((اللَّهُمَّ إِنِّي أَعوذُ بِكَ مِنْ عَذَابِ الْقَبْرِ، وَأَعوذُ بِكَ مِنْ فِتْنَةِ الْمَسِيحِ الدَّجَّالِ، وَأَعوذُ بِكَ مِنْ فِتْنَةِ الْمَحْيَا وَالْمَمَاتِ. اللَّهُمَّ إِنِّي أَعوذُ بِكَ مِنَ الْمَأْثَمِ وَالْمَغْرَمِ)).
56. (ऐ अल्लाह, मैं तेरी पनाह चाहता हूं क़ब्र के अ़ज़ाब से और तेरी पनाह चाहता हूं मसीह़ दज्जाल के फ़ितने से और तेरी पनाह चाहता हूं ज़िन्दगी तथा मौत के फ़ितने से और तेरी पनाह चाहता हूं गुनाह से और क़र्ज़ (ऋन) से।) (1) ....................... (1) बुखारीः1/202, हदीस संख्याः832, मुस्लिमः1/412,हदीस संख्याः587
सुनें · आवाज़ Hamad al-Duraiham