((اللَّهُــمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنْ عَذَابِ الْقَبْرِ، وَمِنْ عَذَابِ جَهَنَّمَ، وَمِنْ فِتْنَةِ الْمَحْيَا وَالْمَمَاتِ، وَمِنْ شَرِّ فِتْنَةِ الْمَسِيحِ الدَّجَّالِ)).
55. (ऐ अल्लाह! मैं तेरी पनाह पकड़ता हूं क़ब्र के अ़ज़ाब से, जहन्नम के अ़ज़ाब से, ज़िन्दगी तथा मौत के फ़ितने से और मसीह़ दज्जाल के फ़ितने की बुराई से।) (1) ....................... (1) बुखारीः2/102, हदीस संख्याः1377, मुस्लिमः1/412, हदीस संख्याः588, शब्द मुस्लिम के हैं।
सुनें · आवाज़ Hamad al-Duraiham