((اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ عِلْماً نَافِعاً، وَرِزْقاً طَيِّباً، وَعَمَلاً مُتَقَبَّلاً)) (إذا أصبحَ).
95. (ऐ अल्लाह! मैं तुझसे लाभ देने वाले इल्म, पाकीज़ा रोज़ी और क़बूल होने वाले अमल का सवाल करता हूं।) (सुबह के समय पढ़े।) (1) ....................... (1) इब्नुस्-सुन्नी की अमलुल-यौमे वल-लैला हदीस संख्याः54, इब्ने माजा ह़दीस संख्याः925 इसकी सनद को अ़ब्दुल क़ादिर और शोऐब अरनाऊत ने तह़क़ीक़ ज़ादुल-मआदः2/375 में ह़सन कहा है। ये रिवायत दुआ संख्याः73 में गुज़र चुकी है।
सुनें · आवाज़ Hamad al-Duraiham