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सुबह और शाम के अज़कार और दुआएँ । — ज़िक्र 14

أذكار الصباح والمساء · हिस्नुल मुस्लिम · 14 / 24

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((يَا حَيُّ يَا قَيُّومُ بِرَحْمَتِكَ أَسْتَغيثُ أَصْلِحْ لِي شَأْنِيَ كُلَّهُ وَلاَ تَكِلْنِي إِلَى نَفْسِي طَرْفَةَ عَيْنٍ)).

88. (ऐ जिन्दा रहने वाले! ऐ क़ायम रहने वाले! मैं तेरी ही रह़मत से फरयाद करता हूं, तू मेरे तमाम काम दुरुस्त कर दे और आंख झपकने के बरार भी मुझे मेरे नफ़्स के ह़वाले न कर।) (1) ..................................... (1) ह़ाकीम ने इसे रिवायत करके सह़ीह़ कहा है और ज़हबी ने सहमति व्यक्त की है, 1/545, देखिएः सह़ीह़ुत्-तरग़ीब वत्-तरहीबः1/273

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