((سُبْحَانَ اللَّهِ، وَالْحَمْدُ لِلَّهِ، وَاللَّهُ أَكْبَرُ (ثلاثاً وثلاثين) لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ وَحْدَهُ لاَ شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ)).
69. (अल्लाह पाक है, हर प्रकार की तारीफ़ अल्लाह के लिए है और अल्लाह सबसे बड़ा है (तेंतीस बार)। अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं। वह अकेला है। उसका कोई शरीक नहीं। बादशाही उसी की है। उसी के लिए सब तारीफ़ है और वह हर चाज़ पर क़ुदरत रखने वाला है। (1) .......................... (1) मुस्लिमः1/418, हदीस संख्याः597, और उसमें हैः(जो आदमी हर नमाज़ के बाद ये दुआ पढ़े, उसके गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं, चाहे वो समुद्र के झाग के बराबर क्यों न हों।)
सुनें · आवाज़ Hamad al-Duraiham