((اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْهَمِّ وَالْحَزَنِ، وَالْعَجْزِ وَالْكَسَلِ، وَالْبُخْلِ وَالْجُبْنِ، وَضَلَعِ الدَّيْنِ وَغَلَبَةِ الرِّجَالِ)).
121. (ऐ अल्लाह! मैं तेरी पनाह मांगता हूं परेशानी से, ग़म से, आजिज़ हो जाने से, सुस्ती एवं काहिली से, कन्जूसी से, बुज़्दिली से तथा क़र्ज़ (ऋन) के बोझ एवं लोगों के ग़ल्बे से।) (1) ..................................... (1) बुखारीः7/158. ह़दीस संख्याः2893, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ये दुआ अधिक से अधिक किया करते थे। देखिएः बुख़ारी फ़त्ह़ुल्-बारी के साथः11/173, तथा पृष्ठः89, दुआ संख्याः137 में ये रिवायत दोबारा आ रही है।
सुनें · आवाज़ Hamad al-Duraiham