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गम और फिक्र से नजात पाने की दुआ — ज़िक्र 1

دعاء الهم والحزن · हिस्नुल मुस्लिम · 1 / 2

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((اللَّهُمَّ إِنِّي عَبْدُكَ، ابْنُ عَبْدِكَ، ابْنُ أَمَتِكَ، نَاصِيَتِي بِيَدِكَ، مَاضٍ فِيَّ حُكْمُكَ، عَدْلٌ فِيَّ قَضَاؤُكَ، أَسْأَلُكَ بِكُــــلِّ اسْمٍ هُوَ لَكَ، سَمَّيْتَ بِهِ نَفْسَكَ، أَوْ أَنْزَلْتَهُ فِي كِتَابِكَ، أَوْ عَلَّمْتَهُ أَحَداً مِنْ خَلْقِكَ، أَوِ اسْتَأْثَرْتَ بِهِ فِي عِلْمِ الغَيْبِ عِنْدَكَ، أَنْ تَجْعَلَ القُرْآنَ رَبِيعَ قَلْبِي، وَنُورَ صَدْرِي، وَجَلاَءَ حُزْنِي، وَذَهَابَ هَمِّي)).

120. (ऐ अल्लाह! मैंं तेरा बन्दा हूं। तेरे बन्दे और तेरी बन्दी का बेटा हूं। तेरा ह़ुक्म मुझ पर जारी है। मेरे बारे में तेरा फैसला इंसाफ़ पर आधारित है। मैं तुझसे तेरे हर उस ख़ास नाम के द्वारा-जिससे तूने ख़ुद को नामित किया है, या अपनी किताब में नाज़िल किया है, या अपनी मख़्लूक़ में से किसी को सिखाया है या फिर तूने उसे अपने इल्मे-ग़ैब में मह़फूज़ कर रखा है-ये सवाल करता हूं कि क़ुरआन को मेरे दिल की बहार, मेरे सीने का नूर, मेरे ग़म को दूर करने वाला औऱ मेरी परेशानी को ख़त्म करने वाला बना दे।) (1) ..................................... (1) अह़मदः1/391, ह़दीस संख्याः3712, शैख़ अल्बानी ने इसे सिल्सिला सह़ीह़ा में सह़ीह़ कहा है, 1/337

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