((لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ وَاللَّهُ أَكْبَرُ، لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ وَحْدَهُ، لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ وَحْدَهُ لاَ شَرِيكَ لَهُ، لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ لَهُ المُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ، لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ وَلاَ حَوْلَ وَلاَ قُوَّةَ إِلاَّ بِاللَّهِ)).
152. (अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं और अल्लाह सबसे बड़ा है। अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं। वह अकेला है। उसका कोई शरीक नहीं। अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं। बादशाही उसी की है। उसी के लिए सब तारीफ़ है। अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं। अल्लाह की मदद के बिना न गुनाह से बचने की शक्ति है, न नेकी करने की ताक़त। ) (1) ................................... (1) तिर्मिज़ी ,हदीस संख्याः3430, इब्ने माजा, हदीस संख्याः3794, और शैख़ अल्बानी ने इसे सह़ीह़ सह़ीह़ कहा है। देखिएः सह़ीह़ तिर्मिज़ीः3/152, सह़ीह़ इब्ने माजाः2/317
सुनें · आवाज़ Hamad al-Duraiham