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नमाज़े जनाज़ा की दुआ — ज़िक्र 4

الدعاء للميت في الصلاة عليه · हिस्नुल मुस्लिम · 4 / 4

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((اللَّهُمَّ عَبْدُكَ وَابْنُ أَمَتِكَ احْتَاجَ إِلَى رَحْمَتِكَ، وَأَنْتَ غَنِيٌّ عَنْ عَذَابِهِ، إِنْ كَانَ مُحْسِناً فَزِدْ فِي حَسَنَاتِهِ، وَإِنْ كَانَ مُسِيئاً فَتَجَاوَزْ عَنْهُ)).

159. (ऐ अल्लाह! यह तेरा बन्दा एवं तेरी बंदी का बेटा, तेरी रह़मत का मुह़ताज हो गया है और तू इसे अज़ाब देने से बेनियाज़ है। अगर यह नेकी करने वाला था तो इसकी नेकियों में इज़ाफ़ा कर औऱ अगर बुराई करने वाला था तो इसे क्षमा कर।) (1) ................................... (1) ह़ाकिम ने इसे रिवायत करके सह़ीह़ कहा है और ज़ह्बी ने भी इस पर सहमति व्यक्त की है। 1/359, और देखिए शैख़ अल्बानी की किताब अह़कामुल-जनाइज़ पृष्ठः125

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