होमअज़कारसलाम को फैलानाज़िक्र 2

सलाम को फैलाना — ज़िक्र 2

إفشاء السلام · हिस्नुल मुस्लिम · 2 / 3

पढ़ें · सुनेंPDF फ़ाइल

((ثَلاَثٌ مَنْ جَمَعَهُنَّ فَقَدْ جَمَعَ الْإِيمَانَ: الْإِنْصَافُ مِنْ نَفْسِكَ، وَبَذْلُ السَّلاَمِ لِلْعَالَمِ، وَالْإِنْفَاقُ مِنَ الإِقْتَارِ)).

225. (तीन चीजें ऐसी हैं कि जो आदमी उन तीनों को ह़ासिल कर लेगा, वह ईमान को समेट लेगा। अपने आप से इन्साफ़ करना, तमाम लोगों को सलाम करना और ग़रीब होते हुये भी अल्लाह की राह में ख़र्च करना।) (1) .................................... (1) बुख़ारी फ़त्ह़ुल्-बारी के साथः1/82, हदीस संख्याः28 अ़म्मार (रज़ि) से मौक़ूफ और मुअ़ल्लक़ तौर पर।)

सुनें · आवाज़ Hamad al-Duraiham

अज़कार · 15 भाषाएँ