((اللَّهُمَّ إِنَّ فُلاَنَ بْنَ فُلاَنٍ فِي ذِمَّتِكَ، وَحَبْلِ جِوَارِكَ، فَقِهِ مِنْ فِتْنَةِ الْقَبْرِ، وَعَذَابِ النَّارِ، وَأَنْتَ أَهْلُ الْوَفَاءِ وَالْحَقِّ، فَاغْفِرْ لَهُ وَارْحَمْهُ إِنَّكَ أَنْتَ الغَفُورُ الرَّحيمُ)).
158. (ऐ अल्लाह! अमुक का पुत्र अमुक तेरे ज़िम्मे और तेरी पनाह में है। अतः तू इसे क़ब्र की आज़माइश और जहन्नम के अज़ाब से बचा। तू वफ़ा औऱ ह़क़ वाला है। अतः इसे बख़्श दे और इस पर रह़म कर। बेशक तू ही बख़्ने वाला तथा बहुुत ज़्यादा मेहरबान है।) (1) ......................................... (1) इब्ने माजा, हदीस संख्याः1499, देखिएः सह़ीह़ इब्ने माजाः1/251, तथा अबू दाऊदः3/211, हदीस संख्याः3202
सुनें · आवाज़ Hamad al-Duraiham