وَقَالَ صلى الله عليه وسلم: ((مَنْ قَالَ لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ وَحْدَهُ لاَ شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ، وَلَهُ الْحَمْدُ، وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ عَشْرَ مِرَارٍ، كَانَ كَمَنْ أَعْتَقَ أَرْبَعَةَ أَنْفُسٍ مِنْ وَلَدِ إِسْمَاعِيلَ)).
255. रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमायाः (जो आदमह दस बार यह दुआ पढ़ेः 'अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं। वह अकेला है। उसका कोई शरीक नहीं। बादशाही उसी की है। उसी के लिए सब तारीफ़ है और वो हर चीज़ पर क़ादिर है।' वह उस आदमी की तरह़ होगा जिसने इस्माईल अलैहिस-सलाम की औलाद में से सौ ग़ुलाम आज़ाद किए।) (1) ............................ (1) बुख़ारी फ़त्ह़ुल्-बारी के साथः7/67, हदीस संख्याः6404, मुस्लिमः4/2071, ह़दीस संख्याः2693, शब्द मुस्लिम के हैं। इस दुआ को दिन में सौ बार पढ़ने की फ़ज़ीलत के लिए देखिए इसी किताब की दुआ संख्याः93, पृष्ठः66
सुनें · आवाज़ Hamad al-Duraiham