وَقَالَ صلى الله عليه وسلم: ((كَلِمَتَانِ خَفِيفَتَانِ عَلَى اللِّسَانِ، ثَقِيلَتَانِ فِي الْمِيزَانِ، حَبِيبَتَانِ إِلَى الرَّحْمَنِ: سُبْحَانَ اللَّهِ وَبِحَمْدِهِ، سُبْحانَ اللَّهِ الْعَظِيمِ)).
256. रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमायाः (दो शब्द ज़बान पर हल्के हैं, लेकिन मीज़ान (तराज़ू) में भारी हैं और अल्लाह को बड़े प्यारे हैं, 'पाक है अल्लाह और उसी के लिए हर क़िस्म की तारीफ़ है, पाक है महान अल्लाह।') (1) ............................ (1) बुख़ारीः7/168, हदीस संख्याः6404, मुस्लिमः4/2072, ह़दीस संख्याः2694
सुनें · आवाज़ Hamad al-Duraiham