((اللَّهُمَّ ربَّ السَّمَوَاتِ السَّبْعِ، وَرَبَّ الْعَرْشِ الْعَظِيمِ، كُنْ لِي جَاراً مِنْ فُلاَنِ بْنِ فُلاَنٍ، وَأَحْزَابِهِ مِنْ خَلاَئِقِكَ، أَنْ يَفْرُطَ عَلَيَّ أَحَدٌ مِنْهُمْ أَوْ يَطْغَى، عَزَّ جَارُكَ، وَجَلَّ ثَنَاؤُكَ، وَلاَ إِلَهَ إِلاَّ أَنْتَ)).
129. (ऐ अल्लाह! सातों आस्मानों के रब और बड़े अर्श के रब! मेरे लिए अमुक के पुत्र अमुक से और तेरी मख़्लूक़ में से उसके जत्थों से इस बात की पनाह देने वाला बन जा कि उनमें से कोई मेरे ऊपर ज़्यादती या सरकशी करे। तेरी पनाह बहुत मज़बूत है, तेरी तारीफ बहुत बड़ी है औऱ तेरे सिवा कोई भी इबादत के लायक़ नहीं।) (1) ................................ (1) बुखारी की अल-अदबुल- मुफरद हदीस संख्याः707 और शैख़ अल्बानी ने इसे सह़ीह़ कहा है। सह़ीह़ अदबुल- मुफरद हदीस संख्याः545
सुनें · आवाज़ Hamad al-Duraiham