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नींद से जागने के बाद की दुआएं — ज़िक्र 2

أذكار الاستيقاظ من النوم · हिस्नुल मुस्लिम · 2 / 4

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( لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ وَحْدَهُ لاَ شَريكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ، وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ، سُبْحَانَ اللَّهِ، وَالْحَمْدُ للَّهِ، وَلاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ، وَاللَّهُ أَكبَرُ، وَلاَ حَوْلَ وَلاَ قُوَّةَ إِلاَّ بِاللَّهِ الْعَلِيِّ الْعَظِيمِ، رَبِّ اغْفرْ لِي ).

2. (अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं। वह अकेला है। उसका कोई शरीक नहीं। उसी के लिए बादशाही है, उसी के लिए सब तारीफ़ है और वह हर चीज़ पर क़ादिर है। अल्लाह पाक है। सब तारीफ़ अल्लाह के लिए है। अल्लाह के सिवा कोई सच्चा माबूद नहीं। अल्लाह सबसे बड़ा है। सर्वोच्च एवं महान अल्लाह की मदद के बिना न किसी चीज़ से बचने की ताकत है और न कुछ करने की शक्ति। ऐ मेरे रब! मुझे बख्श दे।) (1) ......................... (1) जो आदमी ये दुआ पढ़े, उसे माफ़ कर दिया जाता है, फिर यदि वो कोई दुआ करे तो उसकी दुआ क़बूल होती है। और अगर वो उठ खड़ा हो, वुज़ू करे और नमाज़ पढ़े, तो उसकी नमाज़ क़बूल होती है। बुख़ारी फ़त्ह़ुल-बारी के साथ 3/39, हदीस संख्याः1154, आदि। शब्द इब्ने माजा के हैं। देखिएः सह़ीह़ इब्ने माजाः 2/335

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