((سُبْحَانَ اللَّهِ وَبِحَمْدِهِ)) (مائة مرَّةٍ).
91. (मैं अल्लाह की पाकी बयान करता हूं औऱ उसकी तारीफ़ करता हूं।) (सौ बार) (1) ........................ (1) जो आदमी सुबह़ एवं शाम इस दुआ को सौ बार पढ़ेगा, क़यामत के दिन कोई आदमी उससे बेहतर अ़मल लेकर नहीं आएगा, हां अगर कोई आदमी उसी के बराबर या उससे अधिक बार इस दुआ को पढ़े, (तो उससे बेहतर हो सकता है।) मुस्लिमः4/2071, हदीस संख्याः2692
सुनें · आवाज़ Hamad al-Duraiham