((لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ وَحْدَهُ لاَ شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ [ثلاثاً]، اللَّهُمَّ لاَ مَانِعَ لِمَا أَعْطَيْتَ، وَلاَ مُعْطِيَ لِمَا مَنَعْتَ، وَلاَ يَنْفَعُ ذَا الْجَدِّ مِنْكَ الجَدُّ)).
67. (अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, वह अकेला है, उसका कोई शरीक नहीं, उसी के लिए बादशाहत है, उसी के लिए सब तारीफ़ है औऱ वह हर चीज़ पर क़ादिर है। ऐ अल्लाह! जो कुछ तू दे, उसे कोई रोकने वाला नहीं औऱ जिसे तू रोक ले, उसे कोई देने वाला नहीं, और किसी दौलतमन्द को उसकी दौलत तेरे यहां कुछ फायदा नहीं दे सकती।) (1) .......................... (1) बुखारीः1/255, हदीस संख्याः844, मुस्लिमः1/414,हदीस संख्याः593, दोनों कोष्ठों के बीच का भाग बुखारी (हदीस संख्याः6473) का है।
सुनें · आवाज़ Hamad al-Duraiham