بسم الله الرحمن الرحيم ﴿قُلْ هُوَ اللَّهُ أَحَدٌ* اللَّهُ الصَّمَدُ* لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْ* وَلَمْ يَكُن لَّهُ كُفُواً أَحَدٌ﴾، بسم الله الرحمن الرحيم ﴿قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ الْفَلَقِ* مِن شَرِّ مَا خَلَقَ* وَمِن شَرِّ غَاسِقٍ إِذَا وَقَبَ* وَمِن شَرِّ النَّفَّاثَاتِ فِي الْعُقَدِ* وَمِن شَرِّ حَاسِدٍ إِذَا حَسَدَ﴾،بسم الله الرحمن الرحيم ﴿قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ النَّاسِ* مَلِكِ النَّاسِ* إِلَهِ النَّاسِ* مِن شَرِّ الْوَسْوَاسِ الْخَنَّاسِ* الَّذِي يُوَسْوِسُ فِي صُدُورِ النَّاسِ* مِنَ الْجِنَّةِ وَ النَّاسِ﴾ بَعْدَ كُلِّ صَلاَةٍ.
70. (अल्लाह के नाम से शुरू करता हूं, जो बड़ा दयालू एवं बहुत रह़म करने वाला है। (आप कह दीजिए वो अल्लाह एक है। अल्लाह तआला बेनियाज़ है। न उसकी कोई औलाद है और न वह किसी की औलीद है और न उसका कोई समकक्ष (हमसर) है।) अल्लाह के नाम से शुरू करता हूं, जो बड़ा दयालू एवं बहुत रह़म करने वाला है। (आप कह दीजिए कि मैं सुबह़ के रब की पनाह में आता हूं हर उस चीज़ की बुराई से जो उसने पैदा की है, और अंधेरे रात की बुराई से जब उसका अंधकार फैल जाए और गांठ लगाकर उनमें फूंकने वालिय़ों की बुराई से और ह़सद करने वाले की बुराई से जब वो ह़सद करे।) अल्लाह के नाम से शुरू करता हूं, जो बड़ा दयालू एवं बहुत रह़म करने वाला है। (आप कह दीजिए कि मैं लोगों के रब, लोगों के मालिक और लोगों के माबूद की पनाह में आता हूं, वस्वसा डालने वाले और पीछे हट जाने वाले की बुराई से, जो लोगों के सीनों में वस्वसा डालता है (चाहे) वह जिन्न में से हो या मानव में से।) हर नमाज़ के बाद। (1) ........................... (1) अबू दाऊदः2/86, हदीस संख्याः1523, तिर्मिज़ी ,हदीस संख्याः2903, नसाईः3/68, हदीस संख्याः1335, देखिएः सह़ीह़ तिर्मिजीः9/62, इन तीनों सूरतों को मुऔविज़ात कहा जाता है। देखिएः फ़त्ह़ुल-बारीः9/62
सुनें · आवाज़ Hamad al-Duraiham