((لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ وَحْدَهُ لاَ شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ، وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ)) (عشرَ مرَّات) ، أَوْ (مرَّةً واحدةً عندَ الكَسَلِ).
92. (अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं। वह अकेला है। उसका कोई शरीक नहीं। बादशाही उसी की है। उसी के लिए सब तारीफ़ है। वह मारता और जिलाता है और वह हर चीज़ पर क़ुदरत रखने वाला है।) (दस बार) (1), अथवा (सुस्ती के समय एक ही बार) (2) .............................. (1) नसाई की अमलुल-यौमे वल-लैला हदीस संख्याः24, देखिए सह़ीह़ुत-तरग़ीब वत-तरहीबः1/272 और शैख इब्ने बाज़ की तोह़फ़तुल-अख़्यार पृष्ठ संख्याः44,इसकी फ़ज़ीलत के लिए देखिए पृष्ठ संख्याः146, हदीस संख्याः255 (2) अबू दाऊद, हदीस संख्याः5077, इब्ने माजा हदीस संख्याः3798, अह़मद, हदीस संख्याः8719 देखिएः सह़ीह़ुत्-तरग़ीब वत-तरहीब(1/270, सह़ीह़ अबू दाऊद3/957, सह़ीह़ इब्ने माजाः2/331, ज़ादुल मआदः2/377
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