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सुबह और शाम के अज़कार और दुआएँ । — ज़िक्र 19

أذكار الصباح والمساء · हिस्नुल मुस्लिम · 19 / 24

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((لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ، وَحْدَهُ لاَ شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ)) (مائةَ مرَّةٍ إذا أصبحَ).

93. (अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं। वह अकेला है। उसका कोई शरीक नहीं। बादशाही उसी की है। उसी के लिए सब तारीफ़ है। वह मारता और जिलाता है और वह हर चीज़ पर क़ुदरत रखने वाला है।) (सूबह़ के समय सौ बार)।(1) (1)जो आदनमी सुबह़ के समय इस दुआ को सौ बार पढ़ेगा, उसे दस ग़ुलाम आज़ाद करने का सवाब मिलेगा, उसके लिए सौ नेकियां लिखी जाएंगी, उसके सौ गुनाह माफ़ कर दिए जाएंगे और वह उस दिन शाम तक शैतान के शर से मह़फूज़ रहेगा। और कोई आदमी उससे बेहतर अमल लेकर नहीं आएगा, हां अगर कोई आदमी उससे अधिक बार इस दुआ को पढ़े (तो उससे बेहतर हो सकता है) बुखारीः4/95, ह़दीस संख्याः3293, मुस्लिमः4/2071, ह़दीस संख्याः2691

सुनें · आवाज़ Hamad al-Duraiham

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