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बेक़रारी तथा बेचैनी की दुआ । — ज़िक्र 3

دعاء الكرب · हिस्नुल मुस्लिम · 3 / 4

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((لاَ إِلَهَ إِلاَّ أَنْتَ سُبْحَانَكَ إِنِّي كُنْتُ مِنَ الظّالِمِينَ)).

124. (तेरे सिवा कोई भी इबादत के लायक़ नहीं, तू पाक है। बेशक मैं ही ज़ालिमों में से था।) (1) .................................. (1) तिर्मज़ीः5/529, ह़दीस संख़्याः3505, ह़ाकिम ने इसे रीवायत करने के बाद सह़ीह़ कहा है और ज़ह्बी ने सहमति व्यक्त की है, 1/505 और देखिएः सह़ीह़ तिर्मिज़ीः3/168

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