((اللَّهُمَّ رَحْمَتَكَ أَرْجُو، فَلاَ تَكِلْنِي إِلَى نَفْسِي طَرْفَةَ عَيْنٍ، وَأَصْلِحْ لِي شَأْنِي كُلَّهُ، لاَ إِلَهَ إِلاَّ أَنْتَ)).
123. (ऐ अल्लाह! मैं तेरी रह़मत की आशा रखता हूं, इस लिए तू मुझे पलक झपकने के बराबर भी मेरे नफ़्स (आत्मा) के ह़वाले न कर और मेरे लिए मेरे तमाम काम ठीक कर दे। तेरे सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं।) (1) ............................... (1) अबू दाऊदः4/324, ह़दीस संख्याः5090, अह़मदः5/42, शैख़ अल्बानी ने इसे सह़ीह़ अबूदाऊदः3/959 में ह़सन कहा है।
सुनें · आवाज़ Hamad al-Duraiham