((لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ الْعَظِيمُ الْحَلِيمُ، لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ رَبُّ الْعَرْشِ الْعَظِيمِ، لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ رَبُّ السَّمَوَاتِ وَرَبُّ الْأَرْضِ وَرَبُّ الْعَرْشِ الْكَرِيمِ)).
122. (अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं। वह महान तथा सहनशील है। अल्लाह के अलावा कोई इबादत के लायक़ नहीं, जो बड़े अर्श का रब है। अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, जो आस्मानों का रब, ज़मीन का रब और अर्शे करीम का रब है।) (1) ........................................ (10 बुखारीः7/154, हदीस संख्याः6345, मुस्लिमः4/2092,हदीस संख्याः2730
सुनें · आवाज़ Hamad al-Duraiham