((سُبْحَانَ اللَّهِ وَبِحَمْدِهِ: عَدَدَ خَلْقِهِ، وَرِضَا نَفْسِهِ، وَزِنَةَ عَرْشِهِ، وَمِدَادَ كَلِمَاتِهِ)) (ثلاثَ مرَّاتٍ إذا أصبحَ).
94. (अल्लाह पाक है और उसी के लिए हर क़िस्म की तारीफ़ है, उसकी मख़्लूक़ की तादाद के बराबर और उसकी अपनी मर्ज़ी और उसके अ़र्श के वज़न के बराबर और उसके कलिमात की रोशनाई के बराबर।) (सुबह़ के समय तीन बार पढ़े) (1) ............................. (1) मुस्लिमः4/2090, ह़दीस संख्याः2726
सुनें · आवाज़ Hamad al-Duraiham