((لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ وَحْدَهُ لاَ شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ يُحْيِي وَيُمِيتُ وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ)) عَشْرَ مَرّاتٍ بَعْدَ صَلاةِ الْمَغْرِبِ وَالصُّبْحِ.
72. (अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं। वह अकेला है, उसका कोई शरीक नहीं। बादशाही उसी की है और उसी के लिए सब तारीफ़ है। वह मारता और जिलाता है और वह हर चाज़ पर क़ुदरत रखने वाला है।) दस बार मग़्रिब और फ़ज्र की नमाज़ के बाद।(1) .......................... (1)तिर्मिज़ीः5/515, हदीस संख्याः3474, अह़मदः4/227,हदीस संख्याः17990, तख़रीज के लिए देखिएः ज़ादुल-मआदः1/300
सुनें · आवाज़ Hamad al-Duraiham