ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ وَصَدُّوا۟ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِ أَضَلَّ أَعْمَـٰلَهُمْ ﴿١﴾
जिन लोगों ने अल्लाह का इनकार किया और लोगों को अल्लाह के धर्म से रोका, अल्लाह ने उनके कर्मों को व्यर्थ कर दिया।
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मदनी · 38 आयतें
ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ وَصَدُّوا۟ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِ أَضَلَّ أَعْمَـٰلَهُمْ ﴿١﴾
जिन लोगों ने अल्लाह का इनकार किया और लोगों को अल्लाह के धर्म से रोका, अल्लाह ने उनके कर्मों को व्यर्थ कर दिया।
وَٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ وَءَامَنُوا۟ بِمَا نُزِّلَ عَلَىٰ مُحَمَّدٍۢ وَهُوَ ٱلْحَقُّ مِن رَّبِّهِمْ ۙ كَفَّرَ عَنْهُمْ سَيِّـَٔاتِهِمْ وَأَصْلَحَ بَالَهُمْ ﴿٢﴾
بالهم और जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए और अच्छे कार्य किए और उसपर ईमान लाए, जो अल्लाह ने अपने रसूल मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर अवतरित किया है (और वही उनके पालनहार की ओर से सत्य है), अल्लाह ने उनके पापों को मिटा दिया, चुनाँचे वह उनपर उनकी पकड़ नहीं करेगा और उनके सांसारिक और आख़िरत के मामलों को ठीक कर दिया।
ذَٰلِكَ بِأَنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ ٱتَّبَعُوا۟ ٱلْبَـٰطِلَ وَأَنَّ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ ٱتَّبَعُوا۟ ٱلْحَقَّ مِن رَّبِّهِمْ ۚ كَذَٰلِكَ يَضْرِبُ ٱللَّهُ لِلنَّاسِ أَمْثَـٰلَهُمْ ﴿٣﴾
أمثلهم दोनों पक्षों के लिए यह उल्लिखित बदला इस कारण है कि अल्लाह का इनकार करने वालों ने असत्य का अनुसरण किया और अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान रखने वालों ने अपने रब की ओर से सत्य का अनुसरण किया। अतः दोनों के प्रयासों में अंतर के कारण उनका बदला अलग-अलग था। जिस तरह अल्लाह ने दोनों पक्षों: मोमिनों के पक्ष और काफ़िरों के पक्ष के बारे में अपना निर्णय स्पष्ट किया, उसी तरह अल्लाह लोगों के लिए उनकी मिसालें बयान करता है, इसलिए हर एक को उसके सदृश से मिलाता है।
فَإِذَا لَقِيتُمُ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ فَضَرْبَ ٱلرِّقَابِ حَتَّىٰٓ إِذَآ أَثْخَنتُمُوهُمْ فَشُدُّوا۟ ٱلْوَثَاقَ فَإِمَّا مَنًّۢا بَعْدُ وَإِمَّا فِدَآءً حَتَّىٰ تَضَعَ ٱلْحَرْبُ أَوْزَارَهَا ۚ ذَٰلِكَ وَلَوْ يَشَآءُ ٱللَّهُ لَٱنتَصَرَ مِنْهُمْ وَلَـٰكِن لِّيَبْلُوَا۟ بَعْضَكُم بِبَعْضٍۢ ۗ وَٱلَّذِينَ قُتِلُوا۟ فِى سَبِيلِ ٱللَّهِ فَلَن يُضِلَّ أَعْمَـٰلَهُمْ ﴿٤﴾
ه يضل أعملهم अतः जब (ऐ ईमान वालो!) तुम युद्धरत काफिरों से मिलो, तो अपनी तलवारों से उनकी गरदनें उड़ाओ और जब तक उन्हें अधिक से अधिक संख्या में क़त्ल करके उनकी शक्ति तोड़ न दो, उनसे लड़ाई जारी रखो। जब उनमें से बहुत से लोगों को क़त्लकर चुको, तो कै दियों के बंधनों को कस लो। फिर उन्हें क़ै द करने के बाद हित की अपेक्षा के अनुसार तुम्हारे पास यह विकल्प है कि: उनपर उपकार करते हुए कु छ लिए बिना ही उन्हें रिहा कर दो, या उन्हें पैसे लेकर या किसी अन्य चीज़ के बदले में छोड़ दो। उनसे तब तक लड़ते रहो और उन्हें बंदी बनाते रहो, जब तक कि काफ़िरों के इस्लाम लाने या उनकी संधि के साथ युद्ध समाप्त न हो जाए। यह उपर्युक्त काफ़िरों द्वारा मोमिनों का परीक्षण, दिनों का परिवर्तन और उनमें से कु छ की दूसरों पर विजय, अल्लाह का हुक्म (फै सला) है। यदि अल्लाह बिना लड़ाई के काफ़िरों से बदला लेना चाहे, तो वह अवश्य उनसे बदला ले ले। लेकिन अल्लाह ने तुम्हें एक-दूसरे के द्वारा आज़माने के लिए जिहाद का कानून बनाया है। चुनाँचे वह उन लोगों की परीक्षा लेता है जो ईमान वालों में से लड़ते हैं और जो नहीं लड़ते हैं, तथा काफ़िर की मोमिन के द्वारा परीक्षा लेता है। क्योंकि यदि उसने किसी ईमान वाले को क़त्ल कर दिया, तो ईमान वाला जन्नत में जाएगा, लेकिन अगर किसी ईमान वाले ने उसे मार दिया, तो वह जहन्नममें जाएगा। और जो लोग अल्लाह के रास्ते में मारे गए, तो अल्लाह उनके कर्मों को कदापि व्यर्थ नहीं करेगा। سيهديهم ويص لح بالهم
سَيَهْدِيهِمْ وَيُصْلِحُ بَالَهُمْ ﴿٥﴾
वह उन्हें उनके सांसारिक जीवन में सच्चाई का पालन करने की तौफ़ीक़ देगा और उनकी स्थिति सुधार देगा। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर
وَيُدْخِلُهُمُ ٱلْجَنَّةَ عَرَّفَهَا لَهُمْ ﴿٦﴾
वह उन्हें क़ियामत के दिन जन्नत में दाख़िल करेगा, जिससे उसने उन्हें दुनिया में उसके विवरण के साथ परिचित करा दिया है और वे उसे पहचान गए हैं, तथा उसने उन्हें आखिरत में उसके अंदर उनके ठिकानों की पहचान करा दी है।
يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓا۟ إِن تَنصُرُوا۟ ٱللَّهَ يَنصُرْكُمْ وَيُثَبِّتْ أَقْدَامَكُمْ ﴿٧﴾
ऐ अल्लाह पर ईमान रखने वालो और उसकी शरीयत पर अमल करने वालो! यदि तुम अल्लाह की, उसके नबी और उसके धर्म की मदद करके और काफ़िरों से लड़ाई करके , मदद करोगे, तो अल्लाह तुम्हें उनपर विजय प्रदान करके तुम्हारी मदद करेगा और युद्ध में उनसे मुठभेड़ के समय तुम्हारे क़दमजमा देगा।
وَٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ فَتَعْسًۭا لَّهُمْ وَأَضَلَّ أَعْمَـٰلَهُمْ ﴿٨﴾
और जिन लोगों ने अल्लाह और उसके रसूलके साथ कु फ़्र किया, उनके लिए नुकसान और विनाश है और अल्लाह ने उनके कर्मों के प्रतिफलको नष्ट कर दिया।
ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمْ كَرِهُوا۟ مَآ أَنزَلَ ٱللَّهُ فَأَحْبَطَ أَعْمَـٰلَهُمْ ﴿٩﴾
उन्हें यह सज़ा इस कारण मिली कि उन्होंने उस क़ुरआन को नापसंद किया, जो अल्लाह ने अपने रसूल पर उतारा, सिर्फ इस कारण कि उसमें अल्लाह की तौहीद (एके श्वरवाद) की शिक्षा है। तो अल्लाह ने उनके कार्यों को अकारथ कर दिया। इसलिए वे दुनिया और आखिरत दोनों जगह घाटे में रहे।
۞ أَفَلَمْ يَسِيرُوا۟ فِى ٱلْأَرْضِ فَيَنظُرُوا۟ كَيْفَ كَانَ عَـٰقِبَةُ ٱلَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ ۚ دَمَّرَ ٱللَّهُ عَلَيْهِمْ ۖ وَلِلْكَـٰفِرِينَ أَمْثَـٰلُهَا ﴿١٠﴾
क्या ये झुठलाने वाले लोग धरती में चले-फिरे नहीं, ताकि वे सोच-विचार करते कि उनसे पहले झुठलाने वाले लोगों का अंत कैसा रहा? वास्तव में, वह एक दर्दनाक अंत था। अल्लाह ने उनके घरों को उनपर ध्वस्त कर दिया और इस तरह उसने उन्हें, उनके बाल-बच्चों और उनके धन को नष्ट कर दिया। तथा काफ़िरों के लिए हर समय और जगह में इसी तरह की सज़ाएँ हैं।
ذَٰلِكَ بِأَنَّ ٱللَّهَ مَوْلَى ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَأَنَّ ٱلْكَـٰفِرِينَ لَا مَوْلَىٰ لَهُمْ ﴿١١﴾
दोनों पक्षों के लिए उक्त (अलग-अलग) बदला इसकारण है कि अल्लाह ईमान वालों का मददगार है और काफ़िरों का कोई सहायक नहीं है।
إِنَّ ٱللَّهَ يُدْخِلُ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ جَنَّـٰتٍۢ تَجْرِى مِن تَحْتِهَا ٱلْأَنْهَـٰرُ ۖ وَٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ يَتَمَتَّعُونَ وَيَأْكُلُونَ كَمَا تَأْكُلُ ٱلْأَنْعَـٰمُ وَٱلنَّارُ مَثْوًۭى لَّهُمْ ﴿١٢﴾
निश्चय अल्लाह उन लोगों को, जो अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाए और अच्छे कर्म किए, ऐसे बागों में दाखिल करेगा, जिनके महलों और पेड़ों के नीचे से नहरें बहती हैं। तथा जिन लोगों ने अल्लाह और उसके रसूल के साथ कुफ़्र किया, वे अपनी इच्छाओं का पालन करके दुनिया में आनंद लेते हैं और उसी तरह खाते हैं, जैसे जानवर खाते हैं। उन्हें के वल अपने पेट और भोग-विलास की परवाह होती है। और क़ियामत के दिन आग ही उनका ठिकाना है जिसमें वे शरण लेंगे।
وَكَأَيِّن مِّن قَرْيَةٍ هِىَ أَشَدُّ قُوَّةًۭ مِّن قَرْيَتِكَ ٱلَّتِىٓ أَخْرَجَتْكَ أَهْلَكْنَـٰهُمْ فَلَا نَاصِرَ لَهُمْ ﴿١٣﴾
पिछले समुदायों की बस्तियों में से कितनी ही बस्तियाँ थीं, जो मक्का से अधिक शक्तिशाली तथा अधिक धन और संतान वाली थीं, जहाँ से उसके लोगों ने आपको निकाल दिया है। हमने उन्हें नष्ट कर दिया जब उन्होंने अपने रसूलों को झुठलाया। फिर उनका कोई सहायक न हुआ, जो उन्हें अल्लाह की सज़ा से बचा सके । इसलिए अगर हम मक्का वालों को नष्ट करना चाहें, तो हम इसमें अक्षम नहीं हैं। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर
أَفَمَن كَانَ عَلَىٰ بَيِّنَةٍۢ مِّن رَّبِّهِۦ كَمَن زُيِّنَ لَهُۥ سُوٓءُ عَمَلِهِۦ وَٱتَّبَعُوٓا۟ أَهْوَآءَهُم ﴿١٤﴾
क्या वह व्यक्ति जिसके पास अपने पालनहार की ओर से स्पष्ट प्रमाण और खुला तर्क है और वह उसकी इबादत ज्ञान और अंतर्दृष्टि के साथ करता है, उस व्यक्ति की तरह है, जिसके लिए शैतान ने उसके बुरे काम को सुंदर बना दिया, तथा उन्होंने अपनी इच्छाओं का पालन करते हुए मूर्तियों की पूजा की, पाप किए और रसूलों को झुठलाया?
مَّثَلُ ٱلْجَنَّةِ ٱلَّتِى وُعِدَ ٱلْمُتَّقُونَ ۖ فِيهَآ أَنْهَـٰرٌۭ مِّن مَّآءٍ غَيْرِ ءَاسِنٍۢ وَأَنْهَـٰرٌۭ مِّن لَّبَنٍۢ لَّمْ يَتَغَيَّرْ طَعْمُهُۥ وَأَنْهَـٰرٌۭ مِّنْ خَمْرٍۢ لَّذَّةٍۢ لِّلشَّـٰرِبِينَ وَأَنْهَـٰرٌۭ مِّنْ عَسَلٍۢ مُّصَفًّۭى ۖ وَلَهُمْ فِيهَا مِن كُلِّ ٱلثَّمَرَٰتِ وَمَغْفِرَةٌۭ مِّن رَّبِّهِمْ ۖ كَمَنْ هُوَ خَـٰلِدٌۭ فِى ٱلنَّارِ وَسُقُوا۟ مَآءً حَمِيمًۭا فَقَطَّعَ أَمْعَآءَهُمْ ﴿١٥﴾
उस जन्नत की विशेषता, जिसमें दाखिल करने का वादा, अल्लाह ने उन लोगों से किया है, जो (उसके आदेशों का पालन करके और उसके निषेधों से बचकर) उससे डरने वाले हैं, यह है कि उसमें ऐसे पानी की नहरें हैं, जिसकी गंध या स्वाद में अधिक दिनों तक ठहरे रहने के कारण कोई बदलाव नहीं आता। तथा ऐसे दूध की नहरें हैं, जिसका स्वाद नहीं बदला। और ऐसी शराब की नहरें हैं, जो पीने वालों के लिए स्वादिष्ट है। तथा ऐसे मधु की नहरें हैं, जो अशुद्धियों से शुद्ध किए गए हैं। और उनके लिए उसके अंदर हर प्रकार के फल होंगे, जो वे चाहेंगे। तथा उनके लिए इन सबसे बढ़कर अल्लाह की ओर से उनके गुनाहों की माफ़ी होगी। अतः अल्लाह उनपर उनकी पकड़ नहीं करेगा। क्या वह व्यक्ति जिसका यह बदला है, उसके बराबर हो सकता है, जो हमेशा जहन्नम में रहने वाला है, उससे कभी बाहर नहीं निकलेगा, और उन्हें बहुत गर्म पानी पिलाया जाएगा, जो अपनी गर्मी की तीव्रता से उनके पेट की आँतों को टुकड़े-टुकड़े कर देगा?!
وَمِنْهُم مَّن يَسْتَمِعُ إِلَيْكَ حَتَّىٰٓ إِذَا خَرَجُوا۟ مِنْ عِندِكَ قَالُوا۟ لِلَّذِينَ أُوتُوا۟ ٱلْعِلْمَ مَاذَا قَالَ ءَانِفًا ۚ أُو۟لَـٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ طَبَعَ ٱللَّهُ عَلَىٰ قُلُوبِهِمْ وَٱتَّبَعُوٓا۟ أَهْوَآءَهُمْ ﴿١٦﴾
ى और मुनाफ़िक़ों में से कु छ लोग ऐसे हैं, जो (ऐ रसूल!) आपकी ओर कान लगाते हैं, लेकिन उनका उद्देश्य स्वीकार करना नहीं, बल्कि मुँह फे रना होता है। यहाँ तक कि जब आपके पास से निकलते हैं, तो अनजान बनते हुए और उपेक्षा करते हुए उन लोगों से कहते हैं, जिन्हें अल्लाह ने ज्ञान दिया है: उन्होंने अभी-अभी अपनी बात में क्या कहा? यही वे लोग हैं, जिनके दिलों पर अल्लाह ने मुहर लगा दी है, इसलिए कोई अच्छाई उन तक नहीं पहुँचती, तथा उन्होंने अपनी इच्छाओं का पालन किया है, जिनके कारण वे सच्चाई से अंधे कर दिए गए हैं।
وَٱلَّذِينَ ٱهْتَدَوْا۟ زَادَهُمْ هُدًۭى وَءَاتَىٰهُمْ تَقْوَىٰهُمْ ﴿١٧﴾
और जिन लोगों ने सत्य का रास्ता अपनाया और रसूलसल्लल्लाहु अलैहि व सल्लमके लाए हुए धर्म का पालन किया, उनके रब ने उन्हें मार्गदर्शन में बढ़ा दिया और अधिक भलाई का सामर्थ्य प्रदान किया, तथा उन्हें आग (जहन्नम) से बचाने वाला कामकरने के लिए प्रेरित किया।
فَهَلْ يَنظُرُونَ إِلَّا ٱلسَّاعَةَ أَن تَأْتِيَهُم بَغْتَةًۭ ۖ فَقَدْ جَآءَ أَشْرَاطُهَا ۚ فَأَنَّىٰ لَهُمْ إِذَا جَآءَتْهُمْ ذِكْرَىٰهُمْ ﴿١٨﴾
तो क्या काफ़िर लोग यही प्रतीक्षा कर रहे हैं कि क़ियामत उनपर उनकी पूर्व जानकारी के बिना अचानक आ जाए?! निश्चय उसकी निशानियाँ तो आ ही चुकी हैं। जैसे कि मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का नबी बनकर आना और चंद्रमा का दो टुकड़े होना। फिर जब क़ियामत उनके पास आ गई, तो उनके लिए उपदेश ग्रहण करना कै से संभव होगा?
فَٱعْلَمْ أَنَّهُۥ لَآ إِلَـٰهَ إِلَّا ٱللَّهُ وَٱسْتَغْفِرْ لِذَنۢبِكَ وَلِلْمُؤْمِنِينَ وَٱلْمُؤْمِنَـٰتِ ۗ وَٱللَّهُ يَعْلَمُ مُتَقَلَّبَكُمْ وَمَثْوَىٰكُمْ ﴿١٩﴾
तो (ऐ रसूल!) आप यकीन कर लें कि अल्लाह के सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं, तथा अल्लाह से अपने पापों के लिए क्षमा माँगें और ईमान वाले पुरुषों और ईमान वाली स्त्रियों के पापों के लिए भी उससे क्षमा माँगे। अल्लाह दिन में तुम्हारे चलने-फिरने और रात में तुम्हारे ठहरने के स्थान को जानता है। उससे उसमें से कु छ भी छिपा नहीं है। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर
وَيَقُولُ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ لَوْلَا نُزِّلَتْ سُورَةٌۭ ۖ فَإِذَآ أُنزِلَتْ سُورَةٌۭ مُّحْكَمَةٌۭ وَذُكِرَ فِيهَا ٱلْقِتَالُ ۙ رَأَيْتَ ٱلَّذِينَ فِى قُلُوبِهِم مَّرَضٌۭ يَنظُرُونَ إِلَيْكَ نَظَرَ ٱلْمَغْشِىِّ عَلَيْهِ مِنَ ٱلْمَوْتِ ۖ فَأَوْلَىٰ لَهُمْ ﴿٢٠﴾
अल्लाह पर ईमान रखने वाले लोग (इस बात की कामना करते हुए कि अल्लाह अपने रसूलपर कोई सूरत उतारे, जिसमें लड़ाई के हुक्मका उल्लेख हो) कहते हैं: अल्लाह ने कोई सूरत क्यों नहीं उतारी, जिसमें युद्ध का उल्लेख हो? फिर जब अल्लाह युद्ध के उल्लेख पर आधारित अपनी व्याख्या और नियमों में अच्छी तरह से स्पष्ट कोई सूरत उतारता है, तो (ऐ रसूल!) आप उन मुनाफ़िक़ों को देखते हैं, जिनके दिलों में संदेह है, कि वे आपकी ओर उस व्यक्ति की तरह देखते हैं, जिसपर भय और डर की गंभीरता से बेहोशी छा गई हो। तो अल्लाह ने ऐसे लोगों को धमकी दी है कि उनके लड़ाई से पीछे हटने और उससे भय खाने के कारण उनकी यातना निकट आ चुकी है।
طَاعَةٌۭ وَقَوْلٌۭ مَّعْرُوفٌۭ ۚ فَإِذَا عَزَمَ ٱلْأَمْرُ فَلَوْ صَدَقُوا۟ ٱللَّهَ لَكَانَ خَيْرًۭا لَّهُمْ ﴿٢١﴾
अल्लाह के आदेश का पालन करना और भली बात कहना, उनके लिए अच्छा है। फिर जब लड़ना अनिवार्य हो जाए और उसके बिना कोई चारा न हो, तो यदि वे अल्लाह पर अपने ईमान के प्रति और उसकी आज्ञाकारिता में सच्चे रहें, तो यह उनके लिए निफ़ाक़ और अल्लाह के आदेशों की अवहेलना करने से बेहतर होगा।
فَهَلْ عَسَيْتُمْ إِن تَوَلَّيْتُمْ أَن تُفْسِدُوا۟ فِى ٱلْأَرْضِ وَتُقَطِّعُوٓا۟ أَرْحَامَكُمْ ﴿٢٢﴾
यदि तुम अल्लाह पर ईमान लाने और उसकी आज्ञा मानने से दूर हो जाओ, तो तुम्हारी स्थिति पर यही प्रबल है कि तुम कु फ़्र और पापों के द्वारा धरती में बिगाड़ पैदा करोगे और रिश्तेदारी के बंधनों को तोड़ोगे; जैसा कि जाहिलिय्यत (इस्लाम से पूर्व) के समयकाल में तुम्हारी स्थिति थी।
أُو۟لَـٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ لَعَنَهُمُ ٱللَّهُ فَأَصَمَّهُمْ وَأَعْمَىٰٓ أَبْصَـٰرَهُمْ ﴿٢٣﴾
ये धरती में बिगाड़ पैदा करने और रिश्ते-नातों को तोड़ने वाले ही वे लोग हैं, जिन्हें अल्लाह ने अपनी दया से दूर कर दिया, उनके कानों को स्वीकारने और अनुपालन करने के इरादे से सत्य को सुनने से बहरा कर दिया और उनकी आँखों को उसे सोच-विचार करने की दृष्टि से देखने से अंधा कर दिया।
أَفَلَا يَتَدَبَّرُونَ ٱلْقُرْءَانَ أَمْ عَلَىٰ قُلُوبٍ أَقْفَالُهَآ ﴿٢٤﴾
तो इन मुँह फेरने वालों ने क़ुरआन पर विचार क्यों नहीं किया और उस पर ध्यान क्यों नहीं दिया जो उसमें है?! यदि वे उसपर विचार करते, तो वह अवश्य उन्हें सभी अच्छाइयों का मार्गदर्शन करता और उन्हें सभी बुराइयों से दूर रखता। या फिर उनके दिलों पर मज़बूत ताले पड़े हुए हैं, जिसके कारण कोई उपदेश उन तक नहीं पहुँचता और न कोई याददहानी उन्हें लाभ देती है।
إِنَّ ٱلَّذِينَ ٱرْتَدُّوا۟ عَلَىٰٓ أَدْبَـٰرِهِم مِّنۢ بَعْدِ مَا تَبَيَّنَ لَهُمُ ٱلْهُدَى ۙ ٱلشَّيْطَـٰنُ سَوَّلَ لَهُمْ وَأَمْلَىٰ لَهُمْ ﴿٢٥﴾
निश्चय जो लोग अपने ईमान से कु फ़्र और निफ़ाक़ की ओर फिर गए, इसके बाद कि उनपर तर्क स्थापित हो गया और नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की सच्चाई उनके लिए स्पष्ट हो गई। दरअसल शैतान ही है जिसने उनके लिए कुफ़्र और निफ़ाक़ को सुशोभित किया है और उसे उनके लिए आसान बना दिया है और उन्हें लंबी आशा दिलाई है।
ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمْ قَالُوا۟ لِلَّذِينَ كَرِهُوا۟ مَا نَزَّلَ ٱللَّهُ سَنُطِيعُكُمْ فِى بَعْضِ ٱلْأَمْرِ ۖ وَٱللَّهُ يَعْلَمُ إِسْرَارَهُمْ ﴿٢٦﴾
उन्हें गुमराही के रास्ते पर इसलिए डाल दिया गया, क्योंकि उन्होंने गुप्त रूप से उन मुश्रिकों से कहा, जिन्होंने अल्लाह की अपने रसूल पर उतारी हुई वह़्य (प्रकाशना) को नापसंद किया: हम कुछ मामलों में तुम्हारी बात मानेंगे, जैसे कि लड़ने से हतोत्साहित करना। और अल्लाह जानता है जो कुछ वे छिपाते और गुप्त रखते हैं, उससे कोई बात छिपी नहीं है। इसलिए वह उसमें से जो चाहता है, अपने रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के लिए प्रकट कर देता है। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर
فَكَيْفَ إِذَا تَوَفَّتْهُمُ ٱلْمَلَـٰٓئِكَةُ يَضْرِبُونَ وُجُوهَهُمْ وَأَدْبَـٰرَهُمْ ﴿٢٧﴾
तो आप उसे कै से देखते हैं जिस यातना और विकट स्थिति में वे उस समय होंगे, जब उनके प्राण निकालने पर नियुक्त फरिश्ते, उनके प्राण निकालते हुए, लोहे के हथोड़े से उनके चेहरों और पीठों पर मार रहे होंगे?!
ذَٰلِكَ بِأَنَّهُمُ ٱتَّبَعُوا۟ مَآ أَسْخَطَ ٱللَّهَ وَكَرِهُوا۟ رِضْوَٰنَهُۥ فَأَحْبَطَ أَعْمَـٰلَهُمْ ﴿٢٨﴾
यह यातना उन्हें इस कारण दी जाएगी कि उन्होंने हर उस चीज़ का अनुसरण किया जिसने अल्लाह को उनपर क्रोधित कर दिया, जैसे कुफ़्र, निफ़ाक़ तथा अल्लाह एवं उसके रसूल से दुश्मनी, और उस चीज़ को बुरा जाना, जो उन्हें उनके पालनहार के क़रीब लाती है और उनपर उसकी प्रसन्नता लाती है, जैसे अल्लाह पर ईमान लाना और उसके रसूलका अनुसरण करना। अतः अल्लाह ने उनके कर्मों को व्यर्थ कर दिया।
أَمْ حَسِبَ ٱلَّذِينَ فِى قُلُوبِهِم مَّرَضٌ أَن لَّن يُخْرِجَ ٱللَّهُ أَضْغَـٰنَهُمْ ﴿٢٩﴾
क्या वे मुनाफ़िक़, जिनके दिलों में संदेह है, यह समझते हैं कि अल्लाह उनके द्वेष को बाहर नहीं निकालेगा और उन्हें प्रकट नहीं करेगा?! निश्चय अल्लाह विपत्तियों के द्वारा उन्हें अवश्य बाहर निकालेगा। ताकि सच्चे ईमान वाला झूठे से अलग हो जाए तथा ईमान वाला स्पष्ट हो जाए और मुनाफिक़ का पर्दाफाश हो जाए।
وَلَوْ نَشَآءُ لَأَرَيْنَـٰكَهُمْ فَلَعَرَفْتَهُم بِسِيمَـٰهُمْ ۚ وَلَتَعْرِفَنَّهُمْ فِى لَحْنِ ٱلْقَوْلِ ۚ وَٱللَّهُ يَعْلَمُ أَعْمَـٰلَكُمْ ﴿٣٠﴾
और अगर हम (ऐ रसूल!) आपको मुनाफ़िक़ों की पहचान कराना चाहें, तो अवश्य आपको उनकी पहचान करा दें। फिर निश्चय आप उन्हें उनकी निशानियों से पहचान लेंगे, तथा आप उन्हें उनके बात करने की शैली से अवश्य पहचान लेंगे। तथा अल्लाह तुम्हारे कर्मों को जानता है। उससे उनमें से कु छ भी छिपा हुआ नहीं है, और वह तुम्हें उनका बदला देगा।
وَلَنَبْلُوَنَّكُمْ حَتَّىٰ نَعْلَمَ ٱلْمُجَـٰهِدِينَ مِنكُمْ وَٱلصَّـٰبِرِينَ وَنَبْلُوَا۟ أَخْبَارَكُمْ ﴿٣١﴾
और हमअवश्य ही (ऐ ईमान वालो!) जिहाद, दुश्मनों से लड़ाई करने और क़त्लके द्वारा तुम्हारी परीक्षा लेंगे, ताकि हमतुममें से अल्लाह की राह में जिहाद करने वालों और उसके दुश्मनों से लड़ने में धैर्य रखने वालों को जान लें। तथा हमतुम्हारी परीक्षा लेंगे, ताकि हमतुममें से सच्चे और झूठे को जान लें।
إِنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ وَصَدُّوا۟ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِ وَشَآقُّوا۟ ٱلرَّسُولَ مِنۢ بَعْدِ مَا تَبَيَّنَ لَهُمُ ٱلْهُدَىٰ لَن يَضُرُّوا۟ ٱللَّهَ شَيْـًۭٔا وَسَيُحْبِطُ أَعْمَـٰلَهُمْ ﴿٣٢﴾
وسيح بط أعملهم निःसंदेह जिन लोगों ने अल्लाह और उसके रसूल के साथ कु फ़्र किया, तथा खुद को और अन्य लोगों को अल्लाह के धर्म से रोका और उसके रसूल का विरोध किया तथा उनके साथ दुश्मनी की, जबकि यह स्पष्ट हो गया कि वह अल्लाह के नबी हैं - वे कदापि अल्लाह को कोई नुकसान नहीं पहुँचाएंगे, बल्कि वे ख़ुद अपना नुक़सान करेंगे और अल्लाह उनके कर्मों को व्यर्थ कर देगा।
۞ يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓا۟ أَطِيعُوا۟ ٱللَّهَ وَأَطِيعُوا۟ ٱلرَّسُولَ وَلَا تُبْطِلُوٓا۟ أَعْمَـٰلَكُمْ ﴿٣٣﴾
ऐ अल्लाह पर ईमान रखने वालो और उसकी शरीयत पर अमल करने वालो! अल्लाह का और उसके रसूल का आज्ञापालन करो। इस प्रकार कि उनके आदेशों का पालन करो और उनके निषेधों से बचो। तथा कु फ़्र और दिखावा आदि के द्वारा अपने कार्यों को व्यर्थ न करो।
إِنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ وَصَدُّوا۟ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِ ثُمَّ مَاتُوا۟ وَهُمْ كُفَّارٌۭ فَلَن يَغْفِرَ ٱللَّهُ لَهُمْ ﴿٣٤﴾
निश्चय जिन लोगों ने अल्लाह का इनकार किया और खुद को तथा अन्य लोगों को अल्लाह के धर्म से रोका, फिर तौबा करने से पहले अपने कु फ़्र ही की अवस्था में मर गए - तो अल्लाह उनके गुनाहों को हरगिज़ माफ नहीं करेगा, बल्कि उनपर उनकी पकड़ करेगा और उन्हें जहन्नम में दाखिल करेगा, जहाँ वे हमेशा रहेंगे। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर
فَلَا تَهِنُوا۟ وَتَدْعُوٓا۟ إِلَى ٱلسَّلْمِ وَأَنتُمُ ٱلْأَعْلَوْنَ وَٱللَّهُ مَعَكُمْ وَلَن يَتِرَكُمْ أَعْمَـٰلَكُمْ ﴿٣٥﴾
अतः (ऐ मोमिनो!) तुमअपने दुश्मन का सामना करने में कमज़ोर न बनो और उनकी ओर सुलह का हाथ न बढ़ाओ, इससे पहले कि वे तुम्हारी ओर सुलह का हाथ बढ़ाएँ। तथा तुम ही उनपर प्रभुत्वशाली और विजयी हो। और अल्लाह अपनी सहायता और समर्थन के साथ तुम्हारे संग है। वह तुम्हारे कर्मों के प्रतिफल को ज़रा भी कम नहीं करेगा, बल्कि अपने अनुग्रह और कृ पा से तुम्हें बढ़ाकर देगा।
إِنَّمَا ٱلْحَيَوٰةُ ٱلدُّنْيَا لَعِبٌۭ وَلَهْوٌۭ ۚ وَإِن تُؤْمِنُوا۟ وَتَتَّقُوا۟ يُؤْتِكُمْ أُجُورَكُمْ وَلَا يَسْـَٔلْكُمْ أَمْوَٰلَكُمْ ﴿٣٦﴾
दुनिया का जीवन तो के वल खेल और तमाशा है। अतः एक समझदार व्यक्ति को इसमें व्यस्त होकर आख़िरत से गाफ़िल नहीं होना चाहिए। यदि तुम अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान लाओ और अल्लाह से, उसके आदेशों का पालन करके और उसकी मना की हुई वस्तुओं से बचकर डरते रहो, तो वह तुम्हें तुम्हारे कर्मों का पूरा बदला देगा, कोई कमी नहीं करेगा। तथा वह तुमसे तुम्हारा सारा धन नहीं माँगेगा, बल्कि वह तुमसे के वल अनिवार्य ज़कात माँगेगा। إن يسٔلكموها فيحفكم تبخلوا ويخرج أضغنكم
إِن يَسْـَٔلْكُمُوهَا فَيُحْفِكُمْ تَبْخَلُوا۟ وَيُخْرِجْ أَضْغَـٰنَكُمْ ﴿٣٧﴾
अगर वह तुमसे तुम्हारा पूरा धन माँगे और उसे खूब ज़ोर देकर माँगे, तो तुम उसमें कं जूसी करोगे और तुम्हारे दिलों में अल्लाह के रास्ते में खर्च करने की जो अनिच्छा है, वह उसे बाहर कर देगा। अतः उसने तुमपर दया करते हुए तुमसे उसका माँगना छोड़ दिया।
هَـٰٓأَنتُمْ هَـٰٓؤُلَآءِ تُدْعَوْنَ لِتُنفِقُوا۟ فِى سَبِيلِ ٱللَّهِ فَمِنكُم مَّن يَبْخَلُ ۖ وَمَن يَبْخَلْ فَإِنَّمَا يَبْخَلُ عَن نَّفْسِهِۦ ۚ وَٱللَّهُ ٱلْغَنِىُّ وَأَنتُمُ ٱلْفُقَرَآءُ ۚ وَإِن تَتَوَلَّوْا۟ يَسْتَبْدِلْ قَوْمًا غَيْرَكُمْ ثُمَّ لَا يَكُونُوٓا۟ أَمْثَـٰلَكُم ﴿٣٨﴾
सुनो, तुम वे लोग हो कि तुम्हें कहा जाता है कि अपने धन का एक हिस्सा अल्लाह के रास्ते में खर्च करो, तुमसे अपना पूरा धन खर्च करने के लिए नहीं कहा जाता है, तो तुममें से कु छ लोग अपनी कं जूसी के कारण आवश्यक खर्च को रोक लेते हैं। और जो अपने धन का एक भाग अल्लाह के रास्ते में खर्च करने में कं जूसी करता है, तो वह वास्तव में ख़ुद पर कं जूसी करता है; क्योंकि वह अपने आपको खर्च करने के सवाब से वंचित कर देता है। अल्लाह तो बेनियाज़ है, उसे तुम्हारे खर्च करने की आवश्यकता नहीं है। और तुम ही उसके मुहताज हो। और यदि तुम इस्लाम से कु फ़्र की ओर फिर जाओगे, तो वह तुम्हें नष्ट कर देगा और तुम्हारे अलावा अन्य लोगों को ले आएगा। फिर वे तुम्हारे जैसे नहीं होंगे। बल्कि वे उसके आज्ञाकारी होंगे। स्रोत:अल-मुख़्तसर फ़ी तफ़सीरिल क़ु रआनिल करीम
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