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सुबह और शाम के अज़कार और दुआएँ । — ज़िक्र 6

أذكار الصباح والمساء · हिस्नुल मुस्लिम · 6 / 24

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((اللَّهُمَّ إِنِّي أَصْبَحْتُ أُشْهِدُكَ، وَأُشْهِدُ حَمَلَةَ عَرْشِكَ، وَمَلاَئِكَتِكَ، وَجَمِيعَ خَلْقِكَ، أَنَّكَ أَنْتَ اللَّهُ لَا إِلَهَ إِلاَّ أَنْتَ وَحْدَكَ لاَ شَرِيكَ لَكَ، وَأَنَّ مُحَمَّداً عَبْدُكَ وَرَسُولُكَ)) (أربعَ مَرَّاتٍ).[ وإذا أمسى قال: اللَّهم إني أمسيت...]

80. (ऐ अल्लाह! मैंने इस ह़ाल में सुबह़ की (1) कि मैं गवाह बनाता हूं तुझे, तेरा अ़र्श उठाने वालों को, तेरे फ़रिशतों को और तेरी तमाम मख़्लूक़ को। तू ही अल्लाह है, तेरे सिवा कोई सच्चा माबूद नहीं, तू अकेला है, तेरा कोई शरीक नहीं और बेशक मुह़म्मद तेरे बन्दे और रसूल हैं।) (चार बार) (1) .............................. (1) और जब शाम के वक्त पढ़े तो ये कहेः ऐ अल्लाह! मैंने इस ह़ाल में शाम की। (2) जो आदमी इस दुआ को सुबह़ या शाम को चार बार पढ़ेगा, अल्लाह उसे जहन्नम से मुक्ति प्रदान करेगा। अबू दाऊदः4/317, हदीस संख्याः5071, बुख़ारी की अल-अदबुल-मुफ़रद, हदीस संख्याः1201, नसाई की अ़मलुल-यौमे वल-लैला,हदीस संख्याः9, इब्नुस्-सुन्नी, हदीस संख्याः70, शैख़ इब्ने बाज़ ने नसाई औऱ अबू दाऊद की सनद को तोह़फतुल-अख़्यार पृष्ठ संख्याः23 में ह़सन कहा है।

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