قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم: ((لاَ تَدْخُلُوا الْجَنَّةَ حَتَّى تُؤْمِنُوا، وَلاَ تُؤْمِنُوا حَتَّى تَحَابُّوا، أَوَلاَ أَدُلُّكُم عَلَى شَيْءٍ إِذَا فَعَلْتُمُوهُ تَحَابَبْتُم، أَفْشُوا السَّلاَمَ بَيْنَكُمْ)).
224. रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमायाः (तुम जन्नत में दाख़िल नहीं हो सकते यहां तक कि तुम मोमिन बनो और तुम मोमिन नहीं बन सकते यहां तक कि आपस में एक दूसरे से मुह़ब्बत करो। क्या मैं तुम्हें ऐसी चीज़ न बताऊं, जिसके करने से तुम एक दूसरे से मुह़ब्बत करने लगो? आपस में सलाम को ख़ूब फ़ैलाओ।) (1) ................................ (1) मुस्लिमः1/74, ह़दीस संख्याः54, अह़मद ह़दीस संख्याः1430, शब्द अह़मद के हैं।
सुनें · आवाज़ Hamad al-Duraiham