((رَضِيتُ بِاللَّهِ رَبَّاً، وَبِالْإِسْلاَمِ دِيناً، وَبِمُحَمَّدٍ صلى الله عليه وسلم نَبِيّاً)) (ثلاثَ مرَّاتٍ).
87. (मैं अल्लाह के रब होने पर, इस्लाम के दीन होने पर और मुह़म्मद के सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के नबी होने पर राज़ी हूं।) (तीन बार) (1) ................................ (1) जो आदमी इस दुआ को तीन बार सुबह़ और तीन बार शाम को पढ़ेगा, अल्लाह तआला उसे क़यामत के दिन ज़रूर ख़ुश कर देगा। अह़मदः4/337, हदीस संख्याः18967, नसाई की अ़मलुल-यौमे वल-लैला,हदीस संख्याः4, इब्नुस्-सुन्नी, हदीस संख्याः68, अबू दाऊदः 4/318, हदीस संख्याः1531, तिर्मिज़ीः5/465,हदीस संख्याः3389, शैख़ इब्ने बाज़ ने इसकी सनद को तोह़फतुल-अख़्यार पृष्ठ संख्याः39 में ह़सन कहा है।
सुनें · आवाज़ Hamad al-Duraiham