﴿اللَّهُ لاَ إِلَهَ إِلاَّ هُوَ الْحَيُّ الْقَيُّومُ لاَ تَأْخُذُهُ سِنَةٌ وَلاَ نَوْمٌ لَّهُ مَا فِي السَّمَوَاتِ وَمَا فِي الأَرْضِ مَن ذَا الَّذِي يَشْفَعُ عِنْدَهُ إِلاَّ بِإِذْنِهِ يَعْلَمُ مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ وَلاَ يُحِيطُونَ بِشَيْءٍ مِّنْ عِلْمِهِ إِلاَّ بِمَا شَاءَ وَسِعَ كُرْسِيُّهُ السَّمَوَاتِ وَالأَرْضَ وَلاَ يَؤُودُهُ حِفْظُهُمَا وَهُوَ الْعَلِيُّ الْعَظِيمُ﴾ عَقِبَ كلِّ صَلاَةٍ.
71. (अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, वह हमेशा ज़िन्दा रहने वाला है, सबको क़ायम रखने वाला है। उसको न ऊंघ आती है, न नींद। आस्मान और ज़मीन की सब चीजें उसी की हैं। कौन है जो उसकी इजाज़त के बग़ैर उसके पास किसी की सिफ़ारिश करे? वह उन चीज़ों को जानता है जो लोगों के सामने हैं और जो उनके पीछे हैं। और लोग उसके इल्म में से किसी चीज़ पर पहुंच नहीं रखते, मगर जितना वो खुद चाहे। उसकी कुर्सी ने आस्मानों और ज़मीन को अपने घेरे में ले रखा है। और उन दोनों की हिफ़ाज़त उसको थका नहीं सकती और वह बुलन्द एवं अज़मत वाला है।) हर नमाज़ के बाद। (1) ............................ (1) जो आदमी हर नमाज़ के बाद इसे पढ़े, उसे जन्नत में जाने से मौत के सिवा कोई चीज़ नहीं रोकेगी। नसाई की अमलुल-यौमे वल-लैला हदीस संख्याः100, इब्नुस-सुन्नी, हदीस संख्याः121, शैख़ अल्बानी ने इसे सह़ीह़ुल-जामेः 5/339 और सिल्सिला सह़ीह़ाः2/697, हदीस संख्याः972 में सह़ीह़ कहा है। आयत सूरा बक़रा (आयत संख्याः255) की है।
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