَلْ تَسْتَوِى ٱلظُّلُمَـٰتُ وَٱلنُّورُ ۗ أَمْ جَعَلُوا۟ لِلَّهِ شُرَكَآءَ خَلَقُوا۟ كَخَلْقِهِۦ فَتَشَـٰبَهَ ٱلْخَلْقُ عَلَيْهِمْ ۚ قُلِ ٱللَّهُ خَـٰلِقُ كُلِّ شَىْءٍۢ وَهُوَ ٱلْوَٰحِدُ ٱلْقَهَّـٰرُ ﴿١٦﴾

ى (ऐ रसूल!) अल्लाह के साथ दूसरों की पूजा करने वाले काफ़िरों से कह दें: आकाशों और धरती को पैदा करने वाला और उनके मामलों का व्यवस्थापक कौन है? (ऐ रसूल!) कह दें: अल्लाह ही उनका पैदा करने वाला और उनके मामले का प्रबंध करने वाला है और तुम इस बात को स्वीकार करते हो। (ऐ रसूल!) उनसे कह दें: क्या तुमने अल्लाह को छोड़कर अपने लिए ऐसे विवश सहायक बना रखे हैं, जो खुद अपने लिए न कोई लाभ ला सकते हैं और न कोई नुक़सान दूर सर सकते हैं, तो वे दूसरों के लिए ऐसा कहाँ से कर सकते हैं? (ऐ रसूल!) उनसे कह दीजिए: क्या काफ़िर जो दृष्टि से अंधा है और मोमिन जो द्रष्टा और मार्गदर्शित है, दोनों बराबर हो सकते हैं? या क्या कु फ़्र जो अंधकार है और ईमान जो रोशनी है, दोनों बराबर हो सकते हैं? क्या उन लोगों ने पैदा करने के मामले में कु छ ऐसे लोगों को अल्लाह का साझी बना रखा है, जिन्होंने अल्लाह के पैदा करने की तरह कु छ पैदा किया है, जिसके कारण उनके लिए अल्लाह की रचना उनके साझियों की रचना के साथ गडमड हो गई है? (ऐ रसूल!) उनसे कह दीजिए: के वल अल्लाह ही हर चीज़ का पैदा करने वाला है। पैदा करने में उसका कोई साझी नहीं है। और वही अके ला पूज्य है, जो एकमात्र इबादत किए जाने का हक़दार है, हर चीज़ पर प्रभुत्वशाली है।

أَنزَلَ مِنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءًۭ فَسَالَتْ أَوْدِيَةٌۢ بِقَدَرِهَا فَٱحْتَمَلَ ٱلسَّيْلُ زَبَدًۭا رَّابِيًۭا ۚ وَمِمَّا يُوقِدُونَ عَلَيْهِ فِى ٱلنَّارِ ٱبْتِغَآءَ حِلْيَةٍ أَوْ مَتَـٰعٍۢ زَبَدٌۭ مِّثْلُهُۥ ۚ كَذَٰلِكَ يَضْرِبُ ٱللَّهُ ٱلْحَقَّ وَٱلْبَـٰطِلَ ۚ فَأَمَّا ٱلزَّبَدُ فَيَذْهَبُ جُفَآءًۭ ۖ وَأَمَّا مَا يَنفَعُ ٱلنَّاسَ فَيَمْكُثُ فِى ٱلْأَرْضِ ۚ كَذَٰلِكَ يَضْرِبُ ٱللَّهُ ٱلْأَمْثَالَ ﴿١٧﴾

ه अल्लाह ने असत्य के मिटने और सत्य के बाक़ी रहने का एक उदाहरण आकाश से उतरने वाली बारिश के पानी के साथ दिया है, जिसके साथ घाटियाँ, अपने-अपने छोटे या बड़े आकार के अनुसार, बह निकलीं। फिर इस रेले ने झाग और कूड़ा पानी के ऊपर उठा लिया। अल्लाह ने सत्य और असत्य का एक दूसरा उदाहरण कुछ क़ीमती धातुओं के साथ दिया है, जिन्हें लोग पिघलाकर ज़ेवर बनाने के लिए तपाते हैं। तो इसका झाग इसके ऊपर आ जाता है, जिस तरह कि उसका झाग उसके ऊपर होता है। इन दो उदाहरणों के साथ, अल्लाह सत्य और असत्य के उदाहरण प्रस्तुत करता है। चुनाँचे असत्य जल पर तैरते हुए मैल और झाग की तरह तथा उस ज़ंग (मोरचे) के بلغ क़ुरआन · तफ़सीर समान है, जो धातु को तपाने से अलग हो जाता है। जबकि सत्य शुद्ध जल के समान है जिसमें से पिया जाता है, और वह फल, चारा और घास उगाता है, तथा उस धातु के समान है जो पिघलाने के बाद बचता है, जिससे लोग लाभान्वित होते हैं। जिस तरह अल्लाह ने ये दो उदाहरण दिए हैं, वैसे ही अल्लाह लोगों के लिए उदाहरणों को प्रस्तुत करता रहता है, ताकि असत्य से सत्य स्पष्ट हो जाए।

لِلَّذِينَ ٱسْتَجَابُوا۟ لِرَبِّهِمُ ٱلْحُسْنَىٰ ۚ وَٱلَّذِينَ لَمْ يَسْتَجِيبُوا۟ لَهُۥ لَوْ أَنَّ لَهُم مَّا فِى ٱلْأَرْضِ جَمِيعًۭا وَمِثْلَهُۥ مَعَهُۥ لَٱفْتَدَوْا۟ بِهِۦٓ ۚ أُو۟لَـٰٓئِكَ لَهُمْ سُوٓءُ ٱلْحِسَابِ وَمَأْوَىٰهُمْ جَهَنَّمُ ۖ وَبِئْسَ ٱلْمِهَادُ ﴿١٨﴾

ء ى जिन लोगों ने अपने पालनहार की बात मान ली, जो उसने उन्हें अपने एकत्व (एकेश्वरवाद) और आज्ञापालन के लिए आमंत्रित किया, उनके लिए सबसे अच्छा बदला है और वह जन्नत है। और काफ़िर लोग जिन्होंने अपने पालनहार की तौहीद तथा आज्ञापालन के आमंत्रण को स्वीकार नहीं किया, यदि ऐसा हो जाए कि दुनिया का सारा धन उनके पास आ जाए और इसके साथ उनके पास इसके बराबर और भी धन आ जाए, तो वे अपने आपको अज़ाब से छु ड़ाने के लिए वह सारा धन अवश्य खर्च कर देंगे। अल्लाह के आमंत्रण को स्वीकार न करने वाले इन लोगों से उनके सभी पापों का हिसाब लिया जाएगा। और उनका निवास जिसमें वे रहेंगे, जहन्नम है। और उनका बिस्तर तथा ठिकाना जो कि आग है, बहुत बुरा है।

۞ أَفَمَن يَعْلَمُ أَنَّمَآ أُنزِلَ إِلَيْكَ مِن رَّبِّكَ ٱلْحَقُّ كَمَنْ هُوَ أَعْمَىٰٓ ۚ إِنَّمَا يَتَذَكَّرُ أُو۟لُوا۟ ٱلْأَلْبَـٰبِ ﴿١٩﴾

वह आदमी जो जानता है कि अल्लाह ने जो कु छ (ऐ रसूल) आप पर अपनी ओर से उतारा है, वही सत्य है, जिसमें कोई संदेह नहीं है, और वह अल्लाह के आमंत्रण को स्वीकार करने वाला मोमिन व्यक्ति है, उस व्यक्ति के समान नहीं हो सकता, जो अंधा है और वह अल्लाह के आमंत्रण को स्वीकार ने करने वाला काफ़िर व्कायक्ति है। तथ्य यह है कि इससे सद्बुद्धि वाले लोग ही सीख लेते और उपदेश ग्रहण करते हैं।

ٱلَّذِينَ يُوفُونَ بِعَهْدِ ٱللَّهِ وَلَا يَنقُضُونَ ٱلْمِيثَـٰقَ ﴿٢٠﴾

जिन लोगों ने अल्लाह का आमंत्रण स्वीकार किया, वे ऐसे लोग हैं जो अल्लाह के साथ की हुई प्रतिज्ञा या उसके बंदों के साथ की हुई प्रतिज्ञा को पूरा करते हैं। तथा अल्लाह के साथ या उसके अलावा के साथ की हुई दृढ़ प्रतिज्ञाओं को नहीं तोड़ते।

وَٱلَّذِينَ يَصِلُونَ مَآ أَمَرَ ٱللَّهُ بِهِۦٓ أَن يُوصَلَ وَيَخْشَوْنَ رَبَّهُمْ وَيَخَافُونَ سُوٓءَ ٱلْحِسَابِ ﴿٢١﴾

और वे ऐसे लोग हैं, जो उन सभी रिश्तों-नातों को जोड़ते हैं, जिन्हें जोड़ने का अल्लाह ने आदेश दिया है, और वे अल्लाह का ऐसा भय रखते हैं, जो उन्हें अल्लाह के आदेशों का पानल करने और उसके निषेधों से बचने के लिए प्रेरित करता है, तथा उन्हें डर है कि कहीं अल्लाह उनके किए हुए प्रत्येक पाप का हिसाब न ले। क्योंकि जिसके हिसाब में एक-एक चीज़ की पड़ताल की गई,رउसका सर्वनाश हो जाएगा।

وَٱلَّذِينَ صَبَرُوا۟ ٱبْتِغَآءَ وَجْهِ رَبِّهِمْ وَأَقَامُوا۟ ٱلصَّلَوٰةَ وَأَنفَقُوا۟ مِمَّا رَزَقْنَـٰهُمْ سِرًّۭا وَعَلَانِيَةًۭ وَيَدْرَءُونَ بِٱلْحَسَنَةِ ٱلسَّيِّئَةَ أُو۟لَـٰٓئِكَ لَهُمْ عُقْبَى ٱلدَّارِ ﴿٢٢﴾

और वे ऐसे लोग हैं, जिन्होंने अल्लाह की प्रसन्नता के लिए अल्लाह के आज्ञापालन पर तथा अल्लाह ने जो कु छ अच्छा या बुरा उनपर नियत किया है, उसपर सब्र किया और अल्लाह की अवज्ञा से रुक गए, और संपूर्ण रूप से नमाज़ अदा किया, तथा हमारे दिए हुए धन से अनिवार्य हुक़ूक़ (अधिकार) का भुगतान किया, और उसमें से कभी दिखावे से बचने के लिए चुपके से स्वेच्छिक दान दिया और कभी खुले तौर पर दान किया ताकि दूसरे लोग उनका अनुकरण करें, तथा उनके साथ जो दुर्व्यवहार करे उसकी बुराई को उसके साथ अच्छा व्यवहार करके दूर करते हैं। इन विशेषताओं से विशेषित लोगों के लिए क़ियामत के दिन अच्छा परिणामहै।

جَنَّـٰتُ عَدْنٍۢ يَدْخُلُونَهَا وَمَن صَلَحَ مِنْ ءَابَآئِهِمْ وَأَزْوَٰجِهِمْ وَذُرِّيَّـٰتِهِمْ ۖ وَٱلْمَلَـٰٓئِكَةُ يَدْخُلُونَ عَلَيْهِم مِّن كُلِّ بَابٍۢ ﴿٢٣﴾

यह अच्छा परिणाम ऐसे बाग़ हैं, जिनमें वे स्थायी रूप से समृद्धिपूर्वक रहेंगे। उसमें उनकी नेमत की पूर्ति इससे होगी कि उसमें उनके साथ उनके बाप-दादाओं, माताओं, पत्नियों और संतानों में से नेक लोग भी प्रवेश करेंगे। ताकि उनसे मुलाक़ात के द्वारा उनके आनंद को पूरा कर दिया जाए। और जन्नत में फ़रिश्ते उनके घरों के सभी द्वारों से बधाई देते हुए उनके पासआएँगे। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

سَلَـٰمٌ عَلَيْكُم بِمَا صَبَرْتُمْ ۚ فَنِعْمَ عُقْبَى ٱلدَّارِ ﴿٢٤﴾

फ़रिश्ते जब भी उनके पास आएँगे, उनका यह कहते हुए अभिवादन करेंगे: तुमपर सलाम (शांति) हो! अर्थात्: तुम अल्लाह के आज्ञापालन और उसके कष्टदायक फै सलों पर धैर्य से काम लेने, और उसकी अवज्ञा से बचने के कारण विपत्तियों से सुरक्षित रहो। तो क्या ही अच्छा है इस घर का परिणाम, जो तुम्हें प्राप्त हुआ है।

وَٱلَّذِينَ يَنقُضُونَ عَهْدَ ٱللَّهِ مِنۢ بَعْدِ مِيثَـٰقِهِۦ وَيَقْطَعُونَ مَآ أَمَرَ ٱللَّهُ بِهِۦٓ أَن يُوصَلَ وَيُفْسِدُونَ فِى ٱلْأَرْضِ ۙ أُو۟لَـٰٓئِكَ لَهُمُ ٱللَّعْنَةُ وَلَهُمْ سُوٓءُ ٱلدَّارِ ﴿٢٥﴾

ء और जो लोग अल्लाह की प्रतिज्ञा को उसे दृढ़ करने के बाद तोड़ देते हैं, और उन रिश्तों-नातों को काटते हैं, जिन्हें अल्लाह ने जोड़ने का आदेश दिया है, तथा अल्लाह तआला की अवज्ञा करके धरती में उत्पात मचाते हैं। यही अभागे (दुर्भाग्यशाली) लोग हैं, जिनके लिए अल्लाह की दया से निष्कासन है और उनके लिए बुरा परिणाम है, जोकि नरक है।

ٱللَّهُ يَبْسُطُ ٱلرِّزْقَ لِمَن يَشَآءُ وَيَقْدِرُ ۚ وَفَرِحُوا۟ بِٱلْحَيَوٰةِ ٱلدُّنْيَا وَمَا ٱلْحَيَوٰةُ ٱلدُّنْيَا فِى ٱلْـَٔاخِرَةِ إِلَّا مَتَـٰعٌۭ ﴿٢٦﴾

अल्लाह अपने बंदों में से जिसके लिए चाहता है, उसकी रोज़ी में विस्तार कर देता है और जिस पर चाहता है, तंग कर देता है। रोज़ी का विस्तार सौभाग्य और अल्लाह के प्रेम की निशानी नहीं है, और न ही उसका तंग होना दुर्भाग्य की निशानी है। और काफ़िर लोग दुनिया ही के जीवन पर प्रसन्न हैं। इसलिए उसकी ओर झुक गए हैं और उसी पर संतुष्ट हो गए हैं। हालाँकि दुनिया क जीवन आख़िरत के मुक़ाबले में थोड़े-से सामान के सिवा कु छ नहीं है, जो समाप्त हो जाने वाला है।

وَيَقُولُ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ لَوْلَآ أُنزِلَ عَلَيْهِ ءَايَةٌۭ مِّن رَّبِّهِۦ ۗ قُلْ إِنَّ ٱللَّهَ يُضِلُّ مَن يَشَآءُ وَيَهْدِىٓ إِلَيْهِ مَنْ أَنَابَ ﴿٢٧﴾

अल्लाह और उसकी निशानियों का इनकार करने वाले कहते हैं: मुह़म्मद पर उनके पालनहार की ओर से कोई साक्षात निशानी क्यों नहीं उतारी गई, जो उनकी सच्चाई को इंगित करती, फिर हम उनपर ईमान ले आते। (ऐ रसूल!) आप इन प्रस्ताव रखने वालों से कह दें: अल्लाह जिसे चाहता है, अपने न्याय के अनुसार गुमराह करता है। और अपनी कृ पा से उसका अपनी ओर मार्गदर्शन करता है, जो उसकी ओर तौबा के साथ लौटता है। तथा मार्गदर्शन उनके हाथ में नहीं है कि वे उसे निशानियाँ उतारने के साथ जोड़ें।

ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَتَطْمَئِنُّ قُلُوبُهُم بِذِكْرِ ٱللَّهِ ۗ أَلَا بِذِكْرِ ٱللَّهِ تَطْمَئِنُّ ٱلْقُلُوبُ ﴿٢٨﴾

ये लोग जिन्हें अल्लाह मार्गदर्शन प्रदान करता है, वे हैं जो ईमान लाए, और उनके दिलों को अल्लाह को याद करने; उसकी पवित्रता का गान करने और उसकी स्तुति व प्रशंसा करने, तथा उसकी किताब की तिलावत करने और उसे सुनने से और इसके अलावा अन्य प्रकार के स्मरण से चैन और आराम मिलता है। सुन लो! के वल अल्लाह को याद करने ही से दिलों को आराममिलता है। यही दिलों के लायक़ है।

ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ طُوبَىٰ لَهُمْ وَحُسْنُ مَـَٔابٍۢ ﴿٢٩﴾

और ये लोग जो अल्लाह पर ईमान लाए और ऐसे अच्छे कार्य किए, जो उन्हें अल्लाह से क़रीब लाते हैं, उनके लिए आख़िरत में एक अच्छा जीवन है तथा उनके लिए अच्छा परिणाम है, जो कि जन्नत है।

كَذَٰلِكَ أَرْسَلْنَـٰكَ فِىٓ أُمَّةٍۢ قَدْ خَلَتْ مِن قَبْلِهَآ أُمَمٌۭ لِّتَتْلُوَا۟ عَلَيْهِمُ ٱلَّذِىٓ أَوْحَيْنَآ إِلَيْكَ وَهُمْ يَكْفُرُونَ بِٱلرَّحْمَـٰنِ ۚ قُلْ هُوَ رَبِّى لَآ إِلَـٰهَ إِلَّا هُوَ عَلَيْهِ تَوَكَّلْتُ وَإِلَيْهِ مَتَابِ ﴿٣٠﴾

जिस तरह हमने पिछले नबियों को उनके समुदायों की ओर भेजा था, वैसे ही हमने आपको (ऐ रसूल!) आपके समुदाय की ओर भेजा है; ताकि आप उन्हें वह क़ु रआन पढ़कर सुनाएँ, जो हमने आपकी ओर वह़्य की है। क्योंकि वह आपकी सच्चाई को प्रमाणित करने के लिए काफ़ी है। लेकिन आपके समुदाय का हाल यह है कि वे इस निशानी का इनकार करते हैं। क्योंकि वे 'रहमान' (अत्यंत दयावान्) पर अविश्वास करते हैं, जब वे उसके साथ उसके अलावा को साझी बनाते हैं। (ऐ रसूल!) आप उनसे कह दीजिए: वह 'रहमान' (अत्यंत दयावान् हस्ती) जिसके साथ तुम उसके अलावा को साझी बनाते हो, वही मेरा पालनहार है, जिसके अलावा कोई सत्य पूज्य नहीं। मैंने بلغ क़ुरआन · तफ़सीर अपने सभी मामलों में उसी पर भरोसा किया है और उसी की ओर मेरा लौटना है।

وَلَوْ أَنَّ قُرْءَانًۭا سُيِّرَتْ بِهِ ٱلْجِبَالُ أَوْ قُطِّعَتْ بِهِ ٱلْأَرْضُ أَوْ كُلِّمَ بِهِ ٱلْمَوْتَىٰ ۗ بَل لِّلَّهِ ٱلْأَمْرُ جَمِيعًا ۗ أَفَلَمْ يَا۟يْـَٔسِ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓا۟ أَن لَّوْ يَشَآءُ ٱللَّهُ لَهَدَى ٱلنَّاسَ جَمِيعًۭا ۗ وَلَا يَزَالُ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ تُصِيبُهُم بِمَا صَنَعُوا۟ قَارِعَةٌ أَوْ تَحُلُّ قَرِيبًۭا مِّن دَارِهِمْ حَتَّىٰ يَأْتِىَ وَعْدُ ٱللَّهِ ۚ إِنَّ ٱللَّهَ لَا يُخْلِفُ ٱلْمِيعَادَ ﴿٣١﴾

ى ه यदि ईश्वरीय किताबों में से किसी किताब की यह विशेषता होती कि उसके द्वारा पहाड़ों को उनके स्थानों से हटा दिया जाता, या उसके द्वारा धरती को फाड़ दिया जाता और वह नदियों और जल-स्रोतों में बदल जाती, या उसे मुर्दों पर पढ़ा जाता और वे जीवित हो जाते - तो वह अवश्य (ऐ रसूल!) आप पर अवतरित किया गया यह क़ुरआन होता। क्योंकि यह किताब स्पष्ट प्रमाण वाली और महान प्रभाव वाली है, यदि वे साफ़-सुथरे हृदय के मालिक होते, लेकिन वे इनकार करने वाले हैं। बल्कि चमत्कारों आदि के उतारने का सारा काम अल्लाह के अधिकार में हैं। तो क्या अल्लाह पर ईमान रखने वालों ने नहीं जाना कि यदि अल्लाह चमत्कार उतारे बिना ही समस्त लोगों को हिदायत देना चाहता, तो अवश्य उन्हें उसके बिना ही हिदायत दे देता? लेकिन उसने ऐसा नहीं चाहा। तथा अल्लाह का इनकार करने वालों पर उनके कु फ़्र तथा पापों के कारण हमेशा कोई सख़्त आपदा आती रहेगी, जो उनकी शांति भंग कर देगी, या वह आपदा उनके घर के निकट उतरेगी, यहाँ तक कि निरंतर यातना उतरने का अल्लाह का वादा आ जाए। निश्चय अल्लाह अपने वादे को पूरा करना नहीं छोड़ता है, जब उसका नियत समय आ जाए।

وَلَقَدِ ٱسْتُهْزِئَ بِرُسُلٍۢ مِّن قَبْلِكَ فَأَمْلَيْتُ لِلَّذِينَ كَفَرُوا۟ ثُمَّ أَخَذْتُهُمْ ۖ فَكَيْفَ كَانَ عِقَابِ ﴿٣٢﴾

आप पहले रसूल नहीं हैं, जिसे उसके समुदाय ने झुठलाया और उसका मज़ाक़ उड़ाया है। (ऐ रसूल) आपसे पहले भी कई समुदायों ने अपने रसूलों का मज़ाक़ उड़ाया और उन्हें झुठलाया है। तो मैंने उन लोगों को मोहलत दी जिन्होंने अपने रसूलों को झुठलाया था, यहाँ तक कि उन्हें विश्वास हो गया कि मैं उन्हें नष्ट करने वाला नहीं हूँ। फिर मैंने मोहलत के बाद उन्हें तरह-तरह की यातना से ग्रस्त कर दिया, तो आपने उनके लिए मेरी सज़ा को कै सा पाया? निश्चय वह एक कड़ी सज़ा थी।

أَفَمَنْ هُوَ قَآئِمٌ عَلَىٰ كُلِّ نَفْسٍۭ بِمَا كَسَبَتْ ۗ وَجَعَلُوا۟ لِلَّهِ شُرَكَآءَ قُلْ سَمُّوهُمْ ۚ أَمْ تُنَبِّـُٔونَهُۥ بِمَا لَا يَعْلَمُ فِى ٱلْأَرْضِ أَم بِظَـٰهِرٍۢ مِّنَ ٱلْقَوْلِ ۗ بَلْ زُيِّنَ لِلَّذِينَ كَفَرُوا۟ مَكْرُهُمْ وَصُدُّوا۟ عَنِ ٱلسَّبِيلِ ۗ وَمَن يُضْلِلِ ٱللَّهُ فَمَا لَهُۥ مِنْ هَادٍۢ ﴿٣٣﴾

तो क्या जो सभी सृष्टि की जीविका के संरक्षण का ज़िम्मेदार, हर प्राणी के कार्यों की निगरानी करने वाला है, चुनाँचे वह उसे उसके कार्यों का बदला देगा, वह उपासना किए जाने के अधिक योग्य है, या ये मूर्तियाँ जिन्हें इस बात का कोई अधिकार नहीं कि उनकी पूजा की जाए? हालाँकि काफ़िरों ने उन्हें अन्यायपूर्वक और झूठमूठ अल्लाह का साझी बना लिया है। (ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें: तुमहमें उन साझियों के नामबताओ, जिनकी तुमने अल्लाह के साथ पूजा की है, यदि तुमअपने दावे में सच्चे हो। या क्या तुम अल्लाह को ऐसे साझियों के बारे में बता रहे हो, जिन्हें वह धरती में नहीं जानता? या फिर तुम उसे एक ऊपरी बात बता रहे हो, जिसमें कोई सच्चाई नहीं है? बल्कि, शैतान ने इनकार करने वालों की नज़र में उनके छल को सुंदर बना दिया है, जिसके कारण वे अल्लाह का इनकार कर बैठे हैं और शैतान ने उन्हें हिदायत के रास्ते से हटा दिया है। और जिसे अल्लाह हिदायत के मार्ग से दूर कर दे, उसके लिए कोई मार्गदर्शक नहीं, जो उसका मार्गदर्शन कर सके ।

لَّهُمْ عَذَابٌۭ فِى ٱلْحَيَوٰةِ ٱلدُّنْيَا ۖ وَلَعَذَابُ ٱلْـَٔاخِرَةِ أَشَقُّ ۖ وَمَا لَهُم مِّنَ ٱللَّهِ مِن وَاقٍۢ ﴿٣٤﴾

इस सांसारिक जीवन ही में उनके लिए यातना है कि उन्हें मोमिनों के हाथों क़त्ल एवं क़ै द का सामना करना पड़ेगा। जबकि आख़िरत की यातना जो उनकी प्रतीक्षा कर रही है, उनके लिए दुनिया की यातना से अधिक कठोर और भारी है। क्योंकि उसमें तीव्रता और निर्बाध स्थायित्व होगा। और उन्हें क़ियामत के दिन अल्लाह की यातना से कोई बचाने वाला भी न होगा।

۞ مَّثَلُ ٱلْجَنَّةِ ٱلَّتِى وُعِدَ ٱلْمُتَّقُونَ ۖ تَجْرِى مِن تَحْتِهَا ٱلْأَنْهَـٰرُ ۖ أُكُلُهَا دَآئِمٌۭ وَظِلُّهَا ۚ تِلْكَ عُقْبَى ٱلَّذِينَ ٱتَّقَوا۟ ۖ وَّعُقْبَى ٱلْكَـٰفِرِينَ ٱلنَّارُ ﴿٣٥﴾

उस जन्नत की विशेषता जिसका अल्लाह ने उन लोगों से वादा किया है, जो उसके आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर उससे डरने वाले हैं, यह है कि उसके महलों और पेड़ों के नीचे से नहरें बहती हैं, उसके फल, दुनिया के फलों के विपरीत, स्थायी हैं, जो कभी खत्म नहीं होंगे और उसकी छाया भी स्थायी है, जो न कभी समाप्त होगी और न छोटी होगी। यही उन लोगों का परिणाम है, जो अल्लाह के आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर उससे डरते रहे। और काफ़िरों का परिणामआग है, जिसमें वे प्रवेश करेंगे और हमेशा के लिए उसी में रहेंगे। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

وَٱلَّذِينَ ءَاتَيْنَـٰهُمُ ٱلْكِتَـٰبَ يَفْرَحُونَ بِمَآ أُنزِلَ إِلَيْكَ ۖ وَمِنَ ٱلْأَحْزَابِ مَن يُنكِرُ بَعْضَهُۥ ۚ قُلْ إِنَّمَآ أُمِرْتُ أَنْ أَعْبُدَ ٱللَّهَ وَلَآ أُشْرِكَ بِهِۦٓ ۚ إِلَيْهِ أَدْعُوا۟ وَإِلَيْهِ مَـَٔابِ ﴿٣٦﴾

ه जिन यहूदियों को हमने तौरात दी और जिन ईसाइयों को हमने इंजील दी, वे उस (क़ुरआन) से प्रसन्न होते हैं, जो (ऐ रसूल!) आपपर उतारा गया है; क्योंकि वह उनकी पुस्तकों की कु छ बातों से सहमति रखता है। तथा यहूदियों और ईसाइयों के संप्रदायों में से कु छ लोग आपकी ओर अवतिरत पुस्तक के कु छ भाग का इनकार करते हैं, जो उनकी इच्छाओं से मेल नहीं खाता, या जो उनके परिवर्तन और विकृ ति को उजागर करता है। (ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें: अल्लाह ने मुझे आदेश दिया है कि मैं के वल उसी की इबादत करूँ और उसके साथ उसके अलावा को साझी न बनाऊँ । मैं के वल उसी की ओर बुलाता हूँ और उसके अलावा किसी और की ओर नहीं बुलाता। और के वल उसी की ओर मेरा लौटना है। तौरात और इंजील ने भी यही शिक्षा दी है। ي

وَكَذَٰلِكَ أَنزَلْنَـٰهُ حُكْمًا عَرَبِيًّۭا ۚ وَلَئِنِ ٱتَّبَعْتَ أَهْوَآءَهُم بَعْدَ مَا جَآءَكَ مِنَ ٱلْعِلْمِ مَا لَكَ مِنَ ٱللَّهِ مِن وَلِىٍّۢ وَلَا وَاقٍۢ ﴿٣٧﴾

और जैसे हमने पिछली पुस्तकों को उनके समुदायों की भाषा में उतारा था, उसी प्रकार हमने (ऐ रसूल!) आपपर क़ु रआन को अरबी भाषा में सच्चाई को स्पष्ट करने वाला एक निर्णायक फ़रमान बनाकर उतारा है। और यदि (ऐ रसूल!) आपने अपने पास उस ज्ञान के आ जाने के पश्चात जो अल्लाह ने आपको सिखाया है, किताब वालों की इच्छाओं का पालन किया उनके उस चीज़ को हटाने की सौदेबाज़ी में जो उनकी इच्छाओं से मेल नहीं खाती, तो अल्लाह के मुक़ाबले में आपका कोई संरक्षक नहीं होगा, जो आपके मामले को संभाले और आपके दुश्मनों के खिलाफ़ आपकी सहायता करे, और न ही आपको अल्लाह की यातना से कोई बचाने वाला होगा।

وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا رُسُلًۭا مِّن قَبْلِكَ وَجَعَلْنَا لَهُمْ أَزْوَٰجًۭا وَذُرِّيَّةًۭ ۚ وَمَا كَانَ لِرَسُولٍ أَن يَأْتِىَ بِـَٔايَةٍ إِلَّا بِإِذْنِ ٱللَّهِ ۗ لِكُلِّ أَجَلٍۢ كِتَابٌۭ ﴿٣٨﴾

أ جل كتاب (ऐ रसूल!) हमने आपसे पहले रसूलों को मनुष्यों ही में से भेजे। इसलिए आप (दूसरे) रसूलों से अलग कोई (अनोखे) रसूल नहीं हैं। तथा हमने अन्य सभी मनुष्यों की तरह उनके लिए पत्नियाँ और बच्चे बनाए। हमने उन्हें फ़िरिश्ते नहीं बनाए,जो न शादी करते हैं और न बच्चे जनते हैं। और आप भी उन्हीं रसूलों में से हैं, जो मनुष्य थे, शादी- ब्याह करते थे और बच्चे पैदा करते थे, तो फिर आपके ऐसा होने पर इन मुश्रिकों को आश्चर्य क्यों होता है?! तथा किसी रसूल के बस की बात नहीं है कि अल्लाह की अनुमति के बिना अपनी ओर से कोई निशानी ले आए। हर मामले के लिए जिसका अल्लाह ने फ़ै सला किया है एक किताब है, जिसमें वह उल्लिखित है और उसका एक निर्धारित समय है, जो आगे-पीछे नहीं हो सकता।

يَمْحُوا۟ ٱللَّهُ مَا يَشَآءُ وَيُثْبِتُ ۖ وَعِندَهُۥٓ أُمُّ ٱلْكِتَـٰبِ ﴿٣٩﴾

अल्लाह जिस भलाई, या बुराई, या सौभाग्य, या दुर्भाग्य को चाहता है, मिटा देता है और उनमें से जिसे चाहता है बाक़ी रखता है। और उसी के पास 'लौह़ -ए- महफ़ू ज़' है। वह उन सब का संदर्भ है, और जो कु छ भी मिटाया जाता या बाक़ी रखा जाता है, उसी के अनुसार होता है, जो उसमें अंकित है।

وَإِن مَّا نُرِيَنَّكَ بَعْضَ ٱلَّذِى نَعِدُهُمْ أَوْ نَتَوَفَّيَنَّكَ فَإِنَّمَا عَلَيْكَ ٱلْبَلَـٰغُ وَعَلَيْنَا ٱلْحِسَابُ ﴿٤٠﴾

(ऐ नबी!) यदि हम आपकी मृत्यु से पहले आपको उस यातना का कु छ भाग दिखा दें जिसका हम उनसे वादा करते हैं, तो यह हमारा काम है, या उसे आपको दिखाने से पहले ही आपको मौत दे दें, तो आपका काम केवल उसको पहुँचा देना है, जिसे पहुँचाने का हमने आपको आदेश दिया है। आपका काम उन्हें बदला देना या उनका हिसाब लेना नहीं है। क्योंकि यह हमारा काम है।

أَوَلَمْ يَرَوْا۟ أَنَّا نَأْتِى ٱلْأَرْضَ نَنقُصُهَا مِنْ أَطْرَافِهَا ۚ وَٱللَّهُ يَحْكُمُ لَا مُعَقِّبَ لِحُكْمِهِۦ ۚ وَهُوَ سَرِيعُ ٱلْحِسَابِ ﴿٤١﴾

क्या इन काफ़िरों ने यह नहीं देखा कि हम कु फ़्र की धरती पर आते हैं, इस्लाम का प्रसार कर और मुसलमानों को उसपर विजय प्रदान करके उसे उसके किनारों से कम कर देते हैं। और अल्लाह जो कु छ चाहता है, आदेश देता है और अपने बंदों के बीच फ़ै सला करता है। उसके फ़ै सले को कोई टालने वाला, या उसमें संशोधन करने वाला, या उसे बदलने वाला नहीं है। वह महिमावान बहुत शीघ्र हिसाब लेने वाला है, वह अगले और पिछले सभी लोगों का एक ही दिन में हिसाब ले लेगा। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

وَقَدْ مَكَرَ ٱلَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ فَلِلَّهِ ٱلْمَكْرُ جَمِيعًۭا ۖ يَعْلَمُ مَا تَكْسِبُ كُلُّ نَفْسٍۢ ۗ وَسَيَعْلَمُ ٱلْكُفَّـٰرُ لِمَنْ عُقْبَى ٱلدَّارِ ﴿٤٢﴾

पिछले समुदायों ने अपने नबियों के साथ छल किया, चालें चलीं और उनकी लाई हई बातों को झुठलाया। परंतु उन्होंने उनके ख़िलाफ़ उपाय (साज़िश) करके क्या कर लिया? कु छ नहीं; क्योंकि प्रभावी उपाय के वल अल्लाह का उपाय है, किसी और का नहीं। तथा वह महिमावान् (अल्लाह) ही है, जो सारी सृष्टि के सभी कर्मों को जानता है, उनमें से कु छ भी उससे छिपा नहीं है। और उस समय इन झुठलाने वालों को पता चल जाएगा कि वे अल्लाह पर ईमान न लाने में कितने गलत थे और ईमान वाले लोग कितने सही थे। इसलिए उन्होंने जन्नत और अच्छा परिणाम प्राप्त किया।

وَيَقُولُ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ لَسْتَ مُرْسَلًۭا ۚ قُلْ كَفَىٰ بِٱللَّهِ شَهِيدًۢا بَيْنِى وَبَيْنَكُمْ وَمَنْ عِندَهُۥ عِلْمُ ٱلْكِتَـٰبِ ﴿٤٣﴾

जिन लोगों ने कु फ़्र की नीति अपनाई, वे कहते हैं: (ऐ मुहम्मद!) आप अल्लाह द्वारा भेजे नहीं गए हैं। (ऐ रसूल!) आप उनसे कह दें: मेरे और तुम्हारे बीच, इस बात पर अल्लाह गवाह के रूप में काफ़ी है कि मैं अपने पालनहार की ओर से तुम्हारी तरफ़ रसूल बनाकर भेजा गया हूँ, तथा उनकी भी गवाही काफ़ी है, जिनके पास आकाशीय ग्रंथों का ज्ञान है, जिनमें मेरी विशेषताएँ वर्णित हैं। और जिसकी सत्यता का साक्षी अल्लाह है, उसे किसी के झुठलाने से कोई नुकसान नहीं पहुँचता। स्रोत:अल-मुख़्तसर फ़ी तफ़सीरिल क़ु रआनिल करीम

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