((أَصْبَحْنا عَلَى فِطْرَةِ الْإِسْلاَمِ، وَعَلَى كَلِمَةِ الْإِخْلاَصِ، وَعَلَى دِينِ نَبِيِّنَا مُحَمَّدٍ صلى الله عليه وسلم، وَعَلَى مِلَّةِ أَبِينَا إِبْرَاهِيمَ، حَنِيفاً مُسْلِماً وَمَا كَانَ مِنَ الْمُشرِكِينَ)). [وإذا أمسى قال: أمسينا على فطرة الإسلام...]
90. (हमने फितरते इस्लाम, कलिमए इख़्लास, अपने नबी मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के दीन और अपने बाप इब्राहीम की मिल्लत पर सुबह़ की (1), जो ह़नीफ़ व मुस्लिम थे और मुश्रिकों में से न थे।) (2) .................................. (1) और जब शाम के वक्त पढ़े तो ये कहेः हमने फितरते इस्लाम, कलिमए इख़्लास, अपने नबी मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के दीन और अपने बाप इब्राहीम की मिल्लत पर शाम की। (2) अह़मदः3/406,407, ह़दीस संख्याः15360,15563, इब्नुस्-सुन्नी की अ़मलुल-यौमे वल-लैला,हदीस संख्याः34, देखिएः सह़ीह़ुल-जामेः4/209
सुनें · आवाज़ Hamad al-Duraiham