होमतफ़सीरAl-Kahf (18)

तफ़सीर Al-Kahf (18) — الكهف

मक्की · 110 आयतें

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ٱلْحَمْدُ لِلَّهِ ٱلَّذِىٓ أَنزَلَ عَلَىٰ عَبْدِهِ ٱلْكِتَـٰبَ وَلَمْ يَجْعَل لَّهُۥ عِوَجَا ۜ ﴿١﴾

पूर्णता और प्रताप के गुणों के साथ सब प्रशंसा तथा खुली एवं छिपी नेमतों पर हर प्रकार की स्तुति अकेले अल्लाह के लिए है, जिसने अपने बंदे और रसूल मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लमपर क़ु रआन अवतिरत किया और इस क़ु रआन में कोई टेढ़ापन और सत्य से झुकाव नहीं रखा है।

قَيِّمًۭا لِّيُنذِرَ بَأْسًۭا شَدِيدًۭا مِّن لَّدُنْهُ وَيُبَشِّرَ ٱلْمُؤْمِنِينَ ٱلَّذِينَ يَعْمَلُونَ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ أَنَّ لَهُمْ أَجْرًا حَسَنًۭا ﴿٢﴾

बल्कि उसे सीधा बनाया, जिसमें कोई अंतर्विरोध और विभेद नहीं है, ताकि वह काफिरों को अल्लाह के पास से एक भारी यातना से डराए, जो उनकी प्रतीक्षा कर रही है, तथा अच्छे कर्म करने वाले मोमिनों को शुभ सूचना दे कि उनके लिए एक अच्छा बदला है, जिसके समान कोई अन्य बदला नहीं हो सकता। م كثين فيه أبدا

مَّـٰكِثِينَ فِيهِ أَبَدًۭا ﴿٣﴾

वे इस प्रतिफल में हमेशा रहेंगे, जो उनसे कभी खत्म नहीं होगा।

وَيُنذِرَ ٱلَّذِينَ قَالُوا۟ ٱتَّخَذَ ٱللَّهُ وَلَدًۭا ﴿٤﴾

तथा यहूदियों, ईसाइयों और कु छ मुशरिकों को डराए, जिन्होंने कहा: अल्लाह ने कोई संतान बना रखी है।

مَّا لَهُم بِهِۦ مِنْ عِلْمٍۢ وَلَا لِـَٔابَآئِهِمْ ۚ كَبُرَتْ كَلِمَةًۭ تَخْرُجُ مِنْ أَفْوَٰهِهِمْ ۚ إِن يَقُولُونَ إِلَّا كَذِبًۭا ﴿٥﴾

इन मिथ्यारोपण करने वालों के पास अल्लाह की ओर संतान की निस्बत करने के दावे का कोई ज्ञान या उसका कोई प्रमाण नहीं है, और न ही इनके उन बाप-दादाओं के पास कोई ज्ञान था, जिनका इन्होंने इस विषय में अनुकरण किया है। बहुत घृणित है वह बात, जो उनके मुँह से बिना समझ-बूझ के निकल रही है। वे के वल झूठ बोल रहे हैं, जिसका कोई आधार और सबूत नहीं है।

فَلَعَلَّكَ بَـٰخِعٌۭ نَّفْسَكَ عَلَىٰٓ ءَاثَـٰرِهِمْ إِن لَّمْ يُؤْمِنُوا۟ بِهَـٰذَا ٱلْحَدِيثِ أَسَفًا ﴿٦﴾

(ऐ रसूल!) यदि वे इस क़ु रआन पर ईमान न लाए, तो शायद आप अफ़सोस और दू:ख से खुद को नष्ट कर लेंगे। तो आप ऐसा न करें। क्योंकि उन्हें सीधे मार्ग पर लाने की ज़िम्मेदारी आपपर नहीं है। आपका काम के वल संदेश पहुँचा देना है।

إِنَّا جَعَلْنَا مَا عَلَى ٱلْأَرْضِ زِينَةًۭ لَّهَا لِنَبْلُوَهُمْ أَيُّهُمْ أَحْسَنُ عَمَلًۭا ﴿٧﴾

और हमने धरती पर पाए जाने वाले सभी प्राणियों को उसकी शोभा बना दिया है, ताकि हम उनका परीक्षण कर सकें कि उनमें से कौन अल्लाह को प्रसन्न करने वाले सबसे अच्छे कार्य करता है और कौन सबसे बुरे कार्य करता है। ताकि हमप्रत्येक को उसके योग्य बदला दें। وإنا لجعلون ما عليها صعيدا جرزا

وَإِنَّا لَجَـٰعِلُونَ مَا عَلَيْهَا صَعِيدًۭا جُرُزًا ﴿٨﴾

और धरती पर पाए जाने वाले सभी जीवों को हम वनस्पति से रहित मिट्टी बना देंगे। और यह धरती पर उपस्थित प्राणियों के जीवन का अंत हो जाने के बाद होगा। अतः इससे नसीहत प्राप्त करो। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

أَمْ حَسِبْتَ أَنَّ أَصْحَـٰبَ ٱلْكَهْفِ وَٱلرَّقِيمِ كَانُوا۟ مِنْ ءَايَـٰتِنَا عَجَبًا ﴿٩﴾

(ऐ रसलू) आप हरगिज़ यह न समझें कि गुफा वालों की कहानी और उनकी वह शिला जिस पर उनके नाम लिखे गए हैं, हमारी अद्भुत निशानियों में से हैं। बल्कि उसके अलावा उससे भी अधिक अद्भुत चीज़ें मौजूद हैं, जैसे कि आकाशों और पृथ्वी की रचना।

إِذْ أَوَى ٱلْفِتْيَةُ إِلَى ٱلْكَهْفِ فَقَالُوا۟ رَبَّنَآ ءَاتِنَا مِن لَّدُنكَ رَحْمَةًۭ وَهَيِّئْ لَنَا مِنْ أَمْرِنَا رَشَدًۭا ﴿١٠﴾

(ऐ रसूल!) आप उस समय को याद कीजिए, जब ईमान वाले युवकों ने अपने धर्म के साथ भागकर गुफा में शरण ली, तो उन्होंने अपने पालनहार से प्रार्थना करते हुए कहा: ऐ हमारे पालनहार! तू हमें अपनी ओर से दया प्रदान कर, कि तू हमारे पापों को क्षमा कर दे और हमें हमारे शत्रुओं से मुक्ति प्रदान कर, तथा काफिरों से हिजरत करने और ईमान लाने के मामले में तू हमारे लिए सत्य मार्ग की ओर रहनुमाई और शुद्धता बना दे।

فَضَرَبْنَا عَلَىٰٓ ءَاذَانِهِمْ فِى ٱلْكَهْفِ سِنِينَ عَدَدًۭا ﴿١١﴾

फिर, उनके चलने और गुफा में शरण लेने के बाद, हमने उनके कानों पर पर्दा डालदिया ताकि कोई आवाज़ न सुन सकें और कई वर्षों तक सोने के लिए उन्हें नींद से ग्रस्त कर दिया।

ثُمَّ بَعَثْنَـٰهُمْ لِنَعْلَمَ أَىُّ ٱلْحِزْبَيْنِ أَحْصَىٰ لِمَا لَبِثُوٓا۟ أَمَدًۭا ﴿١٢﴾

फिर, उनकी लंबी नींद के बाद, हमने उन्हें इसलिए जगाया, ताकि हम जान ले (उसके ज्ञान के प्रकटन के तौर पर) कि उनके गुफा में ठहरने की अवधि के बारे में परस्पर विरोधी दो समूहों में से कौन उसअवधि को अधिक जानने वाला है।

نَّحْنُ نَقُصُّ عَلَيْكَ نَبَأَهُم بِٱلْحَقِّ ۚ إِنَّهُمْ فِتْيَةٌ ءَامَنُوا۟ بِرَبِّهِمْ وَزِدْنَـٰهُمْ هُدًۭى ﴿١٣﴾

(ऐ रसूल) हम आपको उनकी खबर के बारे में सच्चाई के साथ बता रहे हैं, जिसमें कोई संदेह नहीं है। निःसंदेह वे कु छ युवक थे, जो अपने पालनहार पर ईमान लाए और उसका आज्ञापालन किया। तथा हमने उनके मार्गदर्शन और सत्य पर दृढ़ता में वृद्धि कर दी।

وَرَبَطْنَا عَلَىٰ قُلُوبِهِمْ إِذْ قَامُوا۟ فَقَالُوا۟ رَبُّنَا رَبُّ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ لَن نَّدْعُوَا۟ مِن دُونِهِۦٓ إِلَـٰهًۭا ۖ لَّقَدْ قُلْنَآ إِذًۭا شَطَطًا ﴿١٤﴾

شططا और हमने उनके दिलों को ईमान और उसपर दृढ़ता, तथा उसके लिए स्वदेश छोड़ने पर धैर्य के साथ मज़बूत कर दिया, जब उन्होंने काफ़िर राजा के सामने खड़े होकर एक अल्लाह पर अपने ईमान लाने की घोषणा की और उससे कहा: जिस पालनहार पर हम ईमान लाए और उसकी पूजा की, वह आकाशों और धरती का पालनहार है। हम उसके सिवा तथाकथित झूठे पूज्यों की हरगिज़ पूजा नहीं करेंगे। यदि हमने उसके सिवा किसी अन्य की पूजा की, तो हमने सत्य से दूर एक अनुचित बात कही।

هَـٰٓؤُلَآءِ قَوْمُنَا ٱتَّخَذُوا۟ مِن دُونِهِۦٓ ءَالِهَةًۭ ۖ لَّوْلَا يَأْتُونَ عَلَيْهِم بِسُلْطَـٰنٍۭ بَيِّنٍۢ ۖ فَمَنْ أَظْلَمُ مِمَّنِ ٱفْتَرَىٰ عَلَى ٱللَّهِ كَذِبًۭا ﴿١٥﴾

फिर वे एक-दूसरे की ओर यह कहते हुए मुड़े: ये हमारी जाति के लोग हैं। इन्होंने अल्लाह के अलावा दूसरे पूज्य बना रखे हैं, जिनकी ये पूजा करते हैं। हालाँकि इनके पास उनकी पूजा का कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं है। अतः उससे बड़ा अत्याचारी कोई नहीं हो सकता, जो अल्लाह की ओर साझी की निस्बत करके उसपर झूठ गढ़े।

وَإِذِ ٱعْتَزَلْتُمُوهُمْ وَمَا يَعْبُدُونَ إِلَّا ٱللَّهَ فَأْوُۥٓا۟ إِلَى ٱلْكَهْفِ يَنشُرْ لَكُمْ رَبُّكُم مِّن رَّحْمَتِهِۦ وَيُهَيِّئْ لَكُم مِّنْ أَمْرِكُم مِّرْفَقًۭا ﴿١٦﴾

مرفقا और जब तुमने अपनी जाति से किनारा कर लिया और वे अल्लाह के अतिरिक्त जिनकी पूजा करते हैं, उन्हें छोड़ दिया और तुमने अके ले अल्लाह की इबादत की, तो अब तुम अपने धर्म को बचाकर गुफा में शरण लो, जहाँ तुम्हारा पालनहार तुमपर अपनी दया का विस्तार कर देगा, जिससे वह तुम्हारे शत्रुओं से तुम्हारी रक्षा और सुरक्षा करेगा। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर तथा तुम्हारे लिए तुम्हारे काममें उसचीज़ को आसान बना देगा जिसका तुमलाभ उठाओगे, जिससे तुम्हारे अपने लोगों के बीच रहने की क्षतिपूर्ति हो जाएगी।

۞ وَتَرَى ٱلشَّمْسَ إِذَا طَلَعَت تَّزَٰوَرُ عَن كَهْفِهِمْ ذَاتَ ٱلْيَمِينِ وَإِذَا غَرَبَت تَّقْرِضُهُمْ ذَاتَ ٱلشِّمَالِ وَهُمْ فِى فَجْوَةٍۢ مِّنْهُ ۚ ذَٰلِكَ مِنْ ءَايَـٰتِ ٱللَّهِ ۗ مَن يَهْدِ ٱللَّهُ فَهُوَ ٱلْمُهْتَدِ ۖ وَمَن يُضْلِلْ فَلَن تَجِدَ لَهُۥ وَلِيًّۭا مُّرْشِدًۭا ﴿١٧﴾

ه ر चुनाँचे उन्होंने उसका पालन किया, जिसका उन्हें आदेश दिया गया था। और अल्लाह ने उन्हें नींद से ग्रस्त कर दिया और उनके दुश्मनों से उनकी रक्षा की। और (ऐ उनको देखने वाले!) तुम सूरज को देखोगे कि जब वह पूरब से निकलता है, तो उनकी गुफा से उसमें प्रवेश करने वाले की दाईं ओर मुड़ जाता है, और जब डूबता है, तो उससे कतराकर उसकी बाईं ओर मुड़ जाता है और उस (गुफा) पर सूरज की किरणें नहीं पड़ती हैं। इस प्रकार वे स्थायी छाया में रहते हैं, सूरज की गर्मी उन्हें नुकसान नहीं पहुँचाती है। वे गुफा की एक विस्तृत जगह में हैं, उन्हें ज़रूरत भर हवा मिलती रहती है। उनके साथ होने वाली ये चीज़ें, जैसे कि गुफा में उन्हें शरण देना, उन्हें नींद से ग्रस्त करना, सूरज का उनसे कतराकर गुज़रना, उनके स्थान का विस्तृत होना और उन्हें उनकी जाति के लोगें से बचाना: अल्लाह की अद्भुत कारीगरी में से हैं, जो उसकी शक्ति को दर्शाती हैं। जिसे अल्लाह हिदायत के मार्ग की तौफ़ीक़ दे, वह वास्तव में मार्गदर्शित है, और जिसे वह छोड़ दे और पथभ्रष्ट कर दे, तो आप उसके लिए कोई सहायक नहीं पाएँगे, जो उसे हिदायत की तौफ़ीक़ दे सके और उसकी ओर उसका मार्गदर्शन कर सके । क्योंकि मार्गदर्शन के वल अल्लाह के हाथ में है, उसके अपने हाथ में नहीं है।

وَتَحْسَبُهُمْ أَيْقَاظًۭا وَهُمْ رُقُودٌۭ ۚ وَنُقَلِّبُهُمْ ذَاتَ ٱلْيَمِينِ وَذَاتَ ٱلشِّمَالِ ۖ وَكَلْبُهُم بَـٰسِطٌۭ ذِرَاعَيْهِ بِٱلْوَصِيدِ ۚ لَوِ ٱطَّلَعْتَ عَلَيْهِمْ لَوَلَّيْتَ مِنْهُمْ فِرَارًۭا وَلَمُلِئْتَ مِنْهُمْ رُعْبًۭا ﴿١٨﴾

عليهم لوليت منهم فرارا ولملئت منهم رعبا और (ऐ उनकी ओर देखने वाले) तुम उनकी आँखें खुली होने के कारण उन्हें जगा हुआ समझते, जबकि वास्तव में वे सोए हुए थे। तथा हम उन्हें उनकी नींद में कभी दाईं करवट और कभी बाईं करवट पलटते रहते थे, ताकि मिट्टी उनके शरीर न खा ले। और उनके साथ जाने वाला कु त्ता गुफा के द्वार पर अपनी बाँहें फै लाए हुए था। यदि आप उन्हें झाँककर देख लेते, तो उनके भय से पीठ फे रकर भाग खड़े होते और आपके दिल में उनका डर भर जाता।

وَكَذَٰلِكَ بَعَثْنَـٰهُمْ لِيَتَسَآءَلُوا۟ بَيْنَهُمْ ۚ قَالَ قَآئِلٌۭ مِّنْهُمْ كَمْ لَبِثْتُمْ ۖ قَالُوا۟ لَبِثْنَا يَوْمًا أَوْ بَعْضَ يَوْمٍۢ ۚ قَالُوا۟ رَبُّكُمْ أَعْلَمُ بِمَا لَبِثْتُمْ فَٱبْعَثُوٓا۟ أَحَدَكُم بِوَرِقِكُمْ هَـٰذِهِۦٓ إِلَى ٱلْمَدِينَةِ فَلْيَنظُرْ أَيُّهَآ أَزْكَىٰ طَعَامًۭا فَلْيَأْتِكُم بِرِزْقٍۢ مِّنْهُ وَلْيَتَلَطَّفْ وَلَا يُشْعِرَنَّ بِكُمْ أَحَدًا ﴿١٩﴾

يشعرن بكم أحدا जिस प्रकार हमने उनके साथ वह कु छ किया, जिसका हमने अपनी शक्ति के अजूबों में से उल्लेख किया है, उसी प्रकार हमने उन्हें एक लंबी अवधि के बाद जगा दिया, ताकि वे एक-दूसरे से उस अवधि के बारे में पूछें, जो उन्होंने सोते हुए बिताई। चुनाँचे उनमें से कुछ ने उत्तर दिया: हम एक दिन या दिन के कुछ समय तक सोए रहे। जबकि उनमें से जिसके लिए उनके सोए रहने की अवधि स्पष्ट नहीं हो सकी, उसने उत्तर दिया: तुम्हारा पालनहार ही अधिक जानता है कि तुमकितने दिनों तक सोए रहे। अतः इसके ज्ञान को उसी के हवाले कर दो और अपने काम में व्यस्त हो जाओ। इसलिए अब तुम अपने में से किसी व्यक्ति को चाँदी के ये सिक्के देकर अपने शहर की ओर भेजो। वह देख ले कि नगर का कौन व्यक्ति अधिक उत्तम एवं पवित्र भोजन रखता है, तो उससे तुम्हारे पास कुछ खाना ले आए। और वह जाते-आते तथा सौदा करते समय सावधान रहे तथा व्यवहार कु शलता से काम ले और किसी को भी तुम्हारे स्थान का पता न चलने दे। क्योंकि इससे बड़ा नुकसान हो सकता है।

إِنَّهُمْ إِن يَظْهَرُوا۟ عَلَيْكُمْ يَرْجُمُوكُمْ أَوْ يُعِيدُوكُمْ فِى مِلَّتِهِمْ وَلَن تُفْلِحُوٓا۟ إِذًا أَبَدًۭا ﴿٢٠﴾

यदि तुम्हारे समुदाय के लोगों को तुम्हारी सूचना मिल गई तथा तुम्हारे स्थान का पता चल गया, तो वे पत्थर मार-मारकर तुम्हारी हत्या कर देंगे अथवा तुम्हें अपने उस भ्रष्ट धर्म में वापस लौटा लेंगे, जिसपर तुम अल्लाह की कृ पा से सत्य धर्म की ओर मार्गदर्शन पाने से पहले चला करते थे। और यदि तुम उस पूर्व धर्म में लौट गए, तो कभी सफल नहीं होगे, न इस सांसारिक जीवन में और न ही आखिरत में। बल्कि अल्लाह ने जिस सत्य धर्म का रास्ता तुम्हें दिखाया है, उसे त्यागने तथा उस भ्रष्ट धर्म में लौट जाने के कारण, तुम्हें दोनों लोकों में बहुत बड़े घाटे का सामना करना पड़ेगा। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर ق

وَكَذَٰلِكَ أَعْثَرْنَا عَلَيْهِمْ لِيَعْلَمُوٓا۟ أَنَّ وَعْدَ ٱللَّهِ حَقٌّۭ وَأَنَّ ٱلسَّاعَةَ لَا رَيْبَ فِيهَآ إِذْ يَتَنَـٰزَعُونَ بَيْنَهُمْ أَمْرَهُمْ ۖ فَقَالُوا۟ ٱبْنُوا۟ عَلَيْهِم بُنْيَـٰنًۭا ۖ رَّبُّهُمْ أَعْلَمُ بِهِمْ ۚ قَالَ ٱلَّذِينَ غَلَبُوا۟ عَلَىٰٓ أَمْرِهِمْ لَنَتَّخِذَنَّ عَلَيْهِم مَّسْجِدًۭا ﴿٢١﴾

और जिस प्रकार हमने उनके साथ हमारी शक्ति को दर्शाने वाले अद्भुत कार्य किए, जैसे बहुत वर्षों तक उन्हें नींद के आगोश में रखना और उसके बाद उन्हें जगाना, उसी प्रकार हमने उनके शहर के लोगों को उनसे अवगत कर दिया, ताकि उनके शहर के लोगों को पता चलजाए कि अल्लाह का ईमान वालों की मदद करने और मरने के बाद दोबारा जीवित करने का वादा सच्चा है और यह कि क़ियामत आने वाली है, उसके आने में कोई संदेह नहीं है। फिर जब गुफा वालों का मामला प्रकाश में आ गया और उनकी मृत्यु हो गई, तो उनसे अवगत होने वालों के बीच इस बारे में मतभेद हो गया कि: वे उनके संबंध में क्या करें? उनमें से एक समूह ने कहा: उनकी गुफा के द्वार पर एक भवन बना दो, जिससे वे छिपे तथा सुरक्षित रहें। उनका पालनहार उनकी स्थिति के बारे में सबसे अधिक जानता है। क्योंकि उनकी स्थिति की अपेक्षा यह है कि उन्हें अल्लाह के यहाँ विशेष स्थान प्राप्त है। तथा प्रभावशाली लोगों ने, जिनके पास ज्ञान तथा सही दावत नहीं थी, कहा: हम उनके इस स्थान पर उनके सम्मान हेतु तथा उनके स्थान की यादगार के तौर पर एक मस्जिद बनाएँगे।

سَيَقُولُونَ ثَلَـٰثَةٌۭ رَّابِعُهُمْ كَلْبُهُمْ وَيَقُولُونَ خَمْسَةٌۭ سَادِسُهُمْ كَلْبُهُمْ رَجْمًۢا بِٱلْغَيْبِ ۖ وَيَقُولُونَ سَبْعَةٌۭ وَثَامِنُهُمْ كَلْبُهُمْ ۚ قُل رَّبِّىٓ أَعْلَمُ بِعِدَّتِهِم مَّا يَعْلَمُهُمْ إِلَّا قَلِيلٌۭ ۗ فَلَا تُمَارِ فِيهِمْ إِلَّا مِرَآءًۭ ظَـٰهِرًۭا وَلَا تَسْتَفْتِ فِيهِم مِّنْهُمْ أَحَدًۭا ﴿٢٢﴾

उनकी कहानी के बारे में बातचीत करने वाले कु छ लोग उनकी संख्या के बारे में कहेंगे: वे तीन हैं, उनमें से चौथा उनका कु त्ता है। तथा उनमें से कु छ अन्य लोग कहेंगे: वे पाँच हैं, उनमें से छठा उनका कु त्ता है। जबकि इन दोनों समूहों ने जो कु छ कहा है, वह बिना सबूत के अपने गुमान के अनुसार कहा है। उनमें से कु छ दूसरे लोग कहेंगे: वे सात हैं और उनमें से आठवाँ उनका कु त्ता है। (ऐ रसूल!) आप कह दीजिए: मेरा पालनहार ही उनकी संख्या बेहतर जानता है, उनकी संख्या के वल कु छ ही लोगों को पता है, जिन्हें अल्लाह ने उनकी संख्या सिखाई है। अतः आप उनकी संख्या या उनकी अन्य स्थितियों के बारे में किताब वालों या अन्य लोगों से सरसरी बहस के अलावा गहरी बहस न करें। इस प्रकार कि आप उसी तक सीमित रहें जो उनके विषय में आपपर वह़्य उतरी है। तथा आप उनमें से किसी से भी उनके मामले के विवरण के बारे में न पूछें, क्योंकि उन्हें इसका ज्ञान नहीं है। ولا تقولن لشاىءإنى فاعل ذلك غدا

وَلَا تَقُولَنَّ لِشَا۟ىْءٍ إِنِّى فَاعِلٌۭ ذَٰلِكَ غَدًا ﴿٢٣﴾

और (ऐ नबी) आप हरगिज़ किसी चीज़ के बारे में, जिसे आप कल करना चाहते हों, यह न कहें: मैं कल यह काम करूँ गा। क्योंकि आप नहीं जानते कि आप इसे करेंगे, या आपके और उसके बीच कोई बाधा आ जाएगी?यह हर मुसलमान के लिए एक निर्देशन है।

إِلَّآ أَن يَشَآءَ ٱللَّهُ ۚ وَٱذْكُر رَّبَّكَ إِذَا نَسِيتَ وَقُلْ عَسَىٰٓ أَن يَهْدِيَنِ رَبِّى لِأَقْرَبَ مِنْ هَـٰذَا رَشَدًۭا ﴿٢٤﴾

परंतु यह कि आप उसके करने को अल्लाह की चाहत के साथ जोड़ दें और यूँ कहें: मैं - इन शा अल्लाह - (यदि अल्लाह चाहे) उसे कल करूँ गा। और यदि आप यह कहना भूल जाएँ, तो अपने पालनहार को "इन शा अल्लाह " कह कर याद कर लें और कहें: मुझे आशा है कि मेरा पालनहार मुझे इस मामले से निकटतर मार्गदर्शन और सफलता की राह दिखाएगा।

وَلَبِثُوا۟ فِى كَهْفِهِمْ ثَلَـٰثَ مِا۟ئَةٍۢ سِنِينَ وَٱزْدَادُوا۟ تِسْعًۭا ﴿٢٥﴾

और गुफा वाले अपनी गुफा में तीन सौ नौ साल रहे। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

قُلِ ٱللَّهُ أَعْلَمُ بِمَا لَبِثُوا۟ ۖ لَهُۥ غَيْبُ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ ۖ أَبْصِرْ بِهِۦ وَأَسْمِعْ ۚ مَا لَهُم مِّن دُونِهِۦ مِن وَلِىٍّۢ وَلَا يُشْرِكُ فِى حُكْمِهِۦٓ أَحَدًۭا ﴿٢٦﴾

और (ऐ रसूल) आप कह दीजिए: अल्लाह सबसे अधिक जानता है कि वे अपनी गुफा में कितने समय तक ठहरे, तथा उसने हमें बता दिया है कि वे उसमें कितने समय तक रहे। इसलिए उस महिमावान के कथन के बाद किसी अन्य की बात मान्य नहीं। आकाशों तथा धरती की छिपी हुई समस्त चीज़ों को पैदा करना और उनका ज्ञान रखना उसी महिमावान का काम है। वह महिमावान क्या ही खूब देखने वाला है! चुनाँचे वह सब कु छ देखता है। तथा वह क्या ही खूब सुनने वाला है! चुनाँचे वह सब कु छ सुनता है। उसके सिवा उनका कोई सहायक नहीं है, जो उनके मामले को संभाल सके और वह अपने शासन में किसी को साझी नहीं बनाता है। वह अकेला एकमात्र शासक है।

وَٱتْلُ مَآ أُوحِىَ إِلَيْكَ مِن كِتَابِ رَبِّكَ ۖ لَا مُبَدِّلَ لِكَلِمَـٰتِهِۦ وَلَن تَجِدَ مِن دُونِهِۦ مُلْتَحَدًۭا ﴿٢٧﴾

और क़ुरआन में से जो कुछ अल्लाह ने आपकी ओर वह़्य की है (ऐ रसूल) आप उसे पढ़ें और उसपर अमल करें। क्योंकि उसकी बातों को कोई बदलने वाला नहीं; इसलिए वे सर्वथा सत्य और सर्वथा न्याय हैं। और आप उस महिमावान् अल्लाह के सिवा हरगिज़ कोई शरण स्थल और पनाह लेने की जगह नहीं पाएँगे, जहाँ आप शरण ले सकें ।

وَٱصْبِرْ نَفْسَكَ مَعَ ٱلَّذِينَ يَدْعُونَ رَبَّهُم بِٱلْغَدَوٰةِ وَٱلْعَشِىِّ يُرِيدُونَ وَجْهَهُۥ ۖ وَلَا تَعْدُ عَيْنَاكَ عَنْهُمْ تُرِيدُ زِينَةَ ٱلْحَيَوٰةِ ٱلدُّنْيَا ۖ وَلَا تُطِعْ مَنْ أَغْفَلْنَا قَلْبَهُۥ عَن ذِكْرِنَا وَٱتَّبَعَ هَوَىٰهُ وَكَانَ أَمْرُهُۥ فُرُطًۭا ﴿٢٨﴾

ى आप अपने आपको उन लोगों के संग रखें, जो निष्ठापूर्वक अपने पालनहार को दिन की शुरुआत और उसके अंत में, इबादत के तौर पर और कु छ माँगने के लिए, पुकारते हैं। तथा आप धन और सम्मान वाले लोगों के साथ बैठने की इच्छा में उनसे अपनी आँखें न फे रें। और आप उसकी बात न मानें, जिसके दिल पर मुहर लगाकर हमने उसे हमारी याद से असावधान कर दिया है। जिसके कारण उसने आपको अपनी बैठक से गरीबों को हटाने का आदेश दिया, और उसने अपने पालनहार की आज्ञाकारिता पर अपनी इच्छा के अनुपालन को प्रधानता दी और उसके सभी कार्य व्यर्थ और बर्बाद हैं।

وَقُلِ ٱلْحَقُّ مِن رَّبِّكُمْ ۖ فَمَن شَآءَ فَلْيُؤْمِن وَمَن شَآءَ فَلْيَكْفُرْ ۚ إِنَّآ أَعْتَدْنَا لِلظَّـٰلِمِينَ نَارًا أَحَاطَ بِهِمْ سُرَادِقُهَا ۚ وَإِن يَسْتَغِيثُوا۟ يُغَاثُوا۟ بِمَآءٍۢ كَٱلْمُهْلِ يَشْوِى ٱلْوُجُوهَ ۚ بِئْسَ ٱلشَّرَابُ وَسَآءَتْ مُرْتَفَقًا ﴿٢٩﴾

और (ऐ रसूल!) आप इन लोगों से, जो अपने हृदय की लापरवाही के कारण अल्लाह की याद से गाफ़िल हैं, कह दीजिए: मैं तुम्हारे पास जो कु छ लेकर आया हूँ, वह सत्य है। और वह अल्लाह की ओर से है, मेरी ओर से नहीं। और मैं तुम्हारी यह माँग स्वीकार करने वाला नहीं कि मैं ईमान वालों को निष्कासित कर दूँ। अब तुम में से जो इस सच्चाई पर ईमान लाना चाहे, वह उसपर ईमान ले आए और वह उसके प्रतिफल से प्रसन्न होगा। और तुम में से जो उसपर विश्वास न करना चाहे, वह विश्वास न करे और शीघ्र ही वह उस दंड से दुखी होगा जो उसकी प्रतीक्षा कर रहा है। हमने कुफ़्र अपनाकर स्वयं पर अत्याचार करने वाले लोगों के लिए भयानक आग तैयार कर रखी है, जिसकी दीवारें उन्हें घेरी हुई होंगी। इसलिए वे उससे भाग नहीं सकें गे। अगर वे अपनी प्यास की तीव्रता के कारण पानी की फ़र्याद करेंगे, तो उन्हें तलछट जैसा बहुत गर्म पानी दिया जाएगा, जिसकी गर्मी की तीव्रता के कारण उनके चेहरे भुन जाएँगे। क्या बुरा है वह पेय जो उन्हें दिया जाएगा। क्योंकि वह प्यास नहीं बुझाएगा, बल्कि उसे और बढ़ा देगा। तथा वह उस लपट को भी नहीं बुझाएगा जो उनकी खाल उधेड़ रही होगी। जहन्नम क्या ही बुरा घर है जहाँ वे उतरेंगे और क्या ही बुरा ठिकाना है जिसमें वे ठहरेंगे।

إِنَّ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ إِنَّا لَا نُضِيعُ أَجْرَ مَنْ أَحْسَنَ عَمَلًا ﴿٣٠﴾

निःसंदेह जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए और नेक कार्य किए, उन्होंने अच्छा काम किया है। इसलिए उनके लिए बहुत बड़ा प्रतिफल है। निःसंदेह हम अच्छे कर्म करने वाले लोगों का बदला व्यर्थ नहीं करते, बल्कि उन्हें कोई कमी किए बिना पूरा-पूरा बदला देते हैं। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

أُو۟لَـٰٓئِكَ لَهُمْ جَنَّـٰتُ عَدْنٍۢ تَجْرِى مِن تَحْتِهِمُ ٱلْأَنْهَـٰرُ يُحَلَّوْنَ فِيهَا مِنْ أَسَاوِرَ مِن ذَهَبٍۢ وَيَلْبَسُونَ ثِيَابًا خُضْرًۭا مِّن سُندُسٍۢ وَإِسْتَبْرَقٍۢ مُّتَّكِـِٔينَ فِيهَا عَلَى ٱلْأَرَآئِكِ ۚ نِعْمَ ٱلثَّوَابُ وَحَسُنَتْ مُرْتَفَقًۭا ﴿٣١﴾

ईमान एवं अच्छे कार्य करने की विशेषताओं से विशिष्ट इन लोगों के लिए हमेशा के लिए निवास करने के लिए बगीचे हैं, उनके महलों के नीचे से स्वर्ग की मीठी नहरें बहती हैं। वे वहाँ सोने के कं गनों से सुशोभित किए जाएँगे तथा पतले और मोटे रेशमसे बने हरे कपड़े पहनेंगे। वे सुंदर पर्दों से सजाए गए बिस्तरों पर टेक लगाए बैठे होंगे। उनका प्रतिफल बहुत अच्छा है और जन्नत उनके लिए निवास करने के लिए एक बेहतरीन घर और ठिकाना है।

۞ وَٱضْرِبْ لَهُم مَّثَلًۭا رَّجُلَيْنِ جَعَلْنَا لِأَحَدِهِمَا جَنَّتَيْنِ مِنْ أَعْنَـٰبٍۢ وَحَفَفْنَـٰهُمَا بِنَخْلٍۢ وَجَعَلْنَا بَيْنَهُمَا زَرْعًۭا ﴿٣٢﴾

और (ऐ रसूल!) आप (उनके सामने) दो व्यक्तियों का उदाहरण दें, जिनमें से एक काफ़िर और दूसरा मोमिन था। हमने उनमें से काफ़िर के लिए अंगूर के दो बाग़ बनाए। और हमने दोनों बाग़ों को खजूर के पेड़ों से घेर दिया, तथा हमने उनके खाली क्षेत्र में फसलें उगाईं।

كِلْتَا ٱلْجَنَّتَيْنِ ءَاتَتْ أُكُلَهَا وَلَمْ تَظْلِم مِّنْهُ شَيْـًۭٔا ۚ وَفَجَّرْنَا خِلَـٰلَهُمَا نَهَرًۭا ﴿٣٣﴾

प्रत्येक बगीचे ने अपने फल दिए, जिसमें खजूर, अंगूर और फसलें शामिल थीं। और उसमें से कु छ भी कम नहीं किया, बल्कि पूरा-पूरा फल दिया। तथा हमने उन्हें आसानी से पानी देने के लिए उनके बीच एक नहर जारी कर दी। وكان له ثمر فقال لصحبه وهو يحاوره أناأكثر منك مالا وأعز نفرا

وَكَانَ لَهُۥ ثَمَرٌۭ فَقَالَ لِصَـٰحِبِهِۦ وَهُوَ يُحَاوِرُهُۥٓ أَنَا۠ أَكْثَرُ مِنكَ مَالًۭا وَأَعَزُّ نَفَرًۭا ﴿٣٤﴾

और इन दो बाग़ों के मालिक के पास अन्य धन और फलभी थे। चुनाँचे उसने गर्व करते हुए अपने मोमिन साथी से, जबकि वह उसे प्रभावित करने के लिए उससे संबोधित था, कहा: मैं तुमसे अधिक धनवान, तुमसे बढ़कर सम्मान वाला और तुमसे ज़्यादा शक्तिशाली बिरादरी वाला हूँ।

وَدَخَلَ جَنَّتَهُۥ وَهُوَ ظَالِمٌۭ لِّنَفْسِهِۦ قَالَ مَآ أَظُنُّ أَن تَبِيدَ هَـٰذِهِۦٓ أَبَدًۭا ﴿٣٥﴾

और उस काफ़िर ने ईमान वाले के साथ अपने बाग़ में प्रवेश किया, ताकि उसे अपना बाग़ दिखाए, जबकि वह कु फ़्र और गर्व के द्वारा अपने आप पर अत्याचार करने वाला था। काफ़िर ने कहा: मुझे नहीं लगता कि यह बाग़ जो तुमदेख रहे हो, नष्ट हो जाएगा। क्योंकि मैंने उसके बाकी रहने के कारण अपना लिए हैं।

وَمَآ أَظُنُّ ٱلسَّاعَةَ قَآئِمَةًۭ وَلَئِن رُّدِدتُّ إِلَىٰ رَبِّى لَأَجِدَنَّ خَيْرًۭا مِّنْهَا مُنقَلَبًۭا ﴿٣٦﴾

मुझे नहीं लगता कि क़ियामत आने वाली है। बल्कि यह एक निरंतर जीवन है। और यह मानते हुए कि वह आ ही गई, तो जब मैं पुनर्जीवित किया जाऊँगा और अपने पालनहार की ओर लौटाया जाऊँ गा, तो पुनर्जीवन के बाद मैं जिसकी ओर लौटूँगा उसे अपने इस बाग़ से उत्तम पाऊँ गा। क्योंकि इस दुनया में मेरे समृद्ध होने की अपेक्षा यह है कि मैं पुनर्जीवन के बाद भी समृद्ध होऊँ ।

قَالَ لَهُۥ صَاحِبُهُۥ وَهُوَ يُحَاوِرُهُۥٓ أَكَفَرْتَ بِٱلَّذِى خَلَقَكَ مِن تُرَابٍۢ ثُمَّ مِن نُّطْفَةٍۢ ثُمَّ سَوَّىٰكَ رَجُلًۭا ﴿٣٧﴾

उसके मोमिन साथी ने उसकी बात का उत्तर देते हुए उससे कहा: क्या तूने उस अस्तित्व के साथ क़ु फ़्र किया, जिसने तेरे पिता आदम को मिट्टी से पैदा किया, फिर तुझे वीर्य से पैदा किया, फिर तुझे एक पुरुष बनाया, औ तेरे अंगों को ठीक-ठीक किया और तुझे परिपूर्ण बनाया? क्योंकि जो इन सभी चीज़ों को कर सकता है, वह तुझे पुनः जीवित करने में भी सक्षम है।

لَّـٰكِنَّا۠ هُوَ ٱللَّهُ رَبِّى وَلَآ أُشْرِكُ بِرَبِّىٓ أَحَدًۭا ﴿٣٨﴾

लेकिन मैं यह बात नहीं कहता, बल्कि मैं कहता हूँ: वह महिमावान् अल्लाह ही मेरा पालनहार है, जिसने अपनी नेमतों के द्वारा हम पर उपकार किया, और मैं इबादत में किसी को भी उसका साझी नहीं बनाता। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

وَلَوْلَآ إِذْ دَخَلْتَ جَنَّتَكَ قُلْتَ مَا شَآءَ ٱللَّهُ لَا قُوَّةَ إِلَّا بِٱللَّهِ ۚ إِن تَرَنِ أَنَا۠ أَقَلَّ مِنكَ مَالًۭا وَوَلَدًۭا ﴿٣٩﴾

और जब तूने अपने बाग़ में प्रवेश किया, तो तूने यह क्यों नहीं कहा: जो अल्लाह ने चाहा, अल्लाह की मदद के बिना किसी के लिए कोई शक्ति नहीं है। क्योंकि वही है, जो वह चाहता है, करता है और वह सर्वशक्तिमान् है। यदि तू मुझे अपने से ज़्यादा ग़रीब और संतान में कमतर देखता है।

فَعَسَىٰ رَبِّىٓ أَن يُؤْتِيَنِ خَيْرًۭا مِّن جَنَّتِكَ وَيُرْسِلَ عَلَيْهَا حُسْبَانًۭا مِّنَ ٱلسَّمَآءِ فَتُصْبِحَ صَعِيدًۭا زَلَقًا ﴿٤٠﴾

मुझे आशा है कि अल्लाह मुझे तुम्हारे बाग़ से अच्छा प्रदान करे और तुम्हारे बाग़ पर आकाश से कोई अज़ाब भेज दे। फिर तुम्हारा बाग़ एक ऐसी भूमिबन जाए, जहाँ कोई वनस्पति न हो, जिसमें उसकी चिकनाहट के कारण पैर फिसलते हों।

أَوْ يُصْبِحَ مَآؤُهَا غَوْرًۭا فَلَن تَسْتَطِيعَ لَهُۥ طَلَبًۭا ﴿٤١﴾

अथवा उसका पानी धरती की गहराई में चला जाए। फिर तुम किसी भी तरह से उस तक नहीं पहुँच सकते हो। और अगर उसका पानी नीचे चला गया, तो वह बाकी नहीं रह सकती।

وَأُحِيطَ بِثَمَرِهِۦ فَأَصْبَحَ يُقَلِّبُ كَفَّيْهِ عَلَىٰ مَآ أَنفَقَ فِيهَا وَهِىَ خَاوِيَةٌ عَلَىٰ عُرُوشِهَا وَيَقُولُ يَـٰلَيْتَنِى لَمْ أُشْرِكْ بِرَبِّىٓ أَحَدًۭا ﴿٤٢﴾

أ حدا उस मोमिन व्यक्ति ने जो आशा व्यक्त की थी, वह पूरी हो गई। चुनाँचे उस काफ़िर के बाग़ के फलों को विनाश ने घेर लिया। फिर वह काफ़िर अपने बाग़ के बनाने और मरम्मत के लिए खर्च किए गए धन पर अफ़सोस के मारे हाथ मलने लगा। जबकि वह बाग़ उन छप्परों पर गिरा पड़ा था, जिनपर अंगूर की बेलों को फै लाया जाता है। और वह कहता था: काश मैं अपने अके ले पालनहार पर ईमान लाया होता और इबादत में उसके साथ किसी को साझी न बनाता।

وَلَمْ تَكُن لَّهُۥ فِئَةٌۭ يَنصُرُونَهُۥ مِن دُونِ ٱللَّهِ وَمَا كَانَ مُنتَصِرًا ﴿٤٣﴾

इस काफ़िर के पास उसे उसपर उतरने वाले दंड से बचाने के लिए कोई समूह नहीं था, जबकि वह अपने समूह पर गर्व कर रहा था। और वह स्वयं भी अल्लाह के उसके बाग़ को विनष्ट करने से बचने वाला न था।

هُنَالِكَ ٱلْوَلَـٰيَةُ لِلَّهِ ٱلْحَقِّ ۚ هُوَ خَيْرٌۭ ثَوَابًۭا وَخَيْرٌ عُقْبًۭا ﴿٤٤﴾

उस स्थिति में, सहायता करना के वल अल्लाह के अधिकार में है। वह अपने ईमान वाले मित्रों को सबसे उत्तम बदला देने वाला है, क्योंकि वह उनके प्रतिफल को कई गुना बढ़ा देता है, तथा वह उनके लिए अंजाम के एतिबार से भी सबसे अच्छा है।

وَٱضْرِبْ لَهُم مَّثَلَ ٱلْحَيَوٰةِ ٱلدُّنْيَا كَمَآءٍ أَنزَلْنَـٰهُ مِنَ ٱلسَّمَآءِ فَٱخْتَلَطَ بِهِۦ نَبَاتُ ٱلْأَرْضِ فَأَصْبَحَ هَشِيمًۭا تَذْرُوهُ ٱلرِّيَـٰحُ ۗ وَكَانَ ٱللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍۢ مُّقْتَدِرًا ﴿٤٥﴾

ى और (ऐ रसूल) दुनिया के धोखे में पड़े हुए लोगों को (सांसारिक जीवन का) एक उदाहरण दें। चुनाँचे दुनिया का उदाहरण उसके नष्ट होने और जल्दी समाप्त होने में, उस बारिश के पानी की तरह है, जिसे हमने आकाश से उतारा। फिर उस जल से धरती के पौधे उगे और पक गए। फिर वह पौधा टूटकर चूरा-चूरा बन गया। हवाएँ जिसके हिस्सों को अन्य क्षेत्रों में उड़ा ले जाती हैं। फिर धरती वापस वैसी ही हो जाती है जैसी पहले थी। और अल्लाह हर चीज़ का सामर्थ्य रखने वाला है। उसे कोई चीज़ विवश नहीं कर सकती। इसलिए वह जो चाहता है, जीवित रखता है और जो चाहता है, नष्ट कर देता है। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

ٱلْمَالُ وَٱلْبَنُونَ زِينَةُ ٱلْحَيَوٰةِ ٱلدُّنْيَا ۖ وَٱلْبَـٰقِيَـٰتُ ٱلصَّـٰلِحَـٰتُ خَيْرٌ عِندَ رَبِّكَ ثَوَابًۭا وَخَيْرٌ أَمَلًۭا ﴿٤٦﴾

धन और संतान सांसारिक जीवन की शोभा हैं। और आखिरत में धन का कोई लाभ नहीं है जब तक कि उसे अल्लाह को प्रसन्न करने वाले काम में न खर्च किया जाए। तथा अल्लाह के निकट पसंदीदा कार्य और बातें, सवाब की दृष्टि से, संसार की सभी शोभाओं से उत्तम हैं। और वे सबसे उत्तम वस्तु हैं, जिनकी इनसान आशा करता है। क्योंकि दुनिया की शोभा नश्वर है, जबकि अल्लाह के निकट पसंदीदा कामों और बातों का सवाब बाक़ी रहने वाला है।

وَيَوْمَ نُسَيِّرُ ٱلْجِبَالَ وَتَرَى ٱلْأَرْضَ بَارِزَةًۭ وَحَشَرْنَـٰهُمْ فَلَمْ نُغَادِرْ مِنْهُمْ أَحَدًۭا ﴿٤٧﴾

और उस दिन को याद करो, जब हम पर्वतों को उनके स्थानों से हटा देंगे। और तुम धरती को साफ़ और खुला मैदान देखोगे, क्योंकि उस पर उपस्थित पहाड़, पेड़ और इमारत सब गायब हो जाएँगे। और हम सभी प्राणियों को इकट्ठा कर लेंगे। चुनाँचे हम उनमें से किसी को भी नहींفछोड़ेंगे, जिसे हमने पुनर्जीवित करके उठाया न हो।

وَعُرِضُوا۟ عَلَىٰ رَبِّكَ صَفًّۭا لَّقَدْ جِئْتُمُونَا كَمَا خَلَقْنَـٰكُمْ أَوَّلَ مَرَّةٍۭ ۚ بَلْ زَعَمْتُمْ أَلَّن نَّجْعَلَ لَكُم مَّوْعِدًۭا ﴿٤٨﴾

और लोग आपके पालनहार के समक्ष पंक्तियों में प्रस्तुत किए जाएँगे, तो वह उनका हिसाब लेगा। और उनसे कहा जाएगा: तुम हमारे पास वैसे ही अके ले, नंगे पैर, नंगे शरीर और बिना ख़तना के आए हो, जैसे हमने तुम्हें पहली बार पैदा किया था। लेकिन तुम तो यह सोचते थे कि तुम कभी पुनर्जीवित नहीं किए जाओगे और हम तुम्हें तुम्हारे कर्मों का बदला देने के लिए कभी कोई समय और स्थान निर्धारित नहीं करेंगे।

وَوُضِعَ ٱلْكِتَـٰبُ فَتَرَى ٱلْمُجْرِمِينَ مُشْفِقِينَ مِمَّا فِيهِ وَيَقُولُونَ يَـٰوَيْلَتَنَا مَالِ هَـٰذَا ٱلْكِتَـٰبِ لَا يُغَادِرُ صَغِيرَةًۭ وَلَا كَبِيرَةً إِلَّآ أَحْصَىٰهَا ۚ وَوَجَدُوا۟ مَا عَمِلُوا۟ حَاضِرًۭا ۗ وَلَا يَظْلِمُ رَبُّكَ أَحَدًۭا ﴿٤٩﴾

और कर्मपत्र रख दिया जाएगा। तो कु छ लोग अपना कर्मपत्र अपने दाएँ हाथ में पकड़े होंगे और कु छ उसे अपने बाएँ हाथ में। और (ऐ इनसान) तुम काफिरों को देखोगे कि जो कु छ उसमें लिखा होगा, उससे डरे हुए होंगे। क्योंकि वे खूब जानते होंगे कि उन्होंने दुनिया में क्या कु फ़्र और पाप किए थे। और वे कहेंगे: हाय हमारा विनाश और हमारा दुर्भाग्य! इस पुस्तक को क्या हुआ है कि हमारे कर्मों में से कोई छोटा या बड़ा नहीं छोड़ा है, मगर उसे संरक्षित कर रखा है और गिन रखा है। और उन्होंने सांसारिक जीवन में जो पाप किए थे, उन्हें लिखा हुआ और अंकित पाएँगे। और (ऐ रसूल) आपका पालनहार किसी पर अत्याचार नहीं करेगा। चुनाँचे वह किसी को बिना पाप के दंड नहीं देगा और न किसी आज्ञाकारी व्यक्ति की नेकी में से कु छ कम करेगा।

وَإِذْ قُلْنَا لِلْمَلَـٰٓئِكَةِ ٱسْجُدُوا۟ لِـَٔادَمَ فَسَجَدُوٓا۟ إِلَّآ إِبْلِيسَ كَانَ مِنَ ٱلْجِنِّ فَفَسَقَ عَنْ أَمْرِ رَبِّهِۦٓ ۗ أَفَتَتَّخِذُونَهُۥ وَذُرِّيَّتَهُۥٓ أَوْلِيَآءَ مِن دُونِى وَهُمْ لَكُمْ عَدُوٌّۢ ۚ بِئْسَ لِلظَّـٰلِمِينَ بَدَلًۭا ﴿٥٠﴾

और (ऐ रसूल) उस समय को याद कीजिए, जब हमने फरिश्तों से कहा था: तुम सब आदम को अभिवादन के लिए सजदा करो। तो उन सभी ने अपने पालनहार के आदेश का पालन करते हुए उन्हें सजदा किया, परंतु इबलीस ने सजदा नहीं किया। वह जिन्नों में से था, फ़रिश्तों में से नहीं था। अतः उसने सजदा करने से इनकार किया और अभिमान का शिकार हो गया। इस तरह वह अपने पालनहार के आज्ञापालन से निकल गया। तो क्या फिर भी (ऐ लोगो) तुम मुझे छोड़कर उसे और उसकी संतान को अपना मित्र बनाते हो, हालाँकि वे तुम्हारे दुश्मन हैं। भला तुम अपने शत्रुओं को अपना मित्र कै से ठहरा रहे हो?! अत्याचारियों का यह कार्य कितना बुरा और घृणित है कि उन्होंने अल्लाह सर्वशक्तिमान से दोस्ती की बजाय शैतान को अपना दोस्त बना लिया।

۞ مَّآ أَشْهَدتُّهُمْ خَلْقَ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ وَلَا خَلْقَ أَنفُسِهِمْ وَمَا كُنتُ مُتَّخِذَ ٱلْمُضِلِّينَ عَضُدًۭا ﴿٥١﴾

ये लोग जिन्हें तुमने मुझे छोड़कर अपना सहायक व मित्र बना रखा है, तुम्हारे ही जैसे बंदे हैं। मैंने आकाशों तथा धरती को पैदा करते समय उन्हें उपस्थित नहीं किया था। बल्कि उस समय उनका अस्तित्व ही नहीं था। और न ही मैंने उनमें से कु छ को दूसरों के पैदा करने में उपस्थित किया था। क्योंकि मैं सृजन और प्रबंधन में अके ला हूँ। और मैं मानव जाति और जिन्न के शैतानों में से गुमराह करने वालों को अपना सहायक बनाने वाला न था। क्योंकि मैं सहायकों से बेनियाज़ हूँ। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

وَيَوْمَ يَقُولُ نَادُوا۟ شُرَكَآءِىَ ٱلَّذِينَ زَعَمْتُمْ فَدَعَوْهُمْ فَلَمْ يَسْتَجِيبُوا۟ لَهُمْ وَجَعَلْنَا بَيْنَهُم مَّوْبِقًۭا ﴿٥٢﴾

और (ऐ रसूल) उनके सामने क़ियामत के दिन की चर्चा कीजिए, जिस दिन अल्लाह उन लोगों से कहेगा, जिन्होंने दुनिया में उसका साझी बनाया था: मेरे उन साझियों को पुकारो, जिनके बारे में तुमने दावा किया था कि वे मेरे साझी हैं, ताकि वे तुम्हारी कु छ मदद कर सकें । चुनाँचे वे उन्हें पुकारेंगे, लेकिन वे उनकी पुकार का न कोई उत्तर देंगे और न उनकी कोई मदद करेंगे। तथा हम पूजने वालों और पूजे गए लोगों के बीच एक विनाश का स्थान बना देंगे, जिसमें वे दोनों दाखिल होंगे और वह जहन्नम की आग है।

وَرَءَا ٱلْمُجْرِمُونَ ٱلنَّارَ فَظَنُّوٓا۟ أَنَّهُم مُّوَاقِعُوهَا وَلَمْ يَجِدُوا۟ عَنْهَا مَصْرِفًۭا ﴿٥٣﴾

और अल्लाह का साझी बनाने वाले लोग जहन्नम को देखेंगे, तो वे पूरी तरह से निश्चित हो जाएँगे कि वे उसमें गिरने वाले हैं और उन्हें कोई स्थान नहीं मिलेगा जहाँ वे उससे मुड़कर शरण ले सकें ।

وَلَقَدْ صَرَّفْنَا فِى هَـٰذَا ٱلْقُرْءَانِ لِلنَّاسِ مِن كُلِّ مَثَلٍۢ ۚ وَكَانَ ٱلْإِنسَـٰنُ أَكْثَرَ شَىْءٍۢ جَدَلًۭا ﴿٥٤﴾

हमने मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर उतरने वाले इस क़ु रआन में अनेक प्रकार के बहुत-से उदाहरण प्रस्तुत किए हैं और उन्हें विविधता के साथ बयान किए हैं। ताकि लोग नसीहत और सदुपदेश प्राप्त करें। लेकिन मनुष्य - विशेष रूप से एक काफ़िर - की ओर से जो चीज़ सबसे ज़्यादा सामने आती है, वह ना-हक़ (सच्चाई के बिना) झगड़ना (बहस करना) है।

وَمَا مَنَعَ ٱلنَّاسَ أَن يُؤْمِنُوٓا۟ إِذْ جَآءَهُمُ ٱلْهُدَىٰ وَيَسْتَغْفِرُوا۟ رَبَّهُمْ إِلَّآ أَن تَأْتِيَهُمْ سُنَّةُ ٱلْأَوَّلِينَ أَوْ يَأْتِيَهُمُ ٱلْعَذَابُ قُبُلًۭا ﴿٥٥﴾

قبلا हठी काफिरों और मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अपने पालनहार की ओर से जो कुछ लेकर आए थे उसपर ईमान लाने के बीच, तथा उनके और उनके अपने गुनाहों से तौबा करने के बीच (प्रमाणों के ) स्पष्टीकरण का अभाव बाधक नहीं बना। क्योंकि क़ु रआन में उनके लिए उदाहरण दिए गए थे, और उनके पास स्पष्ट तर्क आए थे। बल्कि उनके लिए रुकावट के वल उनकी यह - हठपूर्ण - माँग बन गई कि उनपर पिछले समुदायों वाला अज़ाब लाया जाए, तथा वे उस अज़ाब को अपनी आँखों से देख लें जिसका उनसे वादा किया गया था।

وَمَا نُرْسِلُ ٱلْمُرْسَلِينَ إِلَّا مُبَشِّرِينَ وَمُنذِرِينَ ۚ وَيُجَـٰدِلُ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ بِٱلْبَـٰطِلِ لِيُدْحِضُوا۟ بِهِ ٱلْحَقَّ ۖ وَٱتَّخَذُوٓا۟ ءَايَـٰتِى وَمَآ أُنذِرُوا۟ هُزُوًۭا ﴿٥٦﴾

और हम अपने जो भी रसूल भेजते हैं, उन्हें ईमान और आज्ञाकारिता के लोगों को शुभ सूचना देने वाले, तथा कु फ्रऔर अवज्ञा करने वालों को डराने वाले बनाकर भेजते हैं। और उनका लोगों के दिलों पर कोई अधिकार (ज़ोर) नहीं होता कि उन्हें मार्गदर्शन स्वीकारने पर उभार सकें । और जिन लोगों ने अल्लाह का इनकार किया है, वे अपने सामने प्रमाणों के स्पष्ट हो जाने के बावजूद भी रसूलों के साथ झगड़ा (बहस) करते हैं; ताकि वे अपने असत्य के द्वारा मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर उतरने वाले सत्य को निराकृ त कर दें। तथा उन्होंने क़ु रआन को और उस चीज़ को जिससे उन्हें डराया गया था, हँसी और मज़ाक बना लिया।

وَمَنْ أَظْلَمُ مِمَّن ذُكِّرَ بِـَٔايَـٰتِ رَبِّهِۦ فَأَعْرَضَ عَنْهَا وَنَسِىَ مَا قَدَّمَتْ يَدَاهُ ۚ إِنَّا جَعَلْنَا عَلَىٰ قُلُوبِهِمْ أَكِنَّةً أَن يَفْقَهُوهُ وَفِىٓ ءَاذَانِهِمْ وَقْرًۭا ۖ وَإِن تَدْعُهُمْ إِلَى ٱلْهُدَىٰ فَلَن يَهْتَدُوٓا۟ إِذًا أَبَدًۭا ﴿٥٧﴾

ى और कोई भी उससे बढ़कर अत्याचारी नहीं हो सकता, जिसे उसके पालनहार की आयतों द्वारा समझाया जाए, लेकिन वह उसमें पाई जाने वाली अज़ाब की धमकी की परवाह न करे और उससे नसीहत प्राप्त करने से मुँह मोड़ ले। तथा उसने अपने सांसारिक जीवन में जो कुफ़्र और पाप करके आगे बढ़ाए हैं, उन्हें भूल जाए और उनसे तौबा न करे। निश्चय हमने ऐसे लोगों के दिलों पर पर्दे डाल दिए हैं, जो उन्हें क़ु रआन समझने से रोक रहे हैं, और उनके कानों में बहरापन डाल दिया है, जिसके कारण वे उसे स्वीकार करने के लिए नहीं सुनते हैं। यदि तुमउन्हें ईमान की ओर बुलाओ, तो जब तक उनके दिलों पर पर्दे और उनके कानों में बहरापन है, तुम्हारे बुलावे का कदापि उत्तर नहीं देंगे। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

وَرَبُّكَ ٱلْغَفُورُ ذُو ٱلرَّحْمَةِ ۖ لَوْ يُؤَاخِذُهُم بِمَا كَسَبُوا۟ لَعَجَّلَ لَهُمُ ٱلْعَذَابَ ۚ بَل لَّهُم مَّوْعِدٌۭ لَّن يَجِدُوا۟ مِن دُونِهِۦ مَوْئِلًۭا ﴿٥٨﴾

موئ لا और ऐसा न हो कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम आपको झुठलाने वालों को जल्दी यातना देने की आकांक्षा करें, अल्लाह तआला ने आपसे फरमाया: और (ऐ रसूल!) आपका पालनहार अपने तौबा करने वाले बंदो के पापों को क्षमा करने वाला, तथा ऐसी दया वाला है, जो हर चीज़ को शामिल है। और उसकी दया में से यह भी है कि वह अवज्ञाकारियों को ढील देता है, ताकि वे उसके समक्ष तौबा कर लें। यदि अल्लाह इन मुँह मोड़ने वालों को सज़ा देता, तो इसी सांसारिक जीवन में उन्हें जल्दी सज़ा दे देता। परंतु वह सहनशील और दयालु है। उनसे यातना को टाल रखा है, ताकि वे तौबा कर लें। बल्कि उनके लिए एक विशिष्ट स्थान और समय है, जिनमें उन्हें उनके कु फ्रएवं मुँह मोड़ने की सज़ा दी जाएगी, यदि उन्होंने तौबा नहीं की। उसके सिवा, उन्हें बचने का कोई ऐसा स्थान नहीं मिलेगा, जहाँ वे शरण ले सकें ।

وَتِلْكَ ٱلْقُرَىٰٓ أَهْلَكْنَـٰهُمْ لَمَّا ظَلَمُوا۟ وَجَعَلْنَا لِمَهْلِكِهِم مَّوْعِدًۭا ﴿٥٩﴾

तथा वे काफ़िर बस्तियाँ, जो तुम्हारे आस-पास ही आबाद थीं, जैसे हूद, सालेह और शुऐब अलैहिस्सलाम की जातियों की बस्तियाँ, हमने उन्हें विनष्ट कर दिया, जब उन्होंने कु फ़्र और गुनाहों के द्वारा खुद पर अत्याचार किया, और हमने उनके विनाश का एक विशिष्ट समय निर्धारित कर रखा था।

وَإِذْ قَالَ مُوسَىٰ لِفَتَىٰهُ لَآ أَبْرَحُ حَتَّىٰٓ أَبْلُغَ مَجْمَعَ ٱلْبَحْرَيْنِ أَوْ أَمْضِىَ حُقُبًۭا ﴿٦٠﴾

और (ऐ रसूल) वह समय याद करें, जब मूसा अलैहिस्सलाम ने अपने सेवक यूशा बिन नून से कहा: मैं लगातार चलता ही रहूँगा, यहाँ तक कि दो सागरों के संगम पर पहुँच जाऊँ या लंबे समय तक चलता ही रहूँ, यहाँ तक कि सदाचारी बंदे से मिलकर उससे कु छ ज्ञान अर्जित कर लूँ।

فَلَمَّا بَلَغَا مَجْمَعَ بَيْنِهِمَا نَسِيَا حُوتَهُمَا فَٱتَّخَذَ سَبِيلَهُۥ فِى ٱلْبَحْرِ سَرَبًۭا ﴿٦١﴾

फिर वे दोनों चल पड़े और जब वे दो सागरों के संगम पर पहुँचे, तो वे अपनी वह मछली भूल गए, जिसे उन्होंने अपने लिए भोजन के रूप में लिया था। चुनाँचे अल्लाह ने मछली को जीवित कर दिया और उसने समुद्र में सुरंग की तरह रास्ता बना लिया, उसके साथ पानी मिलता नहीं था।

فَلَمَّا جَاوَزَا قَالَ لِفَتَىٰهُ ءَاتِنَا غَدَآءَنَا لَقَدْ لَقِينَا مِن سَفَرِنَا هَـٰذَا نَصَبًۭا ﴿٦٢﴾

जब वे दोनों उस स्थान से आगे बढ़ गए, तो मूसा अलैहिस्सलाम ने अपने सेवक से कहा: हमें दोपहर का खाना लाओ, हम इस यात्रा से बहुत थक गए हैं।

قَالَ أَرَءَيْتَ إِذْ أَوَيْنَآ إِلَى ٱلصَّخْرَةِ فَإِنِّى نَسِيتُ ٱلْحُوتَ وَمَآ أَنسَىٰنِيهُ إِلَّا ٱلشَّيْطَـٰنُ أَنْ أَذْكُرَهُۥ ۚ وَٱتَّخَذَ سَبِيلَهُۥ فِى ٱلْبَحْرِ عَجَبًۭا ﴿٦٣﴾

युवक ने कहा: क्या आपने देखा कि जब हम चट्टान के पास ठहरे थे तब क्या हुआ था?! वास्तव में, मैं आपसे मछली की बात का उल्लेख करना भूल गया था। और मुझे आपसे उसका उल्लेख करना शैतान ही ने भुलाया था। हुआ यह कि मछली ज़िंदा हो गई और उसने आश्चर्यजनक रूप से समुद्र में अपना रास्ता बना लिया।

قَالَ ذَٰلِكَ مَا كُنَّا نَبْغِ ۚ فَٱرْتَدَّا عَلَىٰٓ ءَاثَارِهِمَا قَصَصًۭا ﴿٦٤﴾

मूसा अलैहिस्सलाम ने अपने सेवक से कहा: यह वही है, जो हम चाहते थे। यही तो उस नेक बंदे के स्थान की निशानी है। फिर वे दोनों अपने पैरों के निशान देखते हुए वापसहुए; ताकि राह न भटकें , यहाँ तक कि चट्टान के पासपहुँच गए और वहाँ से मछली के प्रवेश की जगह तक पहुँचे।

فَوَجَدَا عَبْدًۭا مِّنْ عِبَادِنَآ ءَاتَيْنَـٰهُ رَحْمَةًۭ مِّنْ عِندِنَا وَعَلَّمْنَـٰهُ مِن لَّدُنَّا عِلْمًۭا ﴿٦٥﴾

जब वे दोनों मछली गुम होने के स्थान पर पहुँचे, तो हमारे एक सदाचारी बंदे को पाया (जो कि ख़ज़िर अलैहिस्सलाम थे)। हमने उसे अपने पास से दया प्रदान की थी और उसे अपनी ओर से ऐसा ज्ञान सिखाया था, जिसे लोग नहीं जानते थे। और यह कहानी उसी ज्ञान पर आधारित है। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

قَالَ لَهُۥ مُوسَىٰ هَلْ أَتَّبِعُكَ عَلَىٰٓ أَن تُعَلِّمَنِ مِمَّا عُلِّمْتَ رُشْدًۭا ﴿٦٦﴾

मूसा अलैहिस्सलाम ने उनसे विनम्रता के साथ कहा: क्या मैं इस (शर्त) पर आपका अनुसरण करूँ कि अल्लाह ने आपको जो ज्ञान सिखाया है, जो सच्चाई के लिए एक मार्गदर्शक है, उसमें से कु छ मुझे सिखा दें? قال إنك لن تستطيع معىصبرا

قَالَ إِنَّكَ لَن تَسْتَطِيعَ مَعِىَ صَبْرًۭا ﴿٦٧﴾

ख़ज़िर अलैहिस्सलामने कहा: तुममेरे ज्ञान में से जो कु छ देखोगे, उसपर हरगिज़ धैर्य नहीं रख सकोगे, क्योंकि वह तुम्हारे पास मौजूद ज्ञान से मेलनहीं खाएगा। وكيف تصبرعل ما لم تحط به خبرا

وَكَيْفَ تَصْبِرُ عَلَىٰ مَا لَمْ تُحِطْ بِهِۦ خُبْرًۭا ﴿٦٨﴾

और तुम उन कामों को देखकर कैसे धैर्य रख सकते हो, जिनके बारे में तुम्हें नहीं पता कि उसमें क्या सही है; क्योंकि तुम उनके बारे में अपने ज्ञान की मात्रा के अनुसार फ़ै सला करोगे?!

قَالَ سَتَجِدُنِىٓ إِن شَآءَ ٱللَّهُ صَابِرًۭا وَلَآ أَعْصِى لَكَ أَمْرًۭا ﴿٦٩﴾

मूसा अलैहिस्सलाम ने कहा: अगर अल्लाह ने चाहा, तो आप मुझे, मेरे द्वारा देखे गए अपने कार्यों पर धैर्य रखने वाला, आपकी आज्ञाकारिता के लिए प्रतिबद्ध पाएँगे। आप मुझे जो आदेश देंगे, मैं उसकी अवज्ञा नहीं करूँ गा।

قَالَ فَإِنِ ٱتَّبَعْتَنِى فَلَا تَسْـَٔلْنِى عَن شَىْءٍ حَتَّىٰٓ أُحْدِثَ لَكَ مِنْهُ ذِكْرًۭا ﴿٧٠﴾

ख़ज़िर ने मूसा से कहा: यदि आप मेरा अनुसरण करते हैं, तो मुझसे उस चीज़ के बारे में मत पूछें, जो आप मुझे करते हुए देखते हैं, यहाँ तक कि मैं खुद ही उसकी वजह बताना शुरू कर दूँ।

فَٱنطَلَقَا حَتَّىٰٓ إِذَا رَكِبَا فِى ٱلسَّفِينَةِ خَرَقَهَا ۖ قَالَ أَخَرَقْتَهَا لِتُغْرِقَ أَهْلَهَا لَقَدْ جِئْتَ شَيْـًٔا إِمْرًۭا ﴿٧١﴾

जब वे दोनों इस बात पर सहमत हो गए, तो समुद्र के तट की ओर चल पड़े, यहाँ तक कि एक नौका मिली, और वे दोनों ख़ज़िर के सम्मान में किराए के बिना ही उसमें सवार हो गए। लेकिन ख़ज़िर ने नौका का एक तख़्ता उखाड़कर उसे फाड़ दिया। मूसा अलैहिस्सलाम ने उनसे कहा: क्या आपने उस नौका को फाड़ दिया, जिसके लोगों ने हमें बिना किसी किराए के सवार किया, ताकि आप उसके सवारों को डुबो दें?! निश्चित रूप से आपने एक गंभीर काम किया है। قال ألم أقل إنك لن تستطيع معىصبرا

قَالَ أَلَمْ أَقُلْ إِنَّكَ لَن تَسْتَطِيعَ مَعِىَ صَبْرًۭا ﴿٧٢﴾

ख़ज़िर ने मूसा से कहा: क्या मैंने नहीं कहा था: तुम जो कु छ मुझसे देखोगे, उसपर मेरे साथ हरगिज़ धैर्य नहीं रख सकोगे?! قال لا تؤاخذنى بما نسيت ولا ترهقنى من أمرى عسرا

قَالَ لَا تُؤَاخِذْنِى بِمَا نَسِيتُ وَلَا تُرْهِقْنِى مِنْ أَمْرِى عُسْرًۭا ﴿٧٣﴾

मूसा अलैहिस्सलामने ख़ज़िर से कहा: मेरे भूलवश आपकी प्रतिज्ञा छोड़ने के कारण आप मेरी पकड़ न करें और अपनी संगत के मामले में मुझे तंगी में न डालें और सख़्ती न करें।

فَٱنطَلَقَا حَتَّىٰٓ إِذَا لَقِيَا غُلَـٰمًۭا فَقَتَلَهُۥ قَالَ أَقَتَلْتَ نَفْسًۭا زَكِيَّةًۢ بِغَيْرِ نَفْسٍۢ لَّقَدْ جِئْتَ شَيْـًۭٔا نُّكْرًۭا ﴿٧٤﴾

फिर नाव से उतरने के बाद, वे दोनो तट पर चलने लगे। तो उन्होंने एक बच्चे को, जो अभी बालिग नहीं हुआ था, अन्य बच्चों के साथ खेलते देखा। तो ख़ज़िर ने उसे मार डाला। इसपर मूसा अलैहिस्सलाम ने उनसे कहा: क्या आपने एक पवित्र (निर्दोष) जान को जो बालिग नहीं हुई थी, बिना किसी अपराध के क़त्ल कर दिया?! आपने एक बहुत ही बुरा काम किया है! بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

۞ قَالَ أَلَمْ أَقُل لَّكَ إِنَّكَ لَن تَسْتَطِيعَ مَعِىَ صَبْرًۭا ﴿٧٥﴾

ख़ज़िर ने मूसा अलैहिस्सलाम से कहा: मैंने आपसे कहा था कि (ऐ मूसा!) आप मेरे द्वारा किए गए कार्यों को देखकर धैर्य नहीं रख पाएँगे!

قَالَ إِن سَأَلْتُكَ عَن شَىْءٍۭ بَعْدَهَا فَلَا تُصَـٰحِبْنِى ۖ قَدْ بَلَغْتَ مِن لَّدُنِّى عُذْرًۭا ﴿٧٦﴾

मूसा अलैहिस्सलाम ने कहा: यदि मैं इस बार के बाद आपसे किसी चीज़ के बारे में पूछूँ, तो मुझे अलग कर दीजिएगा। निश्चय आप उस सीमा तक पहुँच चुके हैं, जहाँ आपके पास मेरा साथ छोड़ने का उचित कारण है; क्योंकि मैंने आपकी दो बार अवज्ञा की।

فَٱنطَلَقَا حَتَّىٰٓ إِذَآ أَتَيَآ أَهْلَ قَرْيَةٍ ٱسْتَطْعَمَآ أَهْلَهَا فَأَبَوْا۟ أَن يُضَيِّفُوهُمَا فَوَجَدَا فِيهَا جِدَارًۭا يُرِيدُ أَن يَنقَضَّ فَأَقَامَهُۥ ۖ قَالَ لَوْ شِئْتَ لَتَّخَذْتَ عَلَيْهِ أَجْرًۭا ﴿٧٧﴾

قال لو شئت لتخذت عليهأجرا फिर दोनों चल पड़े, यहाँ तक कि जब वे एक गाँव वालों के पास आए, उसके रहने वालों से भोजन माँगा, तो गाँव वालों ने दोनों को भोजन कराने और उनकी मेहमानी का हक़ अदा करने से इनकार कर दिया। इसी बीच दोनों को गाँव में एक दीवार मिली, जो झुकी हुई थी और गिरने ही वाली थी। ख़ज़िर ने उसे बराबर करके सीधा कर दिया। इसपर मूसा अलैहिस्सलाम ने ख़ज़िर से कहा: यदि आप इसकी मरम्मत के लिए कु छ मज़दूरी लेना चाहते, तो ज़रूर ले लेते, जिसकी हमें उनके हमारी मेज़बानी करने से इनकार करने के बाद आवश्यकता भी थी।

قَالَ هَـٰذَا فِرَاقُ بَيْنِى وَبَيْنِكَ ۚ سَأُنَبِّئُكَ بِتَأْوِيلِ مَا لَمْ تَسْتَطِع عَّلَيْهِ صَبْرًا ﴿٧٨﴾

ख़ज़िर ने मूसा अलैहिस्सलाम से कहा: दीवार सीधी करने पर मेरे पारिश्रमिक न लेने पर यह आपत्ति आपके और मेरे बीच जुदाई का बिंदु है। अब मैं आपको उसकी वास्तविकता बताऊँ गा, जो मुझे करते हुए देख आप धैर्य नहीं रख सके ।

أَمَّا ٱلسَّفِينَةُ فَكَانَتْ لِمَسَـٰكِينَ يَعْمَلُونَ فِى ٱلْبَحْرِ فَأَرَدتُّ أَنْ أَعِيبَهَا وَكَانَ وَرَآءَهُم مَّلِكٌۭ يَأْخُذُ كُلَّ سَفِينَةٍ غَصْبًۭا ﴿٧٩﴾

जहाँ तक नाव की बात है, जिसे फाड़ देने पर आपने मेरा विरोध किया था, तो उसके मालिक कु छ कमज़ोर लोग थे, जो सागर में उसपर काम करते थे और वे उसकी रक्षा करने में असमर्थ थे। इसलिए मैंने सोचा कि उसे फाड़कर ऐबदार बना दूँ; ताकि एक राजा जो उनके आगे था उसपर क़ब्ज़ा न कर ले, जो हर अच्छी नाव को उसके मालिकों से ज़बरदस्ती छीन लेता था, तथा हर ऐबदार (खराब) नाव को छोड़ देता था।

وَأَمَّا ٱلْغُلَـٰمُ فَكَانَ أَبَوَاهُ مُؤْمِنَيْنِ فَخَشِينَآ أَن يُرْهِقَهُمَا طُغْيَـٰنًۭا وَكُفْرًۭا ﴿٨٠﴾

और रहा वह बालक, जिसकी हत्या करने पर आपने मेरा खंडन किया था, तो उसके माता-पिता ईमान वाले थे और वह (बालक) अल्लाह के ज्ञान में काफ़िर था। इसलिए हमें डर था कि कहीं वह बड़ा होने के बाद अपने माता-पिता को अल्लाह के साथ कु फ़्र और सरकशी के लिए न प्रेरित करे, क्योंकि माता-पिता को अपने बच्चे से असीम प्रेम होने के साथ-साथ उन्हें उसकी आवश्यकता भी होती है।

فَأَرَدْنَآ أَن يُبْدِلَهُمَا رَبُّهُمَا خَيْرًۭا مِّنْهُ زَكَوٰةًۭ وَأَقْرَبَ رُحْمًۭا ﴿٨١﴾

इसलिए हमने चाहा कि अल्लाह उन दोनों को उसके बदले में एक ऐसा बालक प्रदान करे, जो धार्मिकता, भलाई और पाप से बचने के मामले में उससे बेहतर हो और अपने माता-पिता के प्रति दया-भाव में उससे अधिक निकट हो। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

وَأَمَّا ٱلْجِدَارُ فَكَانَ لِغُلَـٰمَيْنِ يَتِيمَيْنِ فِى ٱلْمَدِينَةِ وَكَانَ تَحْتَهُۥ كَنزٌۭ لَّهُمَا وَكَانَ أَبُوهُمَا صَـٰلِحًۭا فَأَرَادَ رَبُّكَ أَن يَبْلُغَآ أَشُدَّهُمَا وَيَسْتَخْرِجَا كَنزَهُمَا رَحْمَةًۭ مِّن رَّبِّكَ ۚ وَمَا فَعَلْتُهُۥ عَنْ أَمْرِى ۚ ذَٰلِكَ تَأْوِيلُ مَا لَمْ تَسْطِع عَّلَيْهِ صَبْرًۭا ﴿٨٢﴾

और रही बात उस दीवार की, जिसकी मैंने मरम्मत की थी तथा आपने उसकी मरम्मत करने पर मेरा विरोध किया था, वह उस नगर के दो बालकों की थी, जिसमें हम आए थे: उनके पिता की मृत्यु हो चुकी थी और दीवार के नीचे उन दोनों के लिए धन गाड़ा हुआ था और इन दोनों बालकों का पिता नेक था। इसलिए (हे मूसा!) आपके पालनहार ने चाहा कि वे दोनों वयस्कता तक पहुँचें और बड़े हो जाएँ और दीवार के नीचे से अपने गड़े हुए धन को निकालें; क्योंकि यदि दीवार अभी गिर जाती, तो उनका धन प्रकट हो जाता और क्षति से ग्रस्त हो जाता। दरअसल, यह उपाय आपके पालनहार की ओर से उन दोनों पर एक दया थी। मैंने इसे अपने विवेक से नहीं किया था। यह है असल वास्तविकता उन घटनाओं की, जिनपर आप धैर्य नहीं रख सके ।

وَيَسْـَٔلُونَكَ عَن ذِى ٱلْقَرْنَيْنِ ۖ قُلْ سَأَتْلُوا۟ عَلَيْكُم مِّنْهُ ذِكْرًا ﴿٨٣﴾

और (ऐ रसूल!) अनेके श्वरवादी तथा यहूदी आपको परखने के लिए आपसे ज़ुल-क़रनैन के समाचार के बारे में पूछते हैं। आप कह दें: मैं तुम्हें उसके वृत्तांत का एक भाग अवश्य सुनाऊँ गा, जिससे तुम शिक्षा ग्रहण कर सको और नसीहत हासिल कर सको।

إِنَّا مَكَّنَّا لَهُۥ فِى ٱلْأَرْضِ وَءَاتَيْنَـٰهُ مِن كُلِّ شَىْءٍۢ سَبَبًۭا ﴿٨٤﴾

हमने उसे धरती में प्रभुत्व प्रदान किया, तथा हमने उसे उसकी ज़रूरत से जुड़ी हर चीज़ का रास्ता दिया, जिससे वह अपने लक्ष्य तक पहुँच सके । فأ تبع سببا

فَأَتْبَعَ سَبَبًا ﴿٨٥﴾

हमने उसे अपने उद्देश्य तक पहुँचने के लिए जो साधन एवं तरीक़े प्रदान किए थे, उसने उन्हें अपनाया और पश्चिमकी ओर चलपड़ा।

حَتَّىٰٓ إِذَا بَلَغَ مَغْرِبَ ٱلشَّمْسِ وَجَدَهَا تَغْرُبُ فِى عَيْنٍ حَمِئَةٍۢ وَوَجَدَ عِندَهَا قَوْمًۭا ۗ قُلْنَا يَـٰذَا ٱلْقَرْنَيْنِ إِمَّآ أَن تُعَذِّبَ وَإِمَّآ أَن تَتَّخِذَ فِيهِمْ حُسْنًۭا ﴿٨٦﴾

तथा वह पृथ्वी पर चलता रहा, यहाँ तक कि जब सूर्यास्त की दिशा से (आँख की दृष्टि में) पृथ्वी के अंत तक पहुँच गया, तो उसने सूर्य को देखा, मानो कि वह एक काले कीचड़ वाले गर्म जलस्रोत में ड़ूब रहा है। तथा उसने सूर्यास्त के स्थान के पास अल्लाह पर विश्वास न रखने वाली एक जाति को पाया। हमने उसे एक विकल्प के रूप में कहा: ऐ ज़ुल-क़रनैन! या तो तुम इन लोगों को क़त्ल करके या किसी अन्य चीज़ के साथ यातना दो, और या तो तुम उनके साथ अच्छा व्यवहार करो। قال أما من ظلم فسوف نعذبه ثم يرد إلى ربه فيعذبه عذابا نكرا

قَالَ أَمَّا مَن ظَلَمَ فَسَوْفَ نُعَذِّبُهُۥ ثُمَّ يُرَدُّ إِلَىٰ رَبِّهِۦ فَيُعَذِّبُهُۥ عَذَابًۭا نُّكْرًۭا ﴿٨٧﴾

ज़ुल-क़रनैन ने कहा: जो कोई हमारी ओर से एक अल्लाह की इबादत के लिए बुलाने के बाद भी अल्लाह के साथ साझी ठहराएगा और उसपर अटल रहेगा, तो हम उसे दुनिया में क़त्ल का दंड देंगे, फिर वह क़ियामत के दिन अपने पालनहार की ओर लौटाया जाएगा, तो वह उसे भयानक सज़ा देगा।

وَأَمَّا مَنْ ءَامَنَ وَعَمِلَ صَـٰلِحًۭا فَلَهُۥ جَزَآءً ٱلْحُسْنَىٰ ۖ وَسَنَقُولُ لَهُۥ مِنْ أَمْرِنَا يُسْرًۭا ﴿٨٨﴾

किंतु, उनमें से जो ईमान लाएगा तथा अच्छे कर्म करेगा, उसके लिए जन्नत है। यह उसके पालनहार की ओर से उसके ईमान तथा अच्छे कर्म का प्रतिफल है। तथा हम उसे अपने कामों में से सहज और सरलका आदेश देंगे। ثم أتبع سببا

ثُمَّ أَتْبَعَ سَبَبًا ﴿٨٩﴾

फिर वह सूर्योदय की दिशा की ओर रुख करते हुए अपने पहले मार्ग को छोड़ दूसरे रास्ते पर चल पड़ा। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर

حَتَّىٰٓ إِذَا بَلَغَ مَطْلِعَ ٱلشَّمْسِ وَجَدَهَا تَطْلُعُ عَلَىٰ قَوْمٍۢ لَّمْ نَجْعَل لَّهُم مِّن دُونِهَا سِتْرًۭا ﴿٩٠﴾

और वह चलता रहा, यहाँ तक कि जब वह (आँख की दृष्टि में) सूरज उगने की दिशा में पहुँच गया, तो उसने सूरज को ऐसे लोगों पर उगता हुआ पाया, जिनके लिए हमने सूर्य के ताप से बचने की कोई ओट, जैसे घर और पेड़ों की छाया नहीं बनाई थी। كذلك وقد أحطنا بما لديه خبرا

كَذَٰلِكَ وَقَدْ أَحَطْنَا بِمَا لَدَيْهِ خُبْرًۭا ﴿٩١﴾

ज़ुल-क़रनैन का मामला ऐसा ही था, तथा हमारे ज्ञान ने उसकी शक्ति और अधिकार के विवरण को घेर रखा था। ثم أتبع سببا

ثُمَّ أَتْبَعَ سَبَبًا ﴿٩٢﴾

फिर उसने पूर्व और पश्चिमके बीच पहले दो मार्गों के अलावा एक अन्य मार्ग अपनाया।

حَتَّىٰٓ إِذَا بَلَغَ بَيْنَ ٱلسَّدَّيْنِ وَجَدَ مِن دُونِهِمَا قَوْمًۭا لَّا يَكَادُونَ يَفْقَهُونَ قَوْلًۭا ﴿٩٣﴾

और वह चलता रहा, यहाँ तक कि दो पर्वतों के बीच एक दर्रे तक पहुँचा, तो दोनों के उस पार एक ऐसी जाति को पाया, जो मुश्किल से किसी और की बात समझ पाती थी।

قَالُوا۟ يَـٰذَا ٱلْقَرْنَيْنِ إِنَّ يَأْجُوجَ وَمَأْجُوجَ مُفْسِدُونَ فِى ٱلْأَرْضِ فَهَلْ نَجْعَلُ لَكَ خَرْجًا عَلَىٰٓ أَن تَجْعَلَ بَيْنَنَا وَبَيْنَهُمْ سَدًّۭا ﴿٩٤﴾

س ا उन लोगों ने कहा: ऐ ज़ुल-क़रनैन! याजूज और माजूज (इससे अभिप्राय दो बड़े मानव समुदाय थे।) हत्या आदि के द्वारा इस भूभाग में उत्पात मचाते रहते हैं। तो क्या हम आपको कु छ धन प्रदान करें कि आप हमारे और उनके बीच एक अवरोध निर्मित कर देंॽ قال ما مك نى فيه ربى خير فأعينونى بقوةأجعل بينكم وبينهم ردما

قَالَ مَا مَكَّنِّى فِيهِ رَبِّى خَيْرٌۭ فَأَعِينُونِى بِقُوَّةٍ أَجْعَلْ بَيْنَكُمْ وَبَيْنَهُمْ رَدْمًا ﴿٩٥﴾

ज़ुल-क़रनैन ने कहा: मेरे पालनहार ने मुझे जो शक्ति एवं सत्ता प्रदान की है, वह मेरे लिए उससे बेहतर है जो तुम मुझे धन दे रहे हो। अतः तुम मानवबल और उपकरणों के द्वारा मेरी सहायता करो, मैं तुम्हारे और उनके बीच एक अवरोध बना दूँगा।

ءَاتُونِى زُبَرَ ٱلْحَدِيدِ ۖ حَتَّىٰٓ إِذَا سَاوَىٰ بَيْنَ ٱلصَّدَفَيْنِ قَالَ ٱنفُخُوا۟ ۖ حَتَّىٰٓ إِذَا جَعَلَهُۥ نَارًۭا قَالَ ءَاتُونِىٓ أُفْرِغْ عَلَيْهِ قِطْرًۭا ﴿٩٦﴾

तुम लोहे के टुकड़े ले आओ। चुनाँचे वे लोहे के टुकड़े ले आए, तो वह उनके साथ दोनों पहाड़ों के बीच दीवार बनाना शुरू कर दिया, यहाँ तक कि जब उसने दीवार को दोनों पर्वतों के बराबर कर दिया, तो उसने श्रमिकों से कहा: इन टुकड़ों पर आग दहकाओ। यहाँ तक कि जब लोहे के टुकड़े लाल हो गए, तो उसने कहा: ताँबा ले आओ कि मैं उसे इसपर उंडेलदूँ।

فَمَا ٱسْطَـٰعُوٓا۟ أَن يَظْهَرُوهُ وَمَا ٱسْتَطَـٰعُوا۟ لَهُۥ نَقْبًۭا ﴿٩٧﴾

फिर याजूज और माजूजق उसकी ऊँ चाई के कारण उसपर चढ़ नहीं सके और उसकी मज़बूती के कारण उसमें नीचे से सेंध भी नहीं लगा सके ।

قَالَ هَـٰذَا رَحْمَةٌۭ مِّن رَّبِّى ۖ فَإِذَا جَآءَ وَعْدُ رَبِّى جَعَلَهُۥ دَكَّآءَ ۖ وَكَانَ وَعْدُ رَبِّى حَقًّۭا ﴿٩٨﴾

ज़ुल-क़रनैन ने कहा: यह बाँध मेरे रब की ओर से एक दया है, जो याजूज और माजूज को धरती में उपद्रव मचाने से रोकने का काम करेगा। फिर जब वह समय आ जाएगा, जिसे अल्लाह ने क़ियामत से पहले उनके निकलने के लिए निर्धारित कर रखा है, तो अल्लाह उसे ध्वस्त कर देगा। तथा उसे ध्वस्त करके ज़मीन के बराबर करने بلغ क़ुरआन · तफ़सीर और याजूज एवं माजूज के निकलने से संबंधित अल्लाह का वादा अटल है, जिसका उल्लंघन नहीं हो सकता।

۞ وَتَرَكْنَا بَعْضَهُمْ يَوْمَئِذٍۢ يَمُوجُ فِى بَعْضٍۢ ۖ وَنُفِخَ فِى ٱلصُّورِ فَجَمَعْنَـٰهُمْ جَمْعًۭا ﴿٩٩﴾

और हम अंतिम काल में लोगों को इस अवस्था में छोड़ देंगे कि वे एक-दूसरे से मौजों की तरह परस्पर गुत्थम-गुत्था हो जाएँगे और “सूर” फूँ क दिया जाएगा, तो हम सभी प्राणियों को हिसाब और बदले के लिए इकट्ठा कर लेंगे। وعرضنا جهن م يومئ ذ للكفرين عرضا

وَعَرَضْنَا جَهَنَّمَ يَوْمَئِذٍۢ لِّلْكَـٰفِرِينَ عَرْضًا ﴿١٠٠﴾

और (उस दिन) हम काफ़िरों के लिए जहन्नम को स्पष्ट रूप से प्रकट कर देंगे, ताकि वे उसे अपनी आँखों से देख लें।

ٱلَّذِينَ كَانَتْ أَعْيُنُهُمْ فِى غِطَآءٍ عَن ذِكْرِى وَكَانُوا۟ لَا يَسْتَطِيعُونَ سَمْعًا ﴿١٠١﴾

हम उसे उन काफ़िरों के लिए प्रकट करेंगे, जो संसार में अल्लाह के स्मरण से अंधे थे, क्योंकि उनकी आँखों पर अल्लाह की याद से रोकने वाला पर्दा पड़ा था और वे अल्लाह की आयतों को इस तरह सुनने में सक्षमनहीं थे कि उन्हें स्वीकार कर लें।

أَفَحَسِبَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوٓا۟ أَن يَتَّخِذُوا۟ عِبَادِى مِن دُونِىٓ أَوْلِيَآءَ ۚ إِنَّآ أَعْتَدْنَا جَهَنَّمَ لِلْكَـٰفِرِينَ نُزُلًۭا ﴿١٠٢﴾

क्या अल्लाह पर विश्वास न रखने वालों ने समझ रखा है कि वे मुझे छोड़कर मेरे बंदों; फ़रिश्तों, रसूलों और शैतानों को पूज्य बना लेंगे?! निःसंदेह हमने जहन्नम को विश्वास न रखने वालों के लिए ठिकाने के रूप में तैयार कर रखा है।

قُلْ هَلْ نُنَبِّئُكُم بِٱلْأَخْسَرِينَ أَعْمَـٰلًا ﴿١٠٣﴾

(ऐ रसूल!) आप कह दीजिए: क्या हम(ऐ लोगो!) तुम्हें उन लोगों के बारे में बताएँ जो अपने कर्म की दृष्टि से सबसे अधिक घाटा उठाने वाले हैंॽ

ٱلَّذِينَ ضَلَّ سَعْيُهُمْ فِى ٱلْحَيَوٰةِ ٱلدُّنْيَا وَهُمْ يَحْسَبُونَ أَنَّهُمْ يُحْسِنُونَ صُنْعًا ﴿١٠٤﴾

वे लोग जो क़ियामत के दिन यह देखेंगे कि वे दुनिया में जो प्रयास कर रहे थे, वह बेकार हो गया। जबकि वे समझते हैं कि वे अच्छी कोशिश कर रहे हैं और वे अपने कर्मों से लाभान्वित होंगे, हालाँकि वास्तविकता इसके विपरीत है।

أُو۟لَـٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ بِـَٔايَـٰتِ رَبِّهِمْ وَلِقَآئِهِۦ فَحَبِطَتْ أَعْمَـٰلُهُمْ فَلَا نُقِيمُ لَهُمْ يَوْمَ ٱلْقِيَـٰمَةِ وَزْنًۭا ﴿١٠٥﴾

यही वे लोग हैं, जिन्होंने अपने पालनहार की उन आयतों का इनकार किया, जो उसके एकेश्वरवाद को दर्शाती हैं और उससे मिलने का इनकार किया। अतः उनके इस इनकार के कारण उनके सारे कर्म बेकार हो गए। इसलिए, क़ियामत के दिन अल्लाह के निकट उनका कोई मान नहीं होगा।

ذَٰلِكَ جَزَآؤُهُمْ جَهَنَّمُ بِمَا كَفَرُوا۟ وَٱتَّخَذُوٓا۟ ءَايَـٰتِى وَرُسُلِى هُزُوًا ﴿١٠٦﴾

वह बदला जो उनके लिए तैयार किया गया है, जहन्नमहै। क्योंकि उन्होंने अल्लाह के साथ कु फ़्र किया, तथा मेरी उतारी हुई आयतों और मेरे रसूलों का उपहास किया।

إِنَّ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ كَانَتْ لَهُمْ جَنَّـٰتُ ٱلْفِرْدَوْسِ نُزُلًا ﴿١٠٧﴾

निश्चय जो लोग अल्लाह पर ईमान लाए और अच्छे कर्म किए, उन्हें उनके सम्मान स्वरूप जन्नत का सर्वोच्च स्थान प्राप्त होगा। بلغ क़ुरआन · तफ़सीर خلدين فيها لا يبغون عنها حولا

خَـٰلِدِينَ فِيهَا لَا يَبْغُونَ عَنْهَا حِوَلًۭا ﴿١٠٨﴾

जिसमें वे सदैव रहेंगे, वहाँ से स्थानांतरित होना नहीं चाहेंगे, क्योंकि उसके बराबर का कोई प्रतिफल नहीं होगा।

قُل لَّوْ كَانَ ٱلْبَحْرُ مِدَادًۭا لِّكَلِمَـٰتِ رَبِّى لَنَفِدَ ٱلْبَحْرُ قَبْلَ أَن تَنفَدَ كَلِمَـٰتُ رَبِّى وَلَوْ جِئْنَا بِمِثْلِهِۦ مَدَدًۭا ﴿١٠٩﴾

(ऐ रसूल!) आप कह दीजिए: मेरे पालनहार की बातें बहुत ज़्यादा हैं। अतः यदि उन्हें लिखने के लिए समुद्र स्याही बन जाए, तो पवित्र अल्लाह की बातें समाप्त होने से पहले ही समुद्र का पानी समाप्त हो जाएगा। बल्कि यदि हम और भी समुद्र ले आएँ, तो वे भी समाप्त हो जाएँगे।

قُلْ إِنَّمَآ أَنَا۠ بَشَرٌۭ مِّثْلُكُمْ يُوحَىٰٓ إِلَىَّ أَنَّمَآ إِلَـٰهُكُمْ إِلَـٰهٌۭ وَٰحِدٌۭ ۖ فَمَن كَانَ يَرْجُوا۟ لِقَآءَ رَبِّهِۦ فَلْيَعْمَلْ عَمَلًۭا صَـٰلِحًۭا وَلَا يُشْرِكْ بِعِبَادَةِ رَبِّهِۦٓ أَحَدًۢا ﴿١١٠﴾

(ऐ रसूल!) आप कह दीजिए: मैं तो तुम्हारे ही जैसा एक मनुष्य हूँ। मेरी ओर वह़्य (प्रकाशना) की जाती है कि तुम्हारा वास्तविक पूज्य बस एक ही है, उसका कोई साझी नहीं और वह अल्लाह है। अतः जो अपने रब से मिलने का भय रखता हो, वह अपने पालनहार के प्रति निष्ठावान होकर उसकी शरीयत के अनुसार कार्य करे और अपने पालनहार की उपासना में किसी को साझी न बनाए। स्रोत:अल-मुख़्तसर फ़ी तफ़सीरिल क़ु रआनिल करीम

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