((أَسْتَغْفِرُ اللَّهَ (ثَلاَثَاً) اللَّهُمَّ أَنْتَ السَّلاَمُ، وَمِنْكَ السَّلاَمُ، تَبَارَكْتَ يَا ذَا الْجَلاَلِ وَالْإِكْرَامِ)).
66. (मैं अल्लाह से बख़्शिश मांगता हूं। (तीन बार) ऐ अल्लाह! तू ही सलामती वाला है और तुझी से सलामती है। ऐ बुज़ुर्गी और इज़्ज़त वाले! तू बड़ी बरकत वाला है।) (1) ......................... (1) मुस्लिमः1/414,हदीस संख्याः591
सुनें · आवाज़ Hamad al-Duraiham